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Hindi Sex Story

मैं और मेरा पूरा परिवार चुदक्कड़ (Main Aur Mera Pura Ghar Chudakkad)

हाय दोस्तो.. मेरा नाम अंजू शाह है.. मैं 46 साल की एक विधवा औरत हूँ। मेरे पति को गुज़रे 5 साल हो चुके हैं। मेरा एक बेटा अनिल और एक बेटी रानी है। उन दोनों की शादी 3 महीने पहले एक साथ हो चुकी है। मैं, मेरा बेटा और मेरी बहू स्वीटी साथ में रहते हैं, रानी और मेरा दामाद रणजीत थोड़ी ही दूरी पर रहते हैं। मैं आज भी दिखने में सुन्दर और सेक्सी लगती हूँ.. मेरी सहेलियाँ मुझे सेक्सी अंजू के नाम से बुलाती हैं। मेरा गोरा गठीला बदन देख कर अच्छे-अच्छे मुठ्ठ मारते हैं। मैं जवानी में कई लौड़े ले चुकी हूँ। कई बार मेरे पति ही मुझे अपने दोस्तों से चुदवाते थे, हम सब खूब मस्ती करते थे। लेकिन पति के जाने के बाद उनके दोस्तों ने भी लोक लाज को ध्यान में रखते हुए आना जाना कम कर दिया। रानी और रणजीत हर रविवार शाम को हमारे घर आते हैं और हम सब साथ में ड्रिंक्स लेकर खाना खाते हैं। मेरा दामाद रणजीत दिखने में हैण्डसम है.. मगर उसकी नज़र मेरी बहू स्वीटी पर ही जमी रहती है। मैंने यह बात कई बार नोटिस की.. पर अंजान बनकर सब देखती रही.. कभी-कभी वो कनखियों से मेरे चूचों पर भी नज़र डाल देता है.. क्या पता मेरे पीछे मेरी गाण्ड भी देखता हो? स्वीटी भी उसके सामने कई बार झुक जाती थी.. ताकि रणजीत उस के चूचों का मज़ा ले सके.. एक दिन ड्रिंक्स लेते-लेते रणजीत को थोड़ा नशा हो गया.. जिससे उसे थोड़ी नींद सी आने लगी थी। अंजू- रानी.. आज रात तुम दोनों यहीं सो जाओ, सुबह चले जाना। रानी- ठीक है मम्मी.. हम दोनों आपके ही कमरे में ही सो जाएँगे.. अंजू- अच्छा तुम दोनों मेरे डबलबेड पर सो जाना.. मैं सिंगल बेड पर सो जाऊँगी। रानी ने रणजीत को कंधे का सहारा देकर उठाया और बेडरूम में ले गई। हम तीनों अभी भी बाहर हॉल में बैठकर ड्रिंक्स ले रहे थे.. और खाना ख़ाते हुए इधर-उधर की बातें कर रहे थे। स्वीटी- मम्मी ज़ी.. मुझे भी नींद आ रही है.. मैं सोने जा रही हूँ। अंजू- गुड नाइट बेटा.. स्वीटी- गुड नाइट मम्मी ज़ी.. स्वीटी ने गुलाबी रंग की पतली नाईटी पहनी हुई थी.. जिसमें से उसकी ब्रा साफ़ नज़र आ रही थी। वो झूमती हुई उठी और अपने कमरे की तरफ जाने लगी.. मैंने पीछे से उसको देखा कि उसने अन्दर पैन्टी भी नहीं पहनी हुई थी। उसकी गाण्ड के बीच की दरार साफ नज़र आ रही थी। वो अपने चूतड़ हिलाती हुई बेडरूम में चली गई। अंजू- अनिल बेटा.. अब तुम भी सो जाओ.. काफ़ी रात हो चुकी है। अनिल ने मुझे गुड नाइट किस किया और अपने बेडरूम में चला गया। मैंने ड्रिंक का आखिरी पैग पिया और रणजीत की सिगरेट निकाल कर जला ली.. और लम्बा कश खींचते हुए अपने बेडरूम की तरफ बढ़ गई.. मैंने देखा कमरे का दरवाज़ा जरा खुला हुआ था। रानी का गाउन कमर तक उठा हुआ था और उसके दोनों चूचे नाईटी के बाहर थे। रणजीत का हाथ उसके चूचों पर थे.. लगता है दोनों का चुदाई मूड था.. पर ड्रिंक्स की वज़ह से कुछ ही देर में दोनों सो गए।
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मैंने भी अपने सिंगलबेड पर सो गई। रात को मुझे कुछ आवाज़ आई.. मैंने देखा रणजीत वॉशरूम में से निकल रहा था और उसका लंड पज़ामे से बाहर लटक रहा था। नशे की हालत में वो अपना पजामा बंद करना भूल गया होगा, यह सोच कर मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली। वो रानी की जगह मेरे बिस्तर पर आकर सो गया और उसने अपनी टाँगें मेरी जाँघों पर रख दीं। फिर उसने मेरी कमर में हाथ डाल दिया।मैंने जब कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं जताई तो उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगा। मैं भी नशे की हालत में थी.. इसलिए कुछ नहीं कर पा रही थी। रणजीत ने अपना हाथ मेरे चूचों पर रख दिया और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। मुझे अच्छा भी लग रहा था और गुस्सा भी आ रहा था। वो नींद में बड़बड़ा रहा था- ओह्ह.. मेरी प्यारी स्वीटी.. तुम्हारे कितने बड़े चूचे हैं… एयेए हह… यह कहते हुए वो मेरे चूचों को और ज़ोर से दबाने लगा। अब मुझे भी मज़ा आने लगा था। उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रख दिया.. जो पूरी तरह टाइट हो चुका था। मैंने उसके लंड को पकड़ा.. तो मेरे बदन में एक आग सी लग गई। कई सालों के बाद मैंने किसी का लंड पकड़ा था.. वो भी इतना गोरा.. 2.5 इंच मोटा और 7 इंच लंबा… हाय रब्बा.. मैं तो खुश हो गई कि मेरी रानी को इतना तगड़ा लंड मिला है। पर मेरी एक बात समझ में नहीं आई कि रणजीत स्वीटी को क्यों याद कर रहा है.. कहीं दोनों में कुछ चक्कर तो नहीं है? रणजीत मेरे बगल में लेट गया.. उसका लंड अब भी खड़ा था। मैं भी नशे में उसके लंड को हिला रही थी और वो भी मुझे स्वीटी समझ कर मेरे चूचों को दबा रहा था और ना जाने क्या-क्या बड़बड़ा रहा था..। करीबन आधे घन्टे के बाद उसने मेरे हाथों में पानी छोड़ दिया। मेरा हाथ उसकी मलाई से चिकना हो गया.. मैंने उसे चाट लिया.. और मैं उठ कर रानी के पास सो गई। सुबह जब हम फ्रेश हो कर नाश्ते की टेबल पर बैठे.. तो सब नॉर्मल मूड में थे.. मगर मुझे यह पता लगाना था कि रणजीत और स्वीटी के बीच क्या चल रहा है। मैंने एक प्लान बनाया.. अगले शनिवार को ऑफिस में छुट्टी है.. तो क्यों ना उसी दिन रविवार के जैसे मिलना मिलाना हो जाए। मेरा प्लान सफल हुआ.. रानी और रणजीत व्हिस्की की बोतल और सॉफ्ट ड्रिंक्स लेकर आ गए। हम सबने जम कर दारू पी और बहकी-बहकी बातें करने लगे। मुझे रणजीत और स्वीटी का ड्रामा देखना था.. इसलिए मैंने स्वीटी से बोला- स्वीटी अपने जीजू को कुछ स्पेशल खिलाओ..
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स्वीटी नशे में हंस पड़ी और बोली- जीजू को तो सिर्फ़ मलाई और रबड़ी पसंद है। अंजू- तो ले जाओ रसोई में… और प्यार से खिलाओ.. स्वीटी- आओ जीजू.. मैं तुम्हें रबड़ी और मलाई खिलाती हूँ। मैंने देखा रणजीत का लंड पज़ामे के अन्दर खड़ा हो रहा था। रणजीत स्वीटी के पीछे रसोई में चला गया। थोड़ी देर बाद मैं भी उठी और रसोई की तरफ बढ़ गई.. रणजीत स्वीटी के चूचों को दबा रहा था और उसकी गाण्ड पर अपना लंड रगड़ रहा था। रणजीत- स्वीटी.. पिछले रविवार को मैंने अपनी सास को खूब दबाया और अपने लंड का पानी भी उसकी हथेली पर छोड़ दिया.. जो वो सारा माल चाट गई थी। यह सुन कर मैं हैरान हो गई कि उस रात रणजीत जाग रहा था। ‘रणजीत.. अब तो तुम्हें मेरे साथ मेरी सास भी चोदने को मिलेगी। आज रात दोनों भाई बहन को खूब पिला कर सुला देते हैं और अपनी सास के साथ चुदाई का मज़ा लेते हैं।’ स्वीटी ने रणजीत का लंड पकड़ लिया- तुम अंजू को पटा लेना! ‘ठीक है..’ दोनों हॉल में आने लगे.. मैं वहाँ से हट गई। रानी और अनिल नशे मैं धुत्त हो चुके थे.. वो दोनों एक-दूसरे को सहारा देते हुए अनिल के बेडरूम में चले गए। मगर मेरा ध्यान उन पर नहीं था। स्वीटी और मैं दारू के घूँट लगा रहे थे तभी रणजीत ने सिगरेट जलाई.. और एक कश मारके मेरी और बढ़ा दी। मैंने ना कही.. तब वो बोला- कल रात तो मजे से कश ले रही थी.. आज क्या हो गया? मैंने पीछे मुड़ कर देखा.. स्वीटी हॉल में नहीं थी.. मैंने सिगरेट का एक कश लगाया.. तभी स्वीटी अपने बेडरूम से बाहर आई। उसने अपने सारे अंडरगारमेंट्स उतार दिए थे और पूरी तरह सेक्सी अंदाज़ में झूमती हुई बाहर आई। इधर रणजीत का लंड पज़ामे में कड़ा हो रहा था.. स्वीटी हमारे सामने कुछ इस तरह से बैठी जिससे उसकी चूत हम लोगों को नज़र आए। मैंने स्वीटी की चूत की ओर देखा.. उस पर बिल्कुल बाल नहीं थे और चूत के गुलाबी होंठ चमक रहे थे। रणजीत ने भी अपना हाथ अपने लंड पर रख लिया और उसे मेरे सामने ही सहलाने लगा। उधर अनिल और रानी सो चुके थे। Cute-South-Indian-Girl-Stripping-Her-Clothes-4 रणजीत ने अपना लंड पज़ामे से बाहर निकाला और मेरी तरफ बढ़ आया और अपना लंड जो 7 इंच का था मेरे मुँह के पास रख दिया और बोला। रणजीत- मेरी प्यारी सासू माँ.. चूसो इसे.. मुझे पता है तुम भी एक वक्त की खिलाड़ी रही हो.. कई मर्दों से चुदवा चुकी हो.. आओ आज अपने दामाद का लौड़ा भी चख लो। इतना कहते ही स्वीटी हँस पड़ी और बोली- ले लो मम्मी.. इसका बहुत प्यारा लंड है.. आपको भी मज़ा आ जाएगा.. कल रात अपने सिर्फ़ रणजीत की मुठ्ठ मार दी थी.. आज चूस कर चूत चुदवा लो। आप भी कई सालों से प्यासी हैं।
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रणजीत ने झूमते हुए मेरे चूचों को दबा दिए.. स्वीटी उठी और मेरी टाँगों के बीच बैठ गई.. वो मेरी नाईटी ऊपर करके मेरी चूत पर हाथ फेरने लगी। मेरी चूत पैन्टी के अन्दर गीली हो रही थी। रणजीत ने अपना लंड मेरे मुँह में पेल दिया। मैं भी बरसों से लंड की प्यासी थी, रणजीत का लंड मेरे सामने हिल रहा था, स्वीटी मेरी चूत को पैन्टी के ऊपर से सहला रही थी।स्वीटी ने मेरी पैन्टी उतार दी और मेरी चूत को सहलाने लगी। स्वीटी- वाह.. क्या बात है मम्मी जी.. आपकी चूत तो एकदम क्लीन शेव्ड है.. यह कह कर स्वीटी मेरी चूत चाटने लगी। मेरे मुँह से ‘आआ.. आआहआ.. आआआ.. हऊऊऊऊ..’ की आवाजें निकलने लगीं। रणजीत- सासू माँ.. चिल्लाओ मत.. अनिल और रानी जाग जाएँगे। स्वीटी- नहीं जागेंगे.. भाई-बहन दोनों दारू पी कर के सो रहे हैं। स्वीटी खड़ी हुई और उसने रणजीत का लंड मेरे मुँह से निकाल कर अपने मुँह में ले लिया। रणजीत- चलो बेडरूम में चलते हैं। स्वीटी ने मेरी कमर में इस तरह हाथ डाला.. जैसे मैं उसका बॉयफ्रेंड होऊँ। मैं भी हँस पड़ी.. हम तीनों बेडरूम में आ गए। रणजीत ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे चूचों को मसल कर चूसने लगा। रणजीत चूचों को छोड़ कर मेरे पेट को चाटने लगा, धीरे-धीरे उसने मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी.. मैं सिसक उठी, मेरे मुँह से ‘अयाया.. ऊवू..आह्ह..’ की आवाजें निकलने लगीं। स्वीटी मेरे चूचों को दबा रही थी और मैं उसकी चूत को सहला रही थी। स्वीटी अपनी चूत मेरे मुँह के पास ले आई और उसे चाटने को कहा.. मैं तो पहले से ही चुदक्कड़ रही हूँ। मैं अपनी जीभ उसकी चूत में डाल कर चाटने लगी। वाह.. क्या नज़ारा था.. दामाद सास की चूत चाट रहा है और बहू सास से चूत चटवा रही है। फिर सीन बदल गया.. अब रणजीत ने अपना लंड मेरी चूत पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा.. आधा से ज़्यादा लंड मेरी चूत में धंस गया। मेरे मुँह में स्वीटी की चूत होने की वजह से मेरी चीख दब कर रह गई। मैंने भी अपनी चूत ऊपर की और रणजीत का पूरा लंड चूत में ले लिया.. क्या मजेदार लंड था उसका.. स्वीटी- कैसा लगा दामाद का लंड.. है ना मजबूत? अंजू- क्या तुम्हें अनिल नहीं चोदता.. जो मेरे दामाद से चुदवाती हो? स्वीटी- आपके बेटे के पास लंड ही कहाँ है.. कभी मौका मिले तो देख लेना.. लंड तो इसे कहते हैं। स्वीटी ने रणजीत का लंड मेरी चूत में से निकाला और उसे चूसने लगी। स्वीटी- सासू माँ.. आपकी चूत का पानी तो बहुत टेस्टी है.. अंजू- मुझे मालूम है.. रणजीत मुझे देर तक चोदता रहा और फिर हम दोनों के मुँह पर झड़ कर सो गया। हम दोनों सास-बहू अब भी तड़प रही थीं। स्वीटी ने मेरे चूचों को चूसने के साथ मेरी चूत में भी उंगली डाल दी.. मैंने भी उसके साथ वही किया। कुछ देर में हम दोनों भी झड़ गए।

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Comments

  • deep
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    nice story

  • mannu
    Reply

    Mujhse bhi chuda lo koi si mera bhi londa bahut tagda aur mje daar hai hai kisi ki choot mai dam jo mera londa le sake

  • chandani
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    Mujhe bhi apni chut aise hi chatwani hai. Per koi banda nhi mil raha hai

    • Pawan
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      Mai hu na tumhari chut chatne ke liye aur tumhari chut ko fadne ke liye