दोस्ती गिरी की असली मजा दोस्त की बीवी को चोदने में – Dosti Giri Ki Asli Maja Dost Ki Biwi Ko Chodke

dost ki biwi ko choda - hindi sex story
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एक ऐसी दोस्ती की कहानी हे जो की दोस्त की न होते हुए उसकी बीवी की हर जरुरत पूरी करती हे | ऐसी टेसी नन्ही अगर छूट पे खुजली आये और गरम हो जाए तो दोस्त की बीवी की छूट पे लण्ड डाल के भी उसको चैन देता हे | तो आजकी इसी मजेदार कहानी का मजा लीजिये हमारे साथ भाउज.कम पर..

प्रिय पाठको नमस्कार !

दोस्तों मेरा नाम शुभम है, मेरी उम्र 28 साल है और मैं गोरखपुर का रहने वाला हूँ।

अभी दिल्ली में नौकरी करता हूँ और अपनी बीवी के साथ रहता हूँ। मैं शुरू से सेक्स का आदि हूँ और सेक्स करने में मुझे बहुत आनन्द आता है।

इस बार मैंने भी सोचा कि क्यों न मैं भी अपनी कहानी को आप सब लोगों के सामने पेश करूँ।

बात अभी दो तीन साल पहले की है जब मेरी शादी हुई, मैं अपनी बीवी के साथ दिल्ली आ गया। दिल्ली में मैं और मेरा दोस्त अजय अगल बगल में ही किराये के कमरे में रहते हैं। उसकी अभी तक शादी नहीं हुई है। मेरे दिल्ली आने के बाद मैंने अपनी बीवी से उसको मिलवाया। पहले तो वो मेरी बीवी से बात करने में शर्माता था लेकिन धीरे धीरे खुल गया तो मजाक भी करने लगा।

शादी के चार पांच महीने बाद अचानक मुझे ऑफिस के काम से चंडीगढ़ जाना था, मैं सुबह तैयार हो गया। मेरा दोस्त भी ऑफिस के लिए तैयार हो गया था आजकल वो हमारे यहाँ ही नाश्ता करता था।

मैंने अपने दोस्त को बोला कि मैं देर रात तक आऊँगा, तो अगर तुम्हारी भाभी को किसी चीज कि जरुरत हो तो ला देना !

इतना कह कर मैं चला गया और अपनी बीवी को भी बोल दिया कि अगर किसी चीज की जरुरत हो तो अजय को बोल देना।

अभी मैं कश्मीरी गेट पहुँचा ही था कि ऑफिस से बॉस का फ़ोन आ गया- शुभम, तुम चंडीगढ़ मत जाओ, जिस काम के लिए जाना था वो आर्डर कैंसल हो गया है।

मैंने अपने बॉस को बोला- ठीक है सर, मैं आज ऑफिस नहीं आऊँगा।

इतना कह कर मैंने फ़ोन रख दिया।

मैंने सोचा घर पहुँच कर अचानक बीवी को सरप्राइज दूँगा। अभी मैं अपने कमरे के नीचे पहुँचा ही था कि देखा अजय क़ी बाइक तो नीचे ही खड़ी है, मैंने सोचा यह भी ऑफिस से आ गया क्या?

ऊपर जाकर देखा तो उसके कमरे पर ताला लगा हुआ था, मैंने अपने कमरे पर जाकर दरवाजे पर खटखटाया, अन्दर से किसी क़ी आवाज नहीं आई।

मैंने फिर से खटखटाया तो मेरी बीवी ने अन्दर से पूछा- कौन है?

मैंने अपनी बीवी से दरवाजा खोलने के लिए कहा, मेरी बीवी ने दो मिनट बाद दरवाजा खोला तो मैं अपनी बीवी और अपने दोस्त को अन्दर देखकर दंग रह गया।

मैंने एक नजर अपनी बीवी को देखा तन पर कपड़े ढकने का प्रयास किया गया था और अजय भीगी बिल्ली क़ी तरह मेरे सामने खड़ा था । जैसे ही मैं अन्दर गया, वो वहाँ से निकल लिया।

अन्दर आकर मैं बैठ गया और अपनी बीवी से गंभीर और जोरदार लहजे में पूछा- क्या हो रहा था?

मेरी बीवी क़ी आवाज नहीं निकल रही थी, मैंने उठकर दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया और अपनी बीवी से बोला- बता, यह चुदाई का खेल कब से चल रहा है?

वो चुपके से बोली- पिछले महीने से !

मैंने उसको बोला- तभी मैं सोचता था कि आजकल अजय ऑफिस से इतनी छुट्टियाँ क्यों करता है।

मैं चुपचाप लेट गया। थोड़ी देर में मेरी बीवी संभल गई तो मेरे हाथ पाँव जोड़ने लगी- मुझे माफ़ कर दो, मैं आज के बाद जिन्दगी में ऐसी गलती नहीं करुँगी !

जोर जोर से रोने लगी तो मैंने उसको चुप रहने के लिए कहा।

शाम को मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं सोचने लगा क्या करूँ? पहले तो अजय को बुलाकर कहीं घुमने या फिर पार्टी करने निकल जाते थे।

खैर मैं अकेला ही बाज़ार निकल पड़ा, वहाँ से मैंने एक इंग्लिश दारु क़ी बोतल ली और वापस कमरे पर आ गया। अपनी बीवी को मैंने कुछ चटपटा बनाने के लिए कहा।

उसकी पहले से ही गांड फटी पड़ी थी तो वो एकदम शुरू हो गई। मैंने दो तीन पैग पिए उसके बाद अपनी बीवी को बुलाया।

अब मुझे थोड़ा नशा हो गया था, मैंने अपनी बीवी को कहा- कपड़े उतार !

वो थोड़ी हिचकिचाई लेकिन कपड़े उतारने लगी। मैंने उसको सारे कपड़े उतारने के लिए कहा, वो बिल्कुल नंगी हो गई। अब मैं भी पूरा नंगा हो गया और एक पैग बनाकर अपनी बीवी क़ी तरफ कर दिया।

पहले वो हिचकिचाई, मैंने बोला दूसरों के लण्ड लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं और मैं प्यार से एक पैग दे रहा हूँ तो मना कर रही है?

तो उसने झट से ग्लास पकड़ लिया और होठों से लगाकर खाली कर दिया। उसने पहली बार पिया तो उसको कड़वी लगी, मैंने कहा- कुछ खा ले !

तो उसने मना कर दिया !

मैंने उससे पूछा- अजय का लंड कैसा है? लम्बा या छोटा?

वो कुछ नहीं बोली।

मैंने सख्त लहजे में बोला- मुझे मेरी हर बात का जवाब चाहिए !

तो बोली- लम्बा !

मैंने फिर पूछा- तेरी चूत में अन्दर तक मज़ा आया या नहीं?

तो कुछ नहीं बोली।

खैर मैंने उसे पास बुलाया, अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और बोला- इसे चूसती रह !

तो वो चूसने लगी।

मैंने कहा कि शादी से पहले कितनों से चूत मरवाई है?

तो वो रोने लगी।

मैंने कहा- सच बताना !

तो बोली- दो लड़कों से मरवाई है। एक ने तो जबरदस्ती जब मैं छोटी थी तो ठोक दिया था और एक से शादी से कुछ दिन पहले ही मरवाई थी।

मैंने कहा- फ़ोन उठा और अजय को फ़ोन पर यहाँ आने के लिए बोल !

तो आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगी।

मैंने फ़ोन लगाकर उसके हाथ में दे दिया, उसने अजय को बुलाया और कहा- जरूरी काम है।

15 मिनट बाद अजय ने बाहर से दरवाजा खटखटाया तो मैंने अपनी बीवी से कहा- हल्के हल्के से दरवाजा खोलकर फिर से बंद कर देना।

उसने वैसा ही किया।

अन्दर आते ही वो चौंक कर मुझे और मेरी बीवी को देखने लगा। मैंने उससे बैठने के लिए बोला। वो बैठ गया।

मैंने कहा- साले, अगर तुझे मेरी बीवी पसंद थी तो मेरे से बोला होता !

अबकी बार वो दोनों चौंक गए, मैं हँसने लगा तो वो थोड़ा नोर्मल हो गए !

मैंने कहा- साले, अगर मेरी परमिशन लेकर मारता तो मज़ा कुछ और होता ! चल अच्छा ले पी !

और मैंने फटाफट तीन पैग बनाये, एक अपनी बीवी की तरफ कर दिया और एक अजय को थमा दिया। अब अजय भी नोर्मल हो गया था उसने झट से पैग खींचा और एक और बना लिया। मैंने सिगरेट जलाई।

मेरी बीवी भी अब नशे में हो चुकी थी, मैंने अजय से कहा- साले, जब तेरी बीवी आएगी तो मुझे भी उसकी चूत चाहिए !

तो वो हंस कर बोला- क्यों नहीं भाई, मिल बाँट कर खायेंगे !

अब मेरी बीवी भी खुल गई थी।

मैंने अजय से कपड़े खोलने के लिए कहा। अब हम तीनों ही नंगे हो चुके थे और तीनों की आँखों में नशा तैर रहा था।

मैंने अपनी बीवी से कहा- अजय का लण्ड चूस !

तो उसने झट से अजय का लंड मुँह में ले लिया। तब तक पीछे से मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी। वो कसमसाने लगी।

मैंने कहा- बहुत रंगरलियाँ मनाई तुमने ! अब रोज ऐसे ही चुदाई होगी !

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अजय के चेहरे की रौनक वापस आ गई थी। मैंने अपनी बीवी से कहा- कुतिया की तरह झुक जा !

तो वो झुक गई तो मैंने अजय से उसको चोदने के लिए कहा। तो अजय ने अपना लण्ड झट से उसकी चूत में डाल दिया। तब तक मैं आगे आ गया था, मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। अब पीछे से अजय उसको चोद रहा था और आगे से वो मेरा लंड चूस रही थी !

थोड़ी देर बाद मैंने अजय से कहा- तू नीचे लेट जा !

और उसके ऊपर मैंने अपनी बीवी को लिटा दिया अब अजय ने अपना लंड मेरी बीवी की चूत में डाल दिया और ऊपर से उसकी गांड खुली झलक रही थी। बस फिर क्या था, मैंने थोड़ा सा तेल अपने लंड पर मला और अपनी बीवी की गांड के छेद पर लंड रख कर हल्का सा धक्का दिया तो मेरी बीवी दर्द से छटपटा गई लेकिन मैं कहाँ छोड़ने वाला था, मैंने उसको कस कर पकड़ा और एक जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड उसकी गांड की दीवारों को चीरता हुआ अन्दर समां गया।

सचमुच आज सेक्स करने में बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर हम दोनों ने बारी बारी से चूत और गांड की चुदाई का मज़ा लिया और अभी भी ले ही रहे हैं।

अब अजय रात को मेरे ही कमरे में सोता है और मेरी बीवी की चुदाई मेरे सामने ही करता है। उसने वादा किया है कि जब उसकी शादी होगी तो वो अपनी बीवी की भी दिलवाएगा !

हमारी दोस्ती पहले से ज्यादा मज़बूत हो गई है और हम जीवन का भरपूर आनन्द ले रहे हैं।

मेरी कहानी बिलकुल सच्ची है अपने विचार जरूर भेजिएगा।

आपका अपना शुभम !!

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