रजनी की गांड फाड् फाड़ के चोदा – Rajni Ki Gand Faad Faad Ke Choda

rajni ki gand faad fad ke chudai - hindi sex story
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मैनें अपनी इस उम्र में बहुत सी लड़कियों के  साथ सेक्स किया हैं चूकि पैसे की कमी नही है तो नोयडा से बाहर, हिल स्टेशन पर भी हमने खूब मौज मस्ती किया है उसमें से एक कहानी आज पेश करने जा रहा हैं|
यह कहानी 2010 की हैं जब मैं अपने एक ऑफीस की दोस्त के साथ Lansdowne घूमने गया था |
एक दिन शाम 5 बजे, जब मैं logout कर रहा था जब रजनी मेरे पास आई | रजनी… यही नाम था उसका.. क्या लड़की थी यारों…. रजनी करीब 5 फ़ीट हाइट की छरहरी गोरी लड़की थी, चेहरा मासूम और खूबसूरत था, उसके शरीर का अंदाज़ा लगाना मुश्किल था क्यूंकि वह हमेशा ढीले ढाले सलवार कमीज़ पहने रहती थी।
खैर, जैसे हम दोनों के बीच काफ़ी अच्छी दोस्ती थी…वो मेरे कमरे पर भी आती थी… खाना पीना सब होता था… लेकिन कभी मेरी हिम्मत नही होती थी कि उससे अपने मन की बात कह दू.. एक दिन मैने उससे पूछा ” रजनी इस weekend हम कही घूमने चले क्या..” उसने कहा.. ” कहा बताओं..” मैने कहा चलो lansdowne चलते है weekend मे और Monday को आ जाएँगे भी… तो ऑफीस से off भी नही लेनी पड़ेगी… छुट्टियाँ अच्छी बीतेगी, क्या बोलती हो? ” उसने हाँ में सर हिलाया।… मैं समझ गया कि बात बन गई।  मैने उसे उसके कमरे से pick up कर लिया…..

और हम दोनों सुबह सुबह निकल पड़ें.. पूरे रास्ते बस यही सोच रहा था… कि इतने कम समय में रजनी को सेक्स के लिए मनाऊँ कैसे।

सुबह के साढ़े दस बज रहे थे, मैं कार स्पीड पर मजे लेते हुए चला रहा था, रजनी ने T-Shirt और जीन्स पहन रखा था… मैं उसके बूब्स को कभी कभी देख लेता था…रास्ते भर हमने हर Topics पर बात की.. रजनी काफ़ी खुल कर बातें कर रही थी… कभी कभी हम डबल मीनिंग बाते भी करते थे.. लेकिन मेरा मन तो बस उसके जवान जिस्म को देखना चाहता था….
हम 11 बजे अपने होटल पहुँच गये | फिर अपने कमरे मे पहुच कर.. मैं बेड पर लेट गया… और रजनी वही सोफे पर बैठ गयी…मैं कहा….. ” रजनी तुम फ्रेश हो जाओ… फिर हम कही घूमने चलेंगे.. “
उसके कहा पहले तुम जाओं… मैं थोड़े देर बाद नहा लूँगी… मैं नहाने चला गया.. नहा कर बाहर आया .. तो Towel लपेटे हुए था… मेरा लॅंड खड़ा हुआ था…. जिसे रजनी चुपके से देख रही थी….. जो Towel से उभरा हुआ था… मैने पूछा… क्या हुआ… वो मुस्कुरा कर बोली कुछ नही… रात में बता दूँगी…
जब रजनी नहा के निकली…. तो Towel लपेट रखा था… मैने खुद को रोक नही पाया.. और उसे देखने लगा.. वो टवल संभालते हुए बोली… क्या हुआ… मैं कहा.. रजनी मैं तुम्हे गले लगाना चाहता हूँ.. ऐसे ही… वो बोली …  मैने माना थोड़े किया है… और मैं उसे कस कर पकड़ कर चिपक गया… पहली बार उसके बदन को छूकर मेरे अंदर का … हवस जाग गया था,,, जो उसे चोद्ने के बाद ही शांत होगा…उसने कहा .. आकाश घूमने नही चलना क्या… मैं कहा .. हाँ..हाँ.. चलते है… फिर हम घूमने चले गये…
दिन भर..हम दोनों घूमे… बाते की…और रात को 10 बजे तक अपने होटल में वापस आ गये.. चूकि हम दोनों काफ़ी थक गये थे… इसीलिए बेड पर गये… रजनी बैठी थी और मैं उसके बगल में लेट गया। अब 4-5 घंटे थे हमारे पास मौज मस्ती करने के लिए।
मैंने रजनी के हाथों को सहलाना शुरु किया और कहा- तुमने कभी किसी के साथ सेक्स किया है? उसने ना में सिर हिला दिया, वो शर्मा रही थी। मैने कहा मेरे साथ सेक्स करोगी…उसने कुछ नही कहा…लेकिन मना भी नही किया… मैं हिम्मत करके आगे बढ़ा.. क्योकि ऐसा मौका फिर नही मिलेंगा मुझे … ये मैं जनता था..
मैं उसके और करीब आ गया और हथेली को पकड़ कर चूमने लगा। रजनी ने आँखें बंद कर ली और मेरे बगल में लेट कर मुझसे चिपक गई, बोली- मुझे कुछ नहीं आता, सहेलियों से सुना बस है, मेरा यह पहली बार है।
मैंने कहा- बीच में रोकना टोकना मत, तुम बस मेरा साथ दो! मैं उसे अपनी आगोश में लेकर चूमने लगा, अपने उलटे हाथ से से उसकी पीठ कमर को सहलाने लगा, वो मेरा साथ दे रही थी, मैं उसके होंठों को चूसने लगा।
वो गर्म होने लगी थी, उसकी आँखें बंद थी, हल्की हल्की आवाज़ें निकाल रही थी ‘म्मम्म म्म्म्म्म म्म्म म्म्म्म्म…’
अब मैं उसके नितंबों को सहलाने लगा था, रजनी ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ रखा था, वो बहुत बेसब्र हो चुकी थी, मैंने उसके और अपने कपड़े निकालने शुरू किये। रजनी बहुत शर्मा रही थी।
‘उफ्फ क्या त्वचा थी उसकी मलाई जैसी!’ मैंने रजनी को ध्यान से देखा, बहुत ही खूबसूरत जिस्म की मल्लिका थी वो। उसका मस्त फिगर 32-24-34 का था। रजनी की ब्रा को ऊपर सरका दिया, उसकी चूचियाँ बड़ी थी और तन चुकी थी जोश में।
मैं बिना देरी किये उसके गर्दन, कंधे पर चूमने लगा, धीरे धीरे मम्मों को दोनों हाथों से मसलते और दबाते हुए अब चूची को चूसना शुरु कर दिया। रजनी सिहर उठी और मज़े से सिसकारियाँ भरने लगी- आआह्ह्ह ह्ह्ह्ह ह्ह्हम्म्म आअह्ह्ह्ह!
वो मेरी पीठ को सहलाने लगी, वह बहुत ही उत्तेजित हो चुकी थी, अपने दाँतों से होठों को चबा रही थी, अपनी कमर को हिलाने लगी थी। मैंने रजनी पेट और नाभि के आस पास चूमते हुए उसके मस्त मम्मो को मसलना ज़ारी रखा।
रजनी को बहुत मज़ा आने लगा था, वो अब मादक आवाज़ें निकलने लगी थी- कुछ कुछ हो रहा है जान, आआह्ह्ह आह्ह्ह, कुछ करो जान आह्ह्ह अह्ह्ह!
मैंने उसकी पैंटी को निकल दिया, उसने अपने दोनों पैर शर्म से सटा लिए थे, फिर मैं उसके पाँव को सहलाते हुए चूमने लगा।
उसने आँखों को अपनी बाहों से ढक लिया और सिसकारियाँ भरने लगी- म्म्म्म म्म्म्म आअह्ह अह्ह्ह…
धीरे धीरे ऊपर चूमते हुए बढ़ने लगा, जांघों को चूमने और चाटने लगा, रजनी के पैरों की अकड़ ढीली होने लगी।
मैंने उसके पैर फ़ैला दिए और सीधा उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत बहुत गीली थी, उसका पानी पहले से बाहर आ निकला था। मैंने सीधे हाथ की बीच की ऊँगली को उसकी चूत में डालना शुरू किया, रजनी सिहर उठी, उसे दर्द होने लगा था।
मैंने उसकी हालत समझते हुए कहा- रजनी, तुम बस साथ दो और मज़ा लो, तुम्हें कुछ नहीं होगा। उसने कहा- और यह दर्द?  मैंने उसकी चूत को चूमते हुए जवाब दिया- शुरू में थोड़ा होगा, फिर कभी नहीं।
थोड़ी देर उसकी चूत को चाटने और उंगलियों से सहलाने के बाद मैंने रजनी से मेरे लंड को चूसने के लिए कहा।
वह मेरे लंड को हाथ में लेकर लॉलीपॉप जैसे चूसने लगी, अपने जीभ से लंड के सुपारे को चाटने लगी।
मैं मस्त हो चला था और मेरा लंड भी, अब मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था, रजनी का कौमार्य भंग करने के लिए मेरा लंड भी फड़फड़ा रहा था।
कोमल मासूम चेहरा, ऊपर से खूबसूरत छरहरी काया को और इंतज़ार नहीं कराना चाहता था। रजनी को लेटा कर मैं उसके ऊपर चढ़ गया, उसके होठों को जोरदार चूमने चूसने लगा।
मेरा लंड रजनी के चूत के दाने रगड़ खा रहा था। रजनी बहुत गरम हो चुकी थी पहले से ही अपने कूल्हे खूब हिला रही थी। मैं उठा और लंड पर अच्छे से थूक लगा कर चूत पर सटा दिया।
रजनी उत्तेजित भी थी और डरी भी… डर के मारे उसने अपने बदन को कस लिया था। मैंने उसे सहज रहने को कहा वरना दर्द ज्यादा होगा।
रजनी ने आँखें बंद कर ली, मैं अब धक्का लगाने लगा। ‘आह्ह माँ..’ रजनी दर्द के मारे चिल्ला उठी, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे पर उसने मुझे जरा भी नहीं रोका, वो चुदना चाहती थी।
इस समय को, इस पल को, लंड के सुख को भोगना चाहती थी। मैं धीरे धीरे धक्का देने लगा, थोड़ी मेहनत लग रही थी, मेरा मोटा लंड बड़ी मुश्किल से अंदर जा रहा था, दर्द उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था।
मैं अब जोर से रजनी को चोदने लगा। रजनी भी अब रंग में आ गई थी और मादक आवाज़ें निकल रही थी- आआअह्ह्ह अह्ह्ह्ह…उसकी साँसें बहुत तेज हो गई थी।
वो झड़ते हुए जोर से चिल्लाई- आआह्हह्हह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह और बोली- जान, तुमने आज मुझे पूरा कर दिया।
और मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मैंने अपना लंड चूत से निकाल कर तेजी से मुठ मार कर पूरा वीर्य उसके पेट नाभि पर गिरा दिया। एक दूसरे के बाजू में हम लेट गए और खूब चूमने लगे।
उस रात..हमने तीन बार ज़बरदस्त चुदाई की…दोनों बहुत खुश थे… रजनी अब और खूबसूरत लग रही थी … चुद्ने के बाद… जाने कब नींद आ गयी और हम दोनों सो गये…

सुबह सुबह अपने नोयडा के लिए निकलना था.. सो हम निकल गये… लगभग दो सालों तक हम दोनों खुद चुदाई किए…

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