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मेरी असली चूत चुदाई वाली सुहागरात (Meri Asli Chudai Wali Suhagrat)

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यह कहानी मेरी सहेली की है.. उसी की जुबान में सुनिए..

हैलो.. मेरा नाम नाजिया है.. मेरी शादी को 8 साल हो चुके हैं।
यह बात तब की है जब मेरी शादी को हुए 2 महीने हुए थे। मेरे पति दुबई में काम करते थे। मेरी सुहागरात के दिन वो सब नहीं हुआ.. जो मुझे मेरी सहेलियों ने बताया था। या यह कहो कि बस मैं कुंवारी ही रह गई.. मेरे पति मुझे चोदने से पहले ही गिर गए और सो गए।

शादी के बाद वो 15 दिन ही मेरे साथ रहे.. उसके बाद वो दुबई चले गए, बोले- जल्दी ही मेरा वीसा बनवा कर मुझे ले जायेंगे।

शादी के बाद मैं मायके आ गई। मैं घर पर बैठी-बैठी बोर हो जाती थी… तो अपनी दोस्त शामली के वहाँ चली जाती थी या ससुराल चली जाती थी।

एक दिन और मेरी सहेली शामली कैफ़े में बैठे थे.. तो उसके भाई का दोस्त भी वहाँ आ गया।
उसका नाम अशरफ था.. वो देखने में बहुत ही स्मार्ट था, मैं उसको देखती ही रह गई।

शामली ने उससे मेरा परिचय करवाया।
हम दोनों एक-दूसरे को देखते ही रह गए यह बात शामली ने नोट कर ली।
वो जैसे मेरे मन को भा गया।
मैं जब भी शामली के घर जाती वो मुझे वहाँ मिल ही जाता था.. उसको देख कर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान सी आ जाती थी।
यह बात शामली समझ रही थी।

एक दिन उसने मुझसे कहा- अशरफ तुझसे दोस्ती करना चाहता है।
मैंने तुरंत हामी भर दी.. शामली ने मेरा जबाव उस तक पहुँचा दिया।

दूसरे दिन जब हम दोनों कैफ़े में बैठे थे.. तो शामली ने अशरफ को फोन करके बुला लिया।

जैसे ही अशरफ आया तो शामली मुझसे बोली- यार मुझे जाना है.. तू अशरफ से बात कर.. मैं अभी 1 घंटे में आती हूँ।
ऐसा कह कर वो चली गई..

हम लोगों ने एक-दूसरे से बात की.. उसके बाद उसने मेरा फ़ोन नंबर ले लिया और वो चला गया।
हमारी फ़ोन पर बात शुरू हो गई.. धीरे-धीरे मैं उसकी तरफ खिंचने लगी। शामली भी मुझे उसका नाम ले कर छेड़ने लगी थी।
लगभग दस-बारह दिनों में ही हम एक-दूसरे के करीब आ गए थे।

एक दिन मैं और शामली कैफ़े के केबिन में थे.. जो कि एक प्राइवेट केबिन जैसा था.. जहाँ कोई आता नहीं था। वहाँ अशरफ आ गया। शामली ने उसको मेरे पास बैठा दिया और बोली- अशरफ जब से तुम इसको मिले हो.. तब से यह बहुत खुश रहती है। मैं इसको ऐसे ही खुश देखना चाहती हूँ।

उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोला- आप फिकर मत करो। मैं इसको ऐसे ही खुश रखूँगा..
फिर शामली बोली- तुम लोग बात करो.. मैं जाती हूँ।
जैसे ही वो गई.. उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे होंठों को हल्के से चूम लिया।
मैं कुछ कहती.. इतने मैं तो उसने मेरा हाथ में अपने लंड पर से छुआ दिया..

मैं हैरान रह गई और वहाँ से चली गई लेकिन मेरे आँखों के सामने उसका चेहरा घूमने लगा।
लेकिन तभी मुझे मेरे पति की याद आ गई.. मैं उनसे धोखा नहीं करना चाहती थी।

फिर अशरफ ने मुझे फ़ोन किया.. उसका नंबर देखते ही मुझे फिर से पता नहीं क्या हो गया।
मैंने फोन उठाया तो उसने सीधा बोला- आई लव यू..
मेरे मुँह से भी निकल गया- आई लव यू टू..
फिर तो वो बहुत खुश हो गया और मेरी तारीफ़ करने लगा कि मेरा साइज़ बहुत मस्त है.. मेरे चूचे बहुत मस्त हैं।
मेरा साईज उस समय 34-28-36 का था।

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उसने मुझसे कहा- तुम मुझे किस करो।
मैंने मना कर दिया तो बोला- अरे फोन पर तो चुम्मा दे दो।
मैंने उसको ‘पुच्च…’ की आवाज निकाल कर किस दे दिया..
उसके बाद से हम रोज सेक्स पर भी बात करने लगे।

मैं अन्दर से सुलगने लगी.. लेकिन अपने पति के बारे में सोच कर आगे नहीं बढ़ रही थी। वो कई बार मुझसे रात को मिलने की जिद करता था। मेरा भी खूब मन करता था.. पर मैं मना कर देती थी, मैं अपने पति को धोखा नहीं देना चाहती थी।

इस बात के बारे में शामली को मैंने बता दिया तो उसने कहा- जो तेरी इच्छा हो वो तू कर।

हम लोग मिलते थे.. तो वो मुझे किस भी करता था और सेक्स की मांग करता था.. बात यह थी कि मैं रात को बाहर नहीं जा सकती थी इसलिए वो संभव नहीं था।

मेरी शादी को लगभग दो महीने होने वाले थे.. तभी शामली ने बताया कि उसकी बहन और उसके भाई की शादी फिक्स हो गई और उसने मेरे घरवालों से बात कर ली कि मैं 7 दिन के लिए उसके वहाँ रहूँगी।

इस बात के बारे में मैंने अशरफ को बताया तो वो बहुत खुश हुआ। शामली की बहन की शादी से एक दिन पहले महिला संगीत को उसने मुझे मना लिया कि मैं उसके साथ रात को खाने पर उसके घर आऊँ।

मैं तैयार हो गई.. क्योंकि घर पर उसका परिवार होगा.. महिला संगीत रात को 8 से 11 बजे तक था। उसके बाद मेहंदी और बाकी की रस्में थीं..

मैंने काली साड़ी पहनी.. इसमें में बहुत ही मस्त लग रही थी।
मैंने शामली को बताया- मैं अशरफ के साथ उसके घर जा रही हूँ.. डिनर पर.. दस बजे तक आ जाऊँगी।
तो वो बोली- जानेमन मत जा.. वरना तू सुबह तक भी नहीं आ पाएगी।
मैंने पूछा- क्यों?
तो वो बोली- आज वो तेरे साथ सुहागरात मनाने वाला है.. आज वो तुझे रात भर जम कर चोदेगा.. आज रात वो अपनी इच्छा पूरी करके ही रहेगा।
मैंने कहा- नहीं यार.. उसके घर पर उसका पूरा परिवार है.. ऐसा कुछ नहीं होगा।

तो शामली बोली- मेरी जान उसका परिवार तो अभी यहाँ आने वाला है.. और 4 दिन तक यहीं रहेगा और वैसे भी तू आज बहुत सुंदर लग रही है.. वो आज तुझे नहीं छोड़ेगा।
मैंने कहा- वैसे तो ऐसा होगा नहीं.. फिर भी अगर हो ही गया.. तो फिर हो जाने दे.. देखा जाएगा।
तो शामली बोली- ठीक है मेरी जान.. मतलब यह कि आज तेरा पूरा मन हो गया है कि आज तो अपना सब कुछ उसको देकर ही रहेगी..
मैं बोली- यार बेचारे को बहुत तरसा दिया है.. अब आज मौका मिला है तो कर लेने दो.. उसकी मुराद पूरी..

मैंने मजाक करते हुए कहा तो शामली बोली- फिर जा.. तेरी मर्जी.. अपना ख़याल रखना।

मैं वहाँ से निकल पड़ी.. अशरफ की गाड़ी में जैसे ही बैठी.. तो अशरफ बोला- आज तो तुम क़यामत लग रही हो.. बहुत ही खूबसूरत।
मैं मुस्कुरा दी।

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हम दोनों उसके घर पहुँचे.. सबने खाना खाया और उसके परिवार वाले शामली के घर को जाने लगे।
तो अशरफ बोला- अम्मी मैं नाजिया को लेकर आ जाऊँगा.. आप गाड़ी भेज देना।

वो लोग चले गए और घर पर सिर्फ मैं और अशरफ रह गए थे।
मुझे लगने लगा कि शामली सही कह रही थी.. मन तो मेरा भी बहकने को था.. पर अपने पति का ख़याल मुझे बहकने नहीं दे रहा था।

अशरफ मुझे अपने कमरे में ले गया कमरे में अँधेरा था.. जैसे ही उसने लाइट जलाई.. तो पूरा कमरा फूलों से सजा हुआ था.. जैसे सुहागरात की सेज सजी हो।
मैंने पूछा- अशरफ.. यह क्या है?
तो वो बोला- डार्लिंग आज हमारी सुहागरात है।

शामली ने सही कहा था। मेरा मन भी मुझे अब धोखा देने लगा था। मैं कुछ कहती.. उससे पहले अशरफ ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मुझे चूमने लगा।

मेरे नाजुक से ठोस चूचे दबाने लगा.. मैं गर्म होने लगी थी और मेरा मन भी फिसलने लगा.. लेकिन मैंने खुद को संभाला और अशरफ को मना किया- मैं यह नहीं करूँगी।

अशरफ मुझे समझाने लगा.. पर मैं नहीं मानी.. तो उसने कहा- ठीक है.. हम चुदाई नहीं करेंगे.. जब तुम कहोगी.. तभी करेंगे.. पर आज बहुत दिनों के बाद मौका मिला है.. थोड़ा प्यार तो करने दो। आज अपनी इन मस्त-मस्त चूचियों के दीदार तो करा दो। मैं वादा करता हूँ कि जब तक तुम नहीं कहोगी.. मैं तुमको चोदने की कोशिश भी नहीं करूँगा। बस एक बार अपने सन्तरे तो दिखा दो।

मैं उसकी बातों में आ गई और मैंने अपना ब्लाउज और ब्रा उतार दिया। ब्रा उतारते ही मैंने अपनी चूचियाँ हाथ से ढक लीं।
अशरफ बोला- अब पूरे दीदार करवा दो यार..
तो मैंने अपने हाथ हटा लिए.. अशरफ उनको देखता रह गया और उसने उनको छूने के इजाजत मांगी। मैंने मना किया.. पर वो नहीं माना और उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी चूचियाँ मसलने लगा।

पहली बार कोई अजनबी मेरे नंगे बदन को इस तरह से मसल रहा था। जैसे ही उसने मुझे छुआ.. मेरी ‘आह..’ निकल गई। बस उसने भांप लिया और वो धीरे-धीरे मेरी चूचियाँ दबाने लगा।

अब तो मैं मदहोश होने लगी.. वो मेरे बदन के साथ चिपक गया और मुझे चूमते हुए.. मेरे चूचे दबाते हुए.. उसने धीरे से उसने मेरे पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया।
मुझे तब पता चला जब मेरी साड़ी नीचे सरक गई। फिर उसने मुझे सँभलने नहीं दिया। उसने मेरे कान के नीचे से चूमते हुए मुझे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे चूचों को चूसने लगा और दबाने लगा।

मैं अपने होश खोने लगी थी.. मेरी ‘आहें..’ निकलने लगी थीं.. मेरी चूत से पानी निकलने लगा था। मैं अब पूरी तरह से उसके बस में थी।
तभी उसने अपना हाथ मेरी पैन्टी के अन्दर डाल दिया और मेरी चूत को सहलाने लगा।

मेरी चूत पर उसका हाथ लगते ही मैंने अपने होश पूरे खो दिए, मैं भूल गई कि मैं शादीशुदा हूँ और मैंने अशरफ को अपनी बांहों में भर लिया और उसको बोली- प्लीज..ज..ज… अशरफ अब मत तड़पाओ न.. कुछ करो ना..
वो बोला- क्या करूँ?
मैंने कहा- चोदो मुझे..
वो बोला- मुझे अपनी चूत के दीदार तो करवाओ..
मैंने कहा- अँधेरा करो.. मुझे शर्म आ रही है।

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उसने लाइट बंद की और अपने कपड़े उतार कर मेरे पास आ गया। उसने मेरी पैन्टी उतारी और उतारते ही नाईट लैंप जला दिया।
मैंने अपना मुँह छुपा लिया.. जैसे ही मैंने मुँह छुपाया.. उसने अपना लंड मेरे हाथ में दे दिया। उसका लंड देख कर मैं डर गई.. 6 से 7 इंच लंबा और बहुत मोटा था।
मैंने उसको बोला- अशरफ यह तो बहुत मोटा है.. अन्दर कैसे जाएगा?
तो वो बोला- मेरी जान यह अन्दर भी जाएगा और तुमको जन्नत की सैर करवा कर आएगा..

फिर उसने मेरी चूत पर अपनी जीभ रख दी.. मैं तड़प उठी, वो मेरी चूत चाटने लगा, मैं ‘आहें..’ भरने लगी।
थोड़ी देर में मैं तड़पने लगी और बोली- अशरफ.. प्लीज.. मत करो ऐसा.. अब चोद भी दो..

अशरफ बोला- जानेमन इतनी शानदार चूत.. तू तो एकदम फ्रेश माल है.. बेवकूफ़ है तेरा पति.. जो इतना मस्त माल छोड़ कर दुबई चला गया। मेरी जान तुमको थोड़ा दर्द होगा.. लेकिन फिर मजा खूब आएगा। अब तुम तैयार हो जाओ।

फिर उसने अपने लंड में तेल लगाया और मेरी चूत में धीरे से अपने लंड को रखते हुए एक जोर से झटका दिया।
उसका आधा लंड मेरी चूत में घुस गया।
मैं जोर से चिल्ला उठी।

मैंने अशरफ को धकेलने का प्रयास किया.. पर वो मुझसे वजन में इतना भारी था कि मैं उसको हिला भी नहीं पाई और छटपटा कर रह गई।
मैंने उससे विनती की- मुझे छोड़ दे..

पर वो नहीं माना और मुझे चूमने लगा और मेरे निप्पलों को चूसने लगा। करीब 5-10 मिनट के बाद उसने धीरे-धीरे अपने लौड़े को मेरी चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया।
फिर मुझे आनन्द की अनुभूति होने लगी और मैं भी उसको सहयोग देने लगी।

फिर तो मेरी आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं। लगभग 10 मिनट तक हमारी चुदाई चली। उसके बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
मैं उसकी बांहों में ही थोड़ी देर लेटी रही..
हमने टाइम देखा तो 10 बज रहे थे.. तभी शामली का फ़ोन आ गया- हैलो.. नाजिया.. तू कहाँ हैं? इधर कब पहुँच रही है?

‘यार शामली.. अशरफ के साथ हूँ.. मुझे बहुत नींद आ रही है.. अब कल सुबह ही आऊँगी..’
‘कहीं अशरफ ने तुझे खा तो नहीं लिया.. माल बन कर गई थी न.. उसके घर..’
‘हाँ यार.. खा लिया उसने..’
‘मैंने तुझसे कहा ही था कि ऐसा होगा.. पर तुम नहीं मानी.. अब तो तुम सुबह ही आ पाओगी..’
‘हाँ..’
‘ओके.. खूब मस्ती करो.. बाय… गुड नाईट..’

फोन रखते ही अशरफ ने मुझसे बोला- वास्तव में.. तुम बहुत मस्त चीज हो.. आज मैं तुमको रात भर सोने नहीं दूँगा।
फिर हम दोनों ने रात भर चुदाई की.. रात भर में उसने मुझे कई बार चोदा।
उसकी पूरी कहानी बाद में बताऊँगी।

आप मुझे अपने विचार भेजिएगा। मुझे इन्तजार रहेगा।

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