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भाई को मेने चोदने का ट्रेनिंग दी और खुदकी चूत मरवाई -२ Bhai Ko Mene Chodne Ka Training Di Aur Khudki Chut Marwai -2

Bhai Ko Mene Chodne Ka Training Di Aur Khudki Chut Marwai -2हेलो दोस्तों, मेरे सब प्यारे देवर और ननंद को आजके BHAUJA.COM पे स्वागत हे. आज फिर आप सबके लिए मैं लायी हूँ एक खास भाई बेहेन की चुदाई की कहानी, आप सब तो इसका पहला अध्याय पढ़ चुके होंगे पिछले दिन, अगर आप उसी कहानी पढ़े नन्ही हो तो पढ़िए भाई को मेने चोदने का ट्रेनिंग दी और खुदकी चूत मरवाई – Bhai Ko Mene Chodne Ka Training Di Aur Khudki Chut Marwai और फिर आजके कहानी का मजा लीजिये. भाई बेहेन की प्यार भरी संगम आपके खास चुदाई कहानी ब्लॉग … पे. पहिलाल अभी चलिए सीधे कहानी पे.

“भाई को चोदना सिखाया 1” से आगे की कहानी . . . में बोली, “मेरी कमर में थोड़ा दर्द हो रहा है ज़रा बाम लगा दे..” यह बेड पर लेटने का अच्छा बहाना था और में बिस्तर पर पेट के बल लेट गयी. मैनें पेटिकोट थोडा ढीला बाँधा था इसलिए लेटते ही वो नीचे खिसक गया और मेरे कूल्हों के

बीच की दरार दिखाए देने लगी. लेटते ही मैनें हाथ भी ऊपर कर लिए जिससे ब्लाउस भी ऊपर हो गया और उसे मालिश करने के लिए ज़्यादा जगह मिल गयी. वो मेरे पास बैठकर मेरी कमर पर बाम लगाकर धीरे धीरे मालिश करने लगा. उसका स्पर्श(टच) बड़ा ही सेक्सी था और मेरे पुरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी. थोड़ी देर बाद मैनें करवट लेकर अमित की तरफ ऊपर मुँह कर लिया और उसकी जांघ पर हाथ रखकर ठीक से बैठने को कहा. करवट लेने से मेंरी चूचियाँ ब्लाउस के ऊपर से आधी से ज़्यादा बाहर निकल आई थी. उसकी जांघ पर हाथ रखे रखे ही मैनें पहले की बात आगे बडाई, “तुझे पता है की लड़की कैसे पटाया जाता है?” “अरे दीदी अभी तो में बच्चा हूँ… ये सब आप बताएँगी तब मालूम होगा मुझे…” बाम लगाने के दौरान मेरा ब्लाउस ऊपर खींच गया था जिसकी वजह से मेंरी गोलाइयाँ नीचे से भी झाँक रही थी।

मैनें देखा की वो एकटक मेंरी चूचियों को घूर रहा है. उसके कहने के अंदाज़ से भी मालूम हो गया की वो इस सिलसिले में ज़्यादा बात करना चाह रहा है। अरे यार लड़की पटाने के लिए पहले ऊपर ऊपर से हाथ फेरना पड़ता है, ये मालूम करने के लिए की वो बुरा तो नही मानेगी…” “पर कैसे दीदी…” उसने पूछा और अपने पैर ऊपर किये. मैनें तोड़ा खिसक कर उसके लिए जगह बनाई और कहा, “देख जब लड़की से हाथ मिलाओ तो उसको ज़्यादा देर तक पकड़ कर रखो, देखो कब तक नही छुड़ाती है… और जब पीछे से उसकी आँख बंद कर के पूछो की में कौन हूँ तो अपना केला धीरे से उसके पीछे लगा दो..
जब कान में कुछ बोलो तो अपना गाल उसके गाल पर रगड़ दो… वो अगर इन सब बातों का बुरा नही मानती तो आगे की सोचो…”अमित बड़े ध्यान से सुन रहा था. वो बोला, “दीदी सुधा तो इन सब का कोई बुरा नही मानती जबकि मैनें कभी ये सोचकर नही किया था… कभी कभी तो उसकी कमर में हाथ डाल देता हूँ पर वो कुछ नही कहती…”

“तब तो यार छोकरी तैयार है और अब तो उसके साथ दूसरा खेल शुरू कर…”

“कौन सा दीदी?” “बातों वाला… यानी कभी उसके संतरो की तारीफ करके देख क्या कहती है… अगर मुस्कुराकार बुरा मानती है तो समझ ले की पटने में ज़्यादा देर नही लगेगी..” “पर दीदी उसके तो बहुत छोटे-छोटे संतरे हैं… तारीफ के काबिल तो आपके है…” वो बोला और शर्माकर मुहँ छुपा लिया. मुझे तो इसी घड़ी का इंतज़ार था।
मैनें उसका चेहरा पकड़कर अपनी ऊपर घूमाते हुये कहा, “में तुझे लड़की पटाना सीखा रही हूँ और तू मुझी पर नज़रे जमाए है…” “नही दीदी सच में आपकी चूचियाँ बहुत प्यारी है… बहुत दिल करता है…..” और उसने मेंरी कमर में एक हाथ डाल दिया.

“अरे क्या करने को दिल करता है ये तो बता…” मैनें इठलाकर पूछा. इनको सहलाने का और इनका रस पीने का…” अब उसके हौसले बुलंद हो चुके थे और उसे यकीन था की अब में उसकी बात का बुरा नही मानूँगी.

“तू कल रात बोलता… तेरी मुठ मारते हुये इनको तेरे मुहँ में लगा देती… मेरा कुछ घिस तो नही जाता… चल आज जब तेरी मुठ मारूंगी तो उस वक़्त अपनी मुराद पूरी कर लेना…” इतना कह उसके पजामा में हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया जो पूरी तरह से तन गया था।

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“अरे ये तो अभी से तैयार है…” तभी वो आगे को झुका और अपना चेहरा मेरे सीने मैं छुपा लिया. मैनें उसको बाँहो में भरकर अपने करीब लिटा लिया और कस के दबा लिया. ऐसा करने से मेरी चूत उसके लंड पर दबने लगी. उसने भी मेरी गर्दन में हाथ डाल मुझे दबा लिया. तभी मुझे लगा की वो ब्लाउस के ऊपर से ही मेरी लेफ्ट चूची को चूस रहा है. मैनें उससे कहा

“अरे ये क्या कर रहा है… मेरा ब्लाउस खराब हो जाएगा…” उसने झट से मेरा ब्लाउस ऊपर किया और निप्पल मुहँ में लेकर चूसना शुरू कर दिया. में उसकी हिम्मत की दाद दिए बगैर नही रह सकी. वो मेरे साथ पूरी तरह से आज़ाद हो गया था. अब यह मेरे ऊपर था की में उसको कितनी आज़ादी देती हूँ. अगर में उसे आगे कुछ करने देती तो इसका मतलब था की में ज़्यादा बेकरार हूँ चुदवाने के लिए और अगर उसे मना करती तो उसका मूड खराब हो जाता और शायद फिर वो मुझसे बात भी ना करे।

इसलिए मैनें बीच का रास्ता लिया और बनावटी गुस्से से बोली, “अरे ये क्या तू तो ज़बरदस्ती करने लगा… तुझे शर्म नही आती…” “दीदी आपने तो कहा था की मेरा ब्लाउज मत खराब कर… रस पीने को तो मना नही किया था इसलिए मैनें ब्लाउस को ऊपर उठा दिया…” उसकी नज़र मेरी लेफ्ट चूची पर ही थी जो की ब्लाउस से बाहर थी. वो अपने को और नही रोक सका और फिर से मेरी चूची को मुहँ मे ले ली और चूसने लगा. मुझे भी मज़ा आ रहा था और मेरी प्यास बड रही थी. कुछ देर बाद मैनें ज़बरदस्ती उसका मुहँ लेफ्ट चूची से हटाया और राईट चूची की तरफ लाते हुये बोली, “अरे ये दो होती हैं और दोनो में बराबर का मज़ा होता है…” उसने राईट बोब्स को भी ब्लाउस से बाहर किया और उसका निप्पल मुहँ में लेकर चूसने लगा और साथ ही एक हाथ से वो मेरी लेफ्ट चूची को सहलाने लगा. कुछ देर बाद मेरा मन उसके गुलाबी होंठो को चूमने को करने लगा तो मैनें उसे कहा, “कभी किसी को किस किया है?” “नही दीदी पर सुना है की इसमें बहुत मज़ा आता है…” “बिल्कुल ठीक सुना है पर किस ठीक से करना आना चाहिए…” “कैसे?” उसने पूछा और मेरी चूची से मुहँ हटा लिया. अब मेरी दोनो चूचिया ब्लाउस से आज़ाद खुली हवा में तनी थी लेकिन मैनें उन्हे छुपाया नही बल्कि अपना मुहँ उसके मुहँ के पास ले जाकर अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए फिर धीरे से अपने होंठ से उसके होंठ खोलकर उन्हे प्यार से चूसने लगी. करीब दो मिनिट तक उसके होंठ चूसती रही फिर बोली. “ऐसे…”
वो बहुत उत्तेजित हो गया था. इससे पहले की में उसे बोलूं की वो भी एक बार किस करने की प्रेक्टिस कर ले, वो खुद ही बोला, “दीदी में भी करूँ आपको एक बार?”

“कर ले…” मैने मुस्कराते हुवे कहा. अमित ने मेरी ही स्टाइल में मुझे किस किया. मेरे होंठो को चूसते समय उसका सीना मेरे सीने पर आकर दबाव डाल रहा था. जिससे मेरी मस्ती दोगुनी हो गयी थी. उसका किस खत्म करने के बाद मैनें उसे अपने ऊपर से हटाया और बाँहो में लेकर फिर से उसके होंठ चूसने लगी. इस बार में थोड़ा ज़्यादा जोश से उसे चूस रही थी. उसने मेरी एक चूची पकड़ ली थी और उसे कस कसकर दबा रहा था. मैनें अपनी कमर आगे करके चूत उसके लंड पर दबाई. लंड तो एकदम तनकर आइरन रोड हो गया था. चुदवाने का एकदम सही मौका था पर में चाहती थी की वो मुझसे चोदने के लिए भीख माँगे और में उस पर एहसान करके उसे चोदने की इज़ाज़त दूँ।
में बोली, “चल अब बहुत हो गया, ला अब तेरी मुठ मार दूँ…”

“दीदी एक रिक्वेस्ट करूँ?” “क्या?” मैनें पूछा.

“लेकिन रिक्वेस्ट ऐसी होनी चाहिए की मुझे बुरा ना लगे…” ऐसा लग रहा था की वो मेरी बात ही नही सुन रहा है बस अपनी कहे जा रहा है. वो बोला, “दीदी मैनें सुना है की अंदर डालने में बहुत मज़ा आता है… डालने वाले को भी और डलवाने वाले को भी… में भी एक बार अंदर डालना चाहता हूँ…”

“नहीं अमित तुम मेंरे छोटे भाई हो और में तुम्हारी बड़ी बहन…” “दीदी में आपकी लूँगा नही बस अंदर डालने दीजिए…” “अरे यार तो फिर लेने में क्या बचा…” “दीदी बस अंदर डालकर देखूँगा की कैसा लगता है, चोदुंगा नही प्लीज़ दीदी…” मैनें उस पर एहसान करते हुये कहा, “तुम मेरे भाई हो इसलिए में तुम्हारी बात को मना नही कर सकती पर मेरी एक शर्त है… तुमको बताना होगा की अक्सर ख्यालो में किसकी चोदते हो?” और में बेड पर पैर फैलाकर चित लेट गयी और उसे घुटने के बल अपने ऊपर बैठने को कहा. वो बैठा तो उसके पजामा को खोलकर पजामा नीचे कर दिया।
उसका लंड तनकर खड़ा था. मैनें उसकी बाँह पकड़ कर उसे अपने ऊपर कोहनी के बल लेटा लिया जिससे उसका पूरा वज़न उसके घुटनो और कोहनी पर आ गया. वो अब और नही रुक सकता था. उसने मेरी एक चूची को मुहँ में भर लिया जो की ब्लाउस से बाहर थी. में उसे अभी और छेड़ना चाहती थी.

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“सुन अमित ब्लाउस ऊपर होने से चुभ रहा है.. ऐसा कर इसको नीचे करके मेरे संतरे ढक दे..” “नही दीदी में इसे खोल देता हूँ.” और उसने ब्लाउस के बटन खोल दिया. अब मेरी दोनो चूचिया पूरी नंगी थी. उसने लपककर दोनो को क़ब्ज़े में कर लिया. अब एक चूची उसके मुह में थी और दूसरी को वो मसल रहा था. वो मेंरी चूचियों का मज़ा लेने लगा और मैनें अपना पेटिकोट ऊपर करके उसके लंड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद लंड को चूत के मुहँ पर रखकर बोली, “ले अब तेरे चाकू को अपने खरबूजे पर रख दिया है पर अंदर आने से पहले उसका नाम बता जिसकी तू बहुत दिन से चोदना चाहता है और जिसे याद करके मुठ मारता है…” वो मेरी चूचियों को पकड़कर मेरे ऊपर झुक गया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए. में भी अपना मुहँ खोलकर उसके होंठ चूसने लगी. कुछ देर बाद मैनें कहा, ”हां तो मेरे प्यारे भाई अब बता तेरे सपनो की रानी कौन है…” “दीदी आप बुरा मत मानीऐगा पर मैनें आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख्यालो में रखकर…” “ हे भईया तू कितना बेशर्म है…
अपनी बड़ी बहन के बारे में ऐसा सोचता था..” “ दीदी में क्या करूँ आप बहुत खूबसूरत और सेक्सी है… में तो कब से आपकी चूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चूत में लंड डालना चाहता था… आज दिल की आरज़ू पूरी हुई..” और फिर उसने शर्माकर आँखे बंद करके धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाला और वादे के मुताबिक चुपचाप लेट गया.”अरे तू मुझे इतना चाहता है… मैनें तो कभी सोचा भी नही था की घर में ही एक लंड मेरे लिए तड़प रहा है.. पहले बोला होता तो पहले ही तुझे मोका दे देती…” और मैने धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलानी शुरू कर दी।
बीच-बीच में उसकी गांड भी दबा देती.

“दीदी मेरी किस्मत देखिए कितनी गांडू है… जिस चूत के लिए तड़प रहा था उसी चूत में लंड पड़ा है पर चोद नही सकता… पर फिर भी लग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ..” वो खुल कर लंड चूत बोल रहा था पर मैनें बुरा नही माना.

“अच्छा दीदी अब वादे के मुताबिक बाहर निकालता हूँ…” और वो लंड बाहर निकालने को तैयार हुआ. में तो सोच रही थी की वो अब चूत में लंड का धक्का लगाना शुरू करेगा लेकिन यह तो ठीक उल्टा कर रहा था. मुझे उस पर बड़ी दया आई. साथ ही अच्छा भी लगा की वादे का पक्का है. अब मेरा फ़र्ज़ बनता था की में उसकी वफ़ादारी का ईनाम अपनी चूत चुद्वाकर दूँ. इसलिए उससे बोली, “अरे यार तूने मेरी चूत की अपने ख्यालो में इतनी पूजा की है.. और तुमने अपना वादा भी निभाया इसलिए में अपने प्यारे भाई का दिल नही तोडूंगी.. चल अगर तू अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनना ही चाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चूत..” मैने जानकर इतने गंदे शब्द का प्रयोग किए थे पर वो बुरा ना मानकर खुश होता हुआ बोला, “सच दीदी..” और फ़ौरन मेरी चूत में अपना लंड डालने लगा की कहीं में अपना इरादा ना बदल दूँ।

“तू बहुत किस्मत वाला है अमित..” में उसके कुंवारे लंड की चुदाई का मज़ा लेते हुये बोली. ”क्यों दीदी?”

“अरे यार तू अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई अपनी ही बहन की कर रहा है… और उसी बहन की जिसकी तू जाने कब से चोदना चाहता था..”

“हां दीदी मुझे तू अब भी यकीन नही आ रहा है, लगता है सपने में चोद रहा हूँ जैसे रोज़ आपको चोदता था..” फिर वो मेरी एक चूची को मुहँ में दबा कर चूसने लगा. उसके धक्को की रफ़्तार अभी भी कम नही हुई थी. में भी काफ़ी दिनो के बाद चुद रही थी इसलिए में भी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी. वो एक पल रुका फिर लंड को गहराई तक ठीक से डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा. वो अब झड़ने वाला था।
में भी सातवें आसमान पर पहुचं गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठाकर उसके धक्को का जवाब दे रही थी. उसने मेरी चूची छोड़कर मेरे होंठो की मुहँ में ले लिया जो की मुझे हमेशा अच्छा लगता था. मुझे चूमते हुए कसकस कर दो चार धक्के दिये और

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“हाय आशा मेरी जान” कहते हुये झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया. मैनें भी नीचे से दो चार धक्के दिये और

“हाए मेंरे राजा कहते हुये झड़ गयी. चुदाई के जोश ने हम दोनो को निढाल कर दिया था. हम दोनो कुछ देर तक यू ही एक दूसरे से चिपके रहे. कुछ देर बाद मैनें उससे पूछा, “क्यों मज़ा आया मेंरे बहनचोद भाई को अपनी बहन की चूत चोदने मैं?” उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था. उसने मुझे कसकर अपनी बाँहो में जकड़कर अपने लंड को मेरी चूत पर कसकर दबाया और बोला, “बहुत मज़ा आया दीदी.. यकीन नही होता की मैनें अपनी बहन को चोदा है और बहनचोद बन गया हूँ…”

“तो क्या मैनें तेरी मुठ मारी है..”

“नही दीदी यह बात नही है…” “तो क्या तुझे अब अफ़सोस लग रहा है अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनने का..” “नही दीदी ये बात भी नही है.. मुझे तो बड़ा ही मज़ा आया बहनचोद बनने में.. मन तो कर रहा की बस अब सिर्फ़ अपनी दीदी की जवानी का रस ही पीता रहू.. दीदी बल्कि में तो सोच रहा हूँ की भगवान ने मुझे सिर्फ़ एक बहन क्यों दी.. अगर एक दो और होती तो सबको चोदता… दीदी में तो यह सोच रहा हूँ की यह कैसे चुदाई हुई की पूरी तरह से चोद लिया लेकिन चूत देखी भी नही..” “कोई बात नही मज़ा तो पूरा लिया ना?”

“हां दीदी मज़ा तो खूब आया…” “तो घबराता क्यों है? अब तो तूने अपनी बहन चोद ही ली है.. अब सब कुछ तुझे दिखाओँगी… जब तक माँ नही आती में घर पर नंगी ही रहूंगी और तुझे अपनी चूत भी चटवाऊ और तेरा लंड भी चूसू गी.. बहुत मज़ा आता है..” “सच दीदी?” “हां.. अच्छा एक बात है तू इस बात का अफ़सोस ना कर की तेरे सिर्फ़ एक ही बहन है में तेरे लिए और चूत का जुगाड़ कर दूँगी..” “नही दीदी अपनी बहन को चोदने में मज़ा ही अनोखा है.. बाहर क्या मज़ा आएगा?”

“अच्छा चल एक काम कर तू माँ को चोद ले और मादरचोद भी बन जा..” “ओह दीदी ये कैसे होगा?” घबरा मत पूरा इंतेज़ांम में कर दूंगी.. माँ अभी 38 साल की है, तुझे मादरचोद बनने में भी बड़ा मज़ा आएगा..”

“दीदी आप कितनी अच्छी हैं.. दीदी एक बार अभी और चोदने दो इस बार पूरी नंगी करके चोदुंगा..” “जी नही आप मुझे अब माफ़ करिए..” “दीदी प्लीज़ सिर्फ़ एक बार..” और लंड को चूत पर दबा दिया।

“सिर्फ़ एक बार..” मैनें ज़ोर देकर पूछा.“सिर्फ़ एक बार दीदी पक्का वादा..” “सिर्फ़ एक बार करना है तो बिल्कुल नही..” “क्यों दीदी?” अब तक उसका लंड मेरी चूत में अपना पूरा रस निचोड़कर बाहर आ गया था. मैनें उसे झटके देते हुये कहा, “अगर एक बार बोलूँगी तब तुम अभी ही मुझे एक बार और चोद लोगे?” “हां दीदी..” “ठीक है बाकी दिन क्या होगा.. बस मेरी देखकर मुठ मारा करेगा क्या.. और में क्या बाहर से कोई लाऊंगी अपने लिए.. अगर सिर्फ़ एक बार मेरी लेनी है तो बिल्कुल नही..” उसे कुछ देर बाद जब मेरी बात समझ में आई तो उसके लंड में थोड़ी जान आई और उसे मेरी चूत पर रगड़ते हुवे बोला, “ओह दीदी तुम बहुत अच्छी हो…”

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धन्यवाद । ।

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