रेशमा की गर्म जवानी-1 (Reshma ki garam Jawani-1)

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हाय दोस्तो, मैं सैंडी मुंबई से आप सब लोगों को नमस्कार करता हूँ और अपने दफ्तर में काम करने वाली एक शादीशुदा लड़की रेशमा की गर्म जवानी का आनंद लेने का किस्सा ब्यान कर रहा हूँ।

मैं bhauja.com का एक नियमित पाठक हूँ, मैंने बहुत सी कहानियाँ यहाँ पढ़ी हैं, मुझे इनको पढ़ कर बहुत मजा आता है इसलिए मैंने भी यह निर्णय लिया कि मैं भी मेरी एक असली घटना को आप लोगों से साझा करूँ।
पहले मैं आप सभी लोगों को अपने बारे में बताता हूँ।
मूलतः मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ, पर मुंबई में रहने लगा हूँ। अभी मेरी उम्र 25 साल है। मेरा रंग गोरा, कसरती बदन है। मुझे दौड़ना, साइकिलिंग करना बहुत पसंद है। मेरे लंड का साइज़ 6 इंच है, पर बहुत मोटा है।
अब मैं आप लोगों का वक़्त जाया नहीं करते हुए, मुख्य घटना बताता हूँ।
मैं मैंनेजमेंट का स्टूडेंट हूँ। अपनी पढ़ाई अतिरक्त वक्त में करता हूँ और वैसे मैं पूरे समय अपने जॉब पर जाता हूँ।
यह किस्सा मेरे ऑफिस की एक लड़की रेशमा और मेरे बारे में है।
रेशमा बहुत ही मादक और कामुक लड़की है। वैसे तो उसकी शादी हो चुकी है, पर कमाल की लड़की है। उसको एक बच्चा भी है, पर एकदम गरम माल है।
उसकी गाण्ड एकदम मोटी और उठी हुई है, जबकि वो एकदम इकहरी देह की है।
उसके मम्मे सामान्य हैं, उसकी कमर पर और उसकी गाण्ड पर मैं फ़िदा था।
वो हमेशा जीन्स और टॉप पहनती थी।
पूरे ऑफिस में एकदम मस्त माल थी।
मैं ऑफिस में लड़कियों से ज्यादा बातें नहीं करता था पर मेरा मन हमेशा उससे बातें करने का करता था।
हालांकि मैं बहुत डरता था।
एक बार ऑफिस में सभी के बैठने की जगहों को लेकर बदलाव हुआ जिसके कारण वो मेरे बगल की सीट पर आ गई।
मेरा तो जैसे नसीब खुल गया।
काम करते-करते मैंने उससे बातें शुरू कर दीं।
उसे बातों-बातों में खूब हँसाता था ताकि उससे दोस्ती कर सकूँ।
इसी तरह बातें करते-करते दो महीने निकल गए और इन दो महीनो में मैंने उससे गहरी दोस्ती कर ली।
मैं हमेशा उसे देखता तो मन करता कि उसे खा जाऊँ।
ऑफिस में काम करते-करते मैं उसकी हाथों को छू लिया करता, पर हमारी दोस्ती इतनी गहरी हो गई थी कि उसे मेरे हाथ से छूने से कुछ गलत नहीं लगता।
उसके बदन की खुश्बू मुझे और पागल करती थी।
हम दोनों अब फ़ोन पर भी बातें करते थे, रात में फेसबुक पर चैट किया करते थे।
मैं उससे इतना खुल गया था कि मेरी किसी भी बात का वो विरोध नहीं करती।
एक दिन मैंने उसे पूछा- तू देर रात तक इतनी देर तक मुझसे चैट करती है तेरे पति को पता है क्या?
तो उसने कहा- वो तो जल्दी सो जाता है क्योंकि उसे सुबह जल्दी जाना होता है।
तो मैंने मजाक में ही उससे पूछ लिया- तो तुम दोनों ने फैमिली-प्लानिंग की है क्या? जो रात को कुछ करते ही नहीं?
तब उसने कहा- नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है पर वक्त नहीं मिलता। सुबह हम दोनों को जल्दी ऑफिस जाना होता है, इसलिए वक्त नहीं मिलता।
उस रात मैंने उससे और आगे बातें नहीं की।
दूसरे दिन जब वह ऑफिस आई तो मैं उसे देखता ही रह गया।
उसने गुलाबी रंग की टी-शर्ट और जीन्स पहनी थी।
उस टी-शर्ट में वो एकदम नशीली दिख रही थी।
जब वो मेरे पास आ कर बैठी तो उसके बदन से परफ्यूम की महक आ रही थी, जो मुझे और भी पागल बना रही थी।
उस दिन मैंने उससे उसके घर वालों के बारे में पूछा तो उसने सब सच बता दिया कि उसके पति एक कंपनी में काम करते है जहाँ पर वह सुपरवाइजर हैं।
उन्हें रोज जल्दी सुबह उठ कर ऑफिस जाना पड़ता है और रात को देर से आना पड़ता है, जिसकी वजह से वे जिन्दगी का मजा नहीं ले पाते हैं।
अब हम दोनों एकदम खुल गए थे।
अगले दिन हम लोगों का ऑफिस का ग्रुप मॉल में घूमने गए।
वहाँ सभी लोग बहुत मजाक कर रहे थे, मैं भी लोगों को बहुत हँसा रहा था।
मेरा ये अंदाज़ रेशमा को बहुत पसंद आया और वो मुझे मन ही मन चाहने लगी।
वो भी मुझे अच्छी लगती थी, पर मैं मजबूर था क्योंकि उसकी शादी हो चुकी थी और एक बच्चा भी था। मेरा मन तो सिर्फ उसकी गर्म जवानी को चोदना चाहता था।
ऑफिस में मैं उसका हाथ पकड़ लेता, ये सब भी उसे अच्छा लगने लगा।
एक दिन मैंने उससे मजाक में कहा- मुझे तेरे कंधे के नीचे हाथ पर छूने का मन कर रहा है।
तो उसने कहा- छू ले।
मैंने छू लिया।
उफ़्फ़.. यार क्या गोरी बांह थी.. उसकी एकदम नरम और मुलायम।
बारिश का मौसम था, तो उसे घर जाना था और काफी तेज बारिश थी, तो मैंने उससे पूछा- क्या मैं तुझे घर छोड़ सकता हूँ।
तो उसने कहा- ठीक है।
मैंने ऑटो रुकवाई, हम दोनों ऑटो में बैठे और ऑटो का पर्दा गिरा दिया। मैंने उससे मजाक में पूछा- तुझे तेरे पति ने चुम्बन किए हुए कितने दिन हो गए?
तो उसने कहा- 6 महीने।
तब मैंने कहा- अब तो होंठों ने भी जंग पकड़ लिया होगा।
तो उसने मुझे जोर से च्यूंटी काटी।
मुझे बहुत अच्छा लगा, मेरी हिम्मत और बढ़ गई।
मैंने पूछा- क्या मैं चुम्बन कर सकता हूँ?
तो पहले तो उसने कहा- नहीं..
पर मैंने कहा- एक बार सोच ले।
तब उसने कहा- किसी को पता चला तो क्या कहेंगे सब?
तब मैंने कहा- मैं तो नहीं बताऊँगा, पर क्या तू बताएगी?
इतने में वो मुझसे चिपक गई और मुझे पागलों की तरह चुम्बन करने लगी।
अब मैं भी शुरू हो गया। मैं उसके होंठों को चुम्बन करने लगा और वो भी मुझे चुम्बन किए जा रही थी।
इतने में मैं उसकी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उसके पेट पर हाथ फेरने लगा।
मेरा हाथ उसकी नाभि के आस-पास घूम रहा था, मेरी जुबान उसकी मुँह में थी और वो मेरी जुबान को चूसे जा रही थी।

फिर मैंने उसके पेट पर हाथ फेरते-फेरते मेरी ऊँगली उसकी गहरी नाभि में गड़ाने लगा।
किसी भी लौन्डिया की नाभि में ऊँगली करने का आशय चुदाई के लिए इशारा करना होता है।
अब वह और उत्तेजित हो गई और मेरे पैन्ट पर से मेरे लंड को मसलने लगी।
मैं उसकी नाभि में ऊँगली किए जा रहा था और वो मुझे चुम्बन किए जा रही थी।
थोड़ी देर बाद हम दोनों थोड़ा शांत हुए क्योंकि उसका घर नजदीक आ चुका था।
मैंने जब अपना हाथ उसके टी-शर्ट से निकाला और ऊँगली को चाटने लगा, जो उंगली उसकी नाभि में गड़ाए हुए था।
एक अजीब से खुश्बू थी उसकी नाभि की।
मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा- वह परफ्यूम पूरे बदन पर लगाती है।
अब उसे छोड़ कर मैं घर चला गया।
घर पर मेरा कुछ भी मन नहीं लग रहा था। वही हाल उसका भी था।
दूसरे दिन हमने मूवी देखने का प्लान किया और मॉल में मूवी देखने गए।
उस दिन हम दोनों ने ऑफिस की छुट्टी मार दी और सुबह ही 9.30 का शो देखने चले गए।
अब मूवी चालू हुई, पूरा हॉल खाली था।
सुबह का वक़्त होने की वजह से बहुत कम लोग थे।
धीरे-धीरे मेरा हाथ फिर से उसकी कमर पर गया और फिर से मैं उसकी नाभि में ऊँगली करने लगा।
वो उत्तेजित हो कर मुझे चुम्बन करने लगी।
इस बार मैंने मेरा हाथ उसके पीछे से ले जाकर उसे थोड़ा उठने को कहा।
वो थोड़ा उठी और मेरा हाथ उसकी अलादीन की सलवार जैसी सलवार में चला गया।
मेरा हाथ उसके बड़े और नरम चूतड़ों पर घूम रहा था, ऐसा करने से उसे काफी मजा आ रहा था।
वो इतनी गरम हो गई थी कि वह अपना हाथ मेरी शर्ट के अन्दर घुसा कर मेरी छाती की घुंडियों से खेलने लगी।
यहाँ मेरा हाथ अब उसकी गाण्ड के छेद तक पहुँच गया और उसकी चूत से पानी निकल रहा था जो गाण्ड के छेद तक आया था।
उसकी चूत की पानी के सहारे मैंने उसकी गाण्ड के छेद में अपनी उंगली डाल दी और अन्दर घुसाने लगा।
उसे इतना मजा आ रहा था कि उसने मेरी पैन्ट का ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकल लिया और मस्त होकर मसलने लगी और हिलाने लगी।
हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।
उसने धीरे से मेरा लंड अपनी मुँह में लेके चूसने लगी और मैं उसकी गाण्ड के छेद में उंगली डाले जा रहा था।
मैं अपनी उंगली कभी गाण्ड में तो कभी चूत में डाले जा रहा था।
उसने मेरा लंड पूरा बाहर निकाल कर चूस रही थी।
फिर उसने कहा- मेरा लंड उसके पति के लंड से भी ज्यादा बड़ा और मोटा है।
वो चूत में एक बार डालने को कहने लगी, पर मैंने कहा- यह सिनेमा हॉल है, यहाँ इससे ज्यादा कुछ नहीं होगा, इसके लिए हमे कहीं किसी कमरे में जाना पड़ेगा।
फिर वो और जोर से मेरा लंड हिलाने लगी।
मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है।
उसने तुरंत मेरा लंड अपने मुँह में पूरा ले लिया और मैंने जोर से एक पिचकारी की तरह सारा माल उसके मुँह में निकाल दिया।
अब हम दोनों शांत हो गए।
इसी तरह से कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा।
फिर मेरे एक कॉलेज के दोस्त से मेरी मुलाकात हुई।
उसने अपनी चुदाई के बारे में मुझे बताया और कहा- अगर कभी लड़की को चोदना हो तो उसके घर से करीब 6 किलोमीटर दूर पर एक लॉज है, जहाँ पर कमरा मिल जाता है।
मेरी तो जैसे लाटरी निकल गई।
मैंने रेशमा से इसके बारे में कहा, तो उसने कहा- ठीक है हम ऑफिस वक्त पर ही जायेंगे ताकि घर में किसी को शक ना हो।
कहानी जारी रहेगी।
आपके विचारों का स्वागत है।

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