मेरठ की अंजलि को बनाया लेस्बियन- 1 (Merrut Ki Anjaliu Ko Banaya Lesbian-1)

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दोस्तो.. इस बार की कहानी मुझे भोपाल के सलिल ने भेजी है। उन्हें अपनी बात लिखने में मुश्किल हो रही थी इसलिये मुझे ईमेल करके अपना किस्सा लिख भेजा… मैंने उकी कड़ियाँ पिरोकर कहानी का रूप दे दिया।
बस उस कहानी में उन पति-पत्नी की जगह मैं और रवि आ गये हैं। इस बार भी रविवार की छुट्टी हुई तो मेरे पति रवि ने मेरठ जाने की बात कही। महीने में एक बार तो उनका मेरठ का चक्कर लग ही जाता था।
मैंने पूछा- मेरठ में ऐसा क्या काम है?
तो उन्होंने जवाब दिया- ललित से कुछ काम है।

ललित से उनकी इलाहाबाद में दोस्ती हुई थी, दोनों एक साथ ही पढ़ते थे, शादी के बाद भी ललित से रवि की दोस्ती बनी रही, उन्हीं से मिलने रवि अक्सर मेरठ जाते रहते थे लेकिन मुझे एक बार भी अपने साथ नहीं ले गये। इस बार न जाने क्यों मुझे कुछ शक हुआ तो रवि के मेरठ पहुँचने के बाद मैंने ललित की बीवी अंजलि को फोन मिलाया।
अंजलि का जवाब तो चौंकाने वाला था, उसका कहना था कि रवि उनके घर नहीं आते बल्कि ललित ही हर महीने में एक बार रवि से मिलने जाते हैं।

मैंने कहा- यही हाल रवि का है, वो भी महीने में एक बार मेरठ जाने की बात कह कर जाते हैं।
मैं समझ गई कि कुछ तो गड़बड़ घोटाला है लेकिन अंजलि को अपने पति पर पूरा भरोसा था, उसका पति ललित पूजा पाठ का शौकीन था। कुछ गलत करने की तो वो सोच भी नहीं सकता था।

इतने सालों बाद भी मेरी अंजलि से मुलाकात नहीं हुई थी। वो गांव में पल-बढ़ कर मेरठ शहर में आई थी, उसके संस्कार तो अभी भी गांव वाले ही थे, साड़ी, सूट से आगे कुछ नहीं।

पिछली बार जब ललित अकेले मेरे घर आये थे तो मैं मिनी स्कर्ट और मिनी टॉप में थी, मुझे देखकर ललित कहने लगे कि अंजलि को भी थोड़ा माडर्न बना दो।

अब समस्या यह थी कि दोनों दोस्त अपनी अपनी बीवियों से झूठ बोलकर घर से निकलते हैं तो करते क्या हैं।
यह जानने के लिये मैंने रवि को फोन किया और साफ बता दिया कि मेरी अंजलि से बात हो गई है इसलिये मुझे सच सच बता दो कि दोनों कहाँ हो और क्या करते हो।
रवि भी समझ गये कि उनकी चोरी पकड़ी गई है इसलिये बोले कि घर आकर सब बता दूँगा।
मैं समझ गई कि दाल में कुछ काला है।

मेरठ से लौट कर रवि ने बताया कि सीधा साधा दिखने वाला ललित दरअसल गांड मरवाने को शौकीन है।
यह सुनकर मुझे काफी हैरानी हुई, मैंने रवि से कहा- मुझे पूरी बात बताओ।

रवि ने बताया कि इलाहाबाद के हॉस्टल में हर संडे को उनके कमरे में दस-बारह दोस्त मिलकर पार्टी करते थे। बाद में चार दोस्तों को छोड़कर सब चले जाते थे और वो चार दोस्त एक दूसरे की गांड मारते थे लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी।
एक बार ललित भी बिना बुलाये पार्टी में आ गया, अंत में हम चार दोस्तों के अलावा वो भी कमरे में रह गया। हमने ललित को घर भेजने की बहुत कोशिश की लेकिन वो राजी ही नहीं हुआ।
हम चारों ने सोचा कि जब वो सो जाएगा तो हम अपना खेल शुरू कर देंगे।

रात के दो बजे हम चारों नंगे हो गये, लाइट बंद थी इसलिये किसी को पहचान नहीं रहे थे। हमें यह भी नहीं पता था कि हमारा एक दोस्त चुपचाप कमरे से बाहर चला गया है।
मतलब यह था कि ललित हमारे कमरे में था और हम उसे ललित भी नहीं मान रहे थे। हमने अंधेरे में ही उसके कपड़े उतार दिये लेकिन वो कुछ भी नहीं बोला।

जब रवि को एक दोस्त ने ललित की गांड मारनी चाही तो वो उसे टाइट लगी, इसके बाद उसमें तेल लगाया गया, टाइट गांड की जानकारी मिलने पर सभी खुश थे और एक एक करके तीनों ने ललित की टाइट गांड मारी और लंड से निकलने वाला जूस भी उसे पिलाया।

सुबह जब हमारी आंख खुली तो हम हक्के बक्के थे, हमारे कमरे में ललित नंग धड़ंग लेटा हुआ था, वो हमसे नजर नहीं मिला रहा था। ललित ने बताया कि उसे हमारे खेल का पता चल गया था लेकिन शर्म की वजह से वो हमारे ग्रुप में शामिल नहीं हो पा रहा था।इसीलिये रात में मौका मिलते ही उसने अपनी गांड को कुर्बान कर दिया।
यानि अब ललित भी हमारे खेल का हिस्सेदार बन गया था।
इसके बाद हम तीनों ने ललित का लंड पीकर उसका भी जूस पिया, यानि अब हिसाब बराबर हो गया था।

रवि ने बताया कि इसीलिये अब वो महीने में एक बार मेरठ के किसी होटल में चले जाते हैं जहाँ ललित भी आ जाता है और दोनों दोस्त पुरानी यादें ताजा कर लेते हैं।

मैंने रवि से गुस्सा होते हुए कहा- जब हम जयपुर का सैक्स टूर कर आये हैं तो मुझसे इस बात को छुपाने की क्या जरूरत थी।
रवि का कहना था कि ललित इस मामले को छिपाना चाहता था।
मैंने कहा- अबकी बार जब मेरठ जाना होगा तो मैं भी जाऊँगी।

इस बात पर रवि मान गये और तुरंत ललित को फोन करके इस बारे में बता दिया।
ललित की बीवी अंजलि से मेरी फोन पर खूब बात होतीं थी लेकिन मैं उससे कभी नहीं मिली थी।
ललित ने एक बार उसका फोटो दिखाया था, उस फोटो में अंजलि की चूचियाँ काफी बड़ी नजर आ रहीं थी।

मैंने अंजलि से फोन पर पूछा कि उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा काफी भारी है?
इस पर अंजलि ने बताया कि ऐसा एक बीमारी के चलते हुआ है। उसने यह भी बताया कि बीमारी की वजह से ही उसकी चूचियाँ न केवल भारी हैं बल्कि काफी सख्त भी हैं।

मैंने सोचा कि इस बार मेरठ जाऊँगी तो अंजलि की चूचियों का रस भी पीने की कोशिश करूंगी लेकिन गांव की संस्कारी अंजलि ये सब कैसे करने देगी… यही सोच कर मैं परेशान थी।

खैर वो दिन आ ही गया जब हम अंजलि के घर बैठे थे, अंजलि ने सूट पहन रखा था, मैं जींस और टॉप में थी।
मुझे देखकर अंजलि ने कहा- आप ऐसे कपड़े भी पहन लेती हैं?
मैंने हंसते हुए कहा- मैं तो इससे छोटे कपड़े भी पहन लेती हूँ।

मैंने अंजलि को ललित की पसंद के बारे में बताया, उससे कहा कि ललित भी अंजलि को माडर्न लुक में देखना चाहते हैं।
सुनते ही अंजलि बोली कि उसका बचपन गांव में बीता है इसलिये अब ये सब नहीं हो पायेगा।

मैंने अंजलि को समझाया कि ये सभी मर्द सैक्स के भूखे होते हैं, इन्हें तो अपनी बीवी भी माल की तरह दिखनी चाहिये। अगर तुम ऐसा नहीं बनोगी तो ललित कभी भटक भी सकते हैं।

यह सुन कर अंजलि ने माना कि ललित अक्सर दफ्तर की लड़कियों की बात करते हैं, वो भी वैसा बनना चाहती है लेकिन शर्म की वजह से बन नहीं पाती है।

मैंने मौका पकड़ लिया और अंजलि से कहा- आज हम दोनों सैक्सी लुक में घर में रहेंगी, इससे हमारी शर्म थोड़ी खुल जायेगी।
थोड़ी देर समझाने के बाद अंजलि राजी हो गई।

मैंने रवि को इस बारे में बताया, रवि काफी खुश थे, कहने लगे- अंजलि को संभाल लेना, आज रात मैं और ललित घऱ में एक दूसरे की गांड मारेंगे।
मैंने रवि से कहा- आज रात मैं भी अंजलि को इसके पति का असली रूप दिखाऊँगी।
रवि ने इसके लिये मुझे एक आइडिया दिया।

दिन में नहाने के बाद मैंने अपना छोटा नेकर और सैक्सी टॉप पहना, अंजलि मुझे देखकर हैरान थी।
मैंने कहा- ललित को भी ऐसी ही लड़कियाँ चाहियें इसलिये तुझे भी ऐसे ही कपड़े पहनने होंगे।
अंजलि की चूचियां थोड़ी बड़ी थीं इसलिये मैंने उसे थोड़ा बड़ा टॉप दिया जिसके कट भी गहरे थे।

अंजलि जब बाथरूम से बाहर निकली तो ललित उसे देखते ही रह गये, मुझसे बोले- भाभी जी, आज तो आपने मेरी मुराद पूरी कर दी।
टॉप का कट गहरा होने की वजह से भीतर तक का नजारा दिखने लगा था।
अंजलि ने टॉप उतारने को कहा तो ललित ने मना कर दिया।
दो तीन घंटे के बाद अंजलि की अपने कपड़ों को लेकर झिझक मिट गई थी।

रात का खाना खाने के बाद रवि और ललित ने एक साथ सोने की बात कही।
मैंने भी कहा- मुझे भी अंजलि से ढेर सारी बातें करनी हैं, मैं भी अंजलि के साथ सोऊँगी।

कमरे में पहुंच कर अंजलि ने मुझसे पूछा कि रात में पहनने के लिये क्या चाहिये।
मैंने कहा कि टॉप और नेकर उतार देते हैं, नीचे पैंटी और ब्रा तो हैं, उन्हीं को पहन कर सो लेंगे।
इस बार भी अंजलि थोड़ी सी हिचकी लेकिन फिर राजी हो गई।

मैं अपनी सैक्सी पैंटी पहन कर गई थी जबकि अंजलि सामान्य सी पैंटी में थी।
अंजलि मुझसे बोली- इसे पहन कर आपको शर्म नहीं लगती?
मैंने कहा- ..मेरी जान.. इस पैंटी का नजारा तो रवि ही देखते हैं और वो भी पांच मिनट, इसके बाद तो पैंटी भी नहीं रहती है।

मैंने अंजलि की चूचियों को घूरते हुए पूछा- काफी बड़ी और टाइट लग रहीं हैं। क्या इन्हें छेड़ने पर कुछ मजा आता है?
इस पर अंजलि बोली- ललित जब पीते हैं तो बहुत मस्ती चढ़ती है।
इच्छा तो मेरी भी हुई कि अंजलि की चूचियाँ मुंह में भर पूरा रस पी जाऊं लेकिन अभी शांत रहना ही ठीक लगा।

हम दोनों को बात करते हुए एक घंटा हो गया था।
अचानक मैंने कमरे के बाहर देखा तो बाथरूम की लाइट जली थी।
मैं बहाना बना कर बाहर निकली, बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला था, अंदर का नजारा तो बहुत गर्म था, रवि और ललित नंगे थे। दोनों के लंड तने हुए थे और रवि ने अपने मुंह में ललित का लंड ले रखा था।

यह नजारा देख कर मेरी चूत में सनसनी होने लगी, मैं तुरंत कमरे में पहुँची और अंजलि को इस बारे में बताया।
अंजलि को तो विश्वास ही नहीं हुआ, वो तुरंत कमरे से बाहर आई और बाथरूम में झांकने लगी।
इस बार ललित के मुंह में रवि का लंड था।

यह देख कर अंजलि के शरीर में कंपन होने लगा, वो तुरंत कमरे में आई और मुझसे बोली- ऐसा भी होता है?
मैंने कहा- मेरी जान.. लड़कियाँ भी ऐसा करती हैं। यह सुनकर अंजलि और भी हैरान थी।

मैंने कमरे के दरवाजे बंद कर दिये और अपनी ब्रा-पैंटी उतार दी।
अंजलि को थोड़ा संकोच हो रहा था।
मैंने कहा- जब ललित और रवि मस्ती कर सकते हैं तो हमें क्या दिक्कत है?

मैंने आगे बढ़कर उसकी पैंटी उतार दी।
अंजलि ने चूत की झाटें साफ नहीं की थी, मैंने अंजलि को अपनी चिकनी चूत दिखाई और कहा- देख, सभी मर्द इस चिकनी चूत के पीछे पागल रहते हैं। तू भी अपनी झांटें साफ करके ललित के सामने जाना और मुझे अपनी मस्ती के बारे में बताना।

बातों ही बातों में मैंने आगे बढ़कर अपनी तमन्ना पूरी कर ली और उसकी चूचियाँ पीनी शुरू कर दीं।
रवि अक्सर कहते हैं कि टाइट चूची पीने का मजा ही अलग होता है! आज मुझे इसका अंदाजा हो रहा था, चूची मेरे मुंह में जाते ही अंजलि के मुंह से सिसकारी निकलने लगी।
वो पहले ही बता चुकी थी कि चूचियों पर हाथ फेरते ही वो मस्त हो जाती है।

इसके बाद मैंने उसकी चूत पर ऊंगली घुमाते हुए उसे चूत के भीतर डाल दिया, चूत से नदियाँ बह रहीं थीं। मैं नीचे की तरफ झुकी और अपनी जीभ अंजलि की चूत में डाल दी।
उसने इतनी जोर से सिसकारी भरी कि मुझे डर होने लगा कि कहीं उसकी आवाज सुनकर ललित और रवि न आ जायें लेकिन वो दोनों भी तो अपनी ही दुनिया में खोये हुए थे।

मेरी जीभ अंजलि की चूत में और भी गहराई में जाने लगी थी।
अचानक वो धड़ाम से बिस्तर पर गिर गई, अंजलि की तेज तेज चलती सांसों को देखकर मैं घबरा गई थी।
वो थोड़ा नार्मल हुई तो बोली- चुदाई में इतना मजा पहली बार आया है।

मैंने उसे थोड़ी और देर आराम करने दिया, फिर उससे पूछा कि क्या वो एक बार और मजा लेना चाहती है।
अंजलि तुरंत तैयार हो गई। इस बार मैंने कहा- दोनों एक साथ करेंगे, तुझे भी मेरी चूत पीनी होगी।

अंजलि के हां कहते ही मैं सिक्स-नाइन की स्थिति में आ गई। अब मेरे मुंह के सामने अंजलि की चूत थी और अंजलि के मुंह के आगे मेरी चिकनी चूत… हम दोनों ने एक साथ चूत पीनी शुरू की।मुझे पहली बार पता चला कि अंजलि तो चूत पीने में पूरी खिलाड़ी है।
पांच मिनट के अंदर हम दोनों पसीने में नहा गईं थी। हम दोनों की चूत से पिचकारी निकल रही थी, थकान से चूर हम दोनों उसी हालत में सो गये।
मुझे पहली बार पता चला कि अंजलि तो चूत पीने में पूरी खिलाड़ी है।
पांच मिनट के अंदर हम दोनों पसीने में नहा गईं थी। हम दोनों की चूत से पिचकारी निकल रही थी, थकान से चूर हम दोनों उसी हालत में सो गये।

सुबह जोर जोर से दरवाजा पीटने की आवाज सुनकर मेरी आँख खुली।
दरवाजा खोलने पर बाहर रवि और ललित खड़े थे, मुझे देखते ही कहने लगे कि दस मिनट से दरवाजा पीट रहे हैं। रात में देर से सोईं थीं क्या?
अब मैं उन्हें क्या बताती.. कह दिया कि सुबह तीन बजे सोये हैं।
मेरा जवाब सुनकर ललित ने तो भरोसा कर लिया लेकिन रवि मुस्कराते हुए बोले- मतलब मिशन पूरा हो गया।

सुबह नौ बजे हम नाश्ते की मेज पर थे, अंजलि बहुत चहक रही थी, ललित उसकी हालत देखकर हैरान थे, कहने लगे- भाभी जी, आप तो बस कमाल हो, अगली बार रवि अकेले नहीं आयेगा, आपको भी साथ आना होगा।
मैंने भी कहा- ठीक है, लेकिन इस बार जब मै आऊँगी तो घर पर नहीं रहेंगे, कहीं नदी किनारे घूमने चलेंगे।

थोड़ी ही देर बाद हम और रवि घऱ के लिये रवाना हो गये थे।
घर लौटने पर रवि काफी मस्त नजर आ रहे थे, उन्होंने शरारत भरे अंदाज में पूछा- मैडम, आगे का क्या इरादा है?
मैंने कहा- आप ही बताओ, आमतौर पर होता उतना ही है जितना पति चाहता है।
रवि ने कहा- कह तो ठीक रही हो! दरअसल ललित चाहता है कि एक वो हम दोनों की चुदाई सामने होते देखे। अब अंजलि देखना चाहेगी या नहीं इसका कुछ पता नहीं।

मैंने कहा- अंजलि को मैं राजी कर लूंगी, आखिर उसकी चूत पी चुकी हूँ।
लेकिन रवि ने कहा- अंजलि ही तो दिक्कत है, वो अकेले में तो सब कर सकती है लेकिन किसी मर्द के सामने करने को राजी नहीं होगी।
मैंने रवि से कहा- यह मुझ पर छोड़ दो।
रवि बोले- यार, एक बार अंजलि की चूचियाँ ही दिखा दो, दोस्त की बीवी है इसलिये उसकी चूत में घुसना आसान नहीं होगी।
मैं रवि का मतलब समझ रही थी लेकिन गाँव की मानसिकता वाली अंजलि को समझाना भी तो आसान नहीं था।

अगला महीना जैसे जल्दी ही आ गया, हम फिर मेरठ के लिये निकल पड़े, इस बार दो दिन रुकने का प्रोग्राम था।
मेरठ में ललित घर के बाहर ही मिल गया, कहने लगा- भाभी जी, पूरे महीने अंजलि इतनी मस्त रही कि मैं तो दफ्तर की लड़कियाँ भी भूल गया।

अंदर जाने पर अंजलि मिली, अबकी बार टॉप पहने खड़ी थी, मैं उसके गले मिली तो अंदाज हुआ कि उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी।
मैं उसके कान में फुसफसाई- इतनी आजादी ठीक नहीं है।
उसका जवाब था- इतने टाइट हैं कि ब्रा की जरूरत भी नहीं होती है।

हमने हल्का फुल्का नाश्ता किया।
बातों ही बातों में ललित ने बताया- यहाँ पास में ही एक पिकनिक प्वाइंट है। शाम छः के बाद वहाँ केवल पति-पत्नी या जोड़े ही जा सकते हैं।

शाम को हम पिकनिक प्वाइंट पर पहुँच गये थे, भीतर बड़ा सा स्विमिंग पूल था जिसमें बीस जोड़े मस्ती कर रहे थे।
चूंकि सभी जोड़े थे इसलिये सभी बेशर्म बने हुए थे।
मुझे ललित की पसंद काफी अच्छी लगी।
हमने एक कोने की सीट पकड़ी, मैं और रवि एक साथ बैठे था, सामने की सीट पर अंजलि और ललित।

अचानक रवि ने मुझे चूम लिया। खुले में.. भीड़ के बीच चुम्मी का अलग मजा आया। मैंने अंजलि की आँखों में देखा, उससे लग रहा था कि अंजलि को अच्छा तो लगा लेकिन करने से हिचक रही थी। यानि अब अंजलि को मुझे ही तैयार करना था।
सामने स्विमिंग पूल का नजारा मस्त कर देने वाला था, मैंने अंजलि से कहा- चल थोड़ा नहा लेते हैं।

हम दोनों ने नेकर और टॉप पहने और स्विमिंग पूल में उतर गये। पाने में कई बार हम दोनों की चूचियाँ टकराईं तो अंजलि थोड़ी गर्म होती नजर आई। मैंने स्विमिंग पूल में ही उसकी चूत को भी थोड़ा सा छेड़ दिया।
अंजलि काफी हैरान नजर आ रही थी। मैंने उससे जब अपनी चूत को सहलाने को कहा तो वो तैयार नहीं हुई।

हम करीब आधे घंटे तक स्विमिंग पूल में रहे। तब तक रवि औऱ ललित सामने बैठे कोल्ड ड्रिंक पीते रहे।

अब हमने बाहर निकलने की सोची, हमारे कपड़े शरीर से चिपके हुए थे और अंजलि ने तो ब्रा भी नहीं पहनी थी। उसकी चूचियों के काले प्वाइंट पहाड़ की तरह तने हुए थे। मैंने बाहर निकलते हुए रवि को आंख मारी।

रवि चोरी छिपे अंजलि को देख रहे थे। ललित ने अंजलि को कपड़े बदलने नहीं दिये, उसे अपने पास बैठा कर चिपका लिया।
मैंने गौर किया तो ललित का लंड खड़ा हो गया था, एक बार उसने अंजलि की चूचियों पर हाथ फेरने की कोशिश की लेकिन अंजलि ने उसका हाथ हटा दिया।

इसके बाद रवि और ललित भी पानी में गये। मैंने दोनों पर कड़ी निगाह रखी तो अंदाज हुआ कि पानी के भीतर दोनों ने एक दूसरे के लंड पकड़ रखे थे। हो सकता है पानी के भीतर ही दोनों ने लंड से जूस निकाल भी दिया हो।

रात को रवि मेरे पास ही सोये, कहने लगे- अंजलि की चूचियाँ तो गजब की हैं, पीने को मिल जाएं तो मजा आ जाये।
मैंने कहा- ललित के बारे में पता है न… वो तैयार ही नहीं होगा!
रवि बोले- ठीक है लेकिन एक बार दोनों को ठुकाई करते हुए दिखवा दो।
मैंने कहा- ठीक है, कल देखते हैं।

अगले दिन मैंने नाश्ते की मेज पर कहा- कल पानी में भीगने से थकान हो गई है, मैं रवि से मालिश करवाना चाहती हूँ।
यह सुनकर ललित कहने लगे- अंजलि भी थक गई होगी, मैं की अंजलि की मालिश करूँगा।

अब हमने अंजलि की तरफ देखा तो अनमनी सी लगी, बोली- एक साथ नहीं करेंगे।
मैंने कहा- ठीक है, छत पर इंतजाम करते हैं और दोनों पार्टियों के बीच परदा रहेगा।

ललित का मकान तीन मंजिला था। आसपास के सभी मकान एक मंजिल के। यानि अगर हम छत पर डेरा जमायें तो किसी के देखने का खतरा नहीं था।

छत पर दो गद्दे डाल कर उन पर प्लास्टिक की शीट बिछा दी गई। दोनों गद्दों के बीच से गुजर रहे कपड़े सुखाने के तार पर एक साड़ी का परदा डाल दिया गया। अब दोनों ही पार्टियाँ एक दूसरे की आवाज तो सुन सकती थी लेकिन देख नहीं सकते थे।
अंजलि इस इंतजाम से खुश थी।

बिस्तर पर पहुँच कर मैंने अपने कपड़े उतार दिये, रवि भी केवल अंडरवियर में थे।
रवि ने मुझे तेल लगाना शुरू किया, जब उनके हाथ मेरी चूचियों पर पहुँचे तो मुझे सनसनी होने लगी, मैंने कुछ तेज आवाज में कहा- रवि मेरी चूचियों की अच्छी तरह से मालिश करो।

मेरी आवाज सुनकर अंजलि तो चुप रही लेकिन ललित ने रवि से पूछा- दोस्त, कैसा चल रहा है?

रवि ने जवाब दिया कि रेनू अपनी चूचियों की मालिश कस कर करवाना चाहती है।
इस पर ललित ने पूछा- तेल लगाने से भाभी की ब्रा खराब नहीं होगी?
‘…ब्रा.. कैसी ब्रा..?’ रवि ने कहा- अरे भाई, रेनू तो पूरी नंगी पड़ी है। क्या अंजलि ने कुछ पहन रखा है?

इसके जवाब में ललित बोला- …हाँ.. ब्रा पैंटी पहन रखी है।
रवि ने कहा- तुरंत दोनों को उतार दो, तेल से खराब हो जाएंगी।
इसके बाद अंजलि की हल्की सी ना-नुकुर की आवाज आई लेकिन ललित ने उसे भी पूरी नंगी कर दिया।

मैं और रवि तेज आवाज में लंड चूत की बातें कर रहे थे। बीच बीच में ललित भी शामिल हो जाता था।
अचानक अंजलि ने भी तेज आवाज में ललित से कहा- चूत में ज्यादा तेल डालो।

मैं और रवि मंद मंद मुस्करा रहे थे, अंजलि की शर्म मिटने लगी थी।
अब मैंने रवि से कहा- मेरी मालिश पूरी हो गई है। अब मैं आपके लंड में तेल लगाना चाहती हूँ।

इतना सुन कर रवि अंडवियर उतार और नीचे लेट गये.. मैं रवि के ऊपर चढ़ गई…
रवि बोले- लंड में तेल लगाने की जरूरत क्या है.. तुम्हारी चूत को इतना तेल पिलाया है। लंड को चूत में डाल दो.. लंड में तेल लग जायेगा।
मैंने भी कहा- ठीक है, तुम अब चुदाई चाहते हो तो ठीक है…

और अपनी चूत को रवि के लंड में पिरो दिया।
चूत चिकनी थी इसलिये आसानी से लंड सरकता गया।
हमने ऐसी आवाज निकालनी शुरू कर दी जैसे हमारी चुदाई की रफ्तार बढ़ गई हो लेकिन हम चुदाई कर नहीं रहे थे, हम तो मौके का इंतजार कर रहे थे।

हमारी बातें सुन कर ललित ने अंजलि से कहा कि वो भी खुले में उसे चोदना चाहता है, अंजलि पूरी मस्त हो चुकी थी, वो भी बोली- चोद दो मेरे राजा, तुम्हारा पप्पू भी तो पूरा गर्म हो गया है।

पर्दे के दूसरी तरफ से दोनों की सांसें तेज होने लगीं- ऊंह… आह… मार डाला… कितना मोटा है…
अंजलि पूरी तरह बेशर्म हो गई थी!
अचानक रवि ने इशारा किया तो मैंने हाथ बढ़ाकर पर्दा खींच दिया।

सामने ललित का लंड अंजलि की चूत में घुसा हुआ था। दोनों हमें देखकर एक बार चौंके लेकिन उनकी रफ्तार इतनी बढ़ गई थी कि उसे रोकना संभव नहीं था।
रवि ने कहा- ललित पूरा जोर लगाओ, अंजलि की चूत में पूरा लंड जाना चाहिये।
मैंने भी कहा- अंजलि, हारना नहीं है चूत को कस कर दबा ले… लंड घुसाने में जोर लगाना होगा तो ललित को पूरा मजा आयेगा।

दोनों पागलों की तरह एक दूसरे पर चिपटे हुए थे.. पसीने में तरबतर… थोड़ी ही देर में ललित और अंजलि पूरी तरह से झड़ गये और वहीं पर गिरकर तेज तेज सांसें लेने लगे।

थोड़ी नार्मल होने पर अंजलि ने मुझसे शिकायती लहजे में कहा- बहुत बदतमीज हो गई हो रेनू, चलो अब अपनी भी चुदाई दिखा दो!
और मैंने खुशी खुशी रवि का लंड अपनी चूत में डाल लिया।
——– bhauja.com

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