Kamwali Bhabhi Ke Saath

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दोस्तों, मेरा नाम परिमल है और में दिल्ही का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र 28 साल है और हाईट 5.10 इंच है और मेरा साईज़ ७ इंच है और में दिखने में एकदम हैंडसम लगता हूँ और अब में आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए अपनी आज की कहानी की तरफ चलता हूँ।

यह मेरी आज की कहानी मेरी कामवाली बाई की है। उसकी उम्र कोई 30 साल के करीब है और वो शादीशुदा है, उसका नाम विनीता है और दिखने में बहुत ज्यादा सेक्सी है, उसका सावला रंग और उसके बूबू का साईज़ 36-26-38 है, लेकिन वो बिल्कुल हॉट दिखती थी। विनीता हमारे घर पर दो टाईम काम करने आती थी, एक सुबह और दूसरा शाम को और में हमेशा विनीता के जिस्म को देखकर उसे करने के बारे में सोचता रहता था, लेकिन मुझे कभी भी मौका ही नहीं मिलता था और वैसे विनीता बहुत कम बोलती थी, वो बस अपने कामो में लगी रहती और काम खत्म करके अपने घर पर चली जाती थी। फिर एक दिन हमारे पडोसी के घर पर एक प्रोग्राम था, और विनीता वहां पर भी काम किया करती थी। फिर एक दिन विनीता को वहां पर काम करते करते थोड़ी रात हो गई और मुझे उसे उसके घर पर छोड़कर आना पड़ा। मेरी कार घर के बाहर ही खड़ी हुई थी, लेकिन उसके बजाए फिर भी मैंने अंदर से अपनी बाईक को बाहर निकाल लिया और में उसे छोड़ने के लिए चला गया।
फिर जब विनीता मेरे कंधे पर हाथ रखकर बाईक पर चड़ी तो उसके बड़े बड़े बूब्स मेरी पीठ पर छूने लगे और में बाईक को धीरे धीरे ब्रेक मारता हुआ चला रहा था, लेकिन उसका घर 3 km ही था तो मुझे थोड़ा ही मज़ा लेने का मौका मिला और उस रात के बाद से मेरी विनीता से थोड़ी थोड़ी बात होनी शुरू हो गई और में अपनी बाईक पर बिठाकर लगातार 3-4 दिन तक उसे घर पर छोड़ने गया और उसके मज़े लेने लगा और उसके बाद से मैंने भी ध्यान दिया था कि जब भी में नहाकर बाथरूम से आता तो विनीता मुझे चुप चुपकर देख रही होती थी और में भी जब वो सफाई करती थी तो उसके मोटे मोटे बूबू को देखा करता था और जब वो देखती कि में उसके बूबू देख रहा हूँ तो वो और झुक झुककर सफाई किया करती थी, जिसकी वजह से मुझे उसके बूबू और भी ज्यादा गहराई तक नजर आते और में मन ही मन बहुत खुश हुआ करता था और अब में सिर्फ़ उस दिन का बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहा था कि घर पर जब कोई नहीं होगा तो में अपना शिकार पकड़ लूँगा, क्योंकि वो भी शायद अब मुझसे यही चाहती थी, वो हमेशा किसी ना किसी बहाने से मुझे अपने बूबू के दर्शन दिया करती थी। फिर आखिरकार बहुत इंतजार करने के बाद वो दिन आ ही गया, जब उस दिन घर पर सुबह सुबह कोई भी नहीं था, मम्मी पापा किसी काम से बाहर गये थे और वो सुबह सुबह ही चले गये और उनको शाम को वापस आना था। फिर रोज की तरह विनीता घर पर अपना काम करने के लिए आई और फिर वो सफाई कर रही थी। फिर में बेडरूम में जाकर बेड पर बैठ गया और में उसके बूब्स देख रहा था और वो मुझे धीरे धीरे मदहोश करने लगी थे। तभी उसने भी मुझे देख लिया, लेकिन फिर भी इस बार में उसके बूबू पर नजरे टिकाए हुए था, मुझे उसके बूबू देखने में बहुत मज़ा आ रहा था, क्योंकि हमे किसी का डर नहीं था और वो मुझे तिरछी नजरों से देखकर मुस्कुरा रही थी और मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी और फिर वो भी धीरे धीरे अपना काम करते हुए बेडरूम से बाहर चली गयी और अब वो पूरी सफाई कर चुकी थी और अपने घर पर जाने वाली थी।

फिर उसने मुझसे कहा कि में अब जा रही हूँ और शाम को आ जाउंगी। मैंने तभी उसको बोला कि विनीता एक मिनट अंदर आओ। वो चुपचाप अंदर आ गई, लेकिन वो बहुत शरमा रही थी और फिर वो बोली कि हाँ जी कहिए क्या काम है? तो मैंने उससे बोला कि तुम पहले यहाँ पर बैठो और वो चुपचाप बैठ गयी। मैंने उससे कहा कि क्या तुम्हे पता है कि तुम कितनी सुंदर हो? तो वो शरमाने लगी और उसने अपनी नजरे एकदम झुका ली और फिर मैंने एकदम सही मौका देखकर उसका एक हाथ पकड़ लिया तो वो नर्वस होने लगी और बोली कि आप यह क्या कर रहे हो? तो मैंने बोला कि में तुम्हे हाथ लगाकर तुम्हे छूकर देख रहा हूँ और फिर में अपना हाथ उसकी कमर पर लगाने लगा, लेकिन वो कुछ नहीं बोली और बीच में अपनी दोनों आखें बंद करके मुहं घुमाकर मुझसे बोल रही थी कि बस करो रहने दो, कोई आ जाएगा, छोड़ दो मुझे कोई आ जाएगा तो हमे देख लेगा। फिर मैंने जैसे ही उसकी नाभि पर हाथ रखा तो उसने सिसकियाँ लेनी शुरू कर दी और उसने आखें बंद करके मुहं ऊपर की तरफ कर लिया।

फिर मैंने उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया और उसने भी मेरा साथ देते हुए मुझे हग करना शुरू किया, जिससे मुझे उसको बेड पर लेटाने में थोड़ी आसानी हो गयी और मैंने उसकी गर्दन पर किस करते हुए उसके होंठो पर किस किया और फिर जैसे ही उसने भी जमकर मेरा साथ दिया तो वैसे ही मैंने उसके मोटे मोटे बूबू को दबाने शुरू कर दिया और विनीता भी मुझे पागलों की तरह चूमने लगी। फिर उसने मुझे इस तरह ज़ोर से चूमा कि वो मेरी पूरी जीभ अपने मुहं में ले गयी और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी। फिर मैंने चूसते चूसते विनीता को पूरा नंगा कर दिया था और वो भी मेरे कपड़े उतार रही थी। फिर विनीता ने मेरी अंडरवियर को उतार दिया और मेरे लुलु को देखकर उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गयी और वो मेरे लुलु को मुहं में लेकर चूसने लगी। वो समय मेरे लिए किसी जन्नत से कम नहीं था और वो मेरे लुलु को 10 मिनट तक लगातार चूसती रही और अब मैंने उसे 69 की पोज़िशन में कर दिया। फिर मैंने देखा कि उसकी भुर बिल्कुल साफ थी और में भी उसकी भुर को पागलों की तरह ज़ोर ज़ोर से चाटने चूसने लगा तो वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी और अपनी गांड को उठा उठाकर मुझे अपनी भुर में घुसाकर चटवाने लगी और कहने लगी कि औऊऊऊउ हाँ और ज़ोर से अह्ह्हह्ह्ह्ह हाँ और ज़ोर से। करीब दस मिनट तक लगतार उसकी चूत चूसने के बाद वो और भी तड़पने और कहने लगी, प्लीज और ज़ोर से चूसो।
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फिर में समझ गया कि अब यह झड़ने वाली है, में उसे और भी ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और करीब दो मिनट के बाद में वो झड़ गयी और उसने मुझे ज़ोर से गले से लगा लिया। अब मैंने उसे डोगी स्टाईल में बिठा दिया और अपने लुलु को उसकी भुर के मुहं पर रखा और हल्का सा धक्का देकर अंदर किया और फिर में दम लगाने लगा। और वो सिसकियाँ भरने लगी और अब मैंने एक जोरदार झटका मारा तो एकदम उसकी बहुत ज़ोर से चीख निकल गयी और वो बोली कि प्लीज थोड़ा आईईईईईईइ धीरे करो, अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह। फिर मैंने एक और झटका मारा तो मेरा पूरा का पूरा अंदर चला गया और उसके मुहं से अह्ह्हहमम्म आईईईईईई जैसी उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ आवाज़े निकलने लगी और अब में उसकी कमर को पकड़कर ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर अंदर बाहर करने लगा और उसे भी मज़ा आ रहा था। फिर 30 मिनट तक लगातार करने के बाद हम दोनों झड़ गए और उसने मुझे अपनी बाहों में कसकर भर लिया। फिर कुछ देर बाद हम उठे और फिर विनीता को दूसरी जगह काम पर जाना था तो वो चली गई, लेकिन जब वो शाम को वापस आई तो किचन में बर्तन साफ कर रही थी। फिर में उसे पीछे से पकड़कर उसके कान को चूसने लगा और उसकी गांड पर अपना लुलु घुमाने लगा, वो फिर से मदहोश होने लगी। फिर में उसे हमारे ड्राइंगरूम में ले गया और मैंने उसके कपड़ो को उतारकर बूबू को चूसना शुरू कर दिए और मैंने उसके बूबू चूसते चूसते उसके बाकी के कपड़े भी खोलकर उसे पूरा नंगा कर दिया और उसे सोफे पर लेटा दिया और फिर कुछ देर तक उसकी भुर चाटने लगा, वो मेरे सर को अपने अंदर दबाने लगी और सिसकियाँ लेने लगी, लेकिन कुछ देर बाद वो झड़ गई और में उसका पूरा रस पी गया।

फिर कुछ देर बाद मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर कर रखकर लुलु को भुर पर रखकर धक्का दिया और उसकी चुदाई करने लगा, वो ज़ोर ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी और अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह धीरे करो, प्लीज थोड़ा धीरे करो अह्ह्ह्हह, लेकिन में उसकी सुने बिना धक्के देता रहा। करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद में झड़ गया और मैंने अपना पानी उसकी भुर में डाल दिया। फिर वो एकदम निढाल होकर पड़ी रही। दोस्तों उस टाईम हमने दो बार मज़ा लिया और मैंने उसको खुश कर दिया, लेकिन उसके बाद जब भी मौका मिलता तो मैंने उसे कई बार किया और अब वो भी मेरे लुलु को हर कभी मौका देखकर पकड़कर चूसने लगती है और में कई बार उसके मुहं में झड़ चुका हूँ ।।

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