फरेज़ को पता है (Pharenj Ko Pata He)

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प्रेषक : शमीर शुक्ला

बस आप पढ़ते जाईये :
बात है सर्दियों की !
मैं, मेरी बीबी और मेरा छोटा सा करीम पाँच साल का, हम तीन लोग हमारे घर में, घर कानपुर के तल्सोयी मोहल्ले में और उसी मोहल्ले में मेरी सालीजान निकाह कर आई। अब साली और बीवी दोनों अच्छी तरह कभी उसके घर कभी हमारे घर गपशप करतीं। हाँ, मैं भी कभी कभार बात कर लिया करता !
एक दिन साली “फरेज़” आई, उस समय मैं अकेला घर पर था, बीवी “तारेज़” बच्चे को स्कूल ले गई थी।
फरेज़ ने मुझसे बोला-जीजू, ये चार दिनों के लिए बाहर जा रहें हैं, मैं यहाँ रह सकती हूँ क्या ?
मेरे मन में कुछ भी ख़राब नहीं था, मैंने कह दिया- तेरा घर है ! बस गैस की टंकी और सब्जी-भाजी का खर्चा तेरे मियां से ले लूँगा या वो मुझे एक दिन “ग्रीन लेवल ” पिला दे !
तो फरेज़ बोली- वो तो दारू-शारू छूते भी नहीं हैं ! मुझसे ही ले लेना आप !
और मुँह बना कर घर के अन्दर आ गई।
मैं फिर अपने काम में लग गया, तारेज़ आई, उसे सब बताया गया। उसने मुझसे पूछा- क्यों जी ! मेरी बहन से तुम दारु पीना चाहते हो या कोई और इरादा है?
मैंने कहा- क्या फ़िज़ूल की बात करती हो ? तुझे मालूम है मैं इन बातों से दूर रहता हूँ !
मेरी बीबी यह सोचती थी कि मैं उसके साथ कुछ ज्यादा करता नहीं हूँ तो मैं वो हूँ ! पर बात ऐसी है कि मेरी बीबी को मैं कितना भी करूँ, मुझे कोई मज़ा ही नहीं आता।
दूसरे ही दिन से मेरी परीक्षा चालू हो गई जिसमें मेरा पास होना जरूरी था।
मैं सब समझ गया था !
हुआ यूँ ..
तारेज़ रोज़ की तरह हमारे छत वाले बिना कुण्डी के बाथरूम में नहा रही थी, तभी फरेज़ मेरे पास बोली- जीजू ,मेरे लिए शम्पू लेकर आओ, मुझे नहाना है।
मैंने कहा- तू कहाँ नहाएगी? अभी तेरी जीजी तो नहा ले !
उसने कहा- मैं आपके बाथरूम में नहा लूंगी !
मैंने कहा- उसमें तो दरवाजा नहीं है ! सिर्फ परदे से काम चलाना पड़ेगा !
उसने कहा- आप तो बस शैम्पू ले आओ !
मेरा क्या ! मैं शैम्पू लेने नीचे दुकान पर गया, शैम्पू ख़रीदा और लौट कर देखा कि फरेज़ तो पर्दा लगाकर नहाने लगी थी। अंदर बल्ब जलने के कारण उसका छरहरा बदन साफ दिख रहा था। उसने सब कुछ उतार दिया था। मेरी इच्छा हुई कि अंदर चला जाऊँ क्योंकि पिछले तीन महीनों से कुछ भी नहीं किया था। पर मैं सिर्फ देखता रहा।
थोड़ी देर में मैंने कहा- फरेज़, मैं शैम्पू ले आया हूँ ! तुम्हें चाहिए क्या ?
फरेज़ बोली- जीजू, अंदर फेंक दो !
मैंने अंदर फेंका पर बाथरूम की रेक पर जा गिरा।
फरेज़ बोली- जीजू अब क्या करूँ ? वो तो ऊपर चला गया है ! एक काम करो आप उसे उतार दो !
मैं इसी बात का इंतज़ार तो कर रहा था, मैं अंदर गया और बिना कुछ देखे मैंने शैम्पू उतार दिया और जब मैं शैम्पू उसके हाथ में रख रहा था तो उसने सिर्फ एक तौलिया लपेटा था ऊपर से नीचे तक !
मैंने कहा- तू तो बहुत सुंदर दिखती है अंदर से ! तेरे मियां को तो बहुत मज़ा आता होगा !
उसने शरमा कर कहा- कहाँ ! उनके पास मुझे देखने का समय नहीं है !
मैंने कहा- तो मेरे पास समय है ना ! मैं पूरा देख सकता हूँ !
फ़रेज़ शरमा गई और मुझे बाहर धक्का दे दिया। मेरा सामान बहुत दिनों बाद एकदम कड़क हो गया था, अब मेरे पास मुठ मारने के अलावा कोई हल नहीं था।
रात को तारेज़, फरेज़ एक ही बिस्तर में सोई और मैं और बच्चा एक बिस्तर में !
मुझे नींद नहीं आ रही थी, मेरी बीवी बहुत गहरी नींद सोती है, उसके सोते समय मैंने उसे कई बार चोदा है, उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। मैंने सोच लिया कि फरेज़ को चोदूँगा।
मैंने धीरे से तारेज़ को उठाने की कोशिश की, मैंने कहा- करीम बार बार उठ रहा है ! तू उसके पास सो जा !
तारेज़ नींद में उठ कर करीम के पास आकर सो गई और खुर्राटे मारने लगी। एक नशे की दवा मैंने एक कपड़े में मसल के फरेज़ को सुंघा दी और मैं बेफिक्र हो गया। मैंने फरेज़ को बाँहों में भरा और हाथों से उठा कर छत पर ले गया। वहाँ उसके पूरे कपड़े उतार कर देखा ! दूध तो माशा ! अपने मुँह से इतने पिए कि दोनों दूध लाल हो गये, कमर चूसी, इतनी चूसी कि दांत के निशान बन गए और अपने साढ़े सात इन्च के लण्ड को उसकी गुलाबी चूत में डाल दिया। तब फरेज़ ने थोड़ी उम-अहा की। पर उसे कहाँ पता चलने वाला था ! आधे घंटे तक चोदने के बाद मैंने उसे जैसे के तैसे कपड़े पहना कर जहाँ के तहाँ सुला दिया और मैं अपनी संतुष्टि की नींद छत पर लेता रहा।
सुबह मैंने देखा कि फरेज़ जब उठी तो उसका रवैया बदला नहीं पर मेरी तरफ देखकर हंसी।
मैने उससे पूछा- कैसी तबीयत है ? कैसा लग रहा है ?
उसने कहा- जीजू मेरी तबियत को क्या हुआ ! और हाँ जीजू ! ये परसों आ जायेंगे !
कह कर चली गई।
मैंने बिल्कुल पिछली रात की तरह तीनों रात किया।
चौथे दिन तारेज़ ने सुबह मुझसे बोला- साहब, करीम तो रोज़ अच्छा सोता है, तुम मुझे उठाते हो ! मैं समझती नहीं हूँ क्या ?
कल रात मैंने सब देख लिया- तुम फरेज़ को नशा देकर चोदते हो ! अरे मुझसे बोल देते ! मैं बिना नशे के चुदवा देती ! कोई बात नहीं ! फ़रेज़ को भी पता है !
कह कर फरेज़ के मियां के आ जाने पर वो अपने घर चली गई और तारेज़ उस दिन से रोज और फ़रेज़ भी कभी-कभी मुझसे चुदवाने लगी।

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