Chudai Ke Sangam (चुदाई का संगम)

Attention! Beware Of WaanaCry Virus (Ransomware) ! Don't install any unknown software to your computer or mobile. Better to download software only from google play store. Avoid Installing UC Browser
रवि और मोहित मेरे अच्छे दोस्तों में थे। हम तीनों अक्सर शाम को झील के किनारे घूमने जाते थे. मुझे रवि ज्यादा अच्छा लगता था. उसमे सेक्स अपील ज्यादा थी. उसमें मर्दों जैसी बात थी.
पर मोहित साधारण था. ….बातें भी कम करता था.
हम तीनो हम उमर थे. मैं रवि के बदन को मन में नंगा करने की कोशिश करती थी और सोचती थी की उसका लंड कैसा होगा. जब खड़ा होता होगा तो कैसा लगता होगा. कैसी चुदाई करता होगा. कुछ दिनों से मैंने महसूस किया कि रवि भी मुझ में खास दिलचस्पी लेने लगा है। मोहित की नज़रें तो मैं पहचान ही गई थी। मोहित तो मन ही मन में शायद मुझे प्यार करता था. पर बोलता कुछ नहीं था.
जब मेरे घर वाले ५ -६ दिनों के लिए दिल्ली गए तब एक दिन मैंने कुछ सोच कर दोनों को घर पर बुलाया. मैंने सोचा की दोस्ती तो बहुत हो गयी, अब दोस्ती को भुना लेना चाहिए. रवि को जाल में फंसा लेना चाहिए. लगता था वो चक्कर में आ भी जाएगा.
मोहित और रवि दोनों ही दिन को ११ बजे मेरे घर पर आ गए. रवि और मोहित एक साथ ही कार में आए थे. मैंने उनके लिए अच्छा लंच तैयार किया था. मैंने उस दिन जान बूझ कर उत्तेजक कपड़े पहने थे. मेरा कसा हुआ तंग पजामा उन्हें अच्छा भी लग रहा था. उन दोनों की नजरें बार बार मेरे चूतडों पर जा रही थी. मेरी चुन्चियों के उभर भी उनकी नजरों में समां रहे थे. रवि बार बार मेरे पास आकर मुझे छूने की कोशिश भी कर रहा था.
मुझे लगा कि ये तो आराम से काबू में आ जायेंगे. मेरा टॉप मेरी चूतडों से ऊपर था इसलिए मेरी दोनों गोलाइयां उन तंग पजामे में ऊपर से खूबसूरत लग रही थी. पजामा तंग था, इसलिए वो मेरी चूतड की दरारों में भी घुसा था. मेरे चलने पर, झुकने पर मेरे सरे कटाव उभर लंड को खड़ा करने के लिए काफी थे. उन दोनों का निहारना मुझे रोमांचित करने लगा. रवि तो अब बार बार मेरे चूतडों को भी स्पर्श कर रहा था. मुझे लगा कि रवि को कब्जे में कर लेना चाहिए. मैंने मोहित को हटाने के लिए उसे बाहर भेज दिया.
“मोहित ….प्लीज़ मेरी मदद कर दो … पास की दुकान से ये समान लाना है …”
“हाँ ..हाँ … बताओ …..” मैंने उसे एक लिस्ट बना कर दे दी. मोहित पैदल हे सामान लेन चला गया.
उसके जाते ही मैंने दरवाजा बंद कर दिया. रवि मुझे देखने लगा. वो मुस्करा कर बोला …”नेहा. … दरवाजा क्यों बंद कर दिया …”
मैं मुसकरयी …. “बस यूँ ही …”
रवि मेरे पास आया और उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया. मैंने घबराने का नाटक किया.
“रवि …ये क्या कर रहा है … छोड़ दे मेरा हाथ …” मैंने कुछ घबराते हुए और शरमाते हुए कहा. पर हाथ नहीं छुडाया.
रवि ने कहा – “नेहा …प्लीज़ …एक रेकुएस्ट …… सिर्फ़ एक किस …”
“अरे कोई देख लेगा …”
उसने कहा – ” अच्छा कौन देखेगा ……” और उसने मुझे धीरे से अपनी तरफ़ खींच लिया.
“बस ..एक ही …प्रोमिस ना ….” मुझे पता था कि खेल आरम्भ हो चुका है. रवि मेरे ऊपर झुक गया.
मेरे नरम होंट उसके होटों से चिपक गए. उसने मेरे चूतड दबा कर पकड़ लिए. मैं सिसक उठी. उसके शरीर का स्पर्श मुझे बहुत ही सुकून दे रहा था. मैंने आँखें बंद कर ली. वो मुझे बेतहाशा चूमता रहा था. मैं चूमने में उसका पूरा साथ दे रही थी. अचानक लगा कि मोहित आ गया है. मैंने जोर से धक्का दे कर उसे दूर करने की कोशिश की पर तब तक देर हो चुकी थी. मोहित एकटक हमें देख रहा था. मैं वास्तव में घबरा गयी.
रवि बोला- थैंक्स नेहा … मोहित ! मेरी फरमाइश तो नेहा पूरी कर दी …..अब तुम भी फरमाइश कर दो …”
मोहित हडबडा गया -“ने … नेहा …. मैं .. मतलब …मुझे भी … किस करोगी …..”
मेरी सांसे शांत होने लगी. मैंने उसे तिरछी नजरों से देखा,”तो दूर क्यों खड़े हो … आ जाओ …….”
वो शर्माता हुआ सा पास आ गया. मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके होंट से होंट मिला दिए. रवि ने इतने में मेरे चूतडों को दबा दिया. और चूतडों को पकड़ कर मसलने लगा. मैं मस्त होने लगी.
मुझसे रहा नहीं गया. मैंने मोहित का लंड पकड़ लिया. उसका लंड खड़ा था. मैंने उसे मसल दिया. वो एकदम से सहम गया. रवि मेरे पीछे चिपक गया. और उसका लंड मेरे चूतडों की दरार में जोर लगाने लगा. एक साथ दो दो लड़कों का लंड मुझे मिलेगा ये मैंने कल्पना भी नहीं की थी. मेरा मन तो दोनों से चुदने की बात सोच कर ही झूम उठा था. रवि की तरफ़ मैंने मुड कर देखा. उसकी आंखों में सेक्स भरा था. मैंने अब मन को सँभालते हुए कहा -“रवि …. मोहित …मेरी बात सुनो …”
“हाँ .. हाँ … कहो …”
“तुम्हारे मन में क्या है ……. बताओ …तो …”
मोहित ने अपना सर झुका लिया. पर रवि बोला -“तुम्हारी इच्छा हो तो … एक मौका मुझे दो ….. मुझसे अब रहा नहीं जाता है ..”
“मोहित ..तुम भी कुछ कहो ….”
“नेहा …तुम हमारी दोस्त हो ….. तुम्हारी मर्ज़ी है …. मना भी कर सकती हो …पर दोस्ती नहीं तोड़ना …”
“अब तुम दोनों की यही इच्छा है तो … फिर मेरी सूरत क्या देख रहे हो .. अब हो जाओ शुरू ….”
रवि ने तुंरत मेरा तंग पजामा उतार दिया. मोहित ने मेरा टॉप खींच लिया. मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया. पहले तो मैं शर्म से झुक गयी. पर झुक के भी क्या करती. झुकते ही मोहित ने मेरे चूतड मसल दिए. सीधी हुयी तो रवि ने मेरी चुंचियां दबा दी. मैंने बेशरम होते हुए अपनी दोनों टाँगें चौडी कर दी और हाथों को ऊपर उठा कर सर पर रख लिया. दोनों के मुंह से आह निकल गयी. मेरा रोम रोम काम की आग से सुलग उठा था. मैंने अपने आपको पूरी तरह उनके हवाले कर दिया. दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए थे. रवि बलिष्ठ दिख रहा था, जबकि मोहित का बदन साधारण था. मोहित नीचे बैठ कर मेरी चूत का रस चूसने लगा …और रवि ने मेरे स्तनों को अपने कब्जे में कर के मसलना चालू कर दिया.
मेरा तो अंग अंग रोमांच से भर गया था. ऐसे मजे की बात तो मैंने सोची भी नहीं थी. मेरे मुंह से सिस्कारियां निकलने लगी थी. रवि पीछे से बार बार अपना लंड मेरे चूतडों की दरार में घुसाने की कोशिश कर रहा था। मोहित और रवि ने मुझे बाँहों में उठा कर बिस्तर पर लेटा दिया. रवि ने मेरी चूत चाटनी चालू कर दी और मोहित मेरे मुंह के पास आ गया. उसने अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. मैं आनंद के मारे मदहोश हो रही थी. मैंने देखा मोहित की आँखें आनंद से बंद हो गयी थी.
तभी रवि ने मोहित को इशारा किया. मोहित ने लंड मुंह से निकाल लिया और हट गया. मोहित अब बिस्तर पर लेट गया. मुझे पता चल गया की अब मुझे क्या करना है. मैं उसके खड़े लंड पर धीरे से बैठ गयी और चूत के लबों को खोल कर उसकी सुपारी पर रख दिया. थोड़े से जोर लगाने पर मोहित का लंड मेरी चूत में सरकता चला गया. मैं मोहित को चोदने लगी ….. पर हाँ … चुद तो मैं ही रही थी.
इतने में रवि ने मेरी चूतडों की गोलाइयों को पकड़ कर खोल दिया और मेरी गांड पर अपना लंड रख दिया. मेरी गांड तो वैसे भी चिकनी थी. छेद भी नरम था. लन्ड की सुपारी छेद में उतर गयी. मेरी पोसिशन ऐसी हो गयी थी कि धक्के नहीं लगा पा रही थी और ना ही मोहित चोद पा रहा था. मैं बीच में दब सी गयी.
उन दोनों ने अपने आप को इधर उधर करके …. आराम की पोसिशन में ले आए. अब मैं भी फ्री महसूस कर रही थी और मोहित भी. मैं अपने हाथों पर आ गयी अब दोनों ही ने धक्के मारने चालू कर दिए थे. मुझे लगा कि स्वर्ग है तो बस इन दोनों के बीच में है. मैं आनंद से सराबोर होने लगी. दोनों के धक्के चल रहे थे. रवि का ताक़तवर लंड मेरी गांड को जम कर चोद रहा था. नीचे से मोहित के लंड झटके पर झटके मर कर चोद रहा था. मैं आनंद से निहाल हो रही थी. जोर जोर से सिस्कारियां भर रही थी. “हाय रे ……. मजा आ गया ….. चोदो …और चोदो …..”
चूत में मीठी मीठी सी गुदगुदी तेज होने लगी. रवि का लंड मेरी गांड की भूख मिटा रहा था …. और मोहित मेरी चूत की खुजली मिटा रहा था. मुझे लग रहा था कि आज दोनों मिलकर मुझे चुदाई की भूख शांत कर देंगे.
“रवि …. हाय … मेरी गांड चुद गयी ……. सी …सी …”
मोहित … और तेज करो … और तेज …. हाय ..डबल मजा … आगे से भी ….और पीछे से भी …… मैं दोनों को नहीं छोड़ना चाह रही थी. पर अब मैं झड़ने वाली थी.
“रवि मैं गयी ……. मोहित जरा जोर से …मेरा निकला ……. आ अह ह्ह्ह्छ …… गयी ………निकल गया पानी … हाय …झड़ गयी रे …” मेरा पानी जोर से निकल गया.
रवि और मोहित को पता चल गया की मैं झड़ गयी हूँ. दोनों ने अपने अपने लंड को जोर से अन्दर घुसा कर ….. झड़ने के लिए जोर लगाने लगे. ऐसा लगा कि दोनों के लन्ड अन्दर टकरा गए हो. और अब हाय. ..रे ….मुझे ठंडक महसूस होने लगी. उन दोनों के लन्ड ने अपना रस छोड़ना चालू कर दिया था. मेरी चूत और गांड उनके गरम गरम लावा से भरने लगी.
उनके झड़ने के मीठे मीठे झटके मुझे महसूस हो रहे थे. रवि थोड़ा रुका और अपना लन्ड निकाल लिया. मोहित ने भी मुझे एक तरफ़ लेटा दिया और बड़ी बड़ी सांसे भरने लगा. रवि तुंरत तोलिया ले कर आ गया …. और मेरी चूत और गांड को साफ़ करने लगा. अब वो दोनों मेरे दोनों तरफ़ लेट गए और चिपक कर प्यार करने लगे. हमारे नंगे शरीर फिर से रगड़ खाने लगे. मुझे चुदाई की पूरी संतुष्टि मिल गयी थी.
The End
READ ALSO:   Cousin Behen Ko Pyar Se Chod Diya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *