मोबाइल सर्विस सेंटर पर (Mobile Service Centre Per)

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मेरा नाम समीर है, उम्र छब्बीस साल और में उज्जैन का रहने वाला हूँ। मैं एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मैनेजर हूँ जो मोबाइल फोन की सर्विस देती है। में कभी कभी bhauja .com  पर कहानी पढ़ता हूँ ।
अभी कंपनी ने मुझे ट्रान्सफर कर के रायपुर भेज दिया है।

यह कहानी तब की है जब मैं इस कंपनी में उज्जैन के ही एक सर्विस सेण्टर पर टेक्निशियन का काम करता था और लोगों के मोबाइल फोन सुधारा करता था।
हर जवान लड़के की तरह मैं भी किसी अच्छी लड़की को चोदने की फिराक में था।
हमारे सर्विस सेण्टर पर कभी कभी लड़कियाँ भी अपना मोबाइल ठीक करवाने के लिए आया करती थी जिनको देखते ही मुँह से लार टपकने लगती थी।
मेरी एक आदत थी कि जब भी किसी लड़की का फ़ोन रिपेयर करके देता था, उसका सारा डाटा मिटाने के बाद अपना मोबाइल नंबर उसकी फ़ोन बुक में कस्टमर केयर के नाम से स्टोर कर देता था।
एक बार एक लड़की जिसका नाम रीना था, अपना मोबाइल लेकर सर्विस सेंटर पर आई।
जब मैंने नज़र उठा कर उसको देखा तो देखता ही रह गया। जी तो कर रहा था कि उसको अभी नंगा करके चोद दूँ लेकिन किसी तरह मैंने अपने आप पर काबू किया और उसके फ़ोन को चेक किया तो पाया कि मोबाइल पूरी तरह बंद है और उसमें पानी लगा हुआ था।
पूछने पर पता चला कि उसके हाथ से मोबाइल दूध में गिर गया था।
मैंने रीना को बताया कि कंपनी की पालिसी के हिसाब से यह वारंटी में रिपेयर नहीं होगा और इसको ठीक करवाने के लिए आपको काफी पैसा लगेगा, शायद इतने में तो आप नया मोबाइल खरीद सकती हैं।
उसने मुझसे रिक्वेस्ट किया- आप कुछ कीजिये, मैं इतना खर्चा नहीं कर सकती।
मैंने मन में सोचा कि मैं तो सब कर सकता हूँ लेकिन तू मेरे लिए क्या करेगी?
खैर मैंने रीना को कहा- आप अपना मोबाइल यहाँ छोड़ दीजिये, मैं देखता हूँ अगर कुछ हो सका तो।
उसने मेरी बात मान कर मोबाइल सर्विस सेंटर में छोड़ दिया और चली गई।
अगले दिन रीना का फ़ोन आया और उसने मुझसे मोबाइल के बारे में पूछा।
मैंने कहा- आप मुझे शाम तक कॉल कीजिये, मैंने अपनी कंपनी से बात की है, अभी उनका जवाब आना बाकी है।
उसके बाद उसने उस दिन कॉल नहीं किया, अगले दिन मैं उसके कॉल का इंतज़ार कर रहा था और अचानक उसका कॉल आ भी गया।
मैंने रीना को बताया कि कंपनी स्पेशल केस में आपका मोबाइल बिना किसी चार्ज लिए रिपेयर करके दे देगी लेकिन उसके लिए थोड़ा समय लगेगा।
यह सुनकर वो बहुत खुश हुई और मुझे थैंक्स कहने लगी।
मैंने कहा- जब आपका सेट रेडी हो जायेगा, मैं आपको कॉल करके बता दूँगा।
यह बोल कर मैंने फ़ोन रख दिया।
तीन दिन बाद मैंने फिर से रीना को कॉल करके बताया- आपका मोबाइल ठीक हो गया है, आप उसको ले जा सकती हैं।
वह उसी दिन अपना मोबाइल लेकर चली गई। मैंने उसकी भी फ़ोन बुक में अपना नंबर स्टोर कर दिया था।
कुछ दिन यूँ ही बीत गए, फिर एक दिन मैंने उसके नंबर पर कॉल किया उसने मुझे पहचाना नहीं और मेरा परिचय पूछने लगी।
मैंने कहा- मुझे आप ही ने तो कुछ देर पहले मिस कॉल किया था, इसिलए मैंने आपको कॉल किया।
उसके मना करने पर मैंने झूठमूठ ही उससे पूछा- आप कौन हैं और कहाँ से बात कर रही हैं?
जब उसने अपने बारे में बताया तो मैंने भी अपनी पहचान बताते हुए कहा- आपके मोबाइल में मेरा नंबर सेव्ड है, और सकता है आपने नहीं तो किसी और ने गलती से कॉल किया होगा।
फिर उससे उसके मोबाइल के बारे में पूछने लगा। उस दिन रीना से बात करके लगा कि वो भी मुझसे बात करने में दिलचस्पी ले रही है।
उस दिन हमने लगभग 20 मिनट इधर उधर की बात की, तभी उसने बताया कि वो यहाँ पढ़ाई के लिए आई है और होस्टल में रहती है।उस दिन के बाद हम रोज़ एक दूसरे से मोबाइल पर बातें और मैसेज़ करने लगे।
एक दिन अचानक दोपहर के वक्त रीना का कॉल आया और उसने मुझे बताया कि वो अपने कॉलेज ग्राउंड पर खेल की प्रेक्टिस कर रही है, 30 मिनट का ब्रेक मिला है और भूख भी तेज़ लगी है लेकिन हॉस्टल कॉलेज से बहुत दूर है, वहाँ नहीं जा सकती, क्या मैं उसके कॉलेज आ सकता हूँ?
मैंने कहा- तुम 10 मिनट रुको, मैं पहुँच रहा हूँ।
वहाँ जाकर मैंने उसको अपनी बाइक पर बैठाया और नजदीक ही एक रेस्तराँ में जाकर हम दोनों ने नाश्ता किया।
तब वो मुझसे बोली- मुझे तुमसे और भी बहुत सी बातें करनी है लेकिन यहाँ नहीं ! तुम मुझे कहीं और मिल सकते हो?
मैंने थोड़ा सोचने के बाद उसको कहा- यह तो बड़ा मुश्किल है, तुम शाम को हॉस्टल छोड़ नहीं सकती और मैं दिन में ड्यूटी पर होता हूँ।
अचानक ही मेरे दिमाग में एक ख्याल आया कि क्यों ना इसको ऑफिस में ही बुला लूँ और मैंने उसको कहा- तुम सुबह साढ़े सात बजे मेरे ऑफिस में आ जाओ, उस वक्त वहाँ कोई नहीं होगा, सभी लोग साढ़े नौ तक आते हैं।
वो भी राजी हो गई।
बताये वक्त के हिसाब से वो अगले दिन मेरे ऑफिस आई, अन्दर आने के बाद मैंने मेन गेट को अन्दर से लोक किया और विजिटर्स सोफा पर बैठ कर एक दूसरे से बात करने लगे।
सर्दी के दिन होने की वजह से सुबह सुबह उसको ठंड लग रही थी, इसी लिए वो स्वेटर पहन कर आई थी, फिर भी कांप रही थी।
बात करते हुए ही मैंने उसको अपने करीब खींच लिया और उसके गले में हाथ डाल कर बतियाने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उसके दूद्दू पर रख दिया, वो थोड़ी झिझकी लेकिन मैंने एक ही झटके में उसको अपनी गोद में गिरा लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
हमारा यह चुंबन करीब 15 मिनट तक चला जिसमें उसने भी मेरा बराबर साथ दिया।
फिर मैं सोफे के एक किनारे बैठ गया और वो अपना सर मेरी गोदी में रख कर लेट गई और मैं उसके स्वेटर के अन्दर हाथ डाल कर कपड़ों के ऊपर से ही उसके दूद्दू दबाने लगा।
अब वो गरम हो रही थी और उसकी साँसें भी तेज़ चलने लगी। इधर मैं भी उसके बगल में लेट कर उसके पैर पर अपना पैर रख कर लेट गया जिससे मेरा लंड उसकी जांघों को छू रहा था।
अब वो समझ रही थी कि क्या हो रहा है। जैसे ही में उसके ऊपर चढ़ने लगा, मैंने उसका मन देखने के लिए ऐसे ही कह दिया कि हमारे बीच यह जो कुछ भी हो रहा है, सही नहीं है।
यह कहते कहते में उससे अलग हो गया, वो भी उठ कर बैठ गई।
जब मेरी नजर अचानक घड़ी की तरफ गई, देखा तो 9:15 हो चुके थे, मैंने उसको कहा- बातों बातों में कितना समय बीत गया, साढ़े नौ बजने वाले हैं, अभी मेरे ऑफिस के लोग आते ही होंगे।
उसने भी मुझे कहा- मुझे भी कोचिंग के लिए जाना है, मैं चलती हूँ।
मैंने जाते हुए उसके लिए लाई हुई कुछ चोकलेट्स और एक गिफ्ट उसको दिया।
वो लेकर वो वहाँ से चली गई और मैं फिर से सोफे पर बैठ कर सोचने लगा- हो गई ना खड़े लंड पे चोट ! अब तो शायद वो मुझसे बात भी नहीं करेगी।
कुछ देर में मेरे ऑफिस के बाकी कर्मचारी भी आ गए। मैं अपने काम में लग गया, उस दिन मैं बड़ा अपसेट था, उसने भी कॉल नहीं किया, मैं भी अपने काम में लगा रहा।
फिर एक दिन उसका फ़ोन आया और उसने सीधे सीधे कहा- क्या कल तुम सुबह जल्दी उठ सकते हो?
क्योंकि वह जानती थी कि मैं रोज़ सुबह आठ बजे सो कर उठता हूँ।
मैंने पूछा- क्यों?
तो बोली- तुमसे कुछ काम है, जल्दी उठ कर ऑफिस आ जाना।
मैंने सोचा, नेकी और पूछ पूछ !
और मैंने भी हाँ कर दी।
दूसरे दिन मैं पूरी तैयारी से कंडोम अपने साथ लेकर ऑफिस गया। वो भी कुछ देर में वहाँ आ गई। वो जींस और टॉप ही पहने हुई थी, उसको पता था कि आज तो वैसे भी स्वेटर का कोई काम नहीं है।
उसके अन्दर आने के बाद मैंने दरवाजे को अन्दर से लॉक किया और सीधे उसको अपनी बाहों में जकड़ कर किस करने लगा।
किस करते करते ही मैंने उसको वहीं सोफे पर लिटा दिया और उसके दुदू दबाने लगा, धीरे धीरे उसकी टॉप के अन्दर हाथ डाल कर उसकी ब्रा का हुक खोल कर उसकी निप्पल के साथ खेलने लगा।
उसको भी मज़ा आ रहा था।
फिर मैंने उसकी टॉप को उसके बदन से अलग कर दिया, हुक खुला होने की वजह से उसकी ब्रा भी टॉप के साथ उतर गई। अब वो मेरे सामने टॉपलेस थी और मैं उसके दुदू को चूम रहा था।
फिर मैंने उसकी जींस के बटन को खोल कर उसको उतार दिया, उसके शरीर पर अब सिर्फ एक पेंटी बची हुई थी, वो थोड़ी शर्मीली किस्म की लड़की थी, इसलिए अपने आपको इस हालत में देख कर अपनी आँखें बंद कर ली।
इसी वजह से मेरे कपड़े भी मुझे खुद ही उतारने पड़े।
इस सबके चलते हम दोनों ही बहुत गरम हो चुके थे, उसकी आँखें बंद थी और मुँह से आह ऊऊऊउह की आवाजें आ रही थी।
उसने मुझसे कुछ कहा तो नहीं लेकिन आँखें बन्द करके जिस तरह के भाव उसके चेहरे पर दिख रहे थे, लगता था मानो बोल रही है- अब देर मत करो !
इधर मेरे लंड का भी यही हाल था और क्योंकि मुझे चूत चाटना अच्छा नहीं लगता, हाँ, अगर कोई मेरे लंड को चूसना चाहे तो वो उसकी इच्छा ।
मैंने बिना देर किये ही उसकी पेंटी हटाकर अपने लंड को सही जगह तक पहुँचा दिया।
उसने तो मुझे नग्न हालत में देखा तक नहीं लेकिन फिर भी लंड का थोड़ा सा हिस्सा भी अन्दर नहीं गया और वो चिल्ला उठी।
मैंने उसको कस कर पकड़ा और हल्की सी ठोकर दी जिस से मेरे लंड का अग्र भाग उसकी चूत में घुस गया लेकिन इतने में ही उसके आँसू आ गए और मुझे कहने लगी- नहीं, मुझसे नहीं होगा, तुम इसको बाहर निकाल लो।
मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा लेकिन एक बार तीर अगर कमान से निकल जाये तो उसको कौन रोक सकता है।
वही मैंने भी किया और उसको समझाया- एक ना एक बार तो सभी को ये दर्द सहना पड़ता है लेकिन उसके बाद ही तो असली मज़ा है। और हल्के से एक झटका और दे दिया, इतने में आधा लंड उसकी चूत में घुस गया।
इस बार भी उसकी चीख निकल गई लेकिन वहाँ कौन सुनने वाला था तो मैंने अपना काम जारी रखा और उसको चूमते हुए धीरे धीरे पूरी गहराई तक अपना लंड उतार दिया।
उसको अभी भी दर्द हो रहा था और मुझसे छुटने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं छोड़ूँ तब ना !
मैंने हल्के हल्के हिलोरे चालू रखे, अब उसकी तरफ से भी थोड़ा साथ मिलने लगा।
मैंने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी, करीब दस से पंद्रह झटकों के बाद मुझे लगा कि मैं जाने वाला हूँ और फिर हम दोनों ही एक साथ डिस्चार्ज हो गए।
हम दोनों बुरी तरह थके हुए लग रहे थे और हमारी साँसों पर भी हमारा कंट्रोल नहीं था।
उसी अवस्था में करीब पच्चीस तीस मिनट ऐसे ही लेटे रहने के बाद वो मुझे फिर से चूमने लगी और मेरा भी लंड फिर से तन गया।
मैंने सोचा कि समय नहीं गंवाते हुए जल्दी से एक राउंड और हो जाये नहीं तो ऑफिस का टाइम हो जायेगा, और फिर खड़ा लंड हाथ में रह जायेगा, मैं फिर से उसके ऊपर आ गया और इस बार उसकी गीली चूत में मेरा पूरा लंड एक ही झटके में चला गया।
अब तो वह भी मजे ले लेकर मुझ से चुद रही थी और इस बार हमारी घिसाई लगभग 20 मिनट तक चलती रही।
हम दोनों एक दूसरे में इतना खोये हुए थे कि मैं साथ में लाये हुए कंडोम को भी भूल गया। बाद में मैंने उसको गोली लाकर दी और उसको विदा किया।
तो दोस्तो, यह तो मेरी शुरुआत थी।
हो सकता है इस कहानी में ज्यादा उत्तेजना नहीं हो, मुझे लिखना तो नहीं आता, लेकिन फिर भी मैंने अपनी तरफ से बहुत कोशिश की कि आपके लिए एक अच्छी कहानी लिखूँ और उम्मीद करता हूँ कि आप भी इसको पसंद करेंगे।
आगे भी मैंने इसी सर्विस सेण्टर पर उसी तरह से और चार गर्ल फ्रेंड्स बनाई लेकिन उन सबमें रीना को मैं कभी नहीं भूला।
हम लोग कई बार साथ में टूर पर भी गए और वहाँ भी हमारा चुदाई का कार्यक्रम बेरोकटोक चला।
बाद में मैं विदेश चला गया और जब फिर से भारत आया तो हम दोनों का कभी सम्पर्क नहीं हुआ।

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