Antarvasna अन्तर्वासना उमा की चूत मालिश

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हमारे सभी पाठकों को मेरा सादर नमन।
आप सबके अपार प्यार और पत्रों के द्वारा भेजा गया प्रेम मुझे अतिउत्साह पूर्वक लिखने को प्रेरित करता है।
लेकिन मैं आप सबसे माफ़ी भी मांगूगा क्योंकि मैं किसी बात को बहुत अच्छे से व्याख्या करता हुआ नहीं लिख पाता हूँ।
मैं वही लिख देता हूँ जैसा मैंने किया है।
मेरी कोशिश होगी कि मैं उसको और अच्छे से ढंग से वर्णन करते हुए लिखूँ।
अब आपके सामने मैं अपनी नई कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ।
इसी 25 नवम्बर को मुझे एक महिला का ईमेल मिला, जिसमें उन्होंने मुझे कानपुर बुलाया था।
उनको मैंने ईमेल से बात करने के बाद स्काइप पर कैमरा के द्वारा बात की..
उसके बाद हमारी मीटिंग कानपुर में ही उनके घर पर तय हुई।
उन्होंने मुझे केवल शारीरक मसाज करने के लिए बुलाया था जिसमें मुझे उनके साथ किसी भी प्रकार से शारीरक सम्बन्ध नहीं बनाना था।
उन्होंने मुझे इरोटिक मसाज के लिए बुलाया था।
मैं दोपहर को उनके पास आ गया।
वह बोली- आप अगर शाम को ये काम करो तो अच्छा है.. अभी जरा मुझे काम है।
मुझे क्या था.. मैं तो पूरे दिन के लिए वहीं के लिए आया था। उसने घर पर अपना काम निबटाया.. मुझे खाना खिलाया.. इस सब में शाम हो गई थी।
मैं बोला- मेरा काम कब शुरू होना है?
बोली- मैंने आज सारा काम पूरा खत्म कर लिया था.. लेकिन कुछ जरूरी काम आ गया है, जिसकी वजह से देर हो गई।
फिर शाम को 7 बजे और वह खाली हुई बोली- हाँ.. अब कोई दिक्कत नहीं है.. आप अपना काम बिना किसी के संकोच के कर सकते हैं।
वो मुझे अपने कमरे में ले गई।
वहाँ उसने मुझे पूछा- कैसे शुरू करना है?
मैं बोला- आप नीचे कालीन पर एक मोटा चादर डाल दें.. उस पर लेट जाएं। तेल आपके पास है ही।
वो अपना गाऊन पहन कर आई और लेट गई। मैं बोला- गाउन पर कैसे लगाऊँ.. आप इसको उतार दें।
वो गाउन उतार कर केवल चड्डी में लेट गई। ब्रा उसने पहनी नहीं थी।
मैं उससे बोला- आप पीठ के बल लेट जाएं।
उमा के लेट जाने के बाद मैंने उसकी पीठ पर हल्का गुनगुना तेल डाला और उसकी पीठ पर फैला कर मालिश करने लगा।
उसने कंधे और पुट्ठों पर मुझसे देर तक रगड़वाया उसने हाथ पर हल्का ही लिया।
फिर मैं उसकी कमर पर आया.. कमर को रगड़ कर मैं उसके गर्दन तक हाथ लगा रहा था।
उसने चड्डी पहनी हुई थी.. इसलिए मैंने उस हिस्से को बचा कर मालिश की।
फिर उसकी जांघ पर मालिश की।
उसको जाँघों पर मालिश करवाने में मजा आ रहा था।
उमा को मैंने उसके पैर की ऊँगली तक मालिश दी.. फिर उसको पलटने को बोला, वह पलट गई।
उनसे पूछा- आपके मम्मों पर मालिश करना है कि नहीं?
उसने कहा- सब जगह करना है।
इस पर मैं बोला- फिर आप फिर अपनी चड्डी उतार दें.. जिससे उधर भी मालिश करने में आसानी होगी और आपको बार-बार उठना न पड़े।
वह बोली- तुम ही नीचे से खींच दो।
मैंने उसकी चड्डी उतार दी।
क्या औरत थी.. बिल्कुल साफ़.. चिकनी.. झांट के बाल साफ़ करके बैठी थी और बुर तो ऐसी खिली हुई था जैसे की पावरोटी.. उसकी पंखुड़ी काली थीं.. लेकिन उसका किनारा साफ़ था जरा गहरे रंग का था।
मैंने उसके मम्मों पर तेल डाल कर मालिश करना शुरू किया और काफी देर तक उसने मुझसे मालिश करवाई।
उसकी पसलियाँ भी मालिश से तरोताज़ा होती गईं।
अब उसने मुझसे बोला- जब किसी औरत को तुम मालिश करते हो.. तुमको लगता नहीं कि तुम उसको चोद दो?
उसके मुँह से चुदाई से सम्बंधित शब्द मुझे बता रहा था कि अब ये गरम होने लगी है।
मैं बोला- नहीं मैडम.. मैं इतना काम कर चुका हूँ कि अब मुझे जरा भी हड़बड़ाहट नहीं होती और जितना कहा जाता है.. मैं वहीं तक सीमित रहता हूँ.. ऐसा नहीं कि उत्तेजना नहीं होती.. हाँ.. उत्तेजित हो जाता हूँ लेकिन व्याकुलता भी नहीं होती।
मैं तो अपनी चड्डी में ही था।
उसके मम्मे गोल-गोल थे और कसे हुए भी थे।
वो 35 साल की थी जरूर.. लेकिन उसके जिस्म में ढलकाव नहीं था।
उसकी चूचियाँ भरी हुई थीं और रगड़ पाने से वे और सख्त होती चली गईं।
उसको मम्मों को रगड़वाने में मजा आ रहा था।
जब मैं रगड़ रहा था तो मैं उसकी तरफ देख रहा था.. उसके पैर कसमसा रहे थे।
उसका इस तरह करने से मुझे पता लग रहा था कि यह गरम हो गई है.. लेकिन उससे मुझे चुदाई नहीं करना है.. यह बात मैं जानता था और उसने जो कहा है.. वही करना है।
उसके मम्मों की अच्छी मालिश से वह पूरी तरह से चुदवाने के मूड में आ चुकी थी।
बोली- आलोक अब जरा नीचे बुर की मालिश आज अच्छे से करना।
उसको मैंने तेल लेकर उसकी बुर को गीला कर दिया।
उसकी बुर पहले से ही गीली थी बुर में से पानी रिस रहा था…
ऊपर से तेल की चिकनाहट से उधर थोड़ा चिपचिपा हो गया लेकिन ठीक ही था।
उसको रगड़ थोड़ी अच्छी मिल रही थी।
उसकी बुर के बगल में मालिश करने से उसकी थकान कम हो गई, जिससे वह आराम से पैर खोल कर लेट गई।
अब क्या बचा था.. मेरे सामने उसकी बुर तेल और उसके कामरस से चमचमा रही थी।
उसकी चूत के होंठों को लेकर मैंने अपनी दोनों ऊँगली के बीच दबा कर धीरे से मसलना शुरू किया।
यह उसके लिए बिजली का झटका लगने जैसा था।
मेरी यह मालिश की ये अदा उसको उत्तेजित कर रही थी।
उसके मुँह और कान लाल हो गए थे, उसने पैर और खोल दिए थे, उसकी फांकें अच्छे से गीली हो रही थी।
फिर मैंने उसकी फांकें खोल कर उसका दाना छुआ।
वह उछल पड़ी और उसने अपनी कमर हिला दी।
मैं समझ रहा था कि अगर इस वक्त कोई उमा को ठोक दे.. उसको बुरा नहीं लगेगा लेकिन मुझे अपनी हद तक रहना था।
मैं भी उत्तेजित तो था लेकिन रुका हुआ था।
उसका दाना जब मैंने खोला तो उसकी गुलाबी फ़ुद्दी मेरे सामने नाश्ते की प्लेट तरह खुल गई।
उसका दाना जब कुछ ही मिनट रगड़ने से उसका दम फूलने लगा।
वह अपने हाथ से ही अपनी चूची को मसलने लगी थी।
उसका दाना मसलने की वजह से वह अपनी कमर उचका रही थी।
फिर मैंने उसकी बुर के छेद में धीरे से ऊँगली डाल दी और उसके अन्दर की दीवार को सहलाना शुरू किया तो वह खुद ही कमर उछाल कर कोशिश करने लगी कि मैं उसकी बुर के अन्दर तक ऊँगली डाल कर मसलूँ।
वह लगातार अपना पानी छोड़ रही थी जिससे मेरा हाथ पूरा हथेली तक हाथ गीला हो गया था।
उसने बोला- अच्छा अब मेरी बुर को अपने जुबान से चाट कर मालिश कर दो।
मैंने उसकी बुर को अपने रुमाल से पोंछा उस पर लगा तेल पौंछ कर साफ़ किया और फिर मैंने खुद को घुटने के बल करके उसकी चूत पर अपना मुँह सटा दिया और अपनी जीभ उसकी बुर के अन्दर डाल कर चाटने लगा।
उमा ने भी अपने हाथ से पूरा साथ दिया उसने अपनी बुर को अपनी ऊँगली से खींच कर खोल रखा था और मैं उसकी बुर को जीभ से चाट रहा था..
साथ में अपनी ऊँगली से उसके भग्नासे को हिला रहा था।
जिससे उसको पूरा उत्तेजना मिल रही थी और वो कोशिश यह कर रही थी कि मेरी जीभ उसके भग्नासे को खूब चाटे।
उसके लिए खुद वह अपना चूत के होंठों को खींच कर खोल रही थी और उसकी कोशिश रंग लाई और उसका भगनासा सामने दिखने लगा। मेरी जुबान उस तक पहुँच गई।
मेरा मुँह.. पूरी नाक.. उसके छोड़े हुए पानी से गीले हो गए थे।
उसकी बुर की आग से वो बिल्कुल पागल हो गई थी।
उसने उछल-उछल कर अपना पानी गिराना शुरू कर दिया और इतना तेज़ गिराया की मेरा मुँह उसको चाटने की बजाए पी रहा था।
मेरा मुँह एक तरह से भर गया था।
उसको चूसने के बाद उमा पूरी निढाल हो गई थी।
उसने थक कर अपने को अलग कर लिया और मुझसे बोला कि मैं उसके ऊपर एक कंबल डाल दूँ।
मैंने उसके ऊपर कंबल डाल दिया।
वह लेटते ही सो गई.. मैं वहीं सोफे पर बैठ गया और मैं भी तकरीबन सो गया था।
उस वक्त रात के 9 बजे थे.. लगभग दस बजे उमा जगी.. तब उसने मुझे सोफे पर सोते देख कर मुझे जगाया और बोला- चलो डिनर कर लें।
उसने खाना लगा दिया.. हम दोनों ने खाना खाया।
अब रात को 11 बज गए.. उसने मुझे अपने कमरे से लगे कमरे में ही सैट किया और मैं सुबह 9 बजे उमा से विदा ली।
मैं वहाँ से निकल गया।
यह छोटी कहानी आप सब को कैसी लगी बताइएगा जरूर!

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