बीवी और साली के साथ सुहागरात (Biwi aur Sali Ke Sath Suhag Raat)

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प्रेषक : रमेश गुप्ता
हाय दोस्तो, मेरा नाम विक्की है, मैं पूर्वी दिल्ली में रहता हूँ। काफ़ी समय से bhauja  की कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ।
आज आपको मैं अपनी एक वास्तविक घटना सुना रहा हूँ, आशा है कि आप लोगों को यह पसन्द आएगी।
बात उन दिनों की है जब मेरा गौना आया ही था, हमारे यहाँ शादी के बाद दो-तीन साल बाद गौना आता है।
मेरी पत्नी के साथ उसकी बड़ी बहन भी आई थी। मैं यह बता दूँ कि मेरी बीवी पाँच बहनें है तथा उसकी बड़ी बहन और मेरा चक्कर काफ़ी समय से चल रहा था।

दिन भर की भागदौड़ के बाद रात में जब सब लोग अपने कमरों में चले गये तो मैं भी अपने कमरे की तरफ़ हो लिया। कमरे में पहुँचकर देखा तो मेरी पत्नी और साली एक ही बिस्तर पर सो रही थी। मैंने अपनी साली को जगा कर उसे दूसरे कमरे में जाने के लिए कहा परंतु उसने कहा कि वह भी यही सोएगी, मेरी पत्नी भी तब तक जग चुकी थी।
मेरा दिमाग खराब सा हो गया था, मैंने अपनी साली से कहा- यार, आज हमारी सुहागरात है ! क्यों बेकार में कबाब में ह्ड्डी बन रही है?
इस पर साली ने कहा- क्यों ? क्या मैं इतनी बेकार हूँ कि यहाँ नहीं रुक सकती?
मैंने उससे कहा- मुझे कोई एतराज़ नहीं है परन्तु तुम्हारे रहते तुम्हारी बहन के साथ मैं कुछ कर नहीं पाऊँगा !
इस पर साली ने कहा- क्यों मेरे रहते तुम्हारा लन्ड खड़ा नहीं होगा क्या? दो-दो को देख़ कर गान्ड फ़ट गई, या दोनों को एक साथ झेलने की हिम्मत नहीं है?
मैंने कहा- मेरा लन्ड तो कमरे में घुसने से पहले ही खड़ा हो गया था, परन्तु क्या तुम्हारे सामने तुम्हारी बहन का मन कुछ करने को करेगा? और रही बात दोनों को झेलने की तो दोनों को इतना चोदूँगा रात भर कि दोनों की दोनों सुबह उठने लायक नहीं रहोगी।
इस पर मेरी पत्नी बोली- क्यों इसमें क्या बुराई है? हम दोनों को एक दूसरे की सब बात मालूम रहती हैं, हम आपस में कुछ भी नहीं छुपाते, मुझे तुम्हारी और सोनू (मेरी साली का नाम) की भी सब बातें मालूम हैं।
अब चौंकने की बारी मेरी थी, मैं वहीं बिस्तर पर बैठ गया और बोला- ठीक है ! जैसी तुम दोनों की मर्जी, मुझे तो फ़ायदा ही फ़ायदा है।
फ़िर मैंने अपनी पत्नी को पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। पहले तो वो ना-नुकुर करने लगी, परन्तु सोनू के कहने पर उसने अपने आप को ढीला छोड़ दिया। काफ़ी देर तक मैं उसके होठों को चूसता रहा, उसे भी अब इस सब में मजा आने लगा था।
मैंने उनकी ब्रा उतार दी… वाऊउउउ… उसके चूचियाँ देख कर मैं तो चकित ही रह गया। छोटे छोटे सन्तरे के आकार की चूचियाँ और उसकी निप्पलों को नज़र ना लगे बिल्कुल मटर के दाने से भी छोटे। मैंने 10-15 मिनट तक चूचियों को खूब दबाया और मेरा लंड एकदम से खड़ा और कड़क हो गया था और पजामे का तम्बू बना रहा था। मैं फिर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा और फिर उसके ऊपर चढ़ उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी पैन्टी खींच ली और थोड़ी देर उसे देखने लगा। वाह क्या कुंआरी और चिकनी बुर थी, एक भी बाल का नामोनिशान नहीं, बिल्कुल छोटा सा गुलाबी छेद, मैंने उसकी बुर में अपनी ऊँगली डाल दी, वह जोर से चीख पडी .. आआआहहहहह… और उठ कर बिस्तर से नीचे उतर गई, और बोली- दर्द नहीं होता? मार डालोगे क्या?
इस पर सोनू बोली- जीजा जी, मीना (मेरी पत्नी का नाम) अभी कुंआरी है, थोड़ा प्यार से और आराम से काम लो।
मैंने कहा- यार, अभी तो दोनों बड़ी-बड़ी हांक रही थी कि तुम्हें दोनों मिलकर निचोड़ देंगी, अब क्या हुआ?
सोनू ने कहा- निचोड़ेंगी तो जरूर ! पर अपने हिसाब से ! मीना और मैं आज रात तुमको छोड़ने वाली नहीं हैं, पर उसका पहली बार है इस लिए थोड़ा घबरा रही है, एक काम करो पहले मुझे चोद लो ताकि वह चुदाई देख कर अच्छे से गर्म हो जाए और फ़िर वह अपने आप करने को कहेगी।
बात मेरे को भी जमी, मैंने फ़ौरन उसे अपने पास खींच लिया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा, मेरी पत्नी वहीं पर सोफ़े पर लेट गई और हमारा खेल देखने लगी। मैंने सोनू की ब्रा उतार दी… यूँ तो मैंने उसकी चूचियों को कई बार देखा था पर आज उसमें जो कड़कपन था वो और दिन के मुकाबले अलग ही था। मैं उसकी चूचियों को चूसने में लग गया। मैंने 10-15 मिनट तक चूचियों को खूब चूसा, मेरा लंड फ़िर से खड़ा और कड़क हो गया था।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटा लिया और उसके कपड़े खोलने शुरु कर दिए। सारे कपड़े उतारने के बाद मैंने उसकी बुर पर हाथ फ़ेरना शुरु कर दिया, उसने भी मेरा लन्ड पकड़ कर सहलाना चालू कर दिया। अपनी बीवी को इसी तरफ़ देखता देख मैंने अपनी साली की बुर में ऊँगली करना शुरु कर दिया, और मेरी साली जो अब काफ़ी हद तक गरम हो चुकी थी, वह चुदवाने को बेक़रार थी, उसने मुझसे कहा- जो भी करना है, जल्दी करो !
पर मैं उसकी चूचियों को चूसने में ही लगा हुआ था। तभी उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर फिराने लगी। मैं समझ गया कि अब तड़पाना अच्छा नहीं है। मैं भी खड़ा हो गया और उसे पटक कर उसके ऊपर चढ़ गया। मैं धीरे-धीरे अपना लंड डालने लगा। मेरा लंड सात इंच का है। मैंने धीरे से धक्का लगाया और पूरा लंड डाल दिया। उसका मुँह खुल गया और आँख से पानी आ गया, बोली- आज क्या हो गया है तुम्हें? मार ही डालने का इरादा कर रखा है क्या?
मैंने धीरे-धीरे लगाने शुरु किए…
आआआहहहहह… ऊऊउउउम्म्म्म्म म्म्मम…
हम दोनों पहले भी तीन-चार बार चुदाई कर चुके थे परन्तु आज जैसी चुदाई का आनन्द पहले कभी नहीं आया था, काफ़ी देर तक करने के बाद मैंने उससे कहा- सब कुछ मैं ही करुँगा तो तुम क्या करोगी? और मैं उसके ऊपर से हट गया।
अब वह मेरे उपर बैठ कर अपनी बुर में मेरा लण्ड लेने लगी, पूरा सात ईन्च का लण्ड को सुपारे से
टट्टो तक को दबा दबा कर चुदवा रही थी, मेरी बीवी की हालत इस तरह की
हो रही थी जैसे किसी मछ्ली को गरम रेत पर छोड दिया गया हो। वह अपने हाथ से अपनी बुर को मींजे जा रही थी तथा मुंह से अजीब अजीब आवाजें आआआह… ऊऊउउउम्म्म्मम म्म्मम… आईईईईई -सीईईईईसीई….. आआआ…. निकाले जा रही थी।
उसे देख कर मेरी
और सोनू की
रफ़्तार
में बेतहाशा तेजी आ गई, चुदाई के मारे सोनू का बुरा हाल था, अब उससे रुका नहीं जा रहा था- जीजाजी, मेरा तो बस होने वाला है, मैं गई, मैं गई ! आह्ह्हह्ह …. फ़ा…. ड़……..दो…. पूरा डाल डाल कर पेलो ! आज तो बहुत खुजली हो रही है इस बुर में ! सारी खुजली मिटा दो इस बुर की।
तुम अब घोड़ी बन जाओ तो मजा आए !
ठीक है, आज सारी हसरत मिटा लो ! बाद में मत कहना कि तुम्हारी तबियत से नहीं मार पाया।
घोड़ी बनाने के बाद मैंने घुटने के बल हो कर उसकी बुर में एक बार फ़िर से अपना लण्ड घुसेड़ दिया, उसने कभी घोड़ी बन कर चुदाई नहीं करवाई थी इसलिए इस अवस्था में उसकी बुर थोड़ी कस गई थी, लण्ड अटक अटक कर जा रहा था, मुझे अब ज्यादा ताकत लगा कर उसकी बुर में डालना पड रहा था, हर धक्के पर उसकी मुँह से हल्की हल्की चीख निकल रही थी- आईईईईईई सीईईईसीई ….. आआआआ….
चोद डालो जीजा ! आज पूरी तरह से फ़ाड दो मेरी बुर को ! ऐसी फ़ाडो कि कम से कम हफ़्ते तक इसे चुदवाने की जरुरत ना पड़े

करीब दस-पन्द्रह मिनट के बाद मेरा भी लन्ड झड़ने को हो गया, मैंने सोनू से कहा- बस अब मेरा भी काम होने वाला है !
जीजाज़ी, बाहर मत निकालना ! अन्दर ही छोड़ दो सारा माल ! वो बोली।
आठ-दस धक्कों के बाद लन्ड की पिचकारी छुट पड़ी और सारा का सारा माल उसकी बुर में भरता चला गया। थोड़ी देर हम उसी पोजिशन में रहे, लन्ड अपने आप सुकड़ कर बाहर आ गया। वह उठी और बाथरुम में जा कर अपनी बुर को साफ़ करने लगी। पाँच मिनट बाद वो बाहर निकली तो उसके चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव थे- जीजाजी, आज तो ऐसी मारी है कि सूज गई है ! बाप रे, अगर मीना की भी ऐसे ही मारोगे तो यह बेचारी तो शायद सुबह उठने लायक नहीं बचेगी।
हुँह, अब यह क्या मारेंगे, इनके लन्ड की हालत तो देखो, सूख कर मूंगफ़ली की तरह हो गया है ! मीना मेरे बराबर में लेटकर लन्ड हाथ में लेते हुए बोली।
उसके बाद मैंने अपनी बीवी की चुदाई कैसे की, वह अगले भाग में …
मेरी कथा “बीवी और साली के साथ सुहागरात” का दूसरा भाग आप लोगों के लिए हाजिर है।
सुहागरात को पहले साली सोनू को चोदने के बाद अब मेरी बीवी मीना की नथ उतरने जा रही है :
लन्ड को मुँह में ले लो, थोड़ी देर में मूंगफ़ली से तोप बन जाएगा मेरी जान ! मैं बोला।
छी: यह कोई मुँह में लेने की चीज है? घिन नहीं आएगी क्या? मीना बोली।
इससे पहले मैं कुछ कहता, सोनू बोली- इसको मुँह में लेने का तो अपना अलग ही मजा है मेरी बहन ! अगर तुझे नहीं लेना तो मत ले, पर मैं यह मौका नहीं छोड़ने वाली ! तू तो अपनी बुर में ही ले लेना, चुसाई मैं कर लेती हूँ !
तेरी मर्जी, मैं तो यह नहीं करुँगी ! मुझे तो इसमें घिन आ रही है ! इस पर मीना बोली।
फ़िर मैंने अपनी पत्नी को पकड़ लिया और उसके होठों का चुम्बन लेने लगा। वो पहले ही इतनी गर्म हो चुकी थी कि ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं पड़ी और वह भी मुझे जोर जोर से चूमने लगी और मुझे कस कर पकड़ लिया। काफ़ी देर तक मैं उसके होठों को चूसता रहा, उसे भी अब इस सब में पूरा मजा आने लगा था।
मैंने फ़िर से उसकी ब्रा उतार दी… वाऊउउउ… उसकी चूचियाँ देख कर मैं तो चकित ही रह गया। छोटे छोटे सन्तरे के आकार की चूचियाँ और उसकी निप्पलों को नज़र ना लगे बिल्कुल मटर के दाने से भी छोटे। मैंने दस बारह मिनटों तक चूचियों को खूब दबाया।
उधर सोनू मेरा लंड मुँह में ले कर धड़ाधड़ चूसे जा रही थी। मेरा लन्ड एक बार फ़िर से एकदम खड़ा और कड़क हो कर बुर को दहाड़ मार मार कर बुलाने लगा था। मैं फिर भी उसकी चूचियाँ दबाने लगा था, जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंने उसकी साड़ी खोलनी शुरु कर दी। साड़ी खोल कर मैंने उसकी पैन्टी खींच ली और थोड़ी देर उसे देखने लगा। वाह चिकनी बुर थी, मैं उसकी बुर पर हाथ फ़ेरने लगा परन्तु इस बार मैंने अपनी ऊँगली उसकी बुर में नहीं डाली क्योंकि मुझे डर था कि कहीं वह फ़िर से ना बिदक जाए, इसलिए मैं सिर्फ़ उसकी बुर को ऊपर से ही मसलता रहा।
उसके मुँह से अब .. आआहहह… ऊउउम्म्म्म म्म्मम… आईईईईईई -सीईईईसीई….. आआआ…. की आवाजें निकल रही थी।
उधर सोनू ने मेरे लन्ड को चूस-चूस कर बेदम कर रखा था, मीना की बुर का भी बुरा हाल हो गया था, उसकी बुर का मक्खन बह कर उसके चूतडों तक पहुँच चुका था। अब मुझे लग रहा था कि बुर पूरी तरह से लन्ड लेने के लिए बेकरार है। परन्तु बुर एकदम नई थी इसलिए मैंने सोचा कि इसे थोड़ा और तड़फ़ाया जाए ताकि पहली बार लन्ड लेने में इसकी गर्मी इसके दर्द के एहसास को कम कर दे।
मैं अब उसके चूचियाँ को पीने लगा, चूचियों को पीने मेरी पत्नी की हालत और खराब हो गई, सोनू भी अब मेरा लन्ड पीना छोड़ वहीं पर बैठ गई और हमारा खेल देखने लगी।
मैं अब उसकी चूचियों को और कस कर चूसने में लग गया। उसने भी मेरा लन्ड पकड़ कर सहलाना चालू कर दिया और मेरी बीवी अब काफ़ी हद तक गर्म हो चुकी थी, वह चुदवाने को बेक़रार थी।
उसने मुझसे कहा- अब करते क्यों नहीं, जल्दी करो, अब नहीं रहा जा रहा ! मेरी बुर में दर्द होने लगा है, डाल दो अब इसमें !
पर मैं उसकी चूचियों को चूसने में ही लगा हुआ था। तभी उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी बुर की तरफ़ ले जाने की कोशिश करने लगी।
मैं समझ गया कि अब तड़पाना अच्छा नहीं है। मैंने पलट कर उसकी दोनों टाँगों को फ़ैला दिया उसके ऊपर चढ़ गया। मैं धीरे-धीरे अपना लंड उसकी बुर में डालने की कोशिश करने लगा, परन्तु उसकी बुर का छेद इतना छोटा था कि मेरा सात इंच का लन्ड बार बार फ़िसल कर नीचे चला जा रहा था। अत: मैंने अपने दोनों हाथ उसके पैरों के नीचे से ले जाकर उसके दोनों पाँव ऊपर उठा लिए, जिससे उसकी बुर ऊपर की ओर उठ गई तथा लन्ड उसकी बुर के बिल्कुल सामने आ गया।
फ़िर मैंने ताकत लगा कर एक जोर का धक्का लगाया और लन्ड उसकी बुर फ़ाडता हुआ लगभग दो इंच लंड उसकी बुर में घुस गया। उसका मुँह खुल गया और आँख से पानी आ गया, वह जोर से चिल्लाई- आईईईईई – माँम्म्म्म्म्म्माआआ…घुस्स्स्स गया आआआ… मेरी बुर फ़…फ़…ट्ट्ट्ट्ट गई ! मरर गई !
वह इतनी जोर से चिल्लाई थी कि मुझे लगा शायद उसकी आवाज को पूरे घर ने सुना होगा, वह इतने जोर से चिल्लाएगी इसका मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था, वरना मैं पहले ही उसके मुँह पर हाथ रख लेता।
मैंने कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने में अपनी भलाई समझी।
तुमने तो मार ही डालने का इरादा कर रखा है क्या? आराम आराम से नहीं कर सकते क्या ? या यह कोई रबड़ का खिलौना है कि जैसे मर्जी वैसे तोड़ मरोड़ दिया? वो लगभग रोते हुए बोली।
पर मैं बोला- मेरी इसमें क्या गलती है, तुम्हारी बुर है ही इतनी छोटी सी ! मैंने तो अभी अपना सुपारा ही तुम्हारी बुर के अन्दर डाला है, इसमें ही तुम्हारा यह हाल है तो पूरा लन्ड तुम्हारी बुर में जाएगा तो तुम्हारा क्या हाल होगा? और पहली पहली बार है तो थोड़ा दर्द तो होगा ही ना, अभी थोड़ी देर में कहोगी कि जोर जोर से मारो, धीरे धीरे में मजा नहीं आ रहा !
थोड़ा दर्द होता तो मैं सह लेती, पर तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी, थोड़ा धीरे चोदो, बुर भी तुम्हारी है और मैं भी तुम्हारी ही हूँ, एक रात में ही सारी जान निकाल दोगे तो बाकी दो चार रातों तक चुदवाने के लायक भी नहीं रहूँगी, फ़िर अपना लन्ड पकड़ कर बैठे रहना ! वो बोली।
परन्तु मैं जानता था कि यह उसकी प्रथम चुदाई है ऐसा तो होना ही था, अभी थोड़ी देर बाद यह खुद ही जोर लगाने लगेगी और चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवाएगी।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किए… आआहहह… ऊउम्म्मम म्म्मम… आईईईईईईई – माँम्म्म्म्म्म्माआआ
… … उसके मुँह से दर्द भरी परन्तु उत्तेजनापूर्ण आवाजें निकलने लगी। लगभग पाँच मिनट बाद जब मेरा पूरा लन्ड उसकी बुर में हिचकोले खाने लगा तो वह भी चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी बुर में मेरा लण्ड लेने लगी।
अब वह मेरे लण्ड को सुपारे से
ले कर टट्टों तक उछल-उछल कर चुदवा रही थी। उधर मेरी साली की हालत दोबारा खराब हो गई थी वह एक हाथ से अपने हाथ से अपनी बुर को मींजे जा रही थी तथा दूसरे हाथ से अपनी चूचियों को दबाये जा रही थी तथा मुँह से उत्तेजनापूर्ण अजीब अजीब आवाजें आआहहह… ऊऊउउउम्म्म म्म्मम… आईईईईई -सीईईईसीई….. आआ… निकाले जा रही थी। उसे देख कर लग रहा था कि वह अभी मेरी बीवी को हटा कर खुद चुदवाने की इच्छा रखती हो।
इधर मैं मीना की बुर का बैन्ड बजाने में लगा हुआ था, बुर टाईट थी, लण्ड भी अटक अटक के जा रहा था, मैं अब अपनी पूरी ताकत लगा कर उसकी बुर में डाल रहा था, हर धक्के पर उसकी मुँह से हल्की हल्की चीख निकल रही थी- आईईईईईई -सीईईईसीई….. आआआ….
करीब दस पन्द्रह मिनट की चुदाई के बाद उसकी बुर अब पूरे मजे से मेरे लन्ड लील रही थी और वो- चोद डालो, फ़ाड डालो, आज पूरी तरह से फ़ाड दो मेरी बुर को, और जोर जोर से मारो, पूरा डाल दो मेरे राजा !
अचानक उसने मुझे अपनी पूरी ताकत से मुझे दबाना शुरु कर दिया, मैं समझ गया कि अब इसकी बुर ने पानी छोड़ देना है, मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार पूरी बढ़ा दी। दो मिनट बाद उसकी पकड़ ढीली पड़ गई, उसकी बुर ने अपना पानी छोड़ दिया था।
करीब दस मिनट के बाद मेरा भी लन्ड झड़ने को हो गया। मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार में और तेजी कर दी, आठ-दस धक्कों के बाद लन्ड की पिचकारी छुट पड़ी और सारा का सारा माल उसकी बुर में भरता चला गया। मैंने अपने हाथ उसकी टाँगों के नीचे से निकाले और उसके ऊपर ही लेट गया। मेरी और उसकी साँसे बड़ी तेजी से चल रही थी।
फ़िर वह उठी और बाथरुम में जा कर अपनी बुर को साफ़ करने लगी। पाँच मिनट बाद वो बाहर निकली तो उसके चाल में थोड़ा लचकपन था पर चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव थे।
बाप रे, मेरी बुर तो सूज कर गोलगप्पा बन गई है ! मीना बोली।
उस रात मैंने मीना और सोनू को दो बार और चोदा, मैंने उनकी गान्ड मारने की भी असफ़ल कोशिश कई बार की परन्तु आज मेरी शादी को पन्द्रह साल हो गए, परन्तु ना तो सोनू ने, ना ही मीना ने आज तक मुझे अपनी गान्ड पर हाथ रखने दिया। मैं भी इसी आशा में लगातार कोशिश करने में लगा हुआ हूँ कि कभी तो इन दोनों में से कोई मेरी बात मानेगी।
उसके बाद मैंने अपनी बाकी तीन सालियों की चुदाई कैसे की, उसके बारे में मैं बाद में बताऊँगा…

= bhauja.com

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