जीजा ने मेरा जिस्म जगाया (JIJA NE MAERA JISM JAGAYA)

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मेरा नाम नीना है, मैं बी.सी.ए की छात्रा हूँ, मेरा काम कंप्यूटर से जुड़ा है, मैं पाँच फुट पाँच इंच लंबी हूँ, सेक्सी हूँ जवान हूँ, जवानी मुझ पर जल्दी आ गई, रहती कसर मेरे सगे जीजू ने पूरी कर दी।

हम तीन बहने हैं, मैं नंबर तीन की हूँ, कोई भाई नहीं है, दोनों बहनें शादीशुदा हैं, उनकी शादी के बाद मैं अकेली और लाडली बन गई। हम रहते तो शहर में थे मगर गाँव में हमारी काफी ज़मीन है, दादा-दादी गाँव में रहकर नौकर चाकरों पर नज़र रखते हैं, पापा सुबह गाँव जाते, शाम को लौटकर आते।
मेरे बड़े जीजा की उम्र होगी बयालीस साल की, लेकिन उनके पुरुष अंग में जो दम अभी है वो सिर्फ मैं बता सकती हूँ, या वो बिस्तर जिस पर को किसी लड़की को चोदते होंगे।
वो अक्सर हमारे यहाँ आते रहते थे, उनका कपड़े का व्यापार है, वो माल लेने के लिए दिल्ली और लुधियाना अक्सर आते जाते थे।
बात तब से शुरु हुई जब मैं अठरह की हुई, शीशे में अपने नाज़ुक कूल्हे, सफेद मलाई की तरह चिकने दूध और जांघें देख अपने पर आते तूफ़ान का अंदाजा होता। जीजा का मेरे साथ काफी हंसी मज़ाक चलता था, वो मुझसे इतने बड़े थे कि किसी ने सपने में भी ना सोचा होगा कि कभी हमारे जिस्म मिल सकते हैं।
जीजू जब आते उनकी नज़र मेरे उभारों पर रुकने लगती, उनकी आँखों में वासना रहने लगी, कभी आँख दबा देते तो मैं शर्म से लाल गाल लेकर वहाँ से भाग जाती थी। तब वो मेरी देह को आँखों से जगाने लगे इशारों से जगाने लगे।
नतीजा यह हुआ कि मेरे पाँव उनके फिसलाने से पहले ही बाहर फिसलने लगे। हमारे ही घर के पास सतीश का घर था, उसके बाप का बहुत बड़ा कारोबार था, आये दिन उसके नीचे कोई नई कार होती, जब उसके घर के आगे से गुज़रती उसकी शैतानी नज़रों से मेरी नज़र एक बार मिलती पर मैं चेहरा नीचे कर चल आती। उसने मेरा छुट्टी का समय नोट किया हुआ था। चाहती तो मैं भी उसे थी, बस मोहल्ले के डर से एक कदम आगे नहीं बढ़ा पाती थी, उसका बड़ा भाई अमेरिका में था उसके माँ पापा कभी भारत, कभी अमेरिका में रहते थे।
उन दिनों वो अकेला रहता, खूब ऐश परस्ती करता। उधर जीजा ने खुद को नहीं रोका, वासना भरी आँखों से जब मुझे देखता मेरे अंदर अजीब सी हलचल होने लगती।
एक दिन उसने ऐसे हालात बना कर मुझे बाँहों में कस लिया, मुझे सहेली की बर्थडे पार्टी में जाना था, मैंने दीदी का सेक्सी सा सूट मांगा, पहन कर तैयार हो रही थी उनके ही कमरे में ! दीदी मम्मी के साथ मार्केट गई थी, जीजा ने मुझे पीछे से बाँहों में दबोच सीधा हाथ मेरे बगलों के नीचे से मेरे दोनों मम्मों पर रख मसल दिए, ब्लोए- मोना डार्लिंग, आज मेरा मूड है !
कह मेरी गर्दन पर होंठ लगा दिए।
मैं सिसकार पड़ी- जीजा, क्या कर रहे हो?
जीजा ने मुझे छोड़ा- सॉरी, मुझे लगा तेरी दीदी है, यह उसका सूट है।
जीजा के हाथ मम्मों से नीचे चले गए थे, अचानक बोले- खैर साली भी आधी घरवाली होती है !
कमर पर हाथ डाल मेरे चिकने पेट को सहलाने लगे।
“मुझे जाना है जीजा !” मैं भाग निकली।
लेकिन अंदर से जलने लगी, मेरी जवानी जगा दी जीजा ने।
जब सतीश के घर की आगे से निकली उसने पत्थर में लपट कागज़ फेंका मेरे काफ़ी आगे, जब वहाँ से निकली तो झुकी और उठा कर पत्थर फेंक कागज़ को ब्रा में घुसा आगे निक गई।
सहेली के घर जाकर वाशरूम में घुस कर कागज खोला, उस पर उसका मोबाइल नंबर था और आई लव यू लिखा था।
जब बाहर आकर मैंने सहेली से कहा तो वो बोली- मना मत करना ! अब तू भी एडवांस बन जा बन्नो ! उड़ने वाली कबूतरी बन !
उसने मुझे कहा- मैं अभी व्यस्त हूँ, मेरे कमरे से उसको फ़ोन कर ले !
जब मैंने फ़ोन किया तो वो बहुत खुश हुआ, बोला- मिलना चाहता हूँ, जब मैं तेरे सेक्सी मम्मों को कपड़ों में कैद आजादी के लिए तरसते देखता हूँ तो मेरा अंग खड़ा होने लगता है।
“सतीश ! आप भी ना बाबा ?”
“सच कहता हूँ, यहाँ से निकल ! मैं अकेला हूँ ! आज तेरे पास सही बहाना है !”
“लेकिन दिन में आपके घर कैसे घुसूँगी? सतीश, हम एक मोहल्ले के रहने वाले हैं।”
इसमें क्या बात है, मेरी कार के शीशे काले हैं, मैं लोंगों वाले मंदिर के पीछे से तुझे ले लूंगा, कार सीदी पोर्च में और फिर कोई डर नहीं !”
मैं फिसलने वाले रास्ते पर चलने को चल निकली, उसके घर पहुंच गई।
क्या बड़ा सा मस्त घर था ! वो मुझे अपने कमरे में ले गया, मेरा हाथ पकड़ा अपने दिल पर रख कर बोला- देख रानी, कैसे तेरे लिए धड़क रहा है।
उसने पीछे से कमर में हाथ डाल एक हाथ मेरे मम्मे पर रख बोला- क्या तेरा भी? क्या तेरा तो दाना कूद रहा होगा?
“आप भी ना !”
उसने मुझे लपका और मुझे बिछा मेरे ऊपर सवार होने लगा। पहले कपड़ों के ऊपर से मेरे रेशमी जिस्म का मुआयना किया फ़िर धीरे धीरे मुझे अपने रंग में रंगते रंगते एक एक कर केले के छिलके की तरह मेरे कपड़ों से मुझे आज़ाद किया।
मैं पहली बार ऐसे नजरिये से खुलकर किसी लड़के के नीचे नंगी हुई पड़ी अपनी जवानी लुटवाने को तैयार पड़ी थी।
मैं फिसलने वाले रास्ते पर चलने को चल निकली, उसके घर पहुंच गई।
क्या बड़ा सा मस्त घर था ! वो मुझे अपने कमरे में ले गया, मेरा हाथ पकड़ा अपने दिल पर रख कर बोला- देख रानी, कैसे तेरे लिए धड़क रहा है।
उसने पीछे से कमर में हाथ डाल एक हाथ मेरे मम्मे पर रख बोला- क्या तेरा भी? क्या तेरा तो दाना कूद रहा होगा?
“आप भी ना !”
उसने मुझे लपका और मुझे बिछा मेरे ऊपर सवार होने लगा। पहले कपड़ों के ऊपर से मेरे रेशमी जिस्म का मुआयना किया फ़िर धीरे धीरे मुझे अपने रंग में रंगते रंगते एक एक कर केले के छिलके की तरह मेरे कपड़ों से मुझे आज़ाद किया।
मैं पहली बार ऐसे नजरिये से खुलकर किसी लड़के के नीचे नंगी हुई पड़ी अपनी जवानी लुटवाने को तैयार पड़ी थी।
उसने अपना लौड़ा निकाला और मेरे हाथ में देकर बोला- देखो कितना बेताब है तेरी बेनकाब जावानी देख कर ! देख कैसे हिलौरें खा रहा है !
पहले मुझे अजीब लगा लेकिन जब मैंने शर्म को परे कर उसके लण्ड को सहलाया तो मुझे मजा आने लगा।
उसने थूक से गीली कर ऊँगली को मेरे दाने पर रगड़ी तो मानो मुझे स्वर्ग दिख गया हो।
“मजा आता है मेरी छमक छल्लो?”
“बहुत सतीश ! मुझे बहुत मजा आने लगा है !”
“हाय मेरी जान ! घूम जा !”
उसने लौड़ा मेरे होंठों पर रगड़ा और बोला- खोल दे अपना मुँह !
जैसे ही मैंने मुँह खोला, उसने मेरे मुँह में अपने सख्त लौड़े को घुसा दिया, पहले अजीब सा महसूस हुआ मगर अगले ही पल जब उसकी जुबान मेरे दाने को छेड़ने लगी, चाटने लगी तो मुझे उसका लौड़ा स्वाद लगने लगा।
उसने अपनी जुबान घुसा दी मेरी अनछुई फ़ुद्दी में और घुमाने लगा।
मैं तड़फ कर उसके लौड़े को चूसने लगी, आज पहली बार एहसास हुआ कि यह जवानी छुपानी नहीं चाहिए, इसका आनन्द लेना चाहिए जिसमें इतना मजा है।
कुछ देर की इस काम क्रीड़ा के बाद उसने मेरी चूत आज़ाद की और टाँगे फैलवा कर अपना लौड़ा मेरे छेद पर रख घुसाने लगा।
दर्द से भरा यह मीठा एहसास दर्द को भूल आनन्द को तरजीह देने लगा/
जल्दी उसका लौड़ा खुलकर मेरी चूत में घुसने-निकलने लगा। उसने पास पड़े अपने अंडरवीयर से अपना गीला लौड़ा साफ़ किया और खून साफ़ कर दुबारा घुसा दिया।
“हाय करो मेरे राजा ! बहुत सुख मिलता है !”
“आज से तू मेरी जान बन गई है नीना ! तुझे नहीं मालूम कब से इस पल का इंतज़ार था, तेरे ये बड़े बड़े मम्मे रोज देखता था, जी जल उठता था !”
उसने बातों के साथ साथ मेरी चुदाई नहीं रोकी।
“फाड़ डालो मेरे राजा ! चाहती तो मैं भी थी, बस डर और शर्म मिलकर मेरे कदम रोक देते थे !”
“चल पलट !” उसने मुझे पलटा, मेरी एक टांग उठाई और अपना लौड़ा तिरछा करके दुबारा घुसा दिया। मुझे अपने अंदर गर्म गर्म सा महसूस हुआ, मैं झड़ने लगी थी, जल्दी मेरी गर्मी से उसका रस पिंघल गया और दोनों ने एक दूसरे को कस के जकड़ कर अंतिम पल का खुलकर आनन्द उठाया, अलग होकर मैंने कपड़े पहने।
उसने जाती जाती के होंठ चूम लिए।
“यह सब सही था क्या?”
“हां रानी, क्यूँ नहीं सही था? सब सही था ! जवानी होती है मजे लेने के लिए !”
“मुझे कभी धोखा मत देना !”
“कभी नहीं !”
उसने कार निकाली थोड़ा सा आगे जाकर इधर-उधर देखा और मुझे उतार दिया।
जीजा ने जवान साली के जिस्म को हंसी मज़ाक में अपने स्वाद के लिए जगाया था, उसको सतीश ने आज कुछ देर के लिए सुला दिया था।
घर आई तो जीजा मिल गया।
पता नहीं जीजा इन कामों में कितना हरामी था, बोला- क्या बात है, आज तेरी चाल में फर्क है?
“नहीं तो? तुम भी जीजा जो मर्ज़ी बोलते हो?”
“साली, जिंदगी देखी है ! बोल यार के नीचे लेटकर आई हो ना?”
“शटअप जीजू ! आप भी न !”
“साली कपड़े देख अपने ! आज अंदरूनी कपड़े पहन कर नहीं गई? देख कैसे नुकीले हुए हैं?”
दिमाग में सोचा- हाय ! ब्रा वहीं रह गई थी ! उसने उतार फेंकी थी, शायद बैड के नीचे रह गई !
“उड़ने लगे रंग ना? पार्टी में गई थी या किसी कबड्डी के मैदान में? जाकर कपड़े बदल ले, नहीं तो साफ़ साफ़ पकड़ी जायेगी।”
पता नहीं जीजा इन कामों में कितना हरामी था, बोला- क्या बात है, आज तेरी चाल में फर्क है?
“नहीं तो? तुम भी जीजा जो मर्ज़ी बोलते हो?”
“साली, जिंदगी देखी है ! बोल यार के नीचे लेटकर आई हो ना?”
“शटअप जीजू ! आप भी न !”
“साली कपड़े देख अपने ! आज अंदरूनी कपड़े पहन कर नहीं गई? देख कैसे नुकीले हुए हैं?”
दिमाग में सोचा- हाय ! ब्रा वहीं रह गई थी ! उसने उतार फेंकी थी, शायद बैड के नीचे रह गई !
“उड़ने लगे रंग ना? पार्टी में गई थी या किसी कबड्डी के मैदान में? जाकर कपड़े बदल ले, नहीं तो साफ़ साफ़ पकड़ी जायेगी।”
जल्दी से कमरे में गई, दूसरा सूट निकाला, पहले कमीज़ उतारी, जल्दी से ब्रा डालने लगी, जीजा आ गया अन्दर, उसने रोक दिया- वाह ! लगता है उसने खूब मसले ! देख दांत के निशान ! हमसे मत छुपाया कर रानी ! हम इस खेल के मंझे हुए खिलाड़ी हैं !
जीजा ने मुझे लट्टू की तरह जोर से अपनी तरफ घुमाया और सीधे होंठ मेरे चुचूक पर टिका चूस लिया।
“जीजा, माँ-दीदी आने वाली हैं, पकड़े जायेंगे।”
“हमारे लिए ना और बाकी सब के लिए हां?”
“ऐसी बात नहीं है, सच में ! समय देखो !”
जीजा ने जोर से बाँहों में भींचा उनकी बाजुएँ सतीश से मजबूत थी, होंठ मेरे मम्मों पर रगड़ने लगे, मैं फिर से गर्म होने लगी।
जीजा मुझे चूमते हुए मेरे पेट पर चूमने लगे फिर धीरे से सलवार का नाड़ा खींच दिया, सलवार गिर गई वो भी वहीं बैठ पैंटी एक तरफ़ सरका कर चूत देखने लगे- साली, पकड़ी गई तेरी चोरी ! अभी चुदी हो ! ज्यादा वक़्त नहीं हुआ।”
मुझे शर्म सी आने लगी- आप भी ना?
“बता ना? यार से मिलकर आई हो ना? ताज़ी ताज़ी बजी है।”
“आपके पास यंत्र मंत्र है?”
“मेरे पास आ जा जान !” जीजा ने जिप खोल दी।
जैसे उन्होंने निकाला, मेरा मुँह खुला का खुला रह गया, इतना बड़ा इतना भयंकर लौड़ा, काले रंग का मोटा लौड़ा !
“जीजा मुझे नहीं तेरे संग लेटना तेरा लौड़ा बहुत ज़ालिम दिखता है !”
“रानी, अभी तो बच्ची है, तुझे मालूम होना चाहिए कि औरत मोटे से मोटा लौड़ा ही पसंद करती है, जिसका ख़ासा लंबा हो, तेरी दीदी इस पर मर मर जाती है, मगर जब से उसने बच्चा दिया है तब से वो ढीली हो गई है।”
“हाय जीजा, प्यार से मसलो इनको ! बच्ची हूँ अभी !”
जीजा मुँह में जुबान डाल जुबान से जुबान को लड़ाने लगे। मैं गर्म हो चुकी थी, उनका तरीका ख़ास था जिसने मुझे भुला दिया था कि मैं कुछ देर पहले ही चुदी हूँ, उनके हाथ बराबर मेरे मम्मों पर फिसल रहे थे, मस्ती से मेरी आँखें बंद थी।
“दीदी आ गई तो बवाल होगा !”
“साली साहिबा। डर मत !”
“आपका बहुत बड़ा है !”
“तेरे यार काबड़ा नहीं है क्या?”
“आप जितना नहीं है जीजा !”
“ले थाम इसको ! चूस !”
थोड़ी देर चूसने बाद रुक गई मेरा जबाड़ा थक गया तो जीजा ने मेरी टांगें फैला दी, पाँव की तरफ जाकर चूत चाटने लगे। मैं पूरी नंगी थी, जीजा जी की सिर्फ जिप खुली थी, रुकना जीजा !”
मैं उठी, जब चली तो जीजा बोला- हाय मर जाऊँ ! तेरी मटकती गांड ! साली, तेरी इस हवाई पटी पर हर कोई जहाज उतारना चाहेगा।
मैंने अपने कपड़े बाथरूम के पीछे टांग दिए, वापस गई तो जीजा ने लपक लिया, वो जहाज उतारने की पूरी तैयारी कर चुके थे, कंडोम पहन रखा था।
“यह क्या जीजा?”
“इससे तेरे अंदर मेरा बीज नहीं गिरेगा ! इसे निरोध कहते हैं रानी, कंडोम भी !”
“जीजा, आप बहुत गंदे हो !”
“साली जो चाहे कह ले, यह तो आज घुसेगा ही घुसेगा !” जीजा ने अभी सुपारा ही घुसाया कि मेरी जान निकलने लगी।
थोड़ा और किया।
सतीश से मेरी झिल्ली पूरी नहीं फटी थी क्यूंकि जीजा ने कपड़े से मेरी चूत साफ़ की तो उस पर चूत का रस और खून था।
मेरे होंठ दबा जोर का झटका दिया- मर गई !
मुझे लगा कोई खंजर मेरी चूत में घुसने लगा।
रहम नहीं खाया जीजा ने मेरे ऊपर !
तभी दरवाजे की घण्टी बजी और हम घबराने लगे।
जीजा ने दर्द से कराह रही अपनी साली को यानि मुझे छोड़ा- तू बाथरूम में घुस जा !
उन्होंने कपड़े नहीं उतारे थे, जल्दी से चादर की सलवटें ठीक की, मैं बाथरूम गई, बुरा सा मूड लेकर और दरवाज़ा खोला।
दीदी और माँ थी- इतनी देर?
“सो रहा था जानू !”
“नीना नहीं आई अभी सहेली के यहाँ से?”
“शायद आ गई।”
मैंने नहा धोकर कपड़े पहने, तौलिए से बाल पोंछती निकली
“आ गई?”
“दीदी ! हाँ आ गई !””तू कब आई बेटी?”
“बस माँ, आपके आगे आगे ही लौटी हूँ ! जीजू सो रहे थे तो मैंने जगाया नहीं, इसी लिए कुण्डी लगा कर नहाने चली गई/”
जीजू की नज़र में प्यासी वासना थी, खूबसूरत साली को नंगी करवा कर उसके एक एक अंग से खेल जब मंजिल की तरफ बढ़े तो निकालना पड़ा।
जीजा बोले- नीना, यह दोनों तो बाज़ार घूम आई, मैं सुबह से बोर हो रहा हूँ ! चल कहीं पानी-पूरी या चाट खाकर आयें !
दीदी से बोले- चलेगी क्या?
वो बोली- अभी थकी आई हूँ ! तुम जाओ !
जीजा तो धार कर बैठे थे कि आज नहीं छोड़ने वाले !
एक सुनसान सड़क पर कार रोक मुझे चूमने लगे !
“जीजा, यह क्या?”
“बस चुपचाप पिछली सीट पर टाँगें उठा कर लेट जा !”
“यहाँ !”
“हाँ रानी !”
“यहाँ नहीं जीजा ! कहीं पुलिस ने पकड़ लिया तो बदनाम होंगे। सोचो, घर में इतना घबरा गए थे ,यहाँ क्या होगा?”
“सही बात कहती है, पर एक बार पानी निकलवा दे !”
मैं उनकी मुठ मारने लगी, झुक कर बीच में चुप्पा भी लगा देती।
जीजा मेरी चोटी पकड़ कर मेरा सर आगे पीछे करने लगे।
अचानक उन्होंने अपने हाथ में लेकर मुठ मारनी चालू की और मेरे बालों को नोंचते दबा कर पूरा माल मेरे मुँह में निकाल दिया।
“जीजा, यह क्या मुझे उलटी हो जायेगी !”
“कुछ नहीं होगा, रात को तेरे कमरे में आऊँगा !”
“मगर दीदी?”
“उसके दूध में नींद की गोली मिला दूँगा, तू बस चूत को साफ़ सफाई कर तैयार कर ले !”
“जीजा, तू बहुत हरामी है !”
अचानक उन्होंने अपने हाथ में लेकर मुठ मारनी चालू की और मेरे बालों को नोंचते दबा कर पूरा माल मेरे मुँह में निकाल दिया।
“जीजा, यह क्या मुझे उलटी हो जायेगी !”
“कुछ नहीं होगा, रात को तेरे कमरे में आऊँगा !”
“मगर दीदी?”
“उसके दूध में नींद की गोली मिला दूँगा, तू बस चूत को साफ़ सफाई कर तैयार कर ले !”
“जीजा, तू बहुत हरामी है !”
“साली, जब तेरा जीजा पैदा हुआ था, उस दिन पड़ोस के गाँव में एक सौ एक हरामी मरे थे।”
“आप भी ना !”
“वैसे माल टेस्टी था ?”
“ठीक ठाक था !”
हम घर लौटे। खाने के बाद मैं सबके लिए दूध लेकर गई। दीदी वाले गिलास में जीजा की दी पुड़िया मिला दी।
मैं अपने बिस्तर में निक्कर और ब्रा में ही लेट गई, मैंने दरवाज़ा पूरा बन्द नहीं किया था।
मेरी आँख लग गई। रात के डेढ़ बजे जीजा मेरे कमरे में आया, कुण्डी चढ़ाई, कब मेरे बिस्तर पर आया मुझे पता नहीं लगा। जब मैंने अपनी नाभि पर किसी चीज़ का स्पर्श पाया तो मैं उठी- जीजा, आप कब आए?
“रानी, पांच मिनट पहले ! क्या बात है? लगता है जीजा के मूड का साली को ख़ासा ख्याल है, तभी इतने कम कपड़ों में लेटी है, तुझे अपने नीचे लिटाने का मेरा सपना आज पूरा हो रहा है।”
“तुम हो ही हरामी ! सच बोलना जीजा, जब तुमने मुझे बाँहों में लिया था दीदी के भलेखे में, तब तुम्हें मालूम था ना कि मैं हूँ?”
“हाँ रानी !”
जीजा ने मुझे पूरी ही नंगी कर दिया, खुद भी हो गया।
क्या चौड़ा सीना था, दिन में उन्होंने कपड़े नहीं उतारे थे, मैं जानदार मर्द के नीचे लेट कर सेक्स सुख प्राप्त करने की राह पर दूसरी बार खड़ी थी।
तभी जीजा ने अपना लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस दिया, छोटा सा लौड़ा मेरे होंठों में आकर खड़ा होने लगा। देखते ही विशाल आकार ले गया। जब चूसना मुश्किल हुआ तो मैंने जुबान से उसको चाटना शुरु किया।
जीजा ने जल्दी अपना काम पूरा किया, कहीं दिन की तरह अब भी काम अधूरा ना रहे। जीजा और मेरे कमरे का बाथरूम सांझा था, दीदी जगती भी तो लगता जीजा बाथरूम में हैं। जीजा ने कंडोम चढ़ाया और घुसाने लगे।
चीरता हुआ लौड़ा मेरे बदन में घुस गया, मेरे होंठ जीजा ने अपने होंठों में ले रखे थे। जब तक मैं सामान्य नहीं हुई, जीजा ने छोड़े नहीं मेरे होंठ्।
आधा घंटा जीजा ने मुझे अलग अलग तरीकों से जम कर ठोका, बड़ी मुश्किल से उनका काम हुआ।
दीदी पढ़ाई आगे कर रही थी इसलिए वो यहीं रहती थी। जीजा का अपना बिज़नस था इसलिए वो वक़्त-बेवक्त आते और घर में पड़े रहते।
माँ सुबह ड्यूटी जाती, मैं कॉलेज ! दीदी अपने कॉलेज !
एक दो दिन छोड़ मैं एक आधा दिन क्लास लगा घर आ जाती और जीजा भी फिर बंद कमरे में रासलीला रचाते।
उधर जिस दिन जीजा से नहीं मिलना होता था, सतीश के घर चली जाती, मैं उस पर शादी का दबाव डालने लगी थी, जीजा ने मेरी देह को जगाया था और सतीश ने उसे आग लगाई थी, दोनों से खुश थी मैं।
तभी मेरी बातें इंटरनेट चैट पर दिल्ली के रहने वाले एक एम.पी के बेटे से होने लगी, उसका नाम राघव था। वेबकैम पर मैं उसको देख चुकी थी, उसने मुझे अपना मोटा लंबा लौड़ा दिखाया, मुझे भी वेबकैम पर आने को कहता।
आखिर एक दिन घर अकेली थी, मैंने उसको अपनी देह के दर्शन करवाए। मेरा रूप-रंग, जवानी देख वो मेरा दीवाना बन गया, मेरी खातिर वो फलाईट पकड़ मेरे शहर आ गया। वो एक बड़े होटल में रुका और मुझे कमरा नंबर दे दिया।
कॉलेज में पूरा बंक मार मैं उससे मिलने चली गई। मुझे देख वो बहुत खुश हुआ, उसने तोहफे में मुझे हीरे की अंगीठी दी, साथ एक महंगा मोबाइल।
मुझे देख उससे रुका नहीं गया और उसने मुझे बाँहों में भर लिया, चूमने लगा, सहलाने लगा।
मैं उसके आगोश में खुद बहकने लगी।
उसने पहले मेरा टॉप उतार फेंका, लाल रंग की अपलिफ्ट ब्रा में कैद मेरे बड़े बड़े मम्मे दबाये और फिर मेरी जींस उतारी।
मेरे एक एक अंग को उसने नथुनों से सूंघा, एक-एक अंग को प्यार किया। मैंने ताज़ी शेव कर चूत चिकनी कर रखी थी, उसने मेरी चूत पर पहला वार होंठों का किया, साथ ही जुबान नाम की मिज़ाईल चूत में दाग दी।
मैं गांड उठाने लगी, मैंने उसको अपने ऊपर खींचा और चूमने लगी, जंगली कुतिया बन उसे चूमने लगी।
मेरा गर्म रूप देख कर बोला- तू तो उससे भी ज्यादा मस्त निकली जितना मैं तुझे देख कर सोचता था।
मैंने उसके लौड़े को पकड़ कर मसला।
उसे क्या पता था कि जीजा ने मेरी देह को ऐसा जगाया था कि अब उसका सोना कठिन था। सतीश ने ऐसा दरवाज़ा खोला कि अब मेरा दिल दरवाज़े पर नये-नये मेहमानों की दस्तक पसंद करने लगा।
आज नया ही मेहमान था। जब मैंने उसका लौड़ा चूसा, उसका तो बुरा हाल होने लगा, मैंने खुद उसके लौड़े को अपनी चूत पर रगड़ा, उसने मेरा मूड गर्म देख जल्दी जल्दी से मेरी टांगें फैला दी और दरवाज़ा खटकाया।
“खुला है राघव ! खुला है।” उसने अपना लौड़ा उतारा। मैं आंखें मूँद एक नई सवारी को सैर करवाने लगी, उसने मुझे दीवार से हाथ लगवा खड़ा किया आयर एक टांग उठा कर घुसा दिया।
क्या जुगाड़ू था ! पूरा दिन उसके साथ बिताया।
अगले दिन उसकी दोपहर की फ़्लाईट थी दो बजे ! एक बजे तक हम साथ थे। वह महीने में दो बार आया और मुझे मसला। सतीश और जीजा पहले ही मुझे मसलते थे तो जवानी अब और बेकाबू होने लगी, मुझे पैसे-तोहफ़े का चस्का लग गया था।
अब मैंने इंटरनेट पर चंडीगढ़ के एक बंदे से बात करनी शुरु कर दी थी, उसका लौड़ा बहुत बड़ा और मस्त था, उसके साथ उसका दोस्त था, दोनों बहुत मस्त थे, मुझे वेबकैम पर नंगी देखा तो मिलने के लिए बेताब होने लगे।
मैंने मना किया तो बोले- क्या लोगी मिलने का? जो कहोगी दूँगा। प्रोग्राम बनाओ ! कहती है तो तेरे ए.टी.एम खाते में पैसे डलवा देता हूँ।
उसने मेरे खाते में दस हज़ार रुपये डाले, दोनों चंडीगढ़ से अपनी ही कार से मेरे शहर आये, एक आलिशान होटल में रुके। पहली बार में एक साथ दो बन्दों के साथ एक ही बिस्तर पर लेटने वाली थी। मुझे कमरे में देख उनके चेहरे खिल उठे।
“वाह ! जैसा देखा था, सोचा था, सामने से तो तू और खूबसूरत है रानी !” मेरे गाल पर लटकी बालों की लट को हाथ से उठाते उसने अपने होंठ मेरे लाल पतले होंठों पर रख दिए।
मैंने ब्रा से पर्स निकाला, एक तरफ़ रख और मोबाइल भी निकाला।
“हाय ! क्या खूब जगह है रखने की !”
सेंडल उतार उन दोनों के बीच लेट गई, एक-एक कर दोनों की शर्ट उतारी और उनमें से एक ने मेरा टॉप उतारा, काली ब्रा में गोरे मम्मे देख उनके खड़े हो गए। दूसरे ने मेरी जींस खींच कर उतारी। काली पैंटी में गोरी गाण्ड देख दोनों ही पागल हो गए। वो मेरे चूतड़ दबा कर चूमने लगे।
मैंने उनके लौड़े निकाले, दोनों के लौड़े बड़े थे, एक मेरे चूतड़ चूमता हुआ चूत चाटने लगा। मैंने दूसरे का मुँह में लेकर चूसा। वह तेरे जैसी मस्त रंडी पर तो लाखों कुर्बान ! ऐसा माल तो किसी दलाल ने नहीं दिलवाया था आज तक !
“ऐसी ही हूँ मैं राजा !”
तभी उनकी मंगवाई बीयर और दारु पहुँच गई। दारु पीकर दोनों और पागल हो गए, पहले एक ने घुसाया और चोदने लगा। तभी दूसरे ने लौड़ा मेरी गाण्ड में दे दिया। मैं दर्द से तड़फने लगी, लेकिन उसने पैसा दिया था तो उसको वसूल भी करना था।
जल्दी ही एक साथ दोनों छेदों में लौड़े घुसवा कर आज मैं पूरी पूरी रण्डी बन कर तैयार थी, एक साथ दोनों छेदों का मजा लूटने लगी।
पूरा दिन होटल में चुदने के बाद घर लौटी, चोदने के बाद तीस हज़ार और दिए मुझे उन्होंने !
और मैं खुश थी !
उनमें से कुछ पैसों के कपड़े खरीदे, बाकी अकाउंट में।

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