भाभी की गाँड-चुदाई (Bhabhi Ki Gand Chudai Badi Kaske)

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 सुनीता भाभी की ये नयी कहानी आप सभी को सायद अच्छी लगेगा ।

प्रेषक – जितेन्द्र सिंह

हैलो दोस्तों, मैं राज एक बार फिर आपकी सेवा में हाज़िर हूँ। मुझे बहुत खुशी हुई कि आप सबने मेरी पहली कहानी किराएदार और उसकी बेटी की काफी सराहना की और इसी के कारण मैं आप के सामने एक बार हाज़िर हूँ एक नई कहानी लेकर। आशा करता हूँ कि आप सब इसे काफी पसन्द करेंगे।
मेरे बड़े भाई की शादी को ३ साल हो गए हैं। मेरी भाभी उत्तर प्रदेश की हैं, और काफ़ी सुन्दर हैं। उनकी फिगर किसी हिरोइन से कम नहीं है और जब से वो मेरे घर में आई, तभी से मेरा लण्ड उनकी चूत में घुसने के लिए काफ़ी परेशान रहने लगा। मैं कभी-कभी उनकी चूत की कल्पना करके मुट्ठ भी मारने लगा। यह सिलसिला काफ़ी दिनों तक चला। पर एक दिन ऐसा आया जिसके कारण मेरी दिली तमन्ना पूरी हो गई।
हुआ यूँ कि एक बार भाभी अपने मायके गई हुईं थीं और काफ़ी दिनों तक वहाँ रहीं। भैया की नौकरी दूसरे जिले में होने के कारण वो भी बाहर ही थे और भाभी को वापस लाने के लिए पापा ने मुझे ही कहा। मैं भाभी को लेने के लिए उनके मायके गया। वहाँ मेरा काफ़ी स्वागत-सत्कार हुआ। जब मैं उनके घर पहुँचा तो भाभी नहा रहीं थीं। बाथरूम घर के अन्दर ही था। बाथरूम के ठीक बाहर मैं कुर्सी पर बैठा था। कुछ ही देर में बाथरूम का द्वार खुला। मैंने उन्हें देखा तो मेरी नज़रें उन्हें देखती ही रह गईं। क्योंकि वो उस वक्त केवल पेटीकोट में थीं। उन्हें पता नहीं था कि बाहर कोई बैठा है। उन्होंने मुझे देखते ही दरवाजा बन्द कर लिया, फिर कुछ देर में पूरे कपड़े पहन कर बाहर निकलीं।
मुस्कुरा कर मुझसे पूछा – “अरे देवरजी, आप कब आए।”
“अभी आधा घण्टा पहले” – मैंने उत्तर दिया।
फिर उन्होंने मुझे खाना खिलाया और आराम करने के लिए मेरा बिस्तर छत पर लगा दिया। मैं छत पर सोने के लिए चला गया। बिस्तर पर पड़ते ही मुझे वह क्षण याद आया जब भाभी नहाकर निकलीं थीं। उसी क्षण को याद करके मैंने मुट्ठ मारी और कुछ ही देर में सो गया।
शाम को करीब चार बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि भाभी मेरे सामने खड़ी हैं और मुस्कुरा कर कहती हैं, “अरे देवरजी, उठो शाम हो गई है।” मैं तुरंत उठकर खड़ा हो गया, और तैयार होने लगा। इतने में भाभी ने कहा, “अरे देवरजी, यह चादर में अकड़न कैसी है?” मैं घबरा गया, पर वह मुस्कुरा कर नीचे चली गईं।
मैं समझ गया कि भाभी को सब पता चल गया है। कुछ देर बाद मैं भी नीचे चला आया। भाभी ने नाश्ता दिया। कुछ देर बाद भाभी ने कहा, “चलिए मैं आपको गाँव का मेला दिखा लाती हूँ।”
मैं तैयार हो गया। भाभी और मैं मेले की ओर चल पड़े। रास्ते में भाभी के खेत पड़ते थे जो कि काफ़ी दूर तक फैले हुए थे। वहीं पर एक झोपड़ी भी थी। मैंने पूछा कि ये झोपड़ी किसकी है, तो भाभी बोलीं कि मेरे पिताजी की। वो कभी-कभी यहाँ रात में सोते हैं। हम झोपड़ी की ओर बढ़ गए क्योंकि हम कुछ थक गए थे।
वहाँ पड़ी चारपाई पर मैं लेट गया और भाभी मेरे पास बैठ गईं। कुछ ही देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि वो रो रही हैं। मैंने उठकर देखा तो उनकी आँखों से आँसू गिर रहे थे। मैंने चौंक कर उनसे पूछा तो उन्होंने कहा, “क्या बताऊँ देवरजी, जबसे मेरी शादी आपके भैया से हुई है, ऐसा लगता है कि जैसे मेरी क़िस्मत ही फूट गई है।”
“कैसे?” – मैंने कारण जानना चाहा।
“एक औरत अपने पति से क्या चाहती है… प्यार। लेकिन मेरी किस्मत में तो प्यार है ही नहीं। आपके भैया हमेशा बाहर ही रहते हैं जिस कारण से मेरे प्यार करने की चाह पूरी नहीं हो पाती है। अब आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ?”

“ये आप कैसी बातें कर रहीं हैं?”
“क्यों, अपने भाई की बुराई सुनी नहीं जाती। अगर ऐसा है तो तुम ही मेरी इच्छा पूरी क्यों नहीं कर देते!”
“ये आप क्या कह रहीं हैं? कैसी इच्छा पूरी करूँ मैं? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा।”
भाभी ने तब मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा, अभी तो अंजान बन रहे हो, पर चादर में जो अकड़न थी, वो मुझे पता है कि वह कैसे हुआ था। अरे देवरजी अपने लंड का पानी बेकार में क्यों बहा रहे हो? उसे उसकी सही जगह में बहाओ।”
“अभी तो सही जगह मिली ही नहीं, तो मैं क्या करूँ?” – मैंने तपाक से कहा।
“चलो, अब मैं आपको सही जगह बता देती हूँ। आप अपना पानी इस चूत में बहाओ” – यह कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रख दिया। उसमें से पहले से ही गरम पानी निकल रहा था, जिससे मेरा हाथ गीला हो गया। भाभी ने अन्दर कुछ भी नहीं पहन रखा था।
अब भाभी ने मेरे पैंट की ज़िप खोल दी और मेरे तन्नाए हुए लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लिया जो कि साँप की तरह फुँफकार रहा था। उसे उन्होंने तुरन्त अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। मुझे मज़ा आने लगा। कुछ ही देर में मेरे लंड ने अपना पानी गिराना चाहा तो मैंने भाभी को कहा कि अपने मुँह से मेरा लंड निकाल दे। लेकिन उन्होंने चूसने की गति और बढ़ा दी, जिससे मेरा पानी उनके मुँह में ही गिर गया, जिसे भाभी ने बड़े चाव से गटक लिया।
उन्होंने अब भी मेरा लंड मुँह से बाहर नहीं निकाला, और चूसती रहीं। कुछ देर में मेरा लंड वापस तैयार हो गया। फिर भाभी ने मुझे खड़ा किया और ख़ुद चारपाई पर चित्त लेट गईं और कहा, “अब चोद दो देवरजी। अब मैं पूरी तरह से तैयार हूँ। मेरी चूत की खुजली मिटा दो।”
मैंने अपने लंड को भाभी की चूत की छेद पर रखकर एक क़रारा झटका मारा जिससे मेरा आधा लंड भाभी की चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। भाभी चिल्लाई – अअअअआआआआआ…. मरी…. मेरे…. रा….जाआआआ….।
मैंने पूछा – “क्या हुआ भाभी?”
तो उन्होंने कहा, “आज पहली बार, इतना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा है, दर्द हो रहा है।”
“अब क्या करूँ, बाहर निकाल लूँ?”
“नहीं… मेरी चूचियों को चूसो।”
मैंने ऐसा ही किया। कुछ ही देर में भाभी ने अपनी गाँड उछालनी शुरू कर दी। मेरी समझ में आ गया कि अब भाभी तैयार हैं। मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी के साथ भाभी की चुदाई करने लगा। वह भी नीचे से अपनी गाँड उछाल-उछाल कर मेरा साथ देने लगी। मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था और भाभी भी बड़े मज़े से अपनी चुदाई करवा रहीं थीं।
कुछ देर के बाद भाभी ने अपनी गाँड उछालने की रफ़्तार को और बढ़ाया और कहा – “अब मैं झड़ने वाली हूँ। और तेज़ देवरजी, और तेज़। आज तो मैं निहाल हो जाना चाहती हूँ… चोदो मेरे राजा… चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को… भुर्त्ता बना दो इस मादरचोद का।”
मैंने अपनी गति और भी बढ़ा दी और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरे लंड को भाभी ने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं तो मैंने पूछा, “अब क्यों चूस हो रही हो मेरा लंड?”
“अभी चुदाई पूरी कहाँ हुई है, अभी तो मेरी गाँड भी प्यासी है, उसे कौन मारेगा?” – भाभी ने समझाया।
“ठीक है, चलो, अब कुतिया बन जाओ, मैं तुम्हारी गाँड मारने के लिए तैयार हूँ।”
वह तुरंत कुतिया बन गई और मैं उसके पीछे आ गया और उसकी गाँड में पहले थूक लगाई, फिर गांड को फैलाकर अपना लंड उसकी गांड की छेद पर रखकर एक धक्का मारा तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी गाँड में घुस गया। वह चीख पड़ी, पर मैंने कोई रहम नहीं किया और एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया। मेरा लंड पूरा का पूरा जड़ तक उसकी गाँड में घुस गया। फिर मैंने तेज़ी के साथ उसकी गाँड मारनी शुरु कर दी।
कुछ देर के बाद उसने भी अपनी गाँड को आगे-पीछे करना शुरु कर दिया। मैंने करीब १० मिनट तक उसकी गाँड मारी और अपना पानी उसकी गाँड के अन्दर ही गिरा दिया, फिर हम एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। करीब एक घण्टे के बाद हमारी नींद खुली तो हम तैयार होकर घर की ओर वापस चले आए।
उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता मैं भाभी की ख़ूब चुदाई करता।
आपको यह कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर मेल कीजिए।

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