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पहली चूत चुदाई में की जन्नत की सैर (Pahli Chut Chudai Me Ki Jannat Ki Sair)

सभी दोस्तों को मेरा नमस्ते.. मैं यह कहानी इसलिए लिख रही हूँ क्योंकि मैंने अन्तर्वासना पर इस तरह की बहुत सी कहानियाँ पढ़ी.. उसी में मैंने एक लेखिका की कहानी पढ़ी थी.. जिसने उसने लिखा था कि यह मेरी रियल सेक्स स्टोरी है..
तो मेरा भी मन भी मेरे जीवन में घटित एक घटना को यहाँ पर लिखने का हो गया कि मैं भी अपनी दास्तान लिखूँ।

तो सुनिए मेरी कहानी.. मेरा नाम श्रुति है.. मैं सूरत में अपनी फैमिली के साथ रहती हूँ। मेरी फैमिली में मॉम-डैड और छोटा भाई व छोटी बहन है। मैं घर में बड़ी हूँ.. तो घर की कुछ जबावदारी मुझ पर रहती है, बाजार आदि का सारा काम मुझे ही संभालना पड़ता है। हम एक कॉलोनी में रहते हैं.. वहाँ सब रेलवे वाले रहते हैं।

मेरे पापा भी रेलवे में काम करते हैं। हम सब कॉलोनी वाले मिल-जुल कर रहते हैं। कॉलोनी में जब भी किसी को कोई काम होता तो हम सब एक-दूसरे की हेल्प करते हैं।

अब मैं आपको वो रियल स्टोरी बताने जा रही हूँ.. जब पहली बार मेरा कुँवारापन खत्म हुआ।
यह 3 साल पहले की बात है.. उस समय मेरी उम्र 19 साल की थी.. मैं एकदम गोरी हूँ.. तब मेरी फिगर 32-28-34 की थी.. टाइट जीन्स में मेरे नितंबों का उभार पूरा बाहर दिखता था.. लड़के मुझे पलट कर देखने से नहीं चूकते.. मुझे भी लड़कों को ऐसे तड़पाना अच्छा लगता है।

उसी कॉलोनी में एक अंकल-आंटी रहते थे.. उनकी शादी को 6 साल हो गए थे.. पर उनके कोई बच्चा नहीं हुआ था।
अंकल का नाम विजय था.. उनकी बॉडी भी बहुत खूब लगती थी, मैं उनको अंकल ही कहती थी।
उनका अक्सर हमारे घर आना-जाना होता था। शाम को मैं और आंटी थोड़ा घूमा भी करते थे।

बहुत सालों के बाद भगवान ने आंटी की सुन ली और आंटी प्रेगनेंट हो गईं.. डॉक्टर ने आंटी को आराम की सलाह दी। आंटी ने घर में काम करने के लिए एक नौकरानी रख ली.. वो घर का सारा काम करती।

अब आंटी भी मेरे साथ घूमने नहीं जाती थीं.. इसलिए मैं ही अक्सर आंटी के घर जाकर मिल लेती थी।
आंटी के सब ठीक-ठाक चल रहा था। अब आंटी का 9 वां महीना चल रहा था.. इसलिए आंटी का विशेष ध्यान रखा जाता था।

अभी तक अंकल नाइट ड्यूटी करते थे तो आंटी अकेली रह जाती थीं.. लेकिन अब आखिरी महीना था.. इसलिए अंकल कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इसलिए नाइट में आंटी के पास किसी को सुलाना ज़रूरी था.. ना जाने कब कोई ज़रूरत पड़ जाए।

एक दिन जब वो इस टॉपिक पर बात कर रहे थे तो मैं वहाँ पहुँच गई।
आंटी ने मुझसे कहा- तुम आज से कुछ दिन तक मेरे पास सोया करोगी.. क्योंकि अब तुम्हारे अंकल की नाइट ड्यूटी है।
चमैंने कहा- आप मेरे पापा से पूछ लेना अगर पापा ‘हाँ’ कह देंगे तो मैं सो जाऊँगी।

उन्होंने पापा से अपनी मजबूरी बताई तो पापा ने ‘हाँ’ कह दिया। अब मैं नाइट को 10 बजे आंटी के घर सोने को चली जाती।

आंटी का घर हमारे घर से बिल्कुल पास था। आंटी और हम दोनों एक ही बिस्तर पर सोते थे.. क्योंकि आंटी के एक ही बिस्तर था। उनका बिस्तर भी डबलबेड था इसलिए आराम से सो जाते थे। आंटी और मेरे बीच में आंटी तकिया लगा देती थीं.. ताकि मैं आंटी के करीब जाकर उनको किसी प्रकार की तकलीफ़ न पहुँचा सकूँ।

इस तरह 5 रातों तक तो हम सामान्य सोते रहे.. कोई प्रॉब्लम नहीं हुई लेकिन वो छटवीं रात मेरे जीवन की सबसे भयानक रात साबित हुई, उस रात को मैं कभी नहीं भूल पाऊँगी।

वो ठंड की रात थी.. दिसंबर का महीना था, ठंड अधिक होने के कारण हम दोनों रजाई वगैरह ओढ़ कर सोते थे, मैं और आंटी रात को सो गए।
उस रात को मैं गहरी नींद में सो रही थी, मैं इतनी गहरी नींद में थी कि अंकल कब आंटी और मेरे बीच में आकर सो गए.. पता ही नहीं चला, लेकिन रात को मुझे ऐसा लगा कि मेरी रज़ाई में कोई है।

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मैंने सोचा कि आंटी होंगी.. मैं सो गई क्योंकि कमरे में बहुत अंधेरा था। तभी मुझे लगा कि आंटी मुझे चिपक रही हैं लेकिन ठंड इतनी ज़्यादा थी कि मैंने उन्हें दूर नहीं किया और मैं भी अंकल को आंटी समझ कर उनसे चिपक कर सोती रही.. क्योंकि मुझे ठंड में कुछ राहत महसूस हुई।

अंकल मुझे और बाँहों में भरने लगे, मैंने सोचा शायद आंटी को ठंड ज्यादा लग रही है.. इसलिए ज्यादा चिपक रही हैं।
मैं भी उन्हें आंटी समझ कर ज़ोर से चिपकाने लगी। अंकल शायद सोच रहे थे कि मैं उनका साथ दे रही हूँ..
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

अंकल ने मुझे और ज़ोर से दबा लिया और मुझे जोरों से किस करने लगे, मैं समझ नहीं पाई.. लेकिन तब तक मुझे यह पता चल गया था कि ये अंकल हैं जो मुझे किस कर रहे हैं।
वो 5 मिनट तक मेरे होंठ चूसते रहे.. मैंने छुड़ाने की कोशिश की.. मगर वो और ज़ोर से किस करते रहे।

मेरी धड़कनें बहुत तेज़ हो गई थीं और मेरे हाथ-पैर काँपने लगे।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ.. लेकिन मेरे तन में भी कुछ आग लगने लगी..
वो मेरी रज़ाई में आ चुके थे.. हम दोनों एक रज़ाई में लेटे थे.. वो मेरे गले पर किस करने लगे। एक हाथ उनका मेरे सिर के नीचे और एक हाथ से मेरे शरीर पर घूमने लगा। मुझे कुछ अज़ीब सा होने लगा.. एक मन तो कर रहा था कि ये सब होने दो.. तो एक मन कह रहा था कि नहीं ये सब ग़लत है।

थोड़ी देर मैं चुपचाप लेटी रही और अंकल मुझे किस करते रहे। फिर जो हाथ अंकल मेरे शरीर पर घुमा रहे थे.. उस हाथ को वो मेरे दूध पर ले गए और मेरे मम्मों को धीमे-धीमे दबाने लगे।

तब मुझे जैसे बेहोशी छाने लगी.. लेकिन मन ही मन बहुत डर लग रहा था कि क्या करूँ.. लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था। वहीं अंकल की हरकतें और बढ़ने लगीं और उन्होंने अपना एक पाँव मेरे ऊपर रख दिया और हाथ को वो मेरी जाँघों पर फिराने लगे।

फिर धीमे से मेरे ऊपर आ गए.. अंकल का शरीर बहुत भारी था, उनकी हाइट 6 फुट से ज़्यादा है।
वैसे दिखने में अंकल हैण्डसम थे..

फिर मैंने हिम्मत करके अंकल को हटा दिया और उठ बैठी।
अंकल एकदम से झेंप गए.. फिर मैं उठ कर बाथरूम में चली गई।

एक बात बताना मैं भूल गई कि जब अंकल मेरे ऊपर आ गए थे और अंकल मेरे मुँह पर अपना हाथ घुमाने लगे थे तो मैंने उनका हाथ ज़ोर से काट लिया था.. जिससे वो एकदम से हट गए थे।

फिर मैं बाथरूम में जाकर बाथरूम का दरवाजा अन्दर से बंद कर बैठी रही।

लगभग 15 मिनट अन्दर बैठने के बाद जैसे ही मैं बाहर आई.. अंकल दरवाजे पर ही खड़े थे। उन्होंने मुझे पकड़ कर फिर अन्दर खींच लिया। वैसे मैं आपको बता दूँ मेरी हाइट 5.5 फीट है और उस समय मेरा शरीर पतला था.. मेरा वेट भी केवल 46 किलो था.. इसलिए अंकल को मुझे दुबारा बाथरूम के अन्दर खींचने में कोई तकलीफ़ नहीं हुई।

अब जो हुआ.. वो मेरे कुंवारेपन को खत्म कर देने वाला था।

दोस्तों यहाँ मैं कहानी को थोड़ा विराम दे रही हूँ.. इसके अगले भाग में मेरी जवानी को एक नए मोड़ का मुँह देखना नसीब हुआ था उसकी मदमस्त कर देने वाली मेरी सच्ची दास्तान आपको पढ़ने मिलेगी.. आप अपने ईमेल मुझे जरूर लिखिएगा।
फिर अंकल ने अन्दर से बाथरूम का दरवाजा बंद करके मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
मैं अंकल को मना करने लगी- प्लीज़ अंकल.. ये सब ग़लत है.. आप मुझे जाने दो..

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लेकिन जैसे अंकल पर तो जैसे भूत सवार था.. वो मेरे होंठों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। मुझे रोना आ रहा था.. पर इतना डर लग रहा था कि कहीं चिल्लाई तो मेरी इज़्ज़त भी चली जाएगी और साथ में मेरे पापा की भी।
लोग कहेंगे कि क्या ज़रूरत थी अपनी जवान लड़की को दूसरों के घर सोने जाने देने की..

अंकल मुझे अपनी बाँहों में भर कर किस करने लगे, वो मेरे पूरे तन पर हाथ फेरने लगे। अचानक उनका एक हाथ मेरी उस जगह पर चला गया.. जहाँ पर जाने के बाद मैं उनका विरोध नहीं कर पाई।
अंकल का हाथ मेरी योनि पर चला गया था.. और वो उसको अपने हाथ से सहलाने लगे, अब मेरे हाथ-पैर ढीले हो गए, अब जो हाथ अंकल को दूर कर रहे थे.. वो हाथ खुद ब खुद अंकल को अपनी बाँहों में खींचने लगे।

अब मुझे भी थोड़ा मज़ा आने लगा।
अंकल ने मेरे आँखों में देखा और धीमे से मुस्कुरा गए.. मेरी आँखें भी झुक गईं।

अंकल ने फिर धीमे से मेरे गाऊन को ऊँचा करके खोलने लगे। मैंने अपने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो आराम से मेरा गाऊन खोल सकें।
अब अंकल ने अपनी लुंगी खोल दी और अब वो सिर्फ़ अंडररवियर और बनियान में रह गए थे, मैं भी ब्रा और पैन्टी में आ गई थी।

धीमे से अंकल ने अपनी बनियान खोल दी.. अंकल अब ऊपर से नंगे थे। उनके सीने पर जो बाल थे.. वो मुझे बहुत अच्छे लगने लगे। अंकल का फूला हुआ अंडररवियर मेरे सामने था.. उनका सफेद रंग का हाफ अंडररवियर पूरा फूला हुआ था.. जैसे मानो अभी उनका लंड बाहर आ जाएगा..
मेरा एक मन किया कि उसे ऊपर से दबोच लूँ.. पर डर और झिझक के मारे मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।

फिर अंकल ने मेरी ब्रा खोल दी.. जैसे ही मेरी ब्रा खोली.. मेरा कलेजा एकदम से मुँह को आ गया।
उन्होंने मेरे दोनों चूचे निकाल कर आज़ाद कर दिए।
वैसे उस समय मैं 32 इंच की ब्रा पहनती थी.. क्योंकि मेरे दूध छोटे थे..

अंकल होंठों से मेरे निप्पलोन को चूमने लगे, फिर मेरे समोसे जैसे मम्मों को दाँत से काटने लगे।
मैं तो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी।
मेरी जिंदगी की यह पहली घटना थी इसलिए मैं चुपचाप सब होते हुए देखती रही और अंकल ने बाथरूम की लाइट ऑफ करके दरवाजा खोल कर मुझे दूसरे कमरे में ले गए।

रेलवे क्वॉर्टर में 2 कमरे होते हैं और इनका बाथरूम बहुत छोटा होता है इसलिए वो मुझे गोद में उठा कर दूसरे कमरे में ले गए।
वहाँ मुझे फर्श पर लिटा दिया, उस कमरे में अंधेरा था इसलिए मैं कुछ साफ़ नहीं देख पा रही थी।

फिर अंकल मेरी पैन्टी को खोलने लगे। जब वो मेरी पैन्टी को खोलने लगे.. ये बात मेरे दिल को ज़ोर-ज़ोर से धड़काने लगी क्योंकि मैंने सुना था कि फर्स्ट सेक्स मे खून निकलता है और दर्द भी होता है।

अंकल ने मेरी पैन्टी खोल दी और अपना हाथ मेरी योनि पर घुमाने लगे और एक उंगली मेरी योनि में धीमे-धीमे अन्दर डालने लगे.. उनकी उंगली से दर्द नहीं हो रहा था.. क्योंकि मैं अक्सर फिंगरिंग कर लेती थी।
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इस तरह अंकल मेरी योनि मे फिंगर डाल कर अन्दर-बाहर करने लगे।
अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, वो मेरी योनि की पंखुड़ियों को उंगली से फैला कर दाने को छेड़ने लगे, उनका सर मेरी दोनों जाँघों के बीच में था।

मैंने कस कर उनके सर को पकड़ लिया और अपनी योनि को उनके सर के पास हिलाने लगी।
मैं मज़े में चूर थी.. अंकल से लिपट कर किस किए जा रही थी। मैं अंकल की मजबूत बाँहों में घिरी हुई थी। अंकल भी मुझे किस कर रहे थे।

फिर अंकल ने मेरी योनि में से उंगली निकाली और थोड़ा हट कर अपनी अंडरवियर को उतार दिया। बहुत कम रोशनी में मैंने अंकल का लिंग देखा वो बहुत बड़ा हो चुका था.. लगभग 7 इंच का था। मुझे उसको देख कर बहुत शर्म आई.. इसलिए मैं सिर्फ़ एक झलक ही देख पाई।

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फिर अंकल मेरे ऊपर लेट गए और अपना लिंग मेरी योनि पर रगड़ने लगे..
उफ्फ.. मेरी हालत खराब हो रही थी।
मुझे ऐसा लग रहा था कि बस ये अब अन्दर चला जाए.. मैं भी अब अपनी कमर को थोड़ा हिला रही थी..
अब अंकल अपना लंड धीमे-धीमे अन्दर डालने लगे।

जैसे ही उनका लिंग मेरी योनि में जा रहा था.. मुझे बहुत दर्द होने लगा.. मैंने धीमे से अंकल को कहा- प्लीज़ अंकल धीमे से.. दर्द हो रहा है..
पर अंकल ने कहा- श्रुति.. थोड़ा दर्द तो होगा.. जब पूरा अन्दर चला जाएगा तो सब नॉर्मल हो जाएगा।
मैंने अंकल से कहा- प्लीज़ आप धीमे-धीमे डालना।

अंकल ने ‘हाँ’ तो कहा..
लेकिन मेरे होंठों को अपने मुँह मे लेकर एकदम से अपना लिंग.. जो मेरी योनि के मुख पर था.. ज़ोर से एक ही झटके में पूरा मेरी योनि में घुसा दिया..
पूरा का पूरा लिंग मेरी कुँवारी योनि को चीरते हुए एक ही शॉट में पूरा अन्दर चला गया।
हाय… मैं तो मर ही गई.. दर्द से मेरी जान जा रही थी.. लेकिन चिल्ला ना पाई क्योंकि अंकल ने अपने होंठों से मेरी बोलती बंद कर रखी थी।

फिर अंकल पूरा लंड मेरी योनि में घुसा कर रुक गए और कहा- श्रुति, अपनी टांगों को जितना हो सके फैला दो।

मेरा दर्द अब कम हुआ.. पर दर्द से ज़्यादा मज़ा आ रहा था.. इसलिए मैं ज़ोर से अंकल के चिपक गई और थोड़ी देर अंकल भी मेरे ऊपर चिपक कर लेटे रहे।

फिर थोड़ी देर बाद अंकल मेरे ऊपर-नीचे होकर मज़ा देने लगे.. उनका लंड अब उछल-उछल कर मेरी योनि के अन्दर रगड़ रहा था.. वो अपनी कमर ज़ोर-ज़ोर से हिला रहे थे.. मैं भी अपनी कमर को हिला कर उनका साथ दे रही थी।

उफ्फ.. क्या मज़ा आ रहा था.. दोनों सेक्स में पूरे डूब चुके थे..

हाँ.. आप सबको बता दूँ कि मेरे इस पहले सेक्स में ब्लड नहीं निकला.. क्योंकि बचपन में मैंने खूब साइकल चलाई है उसी समय फिंगरिंग की वजह से एक बार मेरी सील टूट गई थी.. इतना मुझे याद है।

फिर अंकल मुझे बहुत ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे। इस तरह अंकल ने मुझे 15 मिनट तक चोदा होगा.. पता नहीं मैं उस रात कितनी बार झड़ चुकी थी। इस दर्द के साथ धीरे-धीरे मज़ा भी आ रहा था।

अंकल ने कहा- श्रुति अपनी कमर को और ज़ोर से हिला कर मेरा साथ दो।
मैंने अपनी योनि को लिंग के साथ और ज़ोर से आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। योनि को जकड़ कर उनकी लिंग को निचोड़ने लगी। फिर और भी मज़ा आया मैं तो जन्नत में सैर कर रही थी। पहली बार चुदाई के कारण जैसे जन्नत की सैर कर रही थी।

फिर कुछ देर बाद वो झड़ने लगे और अंकल का वीर्य निकल गया, उन्होंने सारा माल मेरी योनि में ही छोड़ दिया।
झड़ने के बाद अंकल उठ कर बाथरूम में गए और मेरे कपड़े लाकर दिए।

अब उन्होंने भी अपने कपड़े पहन लिए और बिस्तर पर सोने चले गए।
थोड़ी देर मैंने भी अपने कपड़े पहने और मैं भी अंकल के पास बिस्तर पर ही सो गई।

इस तरह पहला सेक्स मेरा एक अंकल के साथ हुआ। यह मेरे जीवन की सच्ची घटना Real Story है.. इसमें कुछ भी झूठ नहीं है।
आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी.. प्लीज़ अपने कमेंट ज़रूर ईमेल करें। मैं आपको ज़रूर रिप्लाई करूँगी..
Writer: Sruti Parekh
Editor: Sunita Prusty
Publisher: Bhauja.com

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