रशियन गोरे मिखाईल से रेखा की चूत चुदाई

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दोस्तो, इससे पहले की मेरी कहानी ‘नौकरानी को उसके यार से चुदवाने में मदद‘ में मैंने रेखा को एक रूसी (रशियन) के यहाँ काम पर लगाने का जिक्र किया था। यह कहानी करीब 25 साल पहले की घटनाओं पर आधारित है, इस कहानी में मैं रेखा के बताये अनुसार उसके और रूसी के बीच अंतरंग सम्बन्ध कैसे बने और दोनों के बीच क्या क्या हुआ, विस्तार से बताऊँगा।
कहानी में सुविधा के लिये हम उस रूसी पुरुष का नाम मिखाईल रख लेते हैं।

बतरा के जाने के 3-4 दिन बाद रेखा ने मिखाईल के यहाँ काम करना शुरू किया, उसके यहाँ काम करने के बाद वह मेरे यहाँ आती थी और ‘वहाँ क्या हुआ’ मुझे बताती थी।

पहले दिन और आगे क्या हुआ वो दिलचस्प कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ:

मिखाईल के यहाँ पहले दिन जाकर रेखा दूसरे दिन जब रेखा मेरे घर आई तो उसके चेहरे पर विस्मय भरी मुस्कान मुझे साफ दिख रही थी।मैंने पूछा- क्या हुआ?
उसने मुझे पूरी बात बताई, वह बोली- आज मैं आपके रूसी दोस्त मिखाईल के यहाँ गई थी। दरवाजे की बेल बजा कर मैं इंतजार कर रही थी कि अन्दर से एक नौजवान ने दरवाजा खोला, वह शॉर्ट्स और बनियान पहना था, मुझे देखते से ही बोला ‘रेखा? नमस्ते!’
मैंने भी नमस्ते कहा।
उसने मुझे कहा- कम इन !
और सोफे पर बैठने का इशारा करते हुए कहा- प्लीज सिट-डाउन!

मैं बैठने में हिचक रही थी तो उसने फिर कहा- सिट-सिट!
फिर उसने फोन उठाकर किसी से बात की और बैठ गया।

थोड़ी देर में एक गोरी लड़की अन्दर आई, उसने मिखाईल को रशियन में कुछ कहा और मुझे नमस्ते बोली। वह मेरे पास सोफे में बैठ गई और मुझे हिंदी में बोली कि मिखाईल को कुछ शब्द छोड़ कर हिंदी और अंग्रेजी नहीं आती।
मिखाईल क्या चाहता है, मैं तुम्हें हिंदी में बताऊँगी।
मैंने सिर हिला दिया।

अब मिखाईल ने लड़की से कुछ कहा, फिर लड़की ने मुझे बताया कि मुझे रोज सुबह सात बजे आना है, पूरे घर की साफ़सफ़ाई करनी है और चाय नाश्ता बनाना है। साहब नाश्ता करके आठ बजे प्लांट चले जाएँ तो मैं जा सकती हूँ। इसके अलावा इतवार को 11 बजे आना है और रोज किचन का सारा काम और घर की डस्टिंग करनी है। इन कामों के 2500 रुपये मिलेंगे। नाश्ते में ब्रेड, बटर, आमलेट और चाय बनाना है।
उन्होंने पूछा- क्या तुम्हें आमलेट बनाना आता है?
मैंने कहा- हाँ!
उसने कहा- मिखाईल साहब तुमको नाश्ता बनाना बता देंगे।

फिर लड़की ने पूछा- क्या तुम्हें मंजूर है या कोई सवाल?
मैंने कहा- मुझे मंजूर है।
उसने कहा- तुम आज से काम पर लग जाओ, मैं अब जाती हूँ।
इतना कह कर वह चली गई.

मिखाईल मुझे किचन में ले गया, उसने चाय बनाने रख दी और मुझे अंडे देकर आमलेट बनाने के लिए बोला। मैंने आमलेट बना कर टोस्ट पर मक्खन और जैम लगाकर नाश्ता टेबल पर रख दिया।
और झाड़ू-पोछा भी कर दिया, तब तक मिखाईल नहा कर तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर आ गया। उसने दो कप में बिना दूध की चाय डाली और एक कप मेरी ओर खिसका कर बोला- यू टेक!
मेरे न कहने पर बोला- मिल्क और शुगर ले लो, आई नो मिल्क!

नाश्ते के बाद मैंने बर्तन धो दिए और जब जाने के लिए निकली तो उसने ‘थैंक यू…’ और ‘बाय’ कहा, मैं भी बाय कह कर निकल आई।
रेखा ने बताया कि उसके पूरे घर में एयर कंडिशनर लगे हैं, सब दरवाजे और खिड़कियाँ हमेशा बंद रहते हैं, ठन्डे घर में बहुत अच्छा लगता है, सेंट की खुशबू भी आती रहती है। उसने बताया मिखाईल उसे ढाई हजार रुपये महीना और नाश्ता देगा।
यह तो यहाँ पांच-छह घर में काम करने के बराबर है।
और वह अचरज से बोली- वो लोग काम वाली की इतनी इज्ज़त करते हैं।

मैंने कहा- उनके देश में काम और काम करने वालों की बहुत इज्जत की जाती है। वे घर में काम करने वालों को अपने घर का सदस्य समझते हैं और उनके साथ कोई भेद-भाव नहीं करते, हर बात पर थैंक यू कहते हैं।
रेखा ने मुझे धन्यवाद दिया और कहा आपने मुझे बहुत अच्छा घर दिला दिया।

8-10 दिन मिखाईल के यहाँ काम करने के बाद रेखा मुझे बताया कि अब वह और मिखाईल दोनों अपनी टूटी फूटी हिंदी और अंगरेजी में बात कर लेते हैं। अगर रुसी को कभी कुछ कहना हो तो वह एक छोटी सी किताब में देखकर हिंदी में अपनी बात कह लेता है।

वह करीब 6 फुट ऊँचा है, उसका पूरा शरीर गोरा टमाटर जैसा लाल और गठीला है, उसके बाल बादामी हैं। उसको देखते ही मैं मदहोश सी हो जाती हूँ, सोचती हूँ ‘काश वो मुझसे लिपट जाये और प्यार करे!’
इस डर के मारे कि वह मुझसे नाराज होकर निकाल न दे, मैं उससे दूर रहती हूँ।

नाश्ते में वह उबला आलू, अंडा, आमलेट, ब्रेड आदि दूध, चाय, फलों के जूस के साथ लेता है। उसकी खाने की मेज पर फल रखे रहते हैं, जब भी वह फल खाता है, मुझे देना नहीं भूलता! मैं बहुत खुश हूँ।

इस तरह करीब एक महीने बाद दिन रेखा बहुत शरमाई सी और खुश नज़र आ रही थी। उसने आते से मुझसे कहा- आपसे बहुत जरूरी बात करनी है।
मैंने कहा- क्या?
रेखा बोली- आज मिखाईल ने मेरे से पूछा क्या मैं और तुम सेक्स करेंगे? उसने कहा कि यदि तुम्हारी मर्जी हो तो कल इतवार है तुम जल्दी 9 बजे आ जाना, अगर तुम 9 बजे आई तो मैं हाँ समझूँगा और अगर इतवार के समय यानि 11 बजे आओगी तो मैं ना समझूँगा, तुम पर कोई जबरदस्ती नहीं!

रेखा मुझसे बोली- आपसे पूछे बगैर मैं हाँ नहीं कहूँगी।
उसने मुझसे यह भी कहा कि मिखाईल ने आज तक मुझे न तो बुरी नजर से देखा और न ही मुझे छुआ, फिर उसने आज ऐसे क्यों पूछा?

मैंने रेखा को समझाया- देख, वह एक विदेशी है. इसमें कोई शक नहीं कि वह एक भला मानुष है। मगर उसे मालूम है कि किसी पराई स्त्री को छूना या उसे बुरी नजर से देखना एक अपराध है और स्त्री की मर्जी के खिलाफ उससे सेक्स करना बलात्कार होता है। अगर वह ऐसा कुछ करता है तो उस स्त्री के द्वारा शिकायत करने पर उसे यहाँ और उसके देश में भी सजा हो सकती है। जहाँ तक उसके साथ चुदाई का सवाल है, तेरी मर्जी!

तब रेखा बोली- मैं तो मन ही मन में उससे चुदाई के लिए आतुर हूँ!
मैंने कहा- तो फिर कल 9 बजे बेहिचक जा, अगर वो तुझसे फिर पूछे तो साफ-साफ हाँ कह देना!
रेखा मुझे ‘थैंक यू’ बोल कर चली गई।

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आगे का हाल रेखा के अपने शब्दों में :

शनिवार को मैं आपसे बात करके घर गई तो मैं रविवार को क्या और कैसे होगा, इसके प्रति बहुत उत्साहित और उत्तेजित थी, मेरे मन में मिखाईल के लंड के प्रति एक अजीब सी कसक थी, मैंने कभी इतने गोरे आदमी का लंड नहीं देखा था, मुझे रात भर ठीक से नींद नहीं आई।
सुबह 9 बजे जब मैं मिखाईल के घर जा रही थी तब उतावलेपन से मेरे शरीर में अजब सी सुकबुकाहट हो रही थी, मुझे पसीना आ रहा था, हाथ पैर ठन्डे हो रहे थे।

उसके घर पहुँचने के बाद मैं बेल बजाकर दरवाजे पर बेचैनी के साथ खड़ी थी, जब मिखाईल ने दरवाजा खोलकर मुझे देखा तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, वह जोर से बोल उठा ‘रेखा!’
उसने मुझे अन्दर लेकर दरवाजा बंद किया और मुझे अपनी बाँहों में उठाकर चूमना चालू किया। वह बार बार ‘थैंक यू… थैंक यू…’ कहता रहा।
मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!

वह मुझे उठा कर बेडरूम में ले गया और कुर्सी पर बैठा दिया, वह बोला- तुम बहुत अच्छी हो!
फिर उसने बाथरूम की तरफ इशारा करके कहा- अब तुम नहा कर फ्रेश हो जाओ, बाथरुम में मैंने टावेल रख दिया है उसे ओढ़ कर तुम बाहर आ जाना! तब तक मैं नाश्ता बनाता हूँ।
उसने तो मेरे मन की बात कह दी, मैं पसीने में तर थी और नहाना चाहती थी।

मिखाईल किचन में चला गया और मैंने अपने सब कपड़े उतार कर बाथरूम के बाहर बेडरूम में रख दिए और नंगी बाथरूम में दाखिल हो गई।
नहाने के बाद मैंने तौलिया अपने बदन पर लपेट लिया, तौलिया बहुत बड़ा था, मैं ऊपर से नीचे तक ढक गई। साबुन और शम्पू की सुगंध से मेरा शरीर महक रहा था, मेरे बाल खुले थे।

जैसे ही मैं बाहर बेडरूम में दाखिल हुई, सामने कुर्सी पर मिखाईल बैठा था, उसने मुझे दूसरी कुर्सी पर बैठने को कहा। हम दोनों आमने सामने बैठे थे, बीच में एक छोटी सी गोल मेज थी जिस पर मिखाईल ने ब्रेड, बटर और दो गिलास में गरम दूध में चाकलेट डाल कर रखा था।

मुझे खुले बालों और तौलिये में लिपटे हुए देख कर मिखाईल से नहीं रहा गया और उसने अलग अलग पोज में मेरी फोटो खींची। इसके बाद हम दोनों ने नाश्ता किया।

अब मैं देख रही थी कि मिखाईल के लंड का उभार उसकी शॉर्ट्स से दिखने लगा था, मैं उसका लंड देखने के लिए उतावली हो रही थी। वह उठकर मेरी कुर्सी के पीछे खड़ा हो गया और उसने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स तौलिये के बाहर करके उन्हें मसलना चालू किया।
मेरे मुख से ‘आह!’ निकल गई।
वह मेरे सिर कान, गर्दन, गले और ओंठों को चूमता रहा, बीच बीच में वह मेरे दोनों मम्मों को चूसता… मेरे पूरे शरीर में सनसनी फ़ैल रही थी।

करीब दस मिनट यह चलता रहा, फिर वह सामने आया और उसने मेरा पूरा टावेल निकाल कर दूसरी कुर्सी पर रख दिया।
अब मैं बिल्कुल नंगी थी, मिखाईल मेरे सामने खड़ा था, मैंने भी जोश में आकर उसकी शार्ट निकाल डाली।

उसका लंड फुफकारता हुआ बाहर निकला और मुझे सलामी देने लगा, उसके झांट के बाल भी बादामी थे।
मिखाईल का लंड देख कर मेरे मुहं से ‘उई मा…’ निकल गया, उसका लंड एकदम गाजर जैसा लाल, मूली जैसा मोटा और बहुत लम्बा था।
मुझे यह देख कर आश्चर्य हुआ कि उसका टमाटर जैसा टोपा हमेशा खुला ही रहता है।
कौतुहल वश मैंने रुसी का लंड मुठ्ठी में पकड़ कर हिलाना चालू किया। लंड स्प्रिंग जैसा लपलपा रहा था।

जब मैंने मेरे दोनों हाथों से लंड पकड़ा तो आधा लंड ही मेरे हाथ में था बाकी बाहर निकला था। मैंने दोनों हाथों से लंड को खूब मसला, उसकी मुठ मारी।
फिर मैं उसके दोनों अंड हाथ से मसलने लगी, एक एक करके मैं कभी अंड को दबाकर ऊपर अंडकोष से बाहर धकेलती और फिर ऊपर से दबा कर वापस अंडकोष में ले आती, तो कभी उन्हें चूसती।

इस बीच मैं लंड और अण्डों को सब तरफ से कौतुहल से देखती रही, मुझे तो स्वर्ग के आनंद जैसे लग रहा था और लंड को छोड़ने का मन ही नहीं हो रहा था।
उधर मिखाईल मेरे बूब्स को चूसे जा रहा था।

अब मैंने उसका लंड मेरे मुँह में डाल कर चूसना चालू किया। उसके लंड में से पानी जैसा मगर चिकना और नमकीन पदार्थ निकल रहा था, उसे मैं चाटती जा रही थी।
मिखाईल ‘अच्छा बहुत अच्छा बहुत.. अच्छा…’ बोले जा रहा था।

करीब बीस मिनट बाद मिखाईल ने मुझे उठा के पलंग पर लिटा दिया, मेरे दोनों पैर फैला कर उसने मेरी चूत को चाटना चालू किया। मैंने उसका सर अपनी चूत की ओर खींचा और अपने नितंब उठा दिए जिससे उसकी जीभ मेरी चूत में अन्दर घुस सके।
जब वह चूत को जीभ से चाट रहा था, मेरे दाने पर मैं उसकी गरम सांसें महसूस कर रही थी, मेरी चूत से भी वही नमकीन पानी निकल रहा था, मिखाईल उसे चाट रहा था।

वह बीच बीच में मेरी चूत के दोनों ओठों को अपने दोनों हाथों से खोल कर ध्यान से देखता और ‘अच्छी.. अच्छी…’ कहता।
मिखाईल मेरी चूत और दाने को तब तक चूसता रहा जब तक मैं सिसकारियाँ भर कर झड़ नहीं गई।

अब उसने लंड को चूत के अन्दर डालना चालू किया, करीब आधा लंड अन्दर जाने पर उसने लंड को आगे पीछे धकेलना चालू किया।चूँकि मेरी चूत और उसके लंड से नमकीन पानी रिस रहा था, जब उसने जोर लगा कर पूरा लंड अन्दर किया मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई, थोड़ी सरसराहट की अनुभूति हुई, सिर्फ जब कभी झटके से लंड का टोपा मेरे अन्दर बच्चेदानी के द्वार के ऊपर लगता था तो मुझे थोडी सी चुभन महसूस होती थी, क्योंकि उसका लंड बहुत बड़ा था।

मगर अब मैं चित लेट गई और उसने मेरे ऊपर औंधे लेट कर पूरे लंड को चूत में डाल कर बिना ज्यादा हरकत के अन्दर रख छोड़ा। उसका लंड चूत की गहराइयों में समा जाने से मुझे बहुत उत्तेजना महसूस होने लगी, मैं सोच रही थी काश मर्द और औरत के चाहने पर इंसानों का लंड भी कुत्तों की तरह चूत में लॉक हो सकता तो और मजा आता।

करीब 20 मिनट लंड को चूत में बिना ज्यादा हरकत रखने के बाद मिखाईल ने लंड को पिस्टन जैसा चलाना शुरू किया। जैसे जैसे उसने स्पीड बढ़ाई, मैं भी उसके धक्कों को अपने चूतड़ उठा कर साथ देने लगी।
मेरी चूत की पकड़ उसके मोटे लंड पर बतरा के लंड से भी अच्छी थी।

वो जब लंड को बाहर की ओर खींचता, मैं और जोर अपने चूत को संकुचित कर उसके लंड पर पकड़ बनाये रखती। मोटाई की वजह से जब वो चूत में लंड धकेलता, अन्दर की सारी हवा निकल जाती, अन्दर हवा नहीं होने से जब मिखाईल लंड को बाहर की तरफ़ खींचकर अन्दर ढकेलता तो चूत उसे जोर से खींच लेती।
वैसे ही जैसे अगर आप छोटे गिलास को मुँह पर रख कर हवा खींचे तो गिलास मुँह से चिपक जाता है और ओठों को खींचता है।

इस तरह हम दोनों 15-20 मिनट चुदाई करते रहे और झड़ गए।
जब तक उसका लंड सिकुड़ नहीं गया तब तक मिखाईल ने लंड चूत के अन्दर ही रखा और मेरे ओंठों को चूमता रहा, मुझे परम सुख की अनुभूति हो रही थी।
मिखाईल ने उठ कर तौलिये से मेरी चूत और अपने लंड को साफ किया, वह फ्रिज में से दो गिलास संतरे का जूस लाया, फिर हम दोनों ने जूस पिया।

बतरा साहब कमरे में घुसते ही मेरे से लिपट गए, मुझे आगोश में लेकर बोले- मैं तुम्हें बहुत मिस करता था। कभी-कभी तो तुम्हारी याद में रात-रात भर जगता था।
मैंने उनसे कहा- मुझे भी आपकी बहुत याद आती थी।

इस तरह बातें करते-करते हम एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे।
मुझे नंगी देख कर वे बोले- अभी भी पहले जैसी कमसिन हो।
बतरा साहब मेरे मम्मो को देख कर उन्हें सहलाते रहे और मेरी दोनों चूचियों को मसलने लगे, तब तक मैंने उनका लंड पकड़ लिया जो अब तक तन कर गरम रॉड हो चुका था।

लंड पकड़ कर मैंने उनसे कहा- आपका लंड तो और मोटा लग रहा है, वहाँ किसी मेम को भी चोदते थे क्या?
उन्होंने कहा- हाँ, 3-4 बार मौका मिला था।
मैंने उनसे पूछा- क्या मेमों की चूत एकदम गोरी और टमाटर के रंग की होती है?
उन्होंने कहा- हाँ और वे चुदाई में कोई शर्म नहीं महसूस करती। कहीं भी जैसे बाग में या फिर समुन्दर या नदी किनारे भी लोग चुदाई करते दिख जाते हैं।

अब बतरा साहब बहुत उत्तेजित हो रहे थे, उन्होंने मुझे पलंग पर लेटा दिया और मेरे ओंठों से चूमना चालू किया।
हम दोनों के ओंठ आपस में लॉक हो गए।

थोड़ी देर बाद वे मेरे कान गले और फिर चूचियों को चूमने लगे, मुझे बहुत मजा आ रहा था।
धीरे धीरे वे मेरे पेट और फिर जांघों तक पहुँच गए।अंत में जब वे मेरे दाने को चूमने लगे तब मेरी चूत से पानी निकलने लगा और कमरा मेरी सीत्कारों से भर गया।
बीच बीच में मैं उनके लंड को पकड़ कर चूस लेती थी।

अब उन्होंने मुझे पलंग पर लिटा दिया और खुद जमीन पर बैठ गए, थोड़ी देर फिर मेरी चूत को खोल कर देखते, सूंघते और चाटते रहे। बतरा साहब अपने साथ श्रीखंड लेकर आये थे उन्होंने श्रीखंड मेरी चूत पर चुपड़ दिया और चूत चाटने लगे।
उत्तेजनावश मैं झड़ गई।

वे बोले जा रहे थे- वाह रेखा, तेरे सेंट् की खुशबू और चूत के नमकीन पानी के साथ श्रीखंड चाटने में मजा आ रहा है।

अब बतरा साहब ने श्रीखंड अपने लंड पर लगाया और लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मैं श्रीखंड चाटती रही, उसके साथ लंड का प्रिकम भी मेरे मुंह में जा रहा था, दोनों का मिला जुला स्वाद बहुत उत्तेजक था।

अब मुझसे नहीं रहा गया, मैंने उनसे कहा- अब चूत को ज्यादा मत तड़पाओ, अपना मोटू जल्दी अन्दर डालो।
बतरा साहब ने अपने लंड को चूत के अन्दर डालना शुरू किया, मेरी चूत उनके लंड को कस कर पकड़ने लगी।
लंड मोटा होने से जब भी वह अन्दर बाहर होता पट-पट आवाज होती।

जैसे-जैसे चुदाई तेज होती गई, चूत लंड को कस कर पकड़ती गई।
बतरा साहब बोले जा रहे थे- वाह रेखा, लंड पर कुंवारी चूत जैसी पकड़ है।
इस तरह काफ़ी बाद हम दोनों झड़ गए। इसके बाद हम दोनों ने अलग-अलग आसनों में तीन बार और चुदाई की।

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सोने से पहले मैंने रेखा को कहा- कल इतवार है, बतरा से चुदाई के वक्त मैं घर पर ही रहूँगा, तुम्हें दो काम करने हैं। एक तो मुझे तुम दोनों को चुदाई करते देखना है। तुम्हें तो पता ही है कि ऊपर के बेडरूम की एक खिड़की का कांच मैंने उल्टा लगाया है जिससे बाहर से अन्दर तो दिखेगा मगर अंदर से बाहर नहीं दिखेगा। तुम्हें चुदाई के समय बिस्तर पर ऐसे लेटना है कि बतरा का लंड और तुम्हारी चूत खिड़की की तरफ हो।

रेखा बोली- मुझे पता है। मैं पहले बतरा को खिड़की की तरफ पैर करके लिटाऊँगी, उसका लंड खड़ा करके चूसूँगी, तब आपको पूरा लंड और मेरी चूत दिखेगी। फिर मैं बतरा पे चढ़ कर अपनी चूत में उसका लंड घुसा के अन्दर बाहर करूंगी। आपको खिड़की से सब दिखेगा।
यह सुन कर मैं ख़ुशी से उछल पड़ा और रेखा को अपने आगोश में लेकर बोला- वाह मेरी रानी! तुम मेरे दिल की बात जान जाती हो। मैं कितना भाग्य शाली हूँ।

मैंने कहा- दूसरी बात यह कि अगर तुम्हें मंजूर हो तो बतरा से पूछना कि अगली बार जब वो आयें तो हम तीनों एक साथ चुदाई करें तो क्या उन्हें एतराज होगा?
रेखा बोली- मैं जरूर पूछूँगी, मुझे तो कोई एतराज नहीं है। मैं ख़ुशी ख़ुशी से आप दोनों का साथ दूंगी।

आज रेखा की छह बार चुदाई हो गई थी इसलिए मैंने सोने से पहले रेखा के पैर दबाये और पीठ की तेल लगा कर मालिश की, फिर उसके सर में भी तेल लगाकर मालिश की।
रेखा खुशी से आँ-ऊँ आवाजें निकलती रही, मुझे बोली- इसीलिए आप मुझे अच्छे लगते हो, मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हूँ।
मैंने कहा- मेरी जान, मैं भी तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ।

इसके बाद हम दोनों एक दूसरे की बांह में नंगे सो गए।

दूसरे दिन बतरा को शाम की ट्रेन से दिल्ली वापस जाना था और उसका लंच किसी दूसरे के यहाँ था इसलिए हमने उसे सुबह नौ बजे नाश्ते पर बुला लिया।
रेखा ने सुबह उठकर नाश्ता बना दिया, उसके बाद हम दोनों नहाने चले गए।
हमेशा की तरह मैंने रेखा की चूत की सफाई की, उसने भी मेरे लंड को धोकर साफ किया और हम दोनों शावर में एक साथ नहा धोकर तैयार हो गए।
नौ बजे बतरा के आने के बाद हम तीनों ने नाश्ता किया।
मैंने बतरा से कहा- आज इतवार है, घर में बहुत से काम करने हैं इसलिए आज मैं घर में रहूँगा। तुम दोनों ऊपर वाले कमरे में चले जाओ, वहाँ कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।

मैं टीवी में समाचार देखने लगा और वे दोनों ऊपर वाले कमरे में चले गए।
हमारी योजना अनुसार रेखा बतरा को बिस्तर पर ले गई और उसे कहा- आज मैं शुरुआत करुँगी।
उसने बतरा के कपड़े उतारना शुरू किये, इस बीच मैं खिड़की के पास पहुँच गया, मैंने देखा कि रेखा ने बतरा कि शर्ट उतार दी, फिर उसने बतरा की पेंट की ज़िप खोली और एक दो बार उसके लंड को फ़ूले हुए अंडरवियर के ऊपर से चूमा।

इस बीच बतरा रेखा की सलवार कुर्ती और ब्रा उतार चुका था, वह रेखा के चूचों को सहला रहा था।
रेखा एक बार बतरा के ऊपर झुकी और दोनों के ओंठ आपस में जुड़ गए, वे बहुत देर तक चूमते रहे।
यह सब देख कर मेरा लंड जागने लगा।

अब मैंने देखा कि जैसे ही रेखा ने बतरा की अंडरवियर नीचे खिसकाई, उसका तना हुआ लंड बाहर आकर स्प्रिंग जैसा उछलने लगा।
रेखा थोड़ी बाजु हट गई जिससे मैं ठीक से देख सकूँ।

सचमुच बतरा का लंड बहुत मोटा था, लम्बा भी कम तो नहीं था मगर मोटाई की वजह से थोड़ा छोटा दिखता था। मुझे यही तो देखना था।

अब रेखा ने बतरा के खड़े लंड को अपनी तरफ खींच कर छोड़ना चालू किया। छोड़ने के बाद लंड उछलकर दूसरी तरफ चला जाता था। रेखा लंड को उछालती रही और बड़े कौतुहल से कभी लंड को तो कभी मेरी ओर देख कर मुस्कुराती।
कुछ देर तक यह खेल चलता रहा।

फिर रेखा ने फ्रूट जेली की बोतल से जेली निकाल कर बतरा के लंड पर चुपड़ दी।
अब मुझे समझ में आया वो ऊपर जाते समय किचन से फ्रूट जेली की बोतल साथ क्यों ले गई थी।
रेखा ने बतरा के जेली चुपड़े हुए लंड को चूसना शुरू किया।
उत्तेजनावश बतरा का प्रिकम निकल रहा था, उसे भी रेखा चाटती गई।
वे दोनों कुछ कुछ बोल रहे थे जो मुझे बाहर सुनाई नहीं दे रहा था। मेरा लंड भी खड़ा हो गया था, उसमें से भी प्रिकम निकल रहा था जो मैं हाथ से चाटता जा रहा था।

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फिर रेखा खुद उछलकर चित लेटे हुए बतरा के ऊपर चढ़ गई और लंड को चूत की सीध में लाकर उसे चूत में घुसा दिया।
एक बार उसने पीछे देखा और तस्सल्ली कर ली कि मैं देख रहा हूँ।

अब रेखा लंड पर ऊपर नीचे धक्के देने लगी।
यह सब देखकर मेरा लंड बल्लियों उछलने लगा, मैं अपने आप को काबू में नहीं रख पा रहा था।

उधर रेखा ने अपनी स्पीड बढाई और मैं मुठ मारने लगा। करीब दस मिनट बाद वे दोनों झड़ गए, मैं भी बाहर उनके साथ झड़ गया।

रेखा का यह खेल देखकर मैं हैरान था।
फिर रेखा और बतरा आजू बाजु लेट गए और एक दूसरे को चूमते रहे।

थोड़ी देर बाद रेखा ने फिर बतरा का लंड पकड़ कर उसकी चमड़ी को सुपारे के ऊपर नीचे करने लगी, बतरा का लंड फिर खड़ा हो गया। बतरा ने रेखा से कुछ कहा और उठ कर जेली की बोतल उठा ली, रेखा बिस्तर पर दोनों पैर फैला कर खिड़की की ओर चूत करके लेट गई।
मुझे उसकी चूत की फांकें साफ दिख रहीं थी, उत्तेजना की वजह से फांकों का फैलाव और सिकुड़न साफ नजर आ रहा था।
बतरा पलंग के बाजु में रेखा की चूत की ओर मुँह करके कालीन पर बैठ गया, उसने रेखा की चूत की फांकों को दोनों हाथ से अलग किया और चूत के अन्दर देखने लगा।
उसने दाने पर उँगलियाँ फेरना चालू किया, रेखा चूतड़ उठा उठा कर कुछ आवाजें निकल रही थी।

फिर बतरा ने रेखा के दाने और चूत के अन्दर जेली चुपड़ दी। अब उसने रेखा की चूत के ऊपर लगी हुई जेली को चाटना शुरू किया तो करीब दस मिनट चाटने के बाद रेखा उछल कर झड़ गई, बतरा सारा पानी चाट गया।

बतरा ने अब अपना लंड रेखा की चूत में घुसा दिया और पिस्टन जैसा अंदर बाहर करने लगा।
दोनों अपने चरम सुख की ओर थे और दस मिनट में झड़ गए।

इधर मेरा बुरा हाल था, लंड लोहे की रॉड जैसा गर्म और कड़ा हो गया।
यह देख कर मैंने भी मुठ मार कर अपने लंड को शांत किया। इसके बाद मैं नीचे आकर थोड़ा सुस्ताने के बाद अपने काम में लग गया। इसके बाद वे दोनों आधे घंटे बाद नीचे आ गए।

लंच टाइम हो रहा था, इसलिए बतरा को जाने की जल्दी थी। उसने हम दोनों को इस आश्चर्यजनक मदद के लिए धन्यवाद दिया, रेखा को बहुत सी गिफ्ट दी।
उसने हम दोनों से इजाजत ली और चला गया।

उसके जाने के बाद रेखा ने मुझे बताया कि बतरा हम तीनों की एक साथ चुदाई के लिए मान गया है।
रशिया जाने के बाद वह मुझे मेल करके बताएगा।

रेखा मुझसे पूछ रही थी कि मैंने कुछ देखा या नहीं?
मैंने जो देखा और मेरा क्या हाल हुआ सब उसे बता दिया।
रेखा ने कहा- कोई बात नहीं, आपके लिए तो मैं हमेशा हाजिर हूँ।

इसके बाद हम दोनों ने फ्रेश होकर नंगे खाना खाया और बिस्तर में आकर लेट गए।
मैंने सोने से पहले फिर रेखा की अच्छे से मालिश की।
करीब चार बजे हम दोनों की नींद खुली मेरा लंड फिर खड़ा होकर फड़फड़ा रहा था, रेखा ने उसे अपने हाथ में लेकर चूमना शुरू किया हमने दो बार चुदाई करके चाय पी।

अगले दिन मैंने रेखा को बताया कि उसके लिए एक अच्छा घर मिल गया है।
मैंने बताया कि हमारे प्लांट में काम करने आये एक रशियन विशेषज्ञ को घर के काम के लिए किसी की जरूरत है।
रेखा को मैंने बताया कि उसे वहाँ तिगुने पैसे मिलेंगे।
हमारी कंपनी की कालोनी में बहुत से रशियन रहते थे, उनके यहाँ बहुत सी नौकरानियाँ काम करती थी। रशियन लोग उनको बहुत पैसा देते थे।
मैंने रेखा से कहा- अगर तुम्हें ठीक लगे तो सब घर छोड़ कर हमारे और उसके यहाँ काम कर सकती हो।
रशियन के यहाँ रेखा की कहानी मैं अगली कड़ी में लिखूंगा।
दूसरे दिन मेरी पत्नी आने वाली थी, इसलिए शाम को रेखा ने मुझसे विदाई ली और घर चली गई।

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2 Comments

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