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Hindi Sex Story

वेश्या के साथ पहली चुदाई (Veshya Ke Sath Pahli Chudai)







दोस्तो.. मेरा नाम रोहित है.. उम्र 21 साल है। अभी मैं दिल्ली में रहता हूँ। मैं आज आपके सामने अपना पहला सेक्स अनुभव बाँटने जा रहा हूँ। मैं Bhauja का लंबे समय से पाठक रहा हूँ। लोगों की कहानियाँ पढ़कर मेरे दिल में भी लालसा जागृत हुई कि मैं भी अपने बीते पलों को यहाँ अपने मित्रों के सामने प्रस्तुत करूँ।
मुझसे अपनी आपबीती लिखने में जो ग़लतियाँ हों.. उनके लिए मैं क्षमा चाहता हूँ।

मेरी कहानी का आरंभ आज से तीन साल पहले लखनऊ में होता है.. यह सन् 2010 की बात है। मैं अपने दोस्त के साथ किराए पर कमरा लेकर रहता था।
एक दिन हम दोनों लोग बहुत ज़्यादा बोर हो रहे थे.. तो उसने मुझसे कहा- चल चलते हैं और एक रंडी लेकर आते हैं।
मैंने बोला- ठीक है भाई.. कमरे पर बैठ कर मुठ्ठ मारने से तो अच्छा ही रहेगा।

चूँकि हमारी जान-पहचान वहाँ के कुछ लोकल लड़कों से थी.. तो उनसे हमने एक मस्त रंडी का नंबर लिया और उसे कॉल किया।
उससे पूछा- आप फ्री हो?
वहाँ से उत्तर आया- हाँ.. बोल..
मेरा दोस्त उसे लेकर कमरे पर आ गया।

वो रण्डी देखने में एक 25 साल की थी पर एकदम जवान सी लड़की लग रही थी। कमरे में अन्दर आने के बाद मैंने उसे पीने के लिए पानी दिया।
वो मुझसे इसी बात से खुश हो गई कि ये लौंडा और चोदू किस्म के ग्राहकों जैसा नहीं है।

मेरा दोस्त दूसरे कमरे में चला गया और मैं उसके साथ बैठ कर बात करने लगा। क्योंकि मित्रों सेक्स का मज़ा तभी आपको पूरी तरह से मिल सकता है.. यदि आपका सामने वाला पार्ट्नर अंतरंग पलों में आपको भरपूर सहयोग दे।

वो एक मस्त जवान लड़की थी। जब एक हसीना साथ में चुदने को तैयार बैठी हो.. तो आप खुद ज़्यादा देर तक कंट्रोल नहीं कर सकते हैं।
बिस्तर पर वो मेरे बाजू में बैठी थी.. मैंने हल्के से ज़ोर लगाकर उसे अपनी तरफ खींचा.. तो वो खुद ब खुद मेरी बाँहों में आ गई।
मैंने धीरे से उसके मम्मों को अपने हाथों में लिया.. तो उसकी सिसकारी निकल गई।
काफ़ी देर तक मैं उसके मम्मों को दबाता रहा। फिर मैंने पीछे से एक हाथ उसकी कुरती में डाल दिया.. और धीरे से उसे ऊपर उठाने लगा। उसकी कुरती टाइट होने के कारण वो खुद उठी.. और अपनी कुरती को अलग करके मेरी बाहों में आ गई।

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मैं एक हाथ उसके पीछे ले गया और एक झटके में उसकी ब्रा को उसके तन से जुदा कर दिया। मैंने पहली बार इतने करीब से एक लड़की को अपने पास पहली बार देखा था.. तो मेरा पप्पू लोवर में सलामी देने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा लवड़ा अभी लोअर फाड़ कर बाहर निकल आएगा।

मैंने उसके बाएँ मम्मे को अपने मुँह में ले लिया और बच्चों की तरह पीने लगा।
वो भी काफ़ी गरम होती जा रही थी.. जो उसकी गरम साँसों से पता चल रहा था। मैं उसके मम्मों को चूसना छोड़कर उसकी नाभि को चूमने लगा.. तो वो पूरी तरह से हिल गई।
मैं उसे और गर्म करना चाहता था.. तो मैं उसके कान में साँसें डालने लगा.. ये एक सिंपल सा तरीका है एक लड़की को जल्दी गरम करने का।

फिर मैंने उसकी सलवार को उसके बदन से अलग किया और उसकी पैन्टी को भी निकाल दिया.. उसकी चूत हल्की सी साँवली थी..
अब वो पूरी तरह से मेरे सामने नंगी लेटी थी और इधर मेरे लंड महाशय मुझे टाइट होकर सलामी दे रहे थे।
मुझे देखकर वो हँस कर बोली- क्या कपड़े पहन के करने का इरादा है?

इतना सुनते ही मैंने फटाफट अपने कपड़े अलग किए और जब अपनी अंडरवियर को उतारा.. तो मेरे लंड का साइज़ देख की उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं, बोली- तुम देखने में नहीं लगते थे कि इतने बड़े लंड के मालिक होगे।

मैं यहाँ पर अपने लंड के बारे में बता दूँ कि मेरे लंड का साइज़ 7.2 इंच है और ये ढाई इंच मोटा है। ये सब स्केल से नापा हुआ है.. छोटा वाला स्केल मेरे लंड के टोपे से पहले ही खत्म हो जाता है।
चलिए नाप तौल हो गई.. अब कहानी पर आते हैं।

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मैंने एक अच्छा सी महक वाला मैनफ़ोर्स का डॉटेड कन्डोम निकाला और उसके हाथ में थमा दिया।
उसने ललचाई नजरों से मेरे लंड को देखते हुए पाकेट फाड़ा और मेरे लंड को चूम कर उस पर कन्डोम चढ़ा दिया।
वो बिस्तर पर अपनी टाँगें खोल कर लेट गई।

मैं तो बस उसे देखता ही रह गया, बस मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मस्त मम्मों को पकड़ कर एक हाथ से लंड को उसकी चूत पर सैट किया और हल्का सा धक्का लगाया.. तो मेरा सुपारा उसकी भोसड़ी में घुस गया।

सच कहूँ मित्रो.. उसकी चूत बड़ी गरम थी.. अन्दर जैसे कोई ज्वालामुखी दहक रहा हो। उसने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर के आस-पास फँसा लीं.. और मुझसे चिपक गई।
ऐसा लग रहा था वो मुझमें समा ही जाएगी।

मैंने एक हल्का सा झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसके अन्दर उतर गया।
साथ ही उसकी एक मादक ‘आहहहह..’ निकल गई.. वो बोली- धीरे-धीरे घुसाओ..
मैंने पूछा- क्यों?
उसने बोला- मेरे धंधे में काफ़ी कस्ट्मर आते हैं.. लेकिन तुम्हारा सच में अभी तक सबसे बड़ा लंड मिला है। थोड़ा धीरे-धीरे चोद लो.. रात भर तुम्हारे यहीं तो रहना है मुझे..

फिर मैंने अपना लंड आधा निकाल लिया और धीरे-धीरे करके उसे चोदने लगा। वो मुझ से चिपक कर मेरा पूरा साथ दे रही थी।
कुछ समय चोदने के बाद मैंने उसे घोड़ी बनने को बोला.. तो उसने मना कर दिया, बोली- जब नीचे लेट कर नहीं ले पा रही हूँ पूरा.. तो वैसे तो तुम मेरी बच्चेदानी ही फाड़ दोगे..

मेरे काफ़ी कहने पर वो मान गई.. पर बोली- प्लीज़ आधा ही डालना।
मैं बोला- ठीक है.. प्यार से डालूँगा..

उसे घोड़ी बना कर मैंने लौड़ा उसकी चूत में डाला और एक धक्का लगा दिया।
वो उछल कर अलग हो गई।
दर्द से कराहती हुई बोली- क्या आज मुझे मारने का इरादा है.. तुम्हारा बहुत बड़ा है.. मैं सहन नहीं कर पा रही हूँ.. प्लीज़ पहले वाली अवस्था में ही चोद लो।

मैं नीचे लेट गया और उसे ऊपर आने को कहा। उसने मेरा कहा माना और मेरे लंड पर बैठ कर लण्ड की सवारी करने लगी। लंड बड़ा होने के कारण उसे पूरा जड़ तक लेने में परेशानी हो रही थी, वो बोली- जल्दी-जल्दी कर लो.. मुझे प्राब्लम हो रही है।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसे तेज-तेज झटके मारने लगा। मेरे धक्का मारते ही वो बार-बार पीछे हुए जा रही थी।

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काफ़ी देर तक उसके मम्मों को चूसते हुए और चूत चोदने में आधा घंटा कहाँ निकल गया.. पता ही नहीं चला।
इतने वो हिली और कसके मुझसे चिपक गई। हम दोनों लोग पसीना छोड़ रहे थे.. जबकि पंखा भी फुल स्पीड पर चल रहा था।
उसका काम हो गया था.. वो थक गई थी.. बोली- अब जल्दी-जल्दी कर लो..

vesya ko choda

मैंने धक्के और तेज गति से मारने शुरू कर दिए।
वो ‘आहह..’ करती हुई.. मेरा साथ देती जा रही थी।
उसके झड़ने के करीब दस मिनट बाद मेरा पानी भी छूट गया। लगभग 5 मिनट तक मैं ऐसे ही उसकी चूत में लंड डाले लेटा रहा।
बड़ा सुकून मिल रहा था मुझे.. और उसकी आँखों में भी संतुष्टि के भाव साफ झलक रहे थे।

अब मेरा लंड सिकुड़ कर छोटा हो गया.. पर अब भी वह 4 इंच का था।
उसे देख कर बोली- देखो तो.. तुम्हारा अभी भी कितनी अकड़ दिखा रहा है..
मैंने कन्डोम उतार कर अलग फेंक दिया और उसे एक चुम्मी कर दी।

थोड़ी देर में वो बोली- तुमसे चुदवाने का दिल तो और कर रहा है.. लेकिन मुझसे इतना बड़ा लिया नहीं जा रहा है।
बाद में मेरे दोस्त ने उसका चूत का मर्दन किया।

मित्रो, यह थी मेरी दास्तान.. आशा करता हूँ, आप सभी लोगों को पसंद आएगी।
अपनी राय दें मुझे.. ताकि भविष्य में शीघ्र आपको अपनी दूसरी कहानी आपके सामने ला सकूं | —- bhauja.com

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