जब दोस्त के लिए लड़की देखने गए

हैलो.. नमस्ते.. मेरे सेक्सी दोस्तो.. आज मैं आपके पास एक नई कहानी लाया हूँ।
वैसे तो आपको पता ही है कि मुझे कैसे चूत का चस्का लगा… जब अभी कोई चूत चोदने को न मिलती.. तो मैं और मेरा दोस्त मोहन आपस में ही गाण्ड मारकर मजा ले लेते हैं। हम दोनों में से जब भी कोई लड़की या लड़का पटा कर लाता.. हम दोनों मिलकर मजा लेते हैं।

अभी कुछ दिन पहले मेरे दोस्त की शादी हुई है। जब मैं और मोहन लड़की को देखने गए थे.. तभी से उसे चोदने का मन कर रहा था। लड़की बहुत ही सुन्दर है.. उसका नाम मधु है, उसका कद 5 फुट 4 इंच है, उसका गदराया बदन.. सेक्सी आँखें और तनी हुई चूचियों को देखते ही हम लोगों का लंड सलामी देने लगा था।
बड़ी मुश्किल में हम लोग अपने को सम्हाले हुए थे। लड़की के माँ-बाप ने लड़की से कुछ पूछने के लिए हम लोगों को अकेला छोड़ दिया।

मधु की आँखों में एक विशेष प्रकार की चमक थी। कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद मोहन ने उसे फ़िल्म देखने के लिए पूछा.. तो वह राजी हो गई।

मैंने मोहन से पहले ही बता दिया था कि यदि इस लड़की के साथ तुम्हारी शादी होती है.. तो मैं भी इसे चोदूँगा। कहीं ऐसा न हो कि तुम अकेले ही इसका मजा लो और मैं मुट्ठ मारता रहूँ।

शाम के शो में वह अपनी छोटी बहन (रोमा) के साथ टाकीज आ गई।
टॉकीज में मोहन और हम और वो दोनों साथ में बैठे थे, टॉकीज में अँधेरा होने पर मोहन ने उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा, वो वहीं मोहन का साथ दे रही थी।
मोहन ने उसे हम दोनों के बारे में सभी कुछ बता दिया.. वो शर्म से नीचे देख रही थी।

बातें सुनते-सुनते वो भी उत्तेजित हो चुकी थी, वो बार-बार अपने हाथ से अपनी चूत को पोंछ रही थी।
इससे लग रहा था कि उसकी चूत पानी छोड़ रही थी।

तभी उसने मोहन को कहकर सीट बदल ली, अब वो हम दोनों के बीच में बैठ गई।

मेरे बगल में बैठ कर मुझसे बोली- क्या ये सही कह रहे हैं..? वास्तव में आप लोग समलिंगी हैं? क्या आप दोनों साथ में सेक्स करते हैं?
मैंने ‘हाँ’ कहा..
तो वो फिर से बोली- ये कह रहे हैं कि आप दोनों मेरे साथ सुहागरात मनाएंगे? क्या यह सही है?
मैं- तो क्या हुआ.. पर जबरदस्ती नहीं है, यदि तुम्हें पसंद न हो तो नहीं मनाएंगे, यह आपकी इच्छा पर निर्भर है।
वो कुछ नहीं बोली।
हम लोग भी शांति से फ़िल्म देखने लगे।

कुछ देर बाद वो बोली- लगता है, आप लोग बुरा मान गए। हम लोग बहुत ही गरीब हैं, हमारे पिता के पास इतना पैसा नहीं है कि वो मेरी शादी में दहेज़ दे सकें। इनके पिताजी ने कोई मांग नहीं की थी बल्कि सिर्फ एक साड़ी में ले जाने की कह रहे थे। इस बात को सुनकर मेरे पिता और मेरा परिवार बहुत खुश हैं। बड़ी मुश्किल से आपका रिश्ता मेरे लिए आया है। मैं आप लोगों के सामने हाथ जोड़ती हूँ.. आप लोग जैसा कहेंगे.. मैं वैसा ही करूँगी.. पर मुझसे शादी करने से मना न करें.. वर्ना मेरे माँ-बाप ये सदमा सहन नहीं कर पाएंगे।

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यह बात कहते-कहते उसकी आँखों में पानी आ गया था।

मैं- कोई बात नहीं.. जब तक तुम खुद न कहोगी.. मैं कुछ नहीं करूँगा.. और रही शादी की बात.. तो तुम्हारी शादी यहीं होगी.. इसी के साथ।

मैं फिर से चुपचाप फ़िल्म देखने लगा, मन ही मन सोच रहा था कि क्या सोचा था.. क्या हो गया..
लेकिन मोहन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था, वह उसके हाथों को दबाते हुए धीरे-धीरे उसके मम्मों को दबाने लगा।
मधु पहले तो शर्माती रही.. लेकिन थोड़ी देर बाद धीरे-धीरे ‘आआआ आआअह.. धीईईईरे.. लगता है.. और दबाआओ.. इधर दबाआआओ..’

तभी मधु के हाथों का स्पर्श मेरी जाँघों पर हुआ, वह मेरे जाँघों पर हाथ फेरते-फेरते मेरे उस स्थान पर ले गई जहाँ मेरा लंड था, वो मेरे लंड को हाथ से दबाने लगी।
मैंने देखा कि मधु एक हाथ से मेरा और दूसरे हाथ से मोहन का लंड सहला रही थी।
हॉल में अँधेरा होने के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

कुछ देर बाद मधु ने हम दोनों के लण्डों को पैंट से बाहर निकाल कर हाथों से आगे-पीछे करने लगी।
ऐसा करते-करते कुछ देर बाद हम दोनों के लण्डों ने फव्वारा छोड़ दिया।
तब हमने अपने लंड को फिर से अन्दर कर लिए।
लेकिन इतने में मजा नहीं आया था।
मैंने मधु को अपनी तरफ खींच कर किस कर दिया.. जिससे वह और लजा गई।
मोहन ने कहा- इतने में मजा नहीं आया।
मधु- अभी नहीं.. शादी के बाद दोनों को मजा दूँगी।

इतना सुनते ही मैं मस्त हो गया कि ये अब मेरे साथ भी सुहागरात मनाएगी।
उसकी छोटी बहन जो हमारे बगल में बैठी थी.. वो ये सब देख रही थी, उसने मुझसे पूछा- दीदी क्या कर रही थीं और दीदी के हाथ में क्या था, मुझे भी देखना है।
मैं- बाद में बताऊँगा… लेकिन एक शर्त है कि तुम किसी से कहोगी नहीं?
रोमा- नहीं बताऊँगी.. पर घर जाकर मुझे बताना जरूर।
मैं- ठीक है.. रात को हमारे पास दीदी को लेकर आना, तब बताएँगे।
रोमा- ठीक है!

फ़िल्म खत्म होने पर मैंने कुछ गिफ्ट लेकर उसको और रोमा को दिए और हम मधु के घर आ गए।

भोजन करने के बाद मधु के पिता ने हमारे सोने का इंतजाम अपने ही कमरे में कर दिया और खुद बरामदे में जा कर सो गए।
रात के 11 बज रहे थे.. लेकिन हमें नींद नहीं आ रही थी, मधु की याद में हम दोनों अपने लंड पकड़ कर सहला रहे थे।

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दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई, मोहन ने दरवाजा खोला.. तो सामने मधु खड़ी थी।
मधु ने तुरंत अन्दर आकर दरवाजा बंद कर दिया और हम दोनों के बीच बैठ गई।

हम लोग लुंगी पहने हुए थे.. जिस कारण खड़े लंड का उभार दिख रहा था। मधु बड़े ध्यान से हमारे लंडों की ओर देख रही थी।
मोहन मधु को अपनी ओर खींच कर अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगा।
मधु भी मोहन का साथ दे रही थी।

मैं बाहर जाने लगा.. तो मोहन ने मुझे रुकने के लिए कहा.. पर संकोचवश मैं नहीं रुक पा रहा था।
तभी मधु ने भी मुझे बाहर जाने से रोका।
अब मैं भी मधु को पीछे से पकड़ कर चुम्बनों की बौछार करने लगा।

मधु गरम हो चुकी थी और उत्तेजना से उसके पैर कंपकंपा रहे थे और वो मुँह से उत्तेजक आवाजें निकालने लगी थी।
मोहन उसके कपड़े निकालने लगा..
तो मधु बोलने लगी- अभी नहीं.. शादी के बाद.. मैं तो आपसे मिलने आई थी।
मोहन- और ये हमारे लंड खड़े करा दिए उनका क्या होगा? कुछ तो करना ही होगा।
मधु- आप कह रहे थे कि आप साथ में सेक्स करते हैं.. तो आपस में ही निपट लो.. मेरी क्या जरूरत है!

यह कह कर वो जोर से हँस दी।
इधर मोहन खड़े लंड पर धोखा होने से नाराज हो रहा था।
मोहन- तो क्या इतनी रात को हमारी गाण्ड मराई देखने के लिए आई हो? और तुम दूसरों से अपनी चूत चुदवाओ?

मैं समझ गया कि मामला ख़राब होने वाला है.. तो मैंने तुरंत मोहन से कहा- इसने ऐसा कहाँ कहा? ये अभी नहीं चुदना चाहती.. तो इसकी मर्जी.. और सही बात भी है.. अभी सारा मजा ले लेंगे.. तो बाद में क्या मजा आएगा? चुदी-चुदाई चूत को सुहागरात में चोदने में क्या मजा..? चलो छोड़ो।
मोहन- राकेश इससे कह दो.. कि यदि इसे हमारी गाण्ड मराई देखना है.. तो इसे हमारा लंड चूसना पड़ेगा.. नहीं तो शादी कैंसिल।

मधु शादी कैंसिल की बात सुन कर स्तब्ध हो गई और कहा- शादी कैंसिल न करो.. जैसा आप लोग कहोगे.. मैं वैसा ही करूँगी।
मोहन- अब आई न अकल ठिकाने.. चलो चूसो हमारे लंडों को..

मोहन ने अपनी और मेरी लुंगी खोल दी हम लोग अन्दर कुछ भी नहीं पहने थे जिस कारण लुंगी खुलते ही खड़ा लंड उसके सामने था।
मधु ने हमारे लंड अपने हाथ में पकड़ कर बारी-बारी चूसने लगी।
लंड गीला होने के कारण उसके मुँह से सपड़-चपड़ की आवाज आ रही थी… जो माहौल को और उत्तेजक बना रही थी।
मोहन उसका सर पकड़ कर लंड को पूरे जड़ तक उसके मुँह में डाल रहा था.. जिससे उसको बीच-बीच में उबकाई आ रही थी।

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कुछ देर बाद मधु ने हम दोनों के लंडों को छोड़ दिया और कहा- अब नहीं मुँह दर्द करने लगा है.. अब तुम लोग करो मैं देखूंगी।

मोहन- मधु पहले किस की गाण्ड मरती देखना चाहती हो।
मधु- तुम्हारी
मोहन- पर एक और शर्त है.. तुम्हें भी अपने कपड़े उतारने होंगे।

मधु भी अपने कपड़े उतारकर नंगी हो गई।

मोहन ने कहा- मधु अगर तुम्हें मेरी गाण्ड मरती हुई देखने का शौक है.. तो पहले मेरी गाण्ड को भी चाटो।
मधु- छिः.. यह गन्दा होता है। यहाँ से तो पॉटी करते हैं।

मोहन ने तभी उसका सर पकड़ कर अपनी गाण्ड पर लगाते हुआ कहा- चलो चाटो।
तब मैंने भी उसका सर पकड़ कर मोहन की गाण्ड पर लगा कर.. उसकी गाण्ड चटवाने लगा।
कुछ देर चटवाने के बाद मैंने उसको अलग किया और मधु को मोहन के मुँह के सामने खड़ा कर दिया और अपने लंड को उसकी गाण्ड के अन्दर कर उसकी गाण्ड चोदने लगा।

मोहन मधु की चूत को चाट रहा था और मैं मधु के मम्मों को मसल रहा था।
मधु का चेहरा उत्तेजना से रहा था। पीछे से मेरा धक्का लगते ही मोहन की जीभ उसकी चूत के अन्दर चली जाती थी।
मधु- आआअह.. इइइ.. और चाआटो.. म्म्म्म.. आहह.. मजा आ रहा है.. दूध जोर से दबाओ.. हाआआय.. राआआ… आईईई.. मेरा छूट रहा है।

तभी मधु ने अपनी जांघों को कसकर जकड़ लिया और मुझे पकड़ लिया, वो झड़ने लगी थी, अब उसकी चूत का पानी मोहन चाट-चाट कर साफ कर रहा था।

मधु अपनी चूत को चटवाकर मुझे मोहन को चोदते हुए देख रही थी, कुछ देर बाद मेरा भी हो गया.. तो मैंने अपना लंड मधु को चाटने को कहा।
तो मधु ने मेरा लंड चाट कर साफ़ कर दिया।
अब मधु अपने कपड़े पहन कर हँसते हुए चली गई।

बाद में मोहन ने मेरी गाण्ड की जोरदार चुदाई की।
रात के 2 बज चुके थे.. हम दोनों थककर सो गए।

सुबह हम लोग जाने लगे तो मधु फिर से हमारे पास आई, आज उसका चेहरा खिला हुआ था, उसने आस-पास देखकर हम लोगों को किस किया और कहा- रात को जितना आनन्द आया शायद ही कभी आया हो। आप जल्दी से शादी का मुहूर्त निकालिए.. मैं आप लोगों से चुदने को बेकरार हूँ।

इतना कहकर मधु जल्दी से कमरे में चली गई और हम दोनों उसके माता-पिता से इजाजत लेकर जैसे ही चलने लगे.. तो पीछे देखने पर मधु की आँखों में पानी था.. वह रो रही थी।

मैंने और मोहन ने उसको फ्लाइंग किस करते हुए उससे विदा ली।

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