पुलिस वाले ने मुझे बांधकर मेरी बीवी को रंडियों की तरह चोदा – Police Wale Ne Mujhe Baandhkar Meri Biwi Ko Randion Ki Tarah Chodi

Biwi Ko Police Walon Ne Randion Ki Tarah Choda - Hindi Sex Story
Biwi Ko Police Walon Ne Randion Ki Tarah Choda - Hindi Sex Story
Submit Your Story to Us!

भाउज में आज मैं आपकी सुनीता भाभी एक गन्दी चुदाई कहानी लायी हूँ, जो की हमारी समाज में कई चलती रहती हे | पुलिस को तो लोगों की सुरक्षा में रखा गया हे लेकिन वो साले कभी और कैसे आम आदमी को लूटते हैं और उनकी इज्जत को भेजने की मजबूर करदेते हैं या कहानी उसीकी एक छोटा सा उदाहरण हे | तो पढ़िए इसी गन्दी चुदाई कहानी …….

जब से मेरी बीवी को पीएसी के जवानों और उसके जीजा ने पेला था उसकी चुदवाने की भूख और बढ़ गई थी। इसी दौरान मेरी बदली प्रतापगढ़ हो गई थी। नीलू की बुर की आग एकदम चरम पर थी। अब चुदवाते वक़्त वो खुल के गालियों का प्रयोग करती। वो अब पूरी रंडी हो चुकी थी।
मेरी ड्यूटी एक प्राइवेट कंपनी में थी। एक दिन मुझे कुछ काम से पटना जाना था। हम दोनों की ट्रेन रात के साढ़े ग्यारह बजे थी। खाना खाकर हम ऑटो से स्टेशन पर पहुंचे। स्टेशन पर बिल्कुल सन्नाटा था। बहुत कम लोग या यूँ कहें कि इक्का दुक्का लोग दिखाई दे रहे थे। ट्रेन थोड़ी लेट थी। हम वहीं बैठ कर बातें कर रहे थे।
तभी न जाने कहाँ से कुछ पुलिस वाले आ गए। वो हमसे पूछताछ करने लगे। मैंने उन्हें अपना कार्ड दिखाया पर वो नहीं माने और हमें एक केस में फरार पति-पत्नी साबित करने लगे। मैं उनको समझाता रहा पर वो नहीं माने।
दरोगा बोला- साले, मादरचोद ! हमें समझाओगे? पहले तो अपने माँ-बाप का खून करते हो और भागने की प्लानिंग करते हो ! ले चलो इनको थाने फिर बात करते हैं !
इतना कहकर वो सब हम दोनों को ले जाने लगे। एक सिपाही नीलू से बोला- साली चल अपना सामान उठा ! तुझसे तो लगता है साहब ही बात करेंगे ! साली की जवानी तो देखो ! अगर साहब बोल दें तो यहीं पटक कर चोद दूं !
नीलू बोली- क्या बदतमीजी कर रहे हो? एक औरत से इस तरह बात करते हैं?
दूसरा सिपाही बोला- तब कैसे बात करते हैं बुरचोदी रंडी? ज्यादा बोल मत ! नहीं अभी तेरे मर्द के सामने साहब त्तुम्हें अपने लंड पर नचवाएंगे ! समझी?
यह सब सुनकर नीलू चुप हो गई पर उन सब की बुरी नज़र उस पर पड़ चुकी थी। वो सब हमें लेकर ड्यूटी-रूम में गए। वहाँ पर उस दरोगा ने पता नहीं किसे फ़ोन लगाया। बात करने के बाद वो मुस्कुराने लगा। उसने अपने तीनों सिपाहियों से कुछ बात की और उसके बाद वो सब हमें गाडी में स्टेशन के दूसरी ओर ले जाने लगे। तो मैंने पूछा- हमें कहाँ ले जा रहे हैं?
तो बोला- अभी पता चल जायेगा !
थोड़ी देर बाद हम एक मकाननुमा ऑफिस में पहुंचे। उन्होंने हमें उतारा और अन्दर ले गए। वहां कोई नहीं था। दरअसल यह वीआईपी गेस्ट-रूम था। वहां पहुँच कर दरोगा बोला- अब बोल साले ! छुटना चाहता है या दफा ३०२ लगवाना चाहता है? अब हम चाहें तो तुम्हें छोड़ भी सकते हैं पर इसके लिए तुझे कुछ देना होगा ! देगा?
मैं बोला- क्या?
वो बड़ी बेशर्मी से बोला- तेरी माल ! यानि तेरी बीवी !
मैं गुस्से में उससे बोला- जबान सम्हाल कर बात कर साले ! तू मुझे नहीं जानता, मैं तुम्हें जेल भिजवा सकता हूँ !
वो बोला- भिजवा दे ! पर वो तो तू तब करेगा जब तू यहाँ से बच कर जायेगा?
इतना कहकर उसने नीलू को दबोच लिया। बाकी के सिपाहियों ने मुझे दबोच कर मेरे मुँह में कपड़ा ठूंस कर मेरा मुँह बंद कर दिया और फिर मुझे रस्सी से खूब मजबूती से बांध कर एक कमरे में छोड़ दिया।
अब आगे की कहानी नीलू के शब्दों में-
उस दरोगा ने पीछे से मुझे कसकर पकड़ लिया, फिर बोला- रानी, आज तो तुझे हमारे लौड़ों पर नाचना होगा !
मैंने चिल्लाते हुए कहा- छोड़ो मुझे ! मैं तुम लोगो की बात नहीं मानूंगी किसी भी कीमत पर !
तब दरोगा बोला- फिर ठीक है, हम तेरे पति का एनकाउंटर कर देंगे, उसके बाद तुझे भी चोद कर रंडीखाने भेज देंगे। जहाँ तेरी जवानी का भुरता बन जायेगा। मान जाओ !
मैं बोली- ठीक है ! मुझे सोचने दो !
मैंने सोचा कि अगर मैं इन सब की बात मान लेती हूँ तो ज्यादा से ज्यादा ये मेरी चुदाई ही करेंगे और अगर नहीं मानी तो ये मेरे पति को जान से तो मारेंगे ही साथ में मुझे भी बर्बाद कर देंगे। यह सोचकर मैंने कहा- ठीक है, मुझे मंजूर है ! पर सुबह तुम लोगों को हमें इज्जत के साथ वापस छोड़ना होगा !
दरोगा बोला- जो तुम बोलो रानी, सब मंजूर !
अब मेरा दिमाग चुदाई की बात सोचते ही धुकधुकाने लगा।
एक सिपाही बोला- साहब क्या मस्त प्लान बनाया है, कई दिनों से किसी की मारी नहीं थी, आज सारी कसर निकालूँगा !
दूसरा बोला- अबे अब इस हरामजादी को चुदाई वाले कमरे में तो ले के चल !
यह कह कर उसने मेरी गांड सहला दिया। वो सब अब मुझे ऊपर लेकर जाने लगे। रास्ते में कोई मेरी चुचियों को सहलाता, कोई गांड पर, तो कोई गाल पर !
हाय ! मैं तो इतने लोगों से चुदने की बात सुनकर ही मस्त हो गई थी। आज फिर मुझे अपने पीएसी वाले जीजा की टक्कर का लौड़ा जो मिलने वाला था।
अन्दर पहुंचते ही दरोगा बोला- चल री मादरचोद, अपने कपड़े उतार ! कसम से साली एकदम कंटीली है ! आज तो तुझे जमकर चोदूंगा ! खोल बुरचोदी ! आज तुझे पुलिस का डंडा दिखाऊंगा। अरे तुम लोग देख क्या रहे हो? गरम करो रंडी को ! आज इसे दिखायेंगे कि पुलिस का लौड़ा जब घुसता है तो क्या होता है ! साली का गांड भी पेलूँगा !
हाय …….. आह! ऐसे मत करो ! छोड़ो मेरी चुचियों को ! आह सी… दर्द हो रहा है ! कभी चूचियां नहीं दबाई क्या? जब मैं चुदने को तैयार हूँ तब मेरे साथ जबरदस्ती क्यों कर रहे हो?
साली रंडी ! तू ऐसी माल है कि बिना ऐसे किए चोदने का मज़ा ही नहीं आएगा ! खोल स्साली पहले अपना जलवा तो दिखा ! यह कहकर दरोगा ने साड़ी के ऊपर से ही मेरी बुर को मींज़ दिया।
हाय, क्या कर रहे हो। छोड़ो ना! मैं बोली।
तब उसने मुझे कपड़े उतारने का इशारा किया। अब मेरी समझ में आ गया था कि चाहे मेरी चूची हो या बुर या गांड सबकी बैंड बजेगी। मैं अन्दर ही अन्दर खुश भी थी। काफी दिनों के बाद मेरी जवानी की बैंड फिर से बजने वाली थी। हाय जीजू ! क्या बना दिया तूने मुझे ?
अब मैंने एक-एक करके अपने कपड़े उतार के एक तरफ रख दिए क्योंकि मैं जानती थी कि ये सब मेरी मां-बहन सब चोद सकते हैं तो मैं अपने कपड़े क्यों ख़राब करूँ !
उन सबने भी अपने कपड़े मुझसे पहले ही उतार दिए। उनके लौड़ों को दख कर तो मन किया कि उनका मुँह चूम लूँ ! सब एक से बढ़ कर एक ! दरोगा का सबसे मस्त ! मेरी बुर तो पानी देने लगी, साली कुछ देर का इन्तज़ार भी नहीं करवा सकती।
दरोगा ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और लण्ड मेरी गांड से सटाते हुए बोले- रानी तैयार हो ना ! अगर नहीं तो तेरे पति को तैयार करूँ !
मैं तो मस्त थी पर कुछ नहीं बोली। सब मेरे ऊपर टूट पड़े, मेरे दोनों 32 साइज़ की चुचियों को दबा-दबा कर लाल कर दिया।. दरोगा मेरे होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। एक मेरी बाईं और एक मेरी दांई चूची के चुचूक चूसने लगे। एक मेरे गांड के दरारों को अपने जीभ से चाटने लगा। सब तरफ से मैं फँसी थी। मेरी बुर तो रिसने लगी। करीब ५ मिनट तक ऐसा करने के बाद एक उंगली मेरी बुर को सहलाते-सहलाते अन्दर घुस गई। हाय मेरा तो बुरा हाल था।
वो उंगली दरोगा की थी। वो चीखा- सालों ! इस रंडी मादरचोद को भी मज़ा आ रहा है ! यह देखो इसकी बुर का रस !
कहकर वो अपनी उंगली चाटने लगा। सब मेरे ऊपर हंसने लगे और एक बोला- हरामजादी, तुझे तो सारी पुलिस-फ़ोर्स भी चोदे तब भी आग न बुझे !
मैं भी बेशर्मी से बोली- साले रंडी हूँ रंडी की तरह चोदोगे तभी मज़ा दूंगी ! मेरी बुर सस्ती रंडी वाली बुर नहीं है ! समझे ? पीएसी के लौड़ों पर दौड़ चुकी हूँ। देखती हूँ तुम्हारे में कितने दम है !
दरोगा ने मेरे कान के लौ को चूसते हुए धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रानी, सही कहूँ तो एकदम मस्त माल हो ! ये सब तो परम पेलू हैं पर सही में अगर तुम मज़ा लेकर यहाँ से जाना चाहती हो तब हम जैसा कहें वैसा करना होगा !
मैं भी नशीली आवाज में बोली- मेरे राजा, आज बुर का दरवाज़ा खोल तो अपने डंडे से ! मैं तो बिल्कुल तैयार हूँ ! जैसे चाहो वैसे पेलो ! तुम लोगो की रंडी हूँ ना, सब तरफ से फाड़ डालो मेरी ! मेरी बुर तुम्हारे लौड़े का स्वागत ही करेगी, इतना जीभर के पेलवाउंगी कि तुम भी क्या याद करोगे।
दरोगा बोला- क्या नाम है तुम्हारा रानी?
मैं बोली- नीलू !
हाय बड़ा मस्त और रंगीन नाम है। चल रानी अब हमारे लौड़ों को अपने बुर के लिए तैयार कर ! दरोगा बोला।
मैं अब उनके मस्त खड़े लौड़ों को चाटने लगी। एक बोला,” साली मस्त है ! सब आता है इसे ! लगता है इसका पति इसे सब सिखा कर रखता है। लंड को चाट रंडी साली ! ले पी मादरचोद !
उधर मैं उनके लौड़े चूसने में मस्त थी, इधर दरोगा ने मेरी प्यारी सी चोट्टी बुर पर हाथ लगाया और फिर मुँह भी लगा दिया। फिर तो एक ने मेरी गांड में उंगली कर दी। मैं और मेरी जवानी पूरी उफ़ान पर आ चुके थे और थोड़ी देर में मेरी जवानी के रस का फव्वारा निकल गया। दरोगा पूरा का पूरा माल चाट गया और बोला- रानी तेरी बुर भी तेरी मुंह की तरह नमकीन है ! मज़ा आ गया, अब तो तुम्हारी असली तीसरी डिग्री शुरु होगी।
इतना कहकर उसने मुझे कुतिया की तरह उल्टा कर दिया। उसके बाद थूक लगा लगा कर जो उनके 9-9 इंच के लौड़ों ने मेरी पेलाई की पूरे आधे घंटे तक बिना रुके !
पेल-पेल के उन्होंने मेरी बुर में ही अपना सारा का सारा माल डाल दिया। मेरी बुर से उनका पानी टपकते हुए नीचे फर्श पर गिर रहा था। हाय मैं तो पूरी तरह मस्त हो गई थी, सभी मुझको एक-एक बार चोद चुके थे।
अब मैं दरोगा की गोद में थी। वो मेरी चुचियों से खेल रहा था। उसने मुझसे पूछा- रानी मज़ा आया?
मैं उसके लंड को सहलाते हुए बोली- पूरा राजा ! तुम लोगों ने तो मेरी बुर को एकदम मस्त कर दिया ! इस समय तो दो चार लंड और भी होते तो मैं आराम से चुदवा लेती। कसम से पहली बार पीएसी ने और इस बार पुलिस ने पेल-पेल कर मुझे पूरा रंडी बना दिया। हाय ! अगला राउंड कब शुरू करोगे राजा?
दरोगा ने पीएसी वाली चुदाई के बारे में पूछा तो मैंने सारा किस्सा बता दिया शोर्ट में। उसने मेरे जीजा का नाम पूछा तो मैंने बता दिया। जीजा का नाम सुनते ही वो हंसने लगा। दरअसल मेरे उस जीजा की ड्यूटी वहीं प्रतापगढ़ में ही लगी थी। उसने मुझसे पूछा- तू कहे तो तेरे जिज्जू को यहीं बुला दूं?
मैंने कुछ नहीं कहा। तब उसने अपने सेलफोन पर बात करके मेरे जीजा को आने को कहा- यार आओ यहाँ एक मस्त रंडी तुम्हारा इन्तज़ार कर रही है।
मैं तो जीजा के आने की बात सोच कर सिहर गई। अब उन लोगों के लंड फिर से मेरी कहानी सुनकर तैयार हो गए थे।
एक बार फिर मेरे बुर में लौड़े घुसने लगे। अबकी बार एक सिपाही ने मेरी गांड को निशाना बनाया और मेरी दोनों तरफ से जबरदस्त कुटाई हुई। मैं तो पूरा निहाल हो गई ! मेरी गांड लंड ले-ले के पूरी लाल हो गई। चारों ने जगह बदल-बदल के मुझे चोदा। हाय मेरा रंडीपन मेरे ऊपर हावी हो गया था। मैं तो मदहोश हो गई थी। याद भी न रहा कि मेरे पतिदेव बगल वाले कमरे में बंद हैं। सबने मुझे चोद-चोद कर मेरी बुर को एकदम खोल दिया। इस बार सबने एक साथ मेरे मुंह में अपना पानी दिया। मुझे न चाहते हुए भी उसे पीना पड़ा।

police wale ne mere patni ka boobs dabaya
तभी नीचे गाड़ी रुकने की आवाज़ आई, मैं समझ गई कि जिज्जू आ गया है ! मेरी बुर जो आठ-दस बार झड़ चुकी थी, एक बार फिर पानी देने लगी।
तभी दरवाज़े पे जीजा आया, वो मुझे देखकर सन्न हो गया। मैं दौड़ कर उससे लिपट गई। वो सब समझ गया। तुंरत उसने अपने कपरे उताड़े और दरोगा से बोला- अरे यार ! इस हरामजादी रंडी को कहाँ से पकड़ लिया।
अरे नीलू रानी कैसे यहाँ?

तब मैंने उसे सारी बात बताई तो वो हंसने लगा और बोला- साली कोई मर्डर नहीं हुआ है शहर में ! ये तो तू इनको भा गई होगी और ये तेरे को फंसा के यहाँ अपने लौड़ों पर नचवा रहे हैं ! चलो ठीक भी है ! तेरी जैसी मादरचोद रंडी की इसी तरह गांड मारी जानी चाहिए। अरे यार ! नीचे मेरा अर्दली होगा, उसे भी बुला ले, वो भी इसे देखेगा तो मस्त हो जायेगा। चल साली, पहले मेरा लौड़ा तो चाट !
कसम से मैं इस समय खुद को एक रंडी ही समझ रही थी और खुल कर अपनी खुजली शांत करना चाहती थी। मैं भी खुल के उनके लौड़े चाटने लगी। जीजा का अर्दली भी मुझे देख कर मस्त हो गया।
अब कमरे में केवल मैं जीजा, दरोगा और वो अर्दली थे। तीनों मुझे फिर से नोचने लगे और गन्दी गन्दी गालियां देने लगे। मुझे भी मज़ा आ रहा था।
उन तीनों के लंड चूसने के बाद मैं बोली- जीजा, राजा, मेरा मन कर रहा है कि एक साथ तुम सब के लौड़े मेरे तीनों छेद को भर दें ! कसम से पिछला बलात्कार याद दिला दो !
जीजा बोला- अरे हरामजादी, तू चिंता मत कर ! सुबह तक तू अपने पैरों पर नहीं जा सकेगी ! साली मैं तो तेरा गांड मरूँगा !
दरोगा बोला- मैं तो इसके मुंह को चोदूँगा !
अर्दली बोला- साहब लोग थैंक्यू ! इस साली की बुर तो एकदम ताजी लौंडिया की तरह फूली है ! मैं तो इसी में अपना डंडा डालूँगा ! आज इसे मालूम होगा कि पुलिस और पीएसी जब मिल के मारते हैं तो क्या होता है।
फिर क्या, उनके मूसल मेरी गांड, बूर और मुँह में घुस कर उधम मचाने लगे। मैं तो एकदम से मस्ता गई। हाय, क्या चुदाई थी !
जगह बदल बदल कर तीनों ने सारी रात मेरी पति की जमानत का पूरा इस्तेमाल किया। हाय रे जीजा का काला लंड ! उफ्फ ये दरोगा मुआ तो सारी रात मुझे पेलता ही रहा, कभी मुंह में, कभी बुर में तो कभी गांड में ! सारी रात सब मेरी जवानी को रौंदते रहे और मै रंडियों की तरह चुदती रही। हाय रे जवानी- उफ्फ्फ ये उफनती जवानी केवल दस इंच के लौड़ों से ही मस्त रहती है, वैसे तो मेरे पति का भी नौ इंच का है, पर वो जब भी पेलते हैं तो अकेले ! हाय, यहाँ तो कई सारे मिल के मेरी बच्चेदानी को फाड़ डालते हैं।
किसी तरह पेलवाते- पेलवाते सुबह हुई। रात भर मैं आह,उच्च, आउक्च,उफ्फ, आई, हाय,सीईईईई. उई मां और न जाने कौन सी मस्ती वाली सिस्कारें मारती रही।
मैंने अपने पूरे कपड़े पहने। जीजा जल्दी चला गया, दरोगा ने मेरे पति को सख्त ताकीद देकर कहा- अगर किसी से कहा तो जान से तो जाओगे ! तेरी बीवी की बुर में डंडा भी पेलेंगे !

Save

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*