हंसती खेलती जवान लड़कियाँ (Hansti Khelti Jawan Ladkiyan)

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आज की ये ५ no.  सेक्स कहानी हे । में सुनीता भाभी आप को स्वागत करता हूँ । दोस्तो आज पेश है एक बिलकुल ही नई कहानी ।

मगर कहानी सुनाने से पहले मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूँ, कहानी पढ़ने के बाद कमेंट करें , वे सिर्फ वहाँ से कहानी पढ़ना शुरू करते हैं जहाँ से असली चुदाई कार्यक्रम शुरू होता है।
जबकि लड़कियाँ बिलकुल शुरू से कहानी पढ़ती हैं और जहाँ से ऐक्शन शुरू होता है वहाँ तक पहुँचते उनका पूरा मूड बन जाता है, सिर्फ इसी लिए उनकी ई मेल्स जो मुझे मिलती हैं, उनमें पूरी डीटेल से बातें कही और पूछी जाती हैं।
जबकि लड़के क्योंकि शुरू से कहानी पढ़ते ही नहीं हैं, इस लिए वे कहानी के करैक्टर को ही सच समझ कर उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज देते हैं, उसे चोदने के लिए रिक्वेस्ट भेज देते हैं, जबकि सच्चाई यह होती है कि कहानी में सिर्फ करैक्टर होता है, सच्चाई तो होती ही नहीं है।
इसी लिए लड़कों ने सिर्फ आधी कहानी पढ़ी, मुट्ठ मारी पानी निकाला और बाद में ईमेल भेजेंगे ‘प्लीज मुझसे सेक्स कर लो, मैं तुम्हें पूरा मज़ा दूँगा।’
अरे भाई पहले देखो तो सही कि कहानी सचमुच आपबीती है या काल्पनिक है। इस लिए मेरी रिक्वेस्ट है, प्लीज कहानी को शुरू से अंत तक पढ़ें, ताकि आपको कहानी समझ भी आए और कहानी का मज़ा भी आए।
अब ऐसे ही एक दिन मेरी कोई कहानी पढ़ कर मुझे एक लड़की ने ईमेल भेजा। अब बहुत से लड़के कहेंगे कि हमारी भी किसी से दोस्ती करवा दो, अरे भाई अपना तजुरबा कहानी के रूप में लिखो, अन्तर्वासना पे डालो और हो सकता है कोई लड़की आपकी कहानी पढ़ कर खुद आपसे दोस्ती करने की रिक्वेस्ट भेज दे।
खैर मुद्दे पर आते हैं, लड़की ने मेल भेजा और दोस्ती करने की रिक्वेस्ट भी भेजी।
मैंने भी जवाब में मेल भेजा, उससे पूछा कि वो कौन है, कहाँ रहती है और मुझसे दोस्ती क्यों करना चाहती है।
उसने जवाब दिया कि मैं आपके ही शहर में रहती हूँ, आपकी कहानी अन्तर्वासना पर पढ़ी और मैं आपसे दोस्ती करना चाहती हूँ और कुछ बातें भी शेयर करना चाहती हूँ।
लड़की ने अपना नाम सुदीप्ति बताया, उम्र 20 साल और बी टेक की स्टूडेंट बताया।
मैंने भी उसे अपने बारे में सब सच बताया और यह भी बता दिया कि मेरी उम्र 45 साल है और मैं शादीशुदा हूँ।
खैर दोनों में ई मेल्स का आदान प्रदान होता रहा। करीब करीब 20-25 दिन हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत सारी ई मेल्स की और दोनों ने एक दूसरे के बारे में बहुत कुछ जान लिया।
सिर्फ वही नहीं, उसकी कुछ और फ्रेंड्स भी थी, जो अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ती थी और नेचुरली कहानियाँ पढ़ते पढ़ते हस्तमैथुन भी करती थी, और सेक्सी कहानी पढ़ते पढ़ते हस्तमैथुन करना बड़ी आम सी बात है।
एक दिन मैंने उससे पूछा कि क्या वो मुझसे मिलना चाहेगी।
उसने जवाब दिया कि वो मिलना तो चाहती है पर उसे डर सा लगता है।मैंने उसे कहा- ऐसा करते हैं, किसी पब्लिक प्लेस में मिलते हैं।
उसने पूछा- क्या मेरे साथ मेरे कुछ फ्रेंड्स भी आ सकते हैं?
मैंने कहा- मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है, बस इतना बता दो कि वो बॉय फ्रेंड्स हैं या गर्ल फ्रेंड्स।
उसने बताया कि उनका चार लड़कियों का ग्रुप है, चारों फास्ट फ्रेंड्स हैं, तो वो चारों आएंगी।
मैंने प्रोग्राम तय करने को कहा।
प्रोग्राम यह तय हुआ कि शहर के क्लासिक होटल में सब मिल कर लंच करते हैं।
मैंने मंजूर कर लिया, उसको भी मंजूर था।
तय दिन मैं करीब एक बजे तैयार हो कर क्लासिक होटल पहुँच गया।
बरसों बाद मैं किसी लड़की के साथ डेट पे जा रहा था तो मैं अपनी पूरी तैयारी के साथ गया।
होटल में जा कर मैं एक 6 सीटर टेबल पर बैठ गया।
करीब आधे घंटे बाद सामने से चार लड़कियाँ होटल में दाखिल हुई। जब वो डाइनिंग हाल में आई, मैं सामने से उठ कर खड़ा हुआ। सुदीप्ति उनमे सबसे आगे थी, वो मेरे पास आई तो मैंने उसे हैलो कहा, मैंने सबसे हाथ मिलाया।
चारों लड़कियाँ 19-20 साल की थी, बहुत ही प्यारी प्यारी, गोरी चिट्टी, सबकी सब सुंदर और सबके नर्म नर्म बदन, जो मुझे उनके हाथ मिला कर छूने से पता चला।
हम सब बैठ गए, सुदीप्ति के साथ मैं मेल पे बात करता रहता था सो, वो मुझसे थोड़ा खुल कर बात कर रही थी, बाकी लड़कियाँ शरमाई सी चुपचाप बैठी थी।
पहले कोल्ड ड्रिंक्स आ गई, पीते पीते बातचीत शुरू हो गई।
सुदीप्ति ने पूछा- सबसे पहले यह बताइये कि आप कहानी कैसे लिखते हैं?
मैंने कहा- कहानी लिखना कोई मुश्किल काम नहीं, जैसे अगर मैं तुम्हें कहूँ कि माइ फ्रेंड का एस्से लिखो, ठीक वैसे ही।
सुदीप्ति- मगर एस्से लिखने और कहानी लिखने में तो बहुत फर्क होता है।
मैंने कहा- नहीं, ज़्यादा फर्क नहीं होता, एक आइडिया होता है, जैसे माइ फ्रेंड का एस्से लिखते वक़्त तुम अपने दिमाग में अपने दोस्त की पिक्चर बनाते हो, ठीक वैसे ही कहानी लिखते वक़्त मैं अपने दिमाग में एक फिल्म बनाता हूँ, कि कौन सा करैक्टर क्या कहेगा, क्या करेगा।
सुदीप्ति- कितने टाइम में एक कहानी लिख लेते हो?
मैंने कहा- डिपेंड करता है, अगर कोई धांसु आइडिया दिमाग में क्लिक कर गया तो मैं यहाँ बैठे बैठे भी कहानी बना सकता हूँ, अगर कोई आइडिया न क्लिक किया तो हो सकता 6 महीने में मैं एक भी कहानी न लिख पाऊँ।
सुदीप्ति- अगर मैं कहूँ कि अभी के अभी एक कहानी लिखो तो, लिख सकते हो?
मैंने कहा- हाँ, बताओ किस पर कहानी लिखूँ? तुम पर या तुम्हारी किसी फ्रेंड पर जो बोलती नहीं हैं, चुपचाप बैठी हैं।
मेरी बात सुन कर सब की सब हंस पड़ी।
सुदीप्ति- अरे पहले तो सबकी सब बोल रही थी, मैं ये पूछूंगी, मैं ये पूछूंगी, अरे अब सामने बैठे हैं, सब पूछ लो न क्यों नाटक कर रही हो?
सुदीप्ति ने कहा तो सब की सब फिर हंस पड़ी।
मैंने कहा- दरअसल बात यह है सुदीप्ति कि हम दोनों तो एक दूसरे को पहले से जानते हैं, मगर ये सब तो आज मुझे पहली बार मिली हैं, इसलिए शर्मा रही हैं, इसके लिए इन्हें खोलना पड़ेगा।
सुदीप्ति- हाँ हाँ, खोलो इनको, अरे यार वी आर जस्ट फ़्रेन्ड्ज़, दोस्त हैं, शर्माओ मत, अगर तुम ऐसे शरमाओगी तो बात कैसे बनेगी।
मैंने कहा- ऐसा करते हैं, एक एक करके सब बताओ, कि तुम में से किस किस को मेरी कौन कौन सी कहानी पसंद आई, और क्यों पसन्द आई?
सबसे पहले शिप्रा थोड़ा सा सकुचती हुई बोली- मुझे आपकी कहानी जंगल में मंगल बहुत पसंद आई!
फिर अदा बोली- मुझे जीजू से किचन में चुदवाया वाली पसंद आई।
एक एक करके सबने अपनी अपनी पसंद की कहानी बता दी।
मैंने पूछा- ओ के ठीक है, थैंक्स फॉर लाइकिंग माइ स्टोरीज़, अब एक बात यह बताओ, अगर तुमको मेरी कहानी की हीरोइन बनने का मौका मिलता तो, क्या तुम अपने आप को उस सिचुऐशन में फिट कर पाती?
मैंने कहा तो सब की सब फिर से शर्मा कर नीचे मुँह करके मुस्कुराने लगी।
मैंने फिर पूछा- चलो ये बताओ, जब तुम मेरी लिखी कहानी पढ़ती हो तो क्या करती हो” पता तो मुझे था, मगर मैंने जान बूझ कर पूछा था।
सुदीप्ति बोली- मैं बताऊँ, सब की सब उंगली से करती हैं।
उसने तो कह दिया मगर बाकी सब की सब शर्मसार हो गई।
मैंने कहा- देखो, यह एक नैचुरल प्रोसैस है, अगर तुम में सेक्सुयल फीलिंग्स आ रही हैं, तो तुम्हारी उम्र के लिहाज से ठीक है, सब की सब अब जवान हो, अगर तुम सब हाथ से हस्तमैथुन करती हो तो कोई प्रोब्लम नहीं, इस उम्र में करीब करीब सभी लोग ऐसा करते हैं, मैंने भी किया है, मगर जैसे जैसे उम्र बढ़ती चली जाती हैं, इन चीजों की ज़रूरत नहीं रहती।
तभी शिप्रा ने धीरे से पूछा- क्या आप अब भी मास्टरबेट करते हैं?
मैंने कहा- नहीं, अब ज़रूरत नहीं महसूस होती, और जब बीवी है तो फिर मास्टरबेट करने की ज़रूरत क्या है।
अदा बोली- आपने अब तक कितनी बार सेक्स किया है?
उसकी बात सुन कर सब लड़कियाँ हंस पड़ी।
सुदीप्ति- पागल ये भी कोई पूछने वाली बात है?
मैंने कहा- खैर कभी गिना तो नहीं पर फिर भी 17 साल हो गए शादी को सैकड़ों बार किया होगा, या हो सकता है हजारों बार… तुम में से कभी किसी ने किया है?
मैंने पूछा।
सबने ना में सिर हिलाया।
मैंने फिर पूछा- कभी किसी ने कोई छेड़छाड़ की हो, किसी का कोई बॉय फ्रेंड, किसी भी किस्म कोई ऐसा एक्सपीरियंस जिसमें सेक्स शामिल हो?
अदा बोली- शिप्रा का था!
मैंने पूछा- तो शिप्रा क्या हमें बताओगी, तुम्हारा बॉय फ्रेंड का तजुरबा कैसा रहा?
शिप्रा बोली- मैं उसे दिल से सच्चा प्यार करती थी, मगर वो हमेशा मुझे गलत काम के लिए उकसाता था। अक्सर मेरे साथ बदतमीजी करता, तो मैंने उससे ब्रेक अप कर लिया।
मैंने कहा- मतलब यह कि तुम में से किसी को भी सेक्स का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, मगर जब कहानियाँ पढ़ती हो तो दिल तो करता होगा कि कोई तुम्हारा बॉय फ्रेंड हो, और जो कहानी का हीरो कर रहा है या हीरोइन कर रही है, वो सब तुम भी करके देखो?
अदा बोली- दिल तो बहुत करता है, मगर डर लगता है, कोई हमारा गलत फायदा न उठा ले, हमसे सब कुछ करके हमें छोड़ के चला जाए।
मैंने कहा- एक बात बताऊँ, जो पहले सब कुछ कर लेता है, वो इसी लिए करता है कि बाद में उसने छोड़ के भागना होता है, जिसने शादी करनी होती है, वो कभी पहले नहीं करता।
हमारी बातों के बीच ही हमने खाने का ऑर्डर दिया। खाना आया, सब खाना खा रहे थे और बातें भी कर रहे थे।
खाना खाते खाते सुदीप्ति ने कहा- एक बात और है, जो मैं आप से पूछना चाहती हूँ, आप हमारे दोस्त बने हो तो आप पर विश्वास करके पूछना चाहती हूँ।
मैंने कहा- हम सब दोस्त हैं, और मैं अपने दोस्तों की बहुत इज्ज़त करता हूँ, उन्हें प्यार करता हूँ। तुम कोई भी बात बेधड़क पूछो, हम पांचों में ही रहेगी।
सुदीप्ति बोली- दरअसल बात यह है कि हम सब पहले यह सोच रही थी कि जब आप से मिलेंगी और अगर आप से बातचीत ठीक ठाक चली तो हम आप से एक फरमाइश करेंगी, अगर आप हमारी बात मानो तो?
मैंने कहा- कहिए, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?
सुदीप्ति ने पहले अपनी फ्रेंड्स को देखा, सबने आखों आखों में एक दूसरे को कुछ इशारा किया, फिर सुदीप्ति बोली- हमने फिल्मों वगैरा में तो कई बार देखा है, मगर सचमुच में कभी नहीं देखा।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
मैं उनकी बात समझ गया- मगर ऐसे कैसे मैं आप को यहाँ पे दिखा सकता हूँ, इसके लिए तो प्राइवेसी चाहिए।
सुदीप्ति ने पूछा- तो?
मैंने कहा- तो ऐसा हो सकता है कि हम इसी होटल में एक रूम ले लेते हैं, और हम सब एक साथ उस रूम में चलेंगे, अगर तुम सब को मंजूर हो तो? अंदर जा कर जो मर्ज़ी देखो।
मैंने उन्हें ऑफर दी।
सुदीप्ति बोली- कोई खतरा तो नहीं?

मैंने कहा- नहीं, मेरा एक दोस्त इस होटल वाले को जानता है, अगर तुम कहो तो मैं रूम का इंतजाम कर सकता हूँ।
चारों लड़कियों ने आपस में सलाह करके हाँ कर दी।
अब तो मुझे खाना बेस्वाद लगने लगा, जिसके सामने चार चार कुँवारी लड़कियाँ, लण्ड लेने को बैठी हों, उसे दाल मखनी, शाही पनीर और चिकन कहाँ स्वाद लगेगा।
मैंने झट से अपने दोस्त को फोन लगाया, और उससे कहा- यार ऐसा कर क्लासिक होटल में आ, एक कमरा बुक करवा के दे ईमीजीएटली।
वो बेचारा भागा भागा आया और खाना खत्म होते होते मेरे पास रूम की चाबी थी ।

अब तो मुझे खाना बेस्वाद लगने लगा, जिसके सामने चार चार कुँवारी लड़कियाँ, लण्ड लेने को बैठी हों, उसे दाल मखनी, शाही पनीर और चिकन कहाँ स्वाद लगेगा।
मैंने झट से अपने दोस्त को फोन लगाया, और उससे कहा- यार ऐसा कर क्लासिक होटल में आ, एक कमरा बुक करवा के दे तुरन्त।
वो बेचारा भागा भागा आया और खाना खत्म होते होते मेरे पास रूम की चाबी थी।
मैंने पूछा- गर्ल्स, तो चलें रूम में?
सब की सब शर्मा गई, मैंने कहा- देखो, यह सिर्फ आपकी जानकारी बढ़ाने के लिए है, यह समझो आपकी सेक्स एजुकेशन की क्लास है। डरना नहीं, घबराना नहीं, अगर नहीं दिल करता तो मत जाओ।
मगर किसी ने इंकार नहीं किया।
मैं आगे चल पड़ा और वो सब मेरे थोड़ा पीछे आ रही थी।
मैंने कमरा खोला, मेरे पीछे वो सब भी अंदर आ गई, मैंने कमरे की कुंडी लगा ली और जाकर बेड पर बैठ गया।
चारों लड़कियाँ भी मेरे सामने ही बेड पर बैठ गई, मैंने कहा- हाँ तो अब सबसे पहले ये कि तुम सब अपनी अपनी शर्म छोड़ो। जो मैं कहता हूँ, मेरे पीछे तुम सब भी कहो, बोलो, ‘लण्ड’।
मैंने कहा तो सब की सब हंसने लगी मगर सब की सब धीरे से बोली- ‘लण्ड’
मैंने कहा- यार मुझे तो सुना नहीं, दोबारा कहो!
सबने फिर ‘लण्ड’ कहा मगर इस बार सब ने थोड़ा ऊंचा और साफ कहा।
‘अब बोलो, चूत!’ मैंने कहा।
सबने कहा- ‘चूत’
‘गाण्ड’
‘गांड’
‘चुदाई’
‘चुदाई’
‘मेरी चूत मारो’
सब हंस पड़ी- मेरी चूत मारो!
‘मुझे लण्ड चाहिए’
‘मुझे लण्ड चाहिए’
हम सब हंस पड़े।
मैंने कहा- देखो अब ऐसा है कि अगर आपको मेरा लण्ड देखना है, देखना क्या है यार, तुम्हारी चीज़ है, अपने हाथ में लेकर देखना, मुँह में लेकर चूसना, मगर उसके लिए आपको फीस देनी होगी।
मैंने अपनी शर्त सामने रखी।
‘क्या फीस देनी होगी?’ अदा ने पूछा।
मैंने कहा- देखो अगर मैं तुम्हें कुछ दिखाऊँगा, तो तुम्हारा भी कुछ देखूँगा, इट्स फेयर, यू नो, गिव एंड टेक, किसी को कोई ऐतराज? मैंने देखा कि सब की सब शर्मा ज़रूर रही थी मगर न किसी ने भी नहीं की।
‘तो फिर इट्स आ डील, चलो बताओ सबसे पहले कौन क्या देखना और दिखाना चाहती है?’ मैंने कहा।
अदा बोली- हमें तो बस वो देखना है।
मैंने कहा- वो का कुछ नाम भी होता है।
पहली बार साक्षी बोली- लण्ड देखना है।
मैंने कहा- इतनी दूर क्यों हों मेरे पास आओ!
वो बेड पे उठ कर मेरे पास आई, मैंने पूछा- साक्षी, क्या तुम्हें अपना लण्ड दिखलाने के बदले मैंने तुम्हरी टीशर्ट और ब्रा के अंदर हाथ डाल कर तुम्हारे बूब्स के साथ खेल सकता हूँ।
मेरी बात सुन कर उसने सुदीप्ति की ओर देखा, उसने इशारा कर दिया, तो साक्षी बोली- हाँ!
मैंने कहा- सब लड़कियाँ पास आ जाओ!
जब सब मेरे बिल्कुल आस पास आ गई, तो मैंने पहले अपनी पैंट खोली और फिर अंडर वियर के ऊपर से हाथ में पकड़ के हिला के दिखा दिया- देखो, इसे कहते हैं लण्ड!
सब की सब बोल पड़ी- यह तो चीटिंग है, बाहर निकाल के दिखाओ।
मैंने कहा- अच्छा!
और मैंने अपना अंडर वियर भी घुटनों तक उतार दिया।
उस वक़्त तक मेरा लण्ड पूरी तरह से अकड़ा नहीं थी।
शिप्रा पहली लड़की थी जिसने मेरा लण्ड अपना हाथ में पकड़ा और बोली- यह तो ढीला सा है, सख्त नहीं है।
मैंने कहा- अब तुमने छू लिया है तो अब अकड़ जाएगा।
शिप्रा को देखा कर सुदीप्ति और अदा ने भी बारी बारी से मेरे लण्ड को अपने हाथों में पकड़ के देखा और इतने प्यारे प्यारे नर्म नर्म हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लण्ड तो पत्थर की तरह सख्त हो गया।
अब जब लण्ड तन गया तो मैं अपनी पैंट और अंडरवियर बिल्कुल उतार दिया और अपने दोनों हाथ बड़े आराम से साक्षी के दोनों बूब्स पकड़ लिए।
वाह क्या नज़ारा था… कितने कोमल और प्यारे बूब्स थे।
साक्षी क्या, उसके बाद तो मैंने सुदीप्ति, अदा और के भी बूब्स दबा कर देखे। किसी लड़की ने कोई विरोध नहीं किया। वो सब तो लण्ड से खेलने में लगी थी और मैं वैसे पागल हुआ पड़ा था, किसी के चूतड़ सहला रहा था, किसी की जांघों पे हाथ फेर रहा था, किसी की पीठ पे, किसी के पेट पर… मगर मेरा दिल नहीं भर रहा था।
मैंने कहा- देखो भाई, मेरे पास एक ही चीज़ थी वो मैंने तुम सब को दिखा दी है, अब तुम सब अपनी अपनी कीमती चीज़ें मुझे दिखाओ।
मैंने कहा तो अदा बोली- अच्छा जी, आप तो बहुत चालाक हो।
मैंने कहा- इसमें चालाकी की बात नहीं, अगर नहीं दिल करता तो कोई ज़बरदस्ती नहीं, मगर फिर भी मेरा इतना तो हक़ बनता है। साक्षी जो मेरी गोद में ही बैठी थी और जिसके ब्रा में हाथ डाल कर मैं उसके बूब्स दबा रहा था, मैंने उसकी टी शर्ट ऊपर उठानी शुरू की और पहले टी शर्ट और फिर बाद में मैंने उसका ब्रा भी उतार दिया।
ब्रा में से दो कच्चे आमों जैसे दो बड़े ही प्यारे और गोल बूब्स निकले, मैंने उसके निप्पल को मुँह में लिया और चूसा, तो साक्षी के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली।
उसकी सिसकारी सुन कर सब के कान खड़े हो गए।
मैंने सुदीप्ति को अपनी तरफ खींचा और उसकी टी शर्ट भी ऊपर को उठाई, जिसे उसने खुद ही ब्रा के साथ ही उतार दिया। अब मेरे दोनों तरफ दो नाज़ुक कलियाँ अपने नाज़ुक फूलों जैसे बूब्स ले कर बैठी थी।
मैंने बारी बारी से दोनों के बूब्स चूसे।
अब तो मेरा लालच बढ़ता ही जा रहा था, मैंने बाकी दोनों लड़कियों के भी अपनी अपनी टी शर्ट्स उतारने को कहा।
उन्होंने सिर्फ टी शर्ट्स उतारी मगर ब्रा पहने रखी।
मैं तो ऐसे महसूस कर रहा था जैसे कोई बादशाह हूँ या कोई शेख़ जिसके चारों तरफ नंगी लड़कियाँ बैठी थी, उसका दिल बहलाने के लिए।
उसके बाद मैंने अपनी शर्ट और बानियान भी उतार दी और बिल्कुल नंगा हो गया। मैंने उनको बड़ी अच्छी तरह से अपना लण्ड और अपने आँड दिखाये और इनकी उपयोगिता भी बताई।
उसके बाद मैंने बारी बारी से चारों लड़कियों के बूब्स अपने मुँह के लेकर चूसे और जिन दो लड़कियों ने ब्रा पहन रखी थी, उनकी ब्रा भी उतरवा दी।
मेरे सामने 8 खूबसूरत, नर्म कच्ची कैरी जैसे बूब्स थे, मैंने 8 के 8 निप्पल अपने मुँह में लेकर चूसे।
उसके बाद मैंने साक्षी को उसकी स्लेक्स उतारने को कहा। स्लेक्स उतारने से साक्षी बिल्कुल नंगी हो गई, क्योंकि उसने नीचे से कोई पेंटी नहीं पहन रखी थी।
साक्षी के बाद, मैंने अपने हाथों से सुदीप्ति को नंगी किया, और मेरा इशारा पा कर अदा और शिप्रा ने भी अपनी अपनी जींस उतार दी और मैंने उनकी छोटी छोटी पेंटीस भी उतार दी।
जब हम पांचों जन बिल्कुल नंगे हो गए तो मैंने पूछा- अब ये बताओ, कौन सबसे पहले मेरा लण्ड अपनी चूत में लेना चाहेगी?
सब ने एक दूसरे की तरफ देखा, मगर चारों लड़कियाँ कोई फैसला न कर पाई के कौन सबसे पहले हाँ करे।
साक्षी बिल्कुल मेरे पास बैठी थी और सबसे से मासूम भी वो ही थी, सो मैंने उसे ही अपनी गोद में उठा लिया- चलो साक्षी से ही शुरुआत करते हैं।
मगर वो एकदम से उछल पड़ी- नहीं नहीं, मैं नहीं, मुझे डर लगता है।
मैंने कहा- तो चलो कुछ और करते हैं।
मैं बेड के बीच में लेट गया और साक्षी से बोला- साक्षी तुम आओ और आकर मेरे मुँह पर बैठ जाओ, इतना तो कर सकती हो न।
उसने हाँ में अपना सर हिलाया और आकर मेरे मुँह पर अपनी चूत रख दी। एक बहुत ही खूबसूरत, गोरी गुलाबी, पेंसिल से खींची एक लकीर जैसी चूत जिस पर हल्के हल्के रेशमी बाल थे, मेरी आँखों के ठीक ऊपर थी।
मैंने उसकी चूत अपने मुँह पर सेट की और उसकी चूत के दोनों होंठ अपने होंठो में ले लिए, मेरे मुँह में उसकी कुँवारी चूत से छुट रहे पानी का स्वाद आया।
और जब मैंने उसकी चूत की दरार में जीभ फेरी तो उसे बहुत सी गुदगुदी हुई, वो हंस पड़ी और ऊपर को उठी, मगर मैंने उसे फिर से नीचे को धकेल कर अपने मुँह पर बैठाया, और फिर से उसकी चूत चाटने लगा।
उसके लिए यह पहला अनुभव था सो जब भी उसे गुदगुदी होती वो अपनी छोटी सी कमर ऊपर उठा लेती।
बाकी की लड़कियों ने उससे पूछा- क्या हो रहा है?
वो बोली- बहुत मज़ा आ रहा है, तुम भी चटवा के देखो।
फिर सुदीप्ति ने उसे उठा दिया और खुद आ कर मेरे मुँह पर बैठ गई, मेरी तो लाटरी लग गई थी, मुझे दूसरी कुँवारी चूत चाटने को मिल रही थी।
दो मिनट चूत चटवाने के बाद सुदीप्ति मेरे ऊपर ही लेट गई, मैंने अपना तना हुआ लण्ड उसके मुँह से लगा दिया और उसने बिना कोई वहम किए मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
अब तो मुझे और भी मज़ा आने लगा।
सुदीप्ति की देखा देखी, बाकी की लड़कियों ने भी बारी बारी से मेरा लण्ड चूसा। एक मुँह से निकालती तो दूसरी चूसने लगती। नर्म नर्म हाथों में पकड़ कर वो अपने कोमल कोमल होंठों से मेरे लण्ड को चूस रही थी।
एक एक करके चारों लड़कियाँ खुद आप आ कर मेरे मुँह पर बैठती रही और मैं उनकी कुँवारी चूतें चाटता रहा।
चूत तो क्या मैं तो उनके गाँड के छेद तक चाट गया। अब मैं तो तजुर्बेकार था, वो सब की सब अंजान तो मैंने अपने तजुर्बे का फायदा उठाया और एक एक करके सिर्फ चाट चाट कर ही दो लड़कियों का पानी छुड़वा दिया।
मगर जो कुछ वो मेरे लण्ड के साथ कर रही थी, वो भी बहुत जोरदार था। उनको तो जैसे खेलने के लिए अजब सा खिलौना मिल गया हो, एक ऐसा खिलौना जिसे वो खा भी सकती थी।
तो जब मैं शिप्रा की चूत चाट रहा था, उसी वक़्त मैं खुद को रोक नहीं सका और मेरे लण्ड से वीर्य के फुव्वारे छूट गए।
सभी लड़कियाँ- ईई छिः छिः करती दूर हो गई।
मगर मैंने उन्हें समझाया कि यही वो वीर्य है जिससे तुम सब एक दिन प्रेग्नंट होगी, इसी में लड़का लड़की है, जो तुम्हारे पेट में जाकर एक दिन जन्म लेगा, घबराओ मत, इसे छूकर देखो।
मगर किसी ने नहीं छुआ।
मैं उठा और बाथरूम में जा कर धोकर फिर से वापिस आ गया।
अब जिन दो लड़कियों का पानी नहीं छूटा था, शिप्रा और अदा।
मेरे बेड पे लेटते ही अदा ने लाकर अपनी चूत मेरे मुँह पे रख दी। मैं फिर से चूत चाटने लगा। बेशक मेरा लण्ड वीर्यपात के बाद ढीला पड़ गया था, मगर लड़कियों ने खेल खेल के फिर से उसे कड़क बना दिया।
मैंने अदा से कहा- अदा ट्राई तो करके देख, अगर मेरा लण्ड तुम अपनी चूत में ले सको।
उसने अपनी चूत मेरे मुँह से हटाई और मेरे तने हुये लण्ड पे रख दी। उसकी गुलाबी चूत मेरे काले से लण्ड को निगल जाने को तैयार थी, मगर जब थोड़ा सा लण्ड अदा की चूत में घुसा तो उसकी मुँह से दर्द की आह निकल गई।
मेरे कहने पर उसने 1-2 बार और कोशिश की, मगर मेरा लण्ड उसकी चूत में न घुस सका।
उसको देख कर और किसी ने भी लण्ड अपनी चूत में लेने की कोशिश नहीं की।
2 मिनट की चटाई से अदा भी स्खलित हो गई, और उसके बाद मैंने सिर्फ 3 मिनट में शिप्रा को भी स्खलित कर दिया।
शिप्रा की चूत तो मैंने खड़े होकर चाटी। मैं अपने पैरों पे खड़ा था, और मैंने शिप्रा को घूमा कर उल्टा लटका रखा था। उसकी टाँगें ऊपर छत्त की तरफ थी और वो उल्टा लटकी मेरा लण्ड चूस रही थी, जिसे बारी बारी और लड़कियाँ भी चूम चाट रही थी।
जब शिप्रा भी झड़ गई तो मैंने कहा- लो भाई लड़कियो, मैंने तुम सब का कर दिया। अब मेरा रह गया, मेरा भी पानी निकलवा दो।
तो अदा बोली- आपका भी तो हो गया।
मैंने कहा- अभी तो तना पड़ा है, इसको तो छुड़वाओ।
तो सभी लड़कियों ने मेरा लण्ड पकड़ा और मेरे मुट्ठ मारने लगी और मैं मज़े लेने के लिए, उनके कुँवारे बदनों से खेलता रहा।
2-3 मिनट की मुट्ठबाजी से मेरा फिर से वीर्यपात हो गया।
मगर इस बार जब छूटा तो चारों लड़कियों ने मेरा लण्ड मजबूती से पकड़ रखा था। मेरे लण्ड से निकल कर वीर्य उन सबके हाथ के ऊपर से बह निकला।
सब की सब हंस पड़ी।
हम सब एक साथ बाथरूम गए और खुद लड़कियों ने मेरा लण्ड धोया, अपने हाथ धोये। बाहर आकर मैं फिर से बेड पे लेट गया।
अदा मेरे लेफ्ट साईड लेट गई, शिप्रा राइट साईड लेट गई। सुदीप्ति और साक्षी को मैंने अपने ऊपर लेटा लिया। कितनी देर हम वैसे ही लेटे आपस में बातें करते रहे।
मैंने उस चारों लड़कियों को खूब चूमा, चाटा और चूसा क्योंकि मैं जानता था के यह मौका मेरी ज़िंदगी में दोबारा नहीं आने वाला।
आपने यह कहानी पढ़ी, आप सोच रहे होंगे कि यह तो सब झूठ है, काल्पनिक है।
हाँ, यह सब काल्पनिक है, तो इसमें सच्चाई क्या है?
सच्चाई यह है, कि ये चारों लड़कियाँ सच में मेरी दोस्त हैं, मेरी कहनी पढ़ कर मुझसे मिली, हमने साथ में लंच किया, मैंने उनसे बात की, कि वो सब मुझसे बहुत छोटी हैं, इस लिए उनसे बातें वातें तो मैं कर सकता हूँ, मगर उनसे सेक्स नहीं कर सकता।
वो भी मान गई।
मैंने उनसे कहा कि उनको अपनी उम्र के लड़के से दोस्ती करके सेक्स करना चाहिए।
उसके बाद हम आज तक एक दूसरे से फोन पे जुड़े हैं। जो कुछ ऊपर कहानी में आपने पढ़ा है, वो सब कुछ मैंने उनसे फोन पर किया है अब तो वो भी खुल कर बात करती हैं।
यह फायदा होता है कहानी लिखने का।

लेखक : सुनीता पृस्टी
प्रकाषक :bhauja.com

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