मेरी चूत का बाजा बज गया (Meri Chut Ka Baja baj Gaya)

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सभी मित्रों को मेरा नमस्कार.. यह bhauja पर मेरी पहली कहानी है.. यदि मुझसे इस कहानी में कोई गलती हो जाए.. तो पहली कहानी मान कर मुझे माफ़ कर दीजिएगा।
मेरा नाम अनामिका जैन है.. मैं चित्तौड़गढ़ राजस्थान से हूँ। मेरी उम्र 20 साल है.. मैं बी.कॉम फाइनल इयर में हूँ। मेरा फिगर 32-28-34 का है।
यह बात 2 महीने पहले की है.. बात भी मेरी पहली चुदाई की है.. जो मेरे भाई ने की थी।
मेरी फैमिली में हम 6 लोग हैं.. मैं, पापा-मम्मी.. बड़े भैया राहुल जैन.. भाभी पूजा जैन .. और मेरा छोटा ममेरा भाई अमित जैन..

पापा एक सरकारी ऑफिस में काम करते हैं.. भैया भी एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। भाभी एक गृहणी हैं.. भाभी 22 साल की हैं.. उनका फिगर 34-30-36 का है.. वे एकदम खुले विचारों की हैं। मेरा छोटा भाई 12 वीं में पढ़ता है.. मैं उस समय तक एकदम कुँवारी थी.. मैंने कभी किसी के साथ सेक्स तो क्या उंगली भी नहीं की थी।

एक बार पापा-मम्मी और भैया किसी काम से बाहर गए हुए थे और मेरे मामा जी को मेरे घर पर रहने के लिए आना था।

उस दिन मेरी तबियत थोड़ी ख़राब थी.. तो मैं कॉलेज नहीं गई थी।
मैं सुबह 9 बजे उठी.. नहा कर फ्रेश होकर.. नाश्ता करने लगी। भाभी भी अपना काम निपटा कर फ्री होकर मेरे पास आ गईं.. हम लोग थोड़ी बातें करने लगे और साथ में टीवी देखने लगे।

थोड़ी देर में भाभी बोलीं- एक बज गया.. मैं अमित के लिए खाना बना देती हूँ.. वो स्कूल से आने वाला होगा।
मैंने बोला- ठीक है..

मैं भी टी.वी. बंद करके सोने लगी.. मुझे नींद आ गई। जब मैं 2 बजे उठी तो मुझे बाथरूम जाना था। मैं जब बाथरूम जाने लगी.. तो भाभी के कमरे से मुझे कुछ आवाजें सुनाई दीं.. तो मैं भाभी के कमरे के दरवाजे के छेद से अन्दर देखने के लिए झुकी।

मैं अन्दर का दृश्य देखकर चौंक गई.. अन्दर मेरा छोटा भाई अमित और भाभी दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे और भाई भाभी को किस कर रहा था। इसी के साथ वो उनके चूचे भी दबा रहा था। भाभी भी चुम्बन में अमित का साथ दे रही थीं और साथ ही पैन्ट के ऊपर से अमित का लंड मसल रही थीं।

फिर भाभी ने भाई की पैन्ट खोल दी और साथ ही चड्डी भी खोल दी, अब वे अमित का लंड हाथ से मसलने लगी थीं।
अमित ने भी भाभी की साड़ी खोल दी और ब्लाउज और पेटीकोट भी खोल दिया।
अब भाभी लाल रंग की ब्रा-पैंटी में थीं इस तरह से उनको पहली बार देखा था.. भाभी एकदम गज़ब की माल लग रही थीं।

मैं भी ये सब देख कर गर्म होने लगी और अपनी सलवार के ऊपर से अपनी चूत सहलाने लगी।

फिर भाभी ने अमित की कमीज़ भी उतार दी। अमित ने भी भाभी की ब्रा-पैंटी उतार दी। अब भाभी एकदम नंगी क़यामत लग रही थीं।
अमित भाभी के स्तनों को जोर-जोर से मसल रहा था और भाभी की चूत सहला रहा था। भाभी भी उसका साथ दे रही थीं।

फिर दोनों पलंग पर चले गए और अमित भाभी की चूत पर मुँह लगा कर चाटने लगा। भाभी भी उसका सर पकड़ कर दबाने लगीं और कहने लगीं- मेरे चोदू देवर.. आह्ह.. ऐसे ही आह्ह.. और चाटो आह.. और जोर से.. और जोर से.. आह..
अमित बोला- हाँ मेरी पूजा रानी.. ले और ले.. आज तो तेरी चूत का भुर्ता बना दूँगा.. बहुत दिन हो गए है तुझे चोदे हुए.. आज सारी कसर निकाल दूँगा..

भाभी- हाँ मेरे राजा.. निकाल दे सारी गर्मी.. इस चूत की.. बहुत परेशान करती है.. मुझे.. आह.. आह.. मैं तो गई.. आह आह.. मेरा पानी निकलने वाला है..
अमित- मेरी पूजा रानी.. निकाल दे अपना पानी.. मेरे मुँह में.. बहुत दिन हो गए हैं.. तेरी चूत का अमृत रस पिए..

फिर ‘आहह.. आह..’ करके भाभी ने अमित के मुँह में अपना पानी छोड़ दिया। अमित अपनी जीभ से भाभी की चूत का सारा पानी चाट गया। भाभी निढाल होकर लेट गईं।

कुछ ही पलों बाद अमित उठ कर भाभी को चुम्बन करने लगा और भाभी के चूचे मसलने लगा.. और उठ कर भाभी के मुँह के अन्दर अपना लंड घुसाने लगा।

भाभी अमित का 7 इंच का लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं.. अमित भी हाथ से भाभी की चूत को सहलाने लगा।
थोड़ी ही देर में भाभी फिर गर्म हो गईं और कहने लगीं- अमित, अब और मत तड़पा.. डाल दो अपना लण्ड.. मेरी चूत में..।
अमित उठ कर भाभी के ऊपर आकर अपना लंड उनकी चुदासी चूत पर रगड़ने लगा।
भाभी बोलीं- अब डाल भी दो यार..

तो अमित ने एक जोर का धक्का दिया और अमित का आधा लंड भाभी की चूत के अन्दर चला गया।
भाभी- आह.. आह.. ओह.. मार डाला..
अमित बोला- भाभी थोड़ा धीरे चिल्लाइए.. कहीं अनामिका जाग ना जाए.. वर्ना सारा मजा बिगड़ जाएगा।

भाभी- साली को आने दो.. उसको भी चोद देना.. आजकल कुछ ज्यादा ही सेक्सी हो गई है.. जरूर वो किसी से चुदवाती होगी.. उसके चूचे और गांड देखी.. कितनी बाहर आ गई है..
अमित- हाँ पूजा रानी.. साली जरूर चुदवाती होगी.. इस उम्र में किसी से भी लंड के बिना नहीं रहा जाता है.. क्या हुस्न है साली रांड का.. मेरा भी लंड उसे देख कर ही खड़ा हो जाता है.. बस एक बार चोदने को मिल जाए.. तो मजा आ जाए..
भाभी- क्या यार.. मेरे चोदू देवर.. वो तो तुम्हारी बहन है.. उसे तो छोड़ देते..
अमित- जब तुम्हें चोद सकता हूँ तो उसे क्यों नहीं चोद सकता..

भाभी- मेरी बात अलग है.. वो तुम्हारी बड़ी बहन है.. बड़ी बहन माँ के समान होती है।
अमित- भाभी भी तो माँ समान होती है
भाभी- हाँ मेरे चोदू देवर.. जा और चोद दे.. साली को.. जा..
अमित- अभी तुम्हें तो चोदने दो।
भाभी- तो चोद ना..

अमित ने एक जोरदार झटका मार दिया और अमित का पूरा लंड भाभी की चूत के अन्दर घुस गया। भाभी की एक बार फिर मुँह से जोरदार ‘आह..’ निकल गई।
अमित- भाभी आपको मैंने इतनी बार तो चोद दिया.. तो फिर ये ‘आह..’ कैसी?
भाभी- यार तुमने मुझे एक महीने पहले चोदा था.. एक महीने में तो बुर वापस चिपक जाती है..
अमित- तो भैया ने भी नहीं चोदा?

भाभी- उस चूतिया के 4 इंच के लंड से क्या होता है.. घुसाता है और पुल्ल-पुल्ल करके निकाल देता है।
फिर भाभी भी अमित का जम कर साथ देने लगीं।

अमित- भाभी आप अब ऊपर आ जाओ में नीचे आ जाता हूँ।
भाभी- ठीक है..

अमित अब नीचे पीठ के बल लेट गया और भाभी ऊपर आकर उसके लंड पर बैठ गईं..। जैसे ही अमित का लण्ड भाभी की चूत में घुसा.. भाभी की ‘आह..’ निकल गई और वो अब धीरे-धीरे लंड पर कूदने लगीं और मीठी-मीठी सिस्कारियां लेने लगीं।

इतनी देर से यह सब देख कर मेरी चूत से भी पानी निकलने वाला था.. तो मैं भी अपनी चूत जोर-जोर से मसलने लगी और मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया।
अमित और भाभी की चुदाई देखकर मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया। मैं बाथरूम में जाकर अपने कमरे के अन्दर आकर पलंग पर लेट गई।
अब आगे..

मैं पलंग पर लेट कर सोचने लगी कि भाभी कितनी ख़राब है.. जो अपने देवर से ही ये सब करवाती हैं। उतने में अमित के कमरे का दरवाजा खुला.. मैं भी जानती थी कि भाभी कभी भी मेरे कमरे के अन्दर आ सकती हैं और उन्होंने मुझे जगा हुआ देखा तो उन्हें शक हो जाएगा.. इसलिए मैं सोने का नाटक करने लगी।

थोड़ी देर बाद भाभी मेरे कमरे के अन्दर आईं और मुझे नींद में समझ कर मुस्कुराने लगीं.. वे मेरे करीब आकर मेरे सर पर हाथ से मुझे उठाने लगीं.. मैं भी उनके जगाने पर नींद से उठी हूँ.. ऐसा नाटक करते हुए उठकर अपनी आँखें मसलने लगी।
भाभी बोलीं- अब तो थकान दूर हो गई होगी?
मैंने भी कहा- हाँ भाभी, अब एकदम ठीक हूँ।

फिर भाभी अपने साथ मुझे बाहर ले गईं और हम हाल में बैठकर टी.वी. देखने लगे।

लगभग 10 मिनट बाद अमित भी अपनी आँखें मसलता हुआ बाहर आया.. जैसे नींद से उठा हो।
वो हमारी और देखकर मुस्कुराया और हमारे पास आकर बैठ थोड़ी देर टी.वी. देखने के बाद बोला- भाभी चाय बना दो यार.. आलस आ रहा है।

भाभी चाय बनाने चली गईं.. भाभी के जाने के बाद अमित मेरे पास आकर बैठ गया।
मैंने उस समय सलवार और एक ढीली सी टी-शर्ट पहनी हुई थी।

अमित मुझसे पूछने लगा- दीदी आप तो अब बड़ी हो गई हैं..
अनामिका- क्यों पहले क्या तेरे से छोटी थी?
अमित- नहीं.. मेरा मतलब आप जवान हो गई हो..
अनामिका- तू भी तो जवान हो गया है.. कॉलेज जो जाने लग गया है..
अमित- हाँ दीदी.. कॉलेज की हवा ही कुछ ऐसी होती है.. जो हर लड़के को जवान बना देती है। वैसे आप भी तो कॉलेज में पढ़ती हो.. सब जानती ही होगी..
अनामिका- हाँ यार पर मुझमें कोई फर्क नहीं आया..

अमित- क्यों नहीं आया.. देखो आप कितनी सेक्सी लगने लग गई हो.. आपका फिगर भी एकदम क़यामत लगती है।
मैं अमित की इस तरह की बातों से बहुत चकित हो गई कि ये क्या बोल रहा है।

उतने में अमित का फोन बजा तो वो फोन पर बात करने अपने कमरे के अन्दर चला गया।

तब तक भाभी भी चाय लेकर आ गईं.. चाय मुझे देकर अमित को आवाज लगाने लगी। अमित भी आकर चाय पीने लगा.. भाभी अपनी चाय लेकर हमे खाना बनाने की बोलकर रसोई के अन्दर चली गईं..

मैंने अमित से पूछा- किसका फ़ोन आया था.. जो कमरे के अन्दर जाकर बात की.. मेरे सामने ही कर लेते।
अमित- दीदी वो मेरी फ्रेंड का फोन आया था।
अनामिका- सिर्फ फ्रेंड का या गर्ल-फ्रेंड?
अमित थोड़ा मुस्कुराते हुए बोला- गर्लफ्रेंड का दीदी..

अनामिका- क्या बोल रही थी?
अमित- कुछ नहीं.. वो आज रात को सिनेमा में चलकर फ़िल्म देखने की बोल रही थी।
अनामिका- तो बस फ़िल्म देखने या कुछ और भी देखने?

अमित- दीदी आप भी ना.. वो तो सब होगा ही.. अगर मेरी किस्मत बढ़िया रही तो..
अनामिका- पहली बार मिल रहे हो क्या?
अमित- हाँ दीदी.. अभी 10 दिन पहले ही उससे फ्रैंडशिप हुई है..
अनामिका- तो आज तो तुम्हारे मजे हैं.. कितने बजे वाले शो में जाओगे?
अमित- 9 से 12..
अनामिका- उसके घर पर कोई कुछ बोलेगा नहीं.. वो घर 12 बजे जाएगी?

अमित मुझसे थोड़ा दूर बैठा था.. तो उठ कर मेरे पास आया और मुझसे बिलकुल चिपक कर बैठ गया और बोला- दीदी उसके मम्मी-पापा यहाँ पर नहीं रहते हैं.. वे उसके गाँव में रहते हैं.. वो तो यहाँ पर पढ़ाई करने आई है और अपनी फ्रेंड के साथ दोनों एक कमरा किराये से लेकर रहती हैं।

अनामिका- अच्छा तो यह बात है.. फिर तो तुम्हें पूरे मजे मिलेंगे..
अमित धीरे-धीरे अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख कर सहलाने लगा। रात की चुदाई देखकर मेरा भी शरीर गर्म हो गया था और चूत में खुजली होने लगी थी.. इसलिए मैंने उसे बिलकुल भी नहीं रोका।

अमित- हाँ दीदी.. और आपका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है?
अनामिका- नहीं यार.. पहले एक था.. पर उससे मेरा ब्रेक-अप हो गया है..
अमित- तो उसके साथ मजे लिए या नहीं?
अनामिका- नहीं यार..

अमित- क्यों.. चुम्बन तो किया होगा?
अनामिका- हाँ चुम्बन तो लिए और ऊपरी मजे सब लिए.. पर इससे आगे कुछ नहीं किया।
अमित- तो दीदी मन तो करता होगा?
अनामिका- चुप साले.. खत्म कर बात.. कुछ भी बोलता है.. मेरा कोई मन नहीं करता..
अमित- चलो ठीक है।

अमित वहाँ से उठकर अपने कमरे के अन्दर चला गया।
मैंने घड़ी में समय देखा 7 बज रहे थे.. थोड़ी देर बाद अमित के पापा यानि मेरे मामा भी आ गए। मुझे देखकर मामा भी बहुत खुश हुए और मुझे गले लगाया और मैं उनसे घर के बारे में पूछने लगी- घर में सब कैसे हैं?

उन्होंने बोला- सब अच्छे हैं।
तभी भाभी आईं और बोलीं- आइए सब खाना खा लीजिये।
मामा उठ कर हाथ-मुँह धोने चले गए।

फिर हम सबने साथ में बैठकर खाना खाया।
अमित मामा से बोला- पापा मैं फ़िल्म देखने जा रहा हूँ.. थोड़ा लेट आऊँगा।
मामा बोले- और कौन जा रहा है?
तो अमित बोला- फ्रेंड है एक..
मामा- तो एक काम कर.. अनामिका को भी साथ ले जा.. ये भी फ़िल्म देख लेगी।
अमित- ठीक है पापा..

अनामिका- नहीं मामा मुझे रात में नहीं देखनी फ़िल्म.. दिन को चलेंगे।

फ़िल्म देखने की तो मेरी भी इच्छा थी मगर मैं अमित की वजह से मना कर रही थी।
अमित- दीदी चलो ना.. बहुत अच्छी फ़िल्म है..
मामा- हाँ बेटी जाओ.. वैसे भी तुम्हारे साथ अमित तो है ही..

मैंने अमित की तरफ देखा तो वो थोड़ा मुझसे नाराज़ था।
मैं तैयार हो गई.. मैंने आज एक टाइट जीन्स और टाइट टी-शर्ट पहन ली।

अमित ने अपनी बाइक निकाली और मैं उस पर बैठ गई। बाइक की सीट थोड़ी छोटी और ऊँची थी.. इसलिए मुझे दोनों तरफ पैर करके बैठना पड़ा। उसकी बाइक यामाहा R15 थी जिसमें पीछे बैठने वाले को आगे वाले के ऊपर लगभग झुक कर बैठना पड़ता है।

अब अमित जब भी ब्रेक लगाता तो मेरे चूचे उसकी पीठ से दब जाते थे।

अमित भी मजे लेकर बार-बार ब्रेक लगा रहा था। इसी तरह हम सिनेमा पहुँचे और अमित ने अपनी गर्लफ्रेंड को फ़ोन लगाया और उससे बात करने लगा। बात करके अमित आया तो थोड़ा अपसैट सा लग रहा था।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोला- श्वेता नहीं आ रही है.. उसके पापा-मम्मी आए हुए हैं।
अनामिका- तो फिर क्या घर वापस चलें?
अमित- तो क्या हुआ.. अपन दोनों देखते हैं..

दोस्तो, कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी..

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