लैला मजनूं की व्यथा कथा

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एक रात मुझे सोते-सोते एक बड़ा हसीन सपना आया !
किसी ने आधी रात को मेरे घर का दरवाजा खटखटाया !
मैंने सोचा यार इतनी रात को कौन कमबख्त चला आया !
दरवाजा खोला तो अपने सामने फटे पजामे में एक व्यक्ति को खड़ा पाया !
उसे देखकर हमें बड़ा गुस्सा आया, हमने अपनी सूजी आँखों को खुजलाया !
मगर लाख कोशिशों के बाद भी मैं उस अनजाने को पहचान न पाया !
हमें उस अनजान को देखकर चिढ़ तो बहुत हुई !
मगर जल्द ही हमें अपनी गांधीवादी संस्कृति याद आई !
हमने अपने मन में आई दुर्भावना मन में ही दबाई !
और बड़े प्यार से पूछा- आप कौन हैं मेरे प्यारे भाई?
आप को हमारी नींद ख़राब करते हुए जरा भी शर्म न आई?
वो बड़े ही नजाकत से बोला- अस-सलाम वालेकुम भाई !
हमारे मन को उनका यह मखमली, नजाकती लहजा बड़ा भाया !
हम बोले- माफ़ करना भाईसाहब, मैं आपको पहचान नहीं पाया !
वो बोला- पहचानोगे कैसे? सदियों बाद इस धरती पर आया हूँ !
खाकसार को मजनूं कहते हैं और साथ मैं लैला को भी लाया हूँ !
उनके साथ खड़ी लैला को देखकर मेरी बुद्धि जोर से चकराई !
अबे यह भूतपूर्व प्रेमियों की हिट जोड़ी आज मेरे घर कैसे चली आई !
मैंने दोनों का अभिवादन कर कहा- आप अन्दर तो आइये !
और परी-लोक से भू-लोक पर आने का कारण तो बताइए !
मजनूं बोले- क्या बताऊँ भाई ! लैला कई दिनों से मुझसे लड़ रही थी !
और कमबख्त धरती पर घूम कर आने की जिद कर रही थी !
कहती थी- चलो मजनूं धरती पर घूमने जाते हैं !
और कलयुगी प्रेमियों की दशा जान कर आते हैं !
इस बीच लैला ने पहली बार अपनी जुबान की खिड़की खोली !
आप हमें आजकल के प्रेमियों के बारे में बताइए ! मुझसे ये बोली !
मैं बोला- लैला आपा, ऐसे तो मैं आपको ज्यादा क्या बता पाऊँगा !
मगर आप हमारे मेहमान है सो बिना बताये भी नहीं रह पाऊँगा !
चलिए मैं अपने दिमाग की बुझी हुई बत्ती फिर से आपके लिए जलाता हूँ !
और लैला मजनूं के साथ पाठकों को भी आधुनिक प्रेमियों की कथा सुनाता हूँ !
प्रथम अध्याय प्रारंभ:
अब पहले की तरह लैला मजनूं की याद में नहीं रोती है !
क्योंकि चौबीसों घंटे उसके पास मजनूं की ताज़ा जानकारी रहती है !
मजनूं जमाने के पत्थर खाने के बाद जहाँ भी जाता है !
तुरंत मोबाइल से लैला को अपने पिटने की दास्तान सुनाता है !
अपने पच्चीस मेगा पिक्सल कैमरे से अपने तन के जख्म दिखाता है !
और फ़ोन पर ही इन जख्मों पर लैला की लाखों पप्पियाँ पाता है !
लैला भी अब कोई “पत्थर से ना मारो मेरे दीवाने को” नहीं गाती है !
लैला “लैला की जवानी” “लैला बदनाम हुई मजनूं तेरे लिए” गाती है !
उसे कम कपड़ों में देख मजनूं को छोड़ जनता उसके पीछे पड़ जाती है !
अब मजनूं को चिट्ठी भेजने को नहीं जरूरत किसी कबूतर की !
तीस रूपए मैं चाहे जितने एस एम एस करो जरुरत है सिर्फ एक पैसे की !
मजनूं अब लैला का नाम कहीं जमीन पर नहीं लिखता है !
किसी और का भेजा एस एम एस तुरंत लैला को अग्रप्रेषित करता है !
अब लैला मजनूं अकेले नहीं, नेट पर चैट का समूह बनाते हैं !
बातों-बातों में कोई पटी तो पटी वर्ना ई-फ़्रेन्ड कहलाते हैं !
आधुनिक लैला मजनुंओं को अब सरकारी मान्यता भी प्राप्त है !
एक बार कोर्ट में जाने पर समझो घरवालों की सीमा समाप्त है !
सरकार कह रही है अब शादी के बिना भी प्रेमी एक साथ रहें !
शादी से पहले ही इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें !
और आजकल की आधुनिक लैलाएँ भी क्या गजब ढा रही हैं !
टीवी चेनल्स पर ही मजनुंओं का लोयल्टी टेस्ट करा रही हैं !
और जो मजनूं फेल हुआ उसपे सरेआम सेंडिल बरसा रही हैं !
और टीवी पर ये प्रायोजित कार्यक्रम दिखाकर अपनी टीआरपी बढ़ा रही हैं !
ये कमबख्त मजनूं भी पिटने के बाद सीधे रान्झाओं के पास जा रहे हैं !
और फिर दोनों मिलकर “आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ” गा रहे हैं !
इन दोनों का प्यार देखकर लैलाओं के भाव भी अब कुछ नीचे आ रहे हैं !
लैला हीर से कहती है “देख सखी ये कलमुहे कैसे दोस्ताना बना रहे हैं” !
द्वितीय अध्याय प्रारंभ:
आधुनिक लैला-मजनूं की इतनी कथा सुनकर लैला और मजनूं थोड़ा घबरा गए,
आजकल की लैला के कपड़े देख कुछ ज्यादा ही शरमा गए !
मजनूं बोला आज की लैलाओं के कपड़े कहाँ गए?
दरजी ने कपड़ा खा लिया या मशीन में फंसकर उधड़ गए !
मैं बोला- लैला आपा लाल दुपट्टे भी अब नहीं लहरा रहे हैं !
ये तो बस अब लैलाओं के मुँह छिपाने के काम आ रहे हैं !
आज के मजनूं लैलाओं पर पैसे भी खूब लुटा रहे हैं !
बाप की गाढ़ी कमाई से पीजा और आईसक्रीम खिला रहे हैं !
लैलाओं को भी ऐसे ही मालदार मजनूं बहुत भा रहे हैं !
बाकी आपसे फटेहाल मजनूं आज भी धक्के खा रहे हैं !
इतनी कथा कहने के बाद मैंने कहा- आगे कथा और सुनेंगे?
या फिर कल मेरे साथ चलकर ऐसे प्रेमियों से खुद मिलेंगे !
यह सुनकर दोनों एक स्वर में बोले- न ही सुनेंगे न ही मिलेंगे !
आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब ! अब हम वापस निकलेंगे !
हमारा एक दिन का ही वीसा था वर्ना हम वापस परीलोक न जा पायेंगे !
और आपकी कथा सुनने के बाद हम इस भूलोक में भी न रह पायेंगे !
जाते जाते मजनूं जी हमें अपना कुरता थमा गए !
धन्य थे वे लैला-मजनूं जो सदा के लिए दुनिया के दिलों में समा गए ! —– bhauja.com

1 Comment

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