बायोलोजी नहीं सेक्सोलोजी लेस्बीयन सेक्स (Lesbian Sex: Biology Nahi Sexology)

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मेरा नाम दिलप्रीत है, और मैं सोनीपत, हरि याणा में रहती हूँ। अभी अभी मैंने अपनी पी एम टी का इम्तिहान क्लीयर किया है, आने वाले समय में मैं डॉक्टर बनूँगी।
मगर बात मेरे इम्तिहान क्लीयर करने की नहीं है, उसके पहले की है, जब मुझे 10+2 में पास होने के लिए ट्यूशन की ज़रूरत थी। बाकी सब सब्जेक्ट्स में मैं ठीक थी, मगर बायोलोजी से मुझे थोड़ा खतरा था, तो मैंने अपने मम्मी पापा से कहा कि मुझे बायोलोजी में ट्यूशन चाहिए।

हमारे घर से थोड़ी ही दूर पे एक बायोलोज़ी की मैडम रहती थी, जो ट्यूशन पढ़ाती थी।
मैं अपने पापा के साथ उनके पास गई और हमने बात की।
पापा ने कहा कि दिलप्रीत पर खास तवज्जो देकर इसे अच्छे से पढ़ाया जाए ताकि इसके अच्छे नंबर आयें!

मैडम ने मुझे शाम को साढ़े छह बजे से बुलाया।
अब मैडम के बारे में मैं आप सब को पहले से कुछ बता दूँ।

मैडम पुनीता जैन करीब 44-45 साल की थी, रंग साफ, लंबी चौड़ी, काफी सेहतमंद। घर में अकेली रहती थी, पति बाहर के शहर में जॉब करते थे, बेटा खुद बाहर पढ़ रहा था तो वो अपने घर में अकेली ही रहती थी।

पढ़ाई शुरू हो गई, मैडम मुझे बहुत दिल लगा कर प्यार से पढ़ा रही थी। उनके पढ़ाने का तरीका मुझे भी बहुत ठीक लगा। दिन बीतने लगे, मगर हर बीतने वाले दिन के साथ बहुत सी और बातें भी मेरे सामने आने लगी।
मैडम अपने ही घर में खुद ऊपर वाले पोर्शन में रहती थी और नीचे का सारा घर किराए पे दे रखा था।
जब भी मैं मैडम के घर पढ़ने के लिए जाती वो अक्सर मुझे देर तक पढ़ाती, शाम को करीब सात बजे चाय पीती, कभी खुद बनाती, कभी मुझसे भी बनवा लेती।

दिन ब दिन हम एक दूसरे के और करीब आती गई। मैडम अक्सर बहुत ही फैशनेबल कपड़े पहनती, कभी साड़ी, कभी सूट, कभी, जीन्स, कैप्री और निकर भी।

एक दिन जब मैं पढ़ने उनके घर गई, तो मैडम ने टी शर्ट के साथ शॉर्ट्स पहने थे, मैंने देखा तो कहा- वाह मैडम, आज तो बहुत गजब चीज लग रही हो!
मेरी तरफ देख कर मैडम हंस कर बोली- पहले यह बता… मैं गजब चीज कब नहीं लगती? मैं हूँ ही लाजवाब!
उनकी बात पर हम दोनों हंस पढ़ी।

ऐसे ही धीरे धीरे हम दोनों की नजदीकी बढ़ती गई। अक्सर मैडम मुझे यार कह कर बुलाती, मैं भी बात करते करते कभी कभी मैडम को यार कह देती, जब हम दोनों में करीब 20 साल से भी ज़्यादा का फर्क था।

हर रोज़ मैडम के नए नए रूप देखने को मिलते, जितना मैं मैडम के करीब आ रही थी उतना मुझे लग रहा था कि मुझे मैडम से प्यार सा होता जा रहा था, मैं चाहती थी कि मैं हमेशा मैडम के पास ही रहूँ।

एक दिन ट्यूशन में जब करीब 7 बजे मैडम चाय बनाने के लिए उठ कर गई, उस दिन मैडम ने कैमल कलर की शॉर्ट्स और टॉप पहना था, मैंने देखा शॉर्ट्स के बाहर जांघों से नीचे मैडम ने अपनी टांगों की हुत बढ़िया से वेक्सिंग की थी, एकदम गोरी और चिकनी मलाई सी टांगें।मैं अभी तक वैक्सिंग नहीं करती थी क्योंकि मेरी बाजू और टाँगों के बाल बहुत छोटे और बारीक थे, जो इतने दिखते नहीं थे।
मगर मैडम की बाजू और टांगें एकदम से साफ थी।

जब मैडम चली जा रही थी, मैंने देखा कि मैडम की गोरी गुदाज़ भरवां टाँगों के ऊपर दो गोल विशाल हिप्स यानि कूल्हे भी थे, जो बहुत ही सेक्सी लग रहे थे।

मैडम ने रसोई में जाने के थोड़ी देर बाद मुझे आवाज़ लगाई।
मैं किचन में गई तो मैडम फर्श पर घुटनों के बल बैठी कुछ ढूंढ रही थी, अपने चारों पाँव पे वो एक घोड़ी की तरह खड़ी थी।

किचन में जाने पर सबसे पहले जिस चीज़ ने मेरा ध्यान खींचा वो थे मैडम के चूत…
बहुत ही सेक्सी पोज में थी जैन मैडम!
अब मैंने भी बहुत सारी अश्लील वीडियोज़ अपने मोबाइल में देख रखी थी, सो बेशक मैं भी लड़की थी, और वो भी औरत, मगर सेक्सी औरत हर एक के लिए सेक्सी ही होती है।

मुझे इस तरह उनके हिप्स को घूरते देख कर मैडम बोली- अरे मेरे हिप्स को देखना छोड़, बाद में देख लेना, पहले मुझे कुछ ला कर दे, ढक्कन शेल्फ के पीछे गिर गया है, उसे निकालना है।
मैं थोड़ा शर्मा सी गई, मगर भाग कर झाड़ू उठा लाई, ढक्कन निकाल कर मैडम ने ऊपर रखा और चाय बनाने लगी।
चाय बना कर हम दोनों वापिस अपने कमरे में आ गई।

चाय पीते पीते हम इधर उधर की बातें करने लगी।
तभी मैडम ने पूछा- सुन… बॉय फ्रेंड है तेरा कोई?
मैंने कहा- जी नहीं!
‘क्यों, इतनी सुंदर तो तू है, कोई मुश्टण्डे लाइन तो मारते ही होंगे?’ मैडम ने बहुत दोस्ताना सा होकर पूछा।
मैंने कहा- जी लाइन तो बहुत मारते हैं, पर डर लगता है, इसलिए किसी से दोस्ती नहीं की।

‘हम्म…’ कह मैडम चाय पीने लगी, फिर बोली- सुन जब मैं झुकी हुई थी, ढक्कन ढूंढ रही थी, तब तू क्या देख रही थी?
अब इस सवाल पे मैं असमंजस में पड़ गई कि मैडम को क्या जवाब दूँ? मैं चुप रही।
मैडम बोली- क्या मैं बहुत सेक्सी लग रही थी?
मैंने सर नीचे झुकाये हुये ही जवाब दिया- जी!

मैडम बोली- तुमने कभी सेक्स किया है?
मुझे बड़ी शर्म आई, मगर मैंने ना में सर हिला दिया।
‘कभी भी… कुछ भी?’ मैडम ने फिर पूछा।मैंने फिर न में सर हिलाया।
‘किसी से किस, या बूब दबाये हों?’ मैडम ने मेरे कंधे पे हाथ रख कर पूछा।
मैंने फिर सर ना में ही हिलाया।

‘मुझे तो सच में बहुत पसंद है सेक्स करना, सच में जब तुम्हारे अंकल आते हैं न, हम दोनों तो दो दो दिन तीन तीन दिन, कपड़े ही नहीं पहनते!’ कह कर वो हंसी।
तो मुझे भी हंसी आ गई, ‘तो क्या करते हो? मैंने पूछा।
‘अरे खुल कर सेक्स करते हैं, इस सोफ़े पर, इस चेयर पर, इस मेज़ पर, इस घर की हर जगह पर हमने सेक्स किया है।’ वो बहुत चहक कर खुश होकर बोली- जानती हो, तुम्हारे अंकल तो मुझे इतना प्यार करते हैं कि क्या बताऊँ, ना जाने कहाँ कहाँ से मेरे लिए नए नए कपड़े, अंडर गारमेंट्स और भी बहुत कुछ ला ला कर देते रहते हैं! देखोगी तुम?

कह कर मैडम ने बिना मेरा जवाब सुने मुझे बाजू से पकड़ा और साथ वाले कमरे में ले गई।
कमरे में अलमारी खोल कर मुझे अपने कपड़े दिखाने लगी। फिर नीचे वाली अलमारी खोली, उसमें तो… हे राम, इतनी किस्म किस्म की ब्रा और पेंटियाँ भरी पड़ी थी, हर रंग और डिजाइन की। मैडम ने मुझे सब निकाल निकाल कर दिखाई।

तभी मुझे अलमारी की साइड में पड़ा हुआ कुछ दिखा, मैंने पूछ लिया- वो क्या है?
मैडम ने एक मुस्कान दी और मुझे वो निकाल कर दिखाया।
वो एक काले रंग की रबर का बना हुआ डिल्डो यानि नकली लंड था।
मैडम ने उसे हाथ में पकड़ के हिलाते हुए कहा- अरे, ये तो मेरी जान है, जब तुम्हारे अंकल नहीं होते तो यही मेरे दर्द ए दिल की दवा है’।

मैंने पहली बार ऐसी कोई चीज़ देखी थी।
मैडम ने नीचे वाला दराज़ खोला तो उसके अंदर और 2-3 अलग अलग तरह के लंड पड़े थे।
मैंने पूछा- अरे इतने सारे, क्या करती हो इनका?
मैडम बोली- ये सब मेरे दिल की आग बुझाते हैं।

उन्होंने सभी उठा कर अपने हाथों में पकड़ लिए और मेरी आँखों में देखते हुये, एक डिल्डो को अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसा, जैसे ब्लू फिल्मों में लड़कियाँ लंड चूसती हैं।
मुझे मैडम की यह अदा बहुत सेक्सी लगी, मेरा भी दिल किया कि मैं भी एक डिल्डो लेकर उसे चूस कर देखूँ, या अपने नीचे लेकर देखूँ।
मगर मैंने बात को आगे बढ़ाने के लिए पूछा- अब जब अंकल आ जाएंगे तो फिर इसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी?
मैडम बोली- नहीं फिर इसकी कोई ज़रूरत नहीं, तुम्हें चाहिए क्या?
मैडम ने पूछा तो मैं न हाँ कह पा रही थी न ही ना कह पा रही थी।

मैडम ने वो रबर का काला डिल्डो मेरे हाथ में पकड़ा दिया- इसे ले जा घर पे और लेकर देखना, ज़िंदगी का मज़ा आ जाएगा।
मैंने डिल्डो हाथ में पकड़ा तो मेरे तो जैसे दिल की धड़कन बढ़ गई, साँसें तेज़ हो गई, कानों में से सेंक निकलने लगा।
मैडम बोली- पता तो है न, कि कैसे लेते हैं?
मैं तो शर्म के मारे चुप रही तो मैडम बोली- देख, मैं एक तुझे लेकर दिखती हूँ, तू वैसे ही घर जा के ट्राई करना!

कह कर मैडम ने अपनी निकर के बटन और ज़िप खोले और निकर उतार दी, नीचे उन्होंने गहरे गुलाबी रंग की पेंटी पहन रखी थी, जिसमें सिर्फ आगे ही छोटा सा कपड़ा था, साइड और पीछे सिर्फ धागा था।
मैडम ने मेरे सामने ही एक डिल्डो को अपने मुँह में डालकर अपने थूक से गीला किया और अपनी पेंटी एक तरफ हटा कर उस डिल्डो को अपनी चूत में घुसा लिया, एकदम चिकनी, दूध जैसे गोरी चूत।
मैं देख रही थी।

मैडम बोली- चल तू भी लेकर दिखा!
मैं अभी कुछ सोच ही रही थी कि मैडम बोली- क्या कभी कुछ लेकर देखा है तूने?
मैंने कहा- हाँ, पर सिर्फ उंगली या पेन वगैरह, मगर इतनी मोटी चीज़ कभी नहीं ली।
मैडम ने मुझे उठा कर खड़ा किया और मेरी स्लेक्स खींच कर नीचे कर दी, बेशक वो औरत थी, मगर फिर भी इस तरह किसी के सामने नंगी होने में मुझे बहुत शर्म आई, मैंने नीचे चड्डी नहीं पहनी थी, तो स्लेक्स उतरते ही मैं नंगी हो गई।

मैडम ने मेरी चिकनी कमर के दोनों तरफ हाथ फेरते हुये- वाउऊ, बहुत सेक्सी हो तुम, मगर और भी सेक्सी होती अगर तुमने ये बाल साफ किए होते!
मुझे बहुत गंदा लगा और सोचा अब कभी झांट के बाल नहीं बढ़ने दूँगी।
मैडम ने मेरी चूत पर पहले प्यार से हाथ फेरा और फिर उसे चूम लिया।
मेरे तो बदन में बिजलियाँ सी कौंध गई।
मैडम ने मेरी पूरी स्लेक्स उतार दी और मुझे वहीं कार्पेट पे ही लिटा दिया, वो खुद मेरी कमर के पास लेट गई, मेरी दोनों टांगें खोली और वही काला रबर का डिल्डो लेकर मेरी चूत पे रगड़ने लगी।
सच में बड़ा अच्छा लग रहा था, जैसे कोई मर्द अपना काला मोटा लंड मेरी चूत पे रगड़ रहा हो, मैंने अपनी आँखें बंद कर ली।

मैडम ने मेरी चूत की दोनों फाँकें खोली और उस डिल्डो को मेरी चूत के सुराख पे रख कर अंदर को धकेला मगर वो अंदर नहीं गया। मैडम ने फिर कोशिश की मगर वो अंदर नहीं जा रहा था।
‘एक मिनट रुक, ये ऐसे नहीं जाएगा!’ कह कर मैडम उठ कर चली गई और मैं वहीं वैसे ही लेटी रही।
एक मिनट बाद ही मैडम वापिस आई मगर इस बार वो बिल्कुल नंगी थी, थोड़े ढलके से मगर खूबसूरत गोल चूचे, गहरे भूरे रंग के निप्पल, कटावदार कमर और गोरी चिकनी जांघें!

मैडम के हाथ में एक क्रीम की शीशी थी, उन्होंने आकर पहले तो वो क्रीम उस डिल्डो पे अच्छी तरह से लगाई, फिर मेरी चूत के अंदर तक अपनी उंगली से लगा दी।
फिर जब दोबारा डिल्डो मेरी चूत पे रख के अंदर को धकेला तो वो तो फच्च से अंदर घुस गया, मुझे दर्द हुआ, क्योंकि पहली बार मेरी कुँवारी चूत में कोई इतनी मोटी चीज़ घुसी थी।

मगर मैडम इस सब से बेपरवाह मेरी चूत के आस पास अपनी जीभ से चाट कर, चूम कर मुझे मज़ा दे रही थी और डिल्डो को भी और अंदर और अंदर धकेले जा रही थी।
मुझे ऐसे लगा जैसे वो डिल्डो मेरे पेट में अंदर तक घुस आया हो।
मगर फिर भी यह काम मज़ेदार था।

मैंने भी मैडम के चूतड़ों पे हाथ फेरा, तो मैडम उठ कर मेरे ऊपर ही लेट गई, उनकी चिकनी गुलाबी चूत बिल्कुल मेरे मुँह के पास थी, दूसरी तरफ मैडम भी मेरी टाँगें पूरी तरह खोल कर डिल्डो से मेरी चूत को चोद रही थी, जैसे जैसे मैडम डिल्डो चला रही थी, मेरी हालत और खराब होती जा रही थी, मैं भी नीचे से अपनी कमर उठा उठा कर डिल्डो को अपने अंदर ले रही थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से मैडम की चूत को खोला और अपने हाथ की एक उंगली मैडम की चूत में घुसा दी।
मैडम बोली- एक उंगली नहीं बिच (कुतिया), पूरा हाथ डाल दे, या फिर ये पकड़, ये डाल!
कह कर मैडम ने एक डिल्डो मेरी तरफ फेंका।

मैंने डिल्डो उठाया और मैडम की चूत में घुसेड़ दिया, अब मैडम तो पहले से बहुत चुदी थी सो डिल्डो बड़े आराम से अंदर चला गया। मैंने भी डिल्डो को आगे पीछे चलना शुरू किया।
मैडम भी अपनी कमर हिला रही थी।
दोनों की दोनों पूरी मस्ती में थी।

मैडम बोली- इस लंड को निकाल कर मेरी गान्ड में डाल!
मैंने वैसा ही किया, थोड़ी सी मशक्कत के बाद डिल्डो मैडम की गान्ड में घुस गया।
जब मैं डिल्डो आगे पीछे करने लगी तो मैडम थोड़ा आ पीछे को सरकी और उन्होंने अपनी पानी से भीगी, गीली चूत मेरे मुँह से सटा दी।
बिना झिझक के मैंने उसकी चूत के होंठों को अपने होंठों में लिया और अपनी जीभ से उनकी चूत चाटने लगी।

डिल्डो से चुदाई के कारण मेरी हालत ऐसी हो रही थी कि अब अगर मुझसे कुछ भी करने के लिए कोई कहता तो मैं कुछ भी कर जाती। मैडम ने भी मेरी चूत का दाना अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, नीचे से रबर के लंड से चुदाई और ऊपर से जीभ से चटाई और वो भी पहली बार… मैं तो समझो मर ही गई, मेरा मज़ा आपे से बाहर शिखर पर पहुँच चुका था, मैंने अपनी कमर बहुत ज़ोर ज़ोर से उचकानी शुरू कर दी और मैडम की चूत को तो मैं अपने दाँतों से ही काट गई।

जब मेरी चूत में से रस की फुहारें टपक पड़ी।
मैडम को शायद थोड़ा दर्द हुआ मेरे काटने से मगर वो लगी रही, मैंने अपनी दोनों टाँगें भींच ली, बदन मेरा अकड़ गया, मगर मैडम ने अपना सर मेरी टाँगों में फंसा कर रखा और डिल्डो से लगातार मुझे चोदती रही।
मैं निढाल होकर नीचे लेट गई, मैडम ने डिल्डो चलाना बंद कर दिया।

मैडम उठी और मेरे बराबर मेरी तरफ मुँह करके लेट गई, उसने अपना हाथ मेरी टी शर्ट में डाला और मेरी ब्रा ऊपर उठा कर दोनों बूब्स ब्रा से बाहर निकाल लिए और बारी बारी से दोनों को सहलाया।
हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रही थी, मैडम ने अपना एक बूब मेरे मुँह में दिया और बोली- जानेमन तेरा तो हो गया, मेरा नहीं हुआ, थोड़ा मज़ा मैं भी ले लूँ।
मैंने उसका बूब चूसते हुये हाँ में सर हिला दिया।
मैडम ने मेरी टी शर्ट और ब्रा भी उतार दिये और मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया, फिर उठ कर जा कर सोफ़े पे बैठ गई।
‘अब एक कुतिया की तरह चल कर मेरे पास आ!’
मैं अपने चारों पाओं पे चलती हुई उसके पास गई, मैडम ने अपनी दोनों टांगें फैला कर सोफ़े की दोनों बाज़ूओं पे रख दी और अपनी दोनों हाथों से अपनी चूत को फैला कर बोली- अब इधर आ और चाट इसे!

 

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मैंने अपना मुँह मैडम की चूत से लगाया तो मैडम ने मेरा सर पकड़ कर कस कर अपनी चूत में घुसा दिया, मैं अपनी जीभ से चाटने लगी।
मैडम भी अपनी कमर हिला हिला कर चटवाने के मज़े ले रही थी, उसकी चूत से छूटने वाले पानी से मेरा सारा मुँह गीला हो गया था। थोड़ी देर में ही मैडम भी झड़ गई।
‘चाट कुतिया, चाट, साली मादर चोद खा जा मेरी चूत को, खा जा कुतिया, चाट इसे, चाट…’ कहती कहती मैडम फिसल कर सोफ़े से नीचे ही आ गिरी।

कुछ देर हम दोनों वैसे ही नंगी लेटी रही।
फिर मैडम ने मुझे उठाया, हम दोनों बाथरूम गई, और अपने आप को धोकर फ्रेश किया।
जब बाहर आई, तो मैडम ने अपने हाथों से मुझे टॉवल से पोंछा और खुद मुझे कपड़े पहनाए।
मैंने भी ऐसे ही किया।
दोनों ने कपड़े पहनने के बाद मैडम किचन से दोनों के लिए एक एक गिलास गरम दूध लाई।

अब वो मेरे लिए मैडम नहीं रही थी, मेरी एक रंडी दोस्त बन गई थी।
उसके बाद भी हमने बहुत बार किया।
जब मैडम के हसबैंड आए तो मैडम ने सारी बात मेरे सामने ही उनको बताई।

अंकल ने मुझसे पूछा- क्या तुम्हें लेस्बीयन सेक्स में मज़ा आया?
मैंने हाँ में सर हिलाया।
‘क्या मेरे साथ भी सेक्स करोगी?’ अंकल ने पूछा।
मैंने न में सर हिलाया।
‘ओके… पर फिर भी अगर कभी दिल करे या कोई ज़रूरत हो तो मुझे बताना! यह मेरी तरफ से तुम्हारे लिए गिफ्ट!’ कह कर अंकल ने वही काला रबर का डिल्डो मुझे दे दिया।
मैंने उसे ले कर अपने बैग में रख लिया। आज भी मैं वो डिल्डो इस्तेमाल करती हूँ तो मैडम के साथ वो सेक्सी लम्हें याद आ जाते हैं। – bhauja.com

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