मिला मौका मारा चौका

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प्रेषक : राजेश ठाकरे
दोस्तो, अभी तक मैंने तीन सच्ची कहानियाँ आप लोगों को अन्तर्वासना के माध्यम से पहुँचाई हैं, अब आप लोगों को मैं एक और भाभी की चुदाई की कहानी बता रहा हूँ और कहानी के शीर्षक के अनुसार कैसे मौका मिला और मैंने कैसे चौका मारा यही बताऊँगा !
उनका पति यानि मेरा ममेरा भाई उनसे करीबन दस साल से बड़ा है, उसके साथ मेरा दोस्ताना व्यव्हार रहा है, हम दोनों भी सेक्स की बातें पहले से ही एक-दूसरे को बताते रहे हैं ! इतना नजदीकी सम्बन्ध होने की वजह से मैंने कभी भी भाभी को वासना की नजर से नहीं देखा था, वो हमेशा देवर-भाभी के रिश्ते की वजह से हसीं मजाक कर लेती थी।
खुद ना चाहते हुए भी कोई आपको मौका दे तो आओ अपने आप को रोक नहीं सकते, यही मेरे साथ भी हुआ, वो अब मैं आपको बता रहा हूँ !
शादी का कार्यक्रम निपटने के बाद वो सब अपने गाँव को चले गए ! शादी के दो दिन बाद मेरी सुहागरात थी लेकिन मेरी बीवी की योनि कसी होने की वजह से मुझे उसे चोदने में बड़ी तकलीफ हुई, मेरी बीवी को बहुत दर्द हो रहा था और उसी वजह मेरा लण्ड पूरा छिल गया साथ में मेरे बीवी की चूत भी छिल गई थी। ऐसी ही तकलीफ 2-3 दिन हुई। बाद में सब कुछ ठीक हो गया !
शादी के चौथे दिन मैंने अपने दोस्तों के लिए एक पार्टी रखी थी जिसमे मैंने मेरे ममेरे भाई को भी बुलाया था !
पार्टी ख़त्म होने के बाद मैंने मेरी सुहागरात वाली बात उसको बता दी तो वो बोला- तेरी बीवी तेरे से नाजुक होने की वजह से ये सब हुआ।
उसने कहा- वो नाजुक लड़की और तू साला चुदक्कड़ ! शैतान के जैसा भिड़ा होगा !
उसके बाद हमारी कुछ और बातें हुई और वो भी अपने गाँव चले गया।
शादी के दो महीने बाद एक दिन ऐसे ही काम से मैं अपनी छोटी बहन के गाँव जा रहा था, उसी सड़क पर मेरे मामा का भी गाँव है और घर मुख्य सड़क पर होने की वजह से मैंने सोचा कि चलो सब से मिल लेते हैं, और मैं मामा के घर पर रुक गया।

करीब 2 बजे का समय था मैंने दरवाजा खटखटाया तो भाभी ने दरवाजा खोला और मुझे अन्दर आने के लिए बोला।
उस दिन भाभी एकदम माल नजर आ रही थी !
मैं अन्दर आ गया और देखा कि घर पर कोई नहीं था। भाभी से पूछने पर पता चला कि सब लोग खेत में चले गए थे और भाभी के बच्चे स्कूल में चले गए थे !
भाभी ने मेरे लिए चाय बनाई और हम दोनों ने बातें करते करते चाय पी !
उसके बाद भाभी पूछने लगी- आपकी तकलीफ अब कैसी है?
मैं बोला- कौन सी तकलीफ?
भाभी बोली- वो जो आपको और मेरे देवरानी को शादी के दूसरे ही दिन हुई !
यह सुनते ही मेरे कान खड़े हुए और मुझे लगने लगा कि शायद भाई ने बताया होगा।
मैंने उनको बोला- आपकी देवरानी कच्ची कलि निकली इसीलिए वो तकलीफ हुई !
तो बीच में ही भाभी ने ताना मारा और बोलने लगी- ऐसे थोड़े ही किया जाता है पहली रात को !
मैंने नासमझ बन कर उनको पूछा- फिर आप ही बताओ कैसे किया जाता है?
भाभी बोली- वो आपको बताने की क्या जरूरत है, आप तो अनुभवी हो इस मामले में !
मैं चौंक गया और भाभी को पूछा- आप यह क्या बोल रही हो कि मैं इस मामले में अनुभवी हूँ?
तो भाभी बोली- मुझे सब मालूम है, आपके भाई ने सब बताया कि आपकी कितनी गर्लफ्रेंड थी और आपके कितनी के साथ सम्बन्ध थे !
मैं बोला- तो इससे क्या होता है ! जैसे पहले करता था वही बीवी के साथ करने गया !
भाभी बोली- वो सब ठीक है लेकिन पहली रात को जरा प्यार से काम लेना होता है !
मैं बोला- भाभी आप ही बता दो कि मैंने क्या करना था उस रात?
भाभी बोली- मैं कैसे बताऊँ कि आपने क्या करना था, वो तो आपने ही करना था ! प्यार से ! धीरे धीरे !
अब ये सब बातें करते करते मेरे लंड में हलचल महसूस हो रही थी, वो धीरे धीरे खड़ा हो रहा था ! आज तक भाभी ने मुझसे ऐसी बातें नहीं की थी ! मेरा मन कर रहा था कि अभी भाभी से ही सुहागरात मनाने की कला सीख लेता हूँ !
मैं बोला- भाभी, आप ही बता दो कि आपकी सुहागरात कैसी हुई थी?
तो भाभी शरमा गई और बोली- अच्छी हुई थी !
मैं बोला- अच्छी मतलब? कहाँ से शुरु किया था भाई ने और कितनी बार किया था ! क्या आपको और भाई को ऐसी ही तकलीफ हुई थी?
भाभी बोली- तकलीफ तो हुई थी लेकिन कम ! क्योंकि ये बड़े प्यार से और आराम से जो कर रहे थे !
मैं बोला- प्यार से मतलब ! हथियार तो हमारा सरीखा ही है ना ! भाई के हथियार से प्यार और मेरे हथियार से क्या आग निकलती है !
भाभी बोली- वो मुझे क्या मालूम कि आप के हथियार से प्यार निकलता या आग ! लेकिन इतना तो मालूम है कि आपके भाई के हथियार से प्यार निकलता था जो अब नहीं निकलता !
यह सुनते ही मैं समझ गया कि भाभी की प्यास भैया से बुझ नहीं रही इसीलिए भाभी ये सब बातें मुझसे करके मुझे उकसा रही हैं।
अब तक मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और धीरे-धीरे उसमें से चिपचिपा पानी निकल रहा था और भाभी भी धीरे धीरे जगह पर ही अपने शरीर को हिला रही थी।
मैं बोला- अब नहीं निकलता? मतलब? क्या वो आपसे प्यार नहीं करता? अब इतना खुल कर बातें कर रहे हैं तो शर्माना क्या, सीधा ही पूछ लेता हूँ ! क्या वो आपके साथ सम्भोग नहीं करता?
भाभी बोली- करते तो हैं, हफ्ते, 15 दिन में एक बार लेकिन पहले जैसा नहीं ! उसमें भी जल्दी ही फुस्स हो जाते हैं ! फिर ऐसे करने में बचा ही क्या जो पूरा ना हो पाया हो !
इतने में भाभी क्या ध्यान मेरे लण्ड की तरफ गया और हंस कर बोलने लगी- देखो, आपका हथियार आग नहीं, पानी छोड़ रहा है !

वैसे ही मैंने अपनी पैंट की ओर देखा तो मेरी पैंट लंड से निकलने वाले पानी की वजह से गीली हो गई थी ! अब मैं समझ गया था कि अब भाभी को मेरे से चुदवाना है ! और मैंने भी सोच लिया कि अब मौका मिला तो चौका मार कर ही रहेंगे !
अब मैंने सोचा कि चलो अब बेशर्म ही बन जाते हैं, और मैं उठ कर भाभी के पास चले गया !
भाभी का हाथ पकड़ा और बोला- चलो भाभी, आज मुझे सुहागरात कैसी करनी है, सिखा ही दो ! और मैं भी आपको अपनी आग से मिलवा देता हूँ !
भाभी शरमा गई और मना करने लगी लेकिन अब मैं कहाँ मानने वाला था ! मैंने दरवाजा बंद किया और भाभी को अपने बाँहों में उठा कर बेडरूम में लेकर गया और दीवान पर लिटा दिया !
अब भाभी बिल्कुल सुहागरात को जैसे नवेली दुल्हन शरमाती है, वैसे ही शरमा रही थी और अपने हाथों अपना चेहरा छुपा लिया !
मैंने अपना पैंट और शर्ट उतार दिया, मैं सिर्फ चड्डी और बनियान में था और मेरा लंड चड्डी से निकलने के लिए तैयार था, मैं दीवान पर आकर भाभी के ऊपर हो गया और उनके होंठों को चूमने लगा, भाभी भी मेरे होंठों को चूमने लगी ! साथ-साथ मैं उनकी गर्दन को भी चूम रहा था, उससे वो और भी ज्यादा सिसकारियाँ मार रही थी।
थोड़ी देर के बाद मैंने उनकी साड़ी उनके शरीर से हटा दी, अब वो सिर्फ ब्लाउज, ब्रा और पेटीकोट में ही थी तो मैंने उनकी चूचियों को मसलना शुरु किया, उन्हें ऊपर की ओर दबा कर चूचियों के बीच की गली में जीभ से चाटना शुरु किया जिससे भाभी बहुत उत्तेजित हो गई। अब वो अपने पैरों से मेरे खड़े लंड को दबा रही थी ! उसके बाद धीरे धीरे मैंने उनकी ब्लाउज के हुक खोल ब्लाउज उतार कर एक ओर फेंक दिया,
क्या उरोज थे भाभी के ! वाह ! गोरे-गोरे और बड़े-बड़े जो ब्रा से निकलने के लिए बेताब थे !
अब मैंने उनको भी मसलना शुरु किया, भाभी भी मेरे बदन को पकड़े हुए थी !
फ़ौरन मैंने उनकी ब्रा को भी उतार दिया और उनकी नंगी चूचियों को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा, साथ-साथ दबाना भी जारी रखा। जोर से दबाने की वजह से उनको थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन आज उनकी सही चुदाई होने वाली थी इसीलिए वो सब सहने के लिए तैयार थी !
उन्होंने मेरी बनियान उतारी और मेरी नंगी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी ! थोड़ी देर बाद मैंने उनका पेटीकोट उतार कर उनकी चूत पर हाथ फेरना शुरु किया जिससे वो अपने पांवों को की सिकोड़ने लगी।
भाभी बोली- आप अपनी चड्डी जल्दी उतरिये ना और मेरी भी उतारिये, अब बरदाश्त नहीं हो रहा है ….प्लीज ……डालो ना जल्दी !
मैं बोला- मैं आपकी चड्डी उतरता हूँ, आप मेरी उतार दो !
वैसे ही फ़ौरन उन्होंने मेरी चड्डी उतारी और उतारते ही मेरे लंड के साथ खेलने लगी। मैंने भी उनकी चड्डी उतार दी और उनकी चूत में उंगली करना शुरु किया, उनकी चूत पर थोड़े थोड़े बाल थे !
जैसे ही मैंने अपनी उंगली चूत में डाली, वैसे ही भाभी उछल पड़ी और बोली- जरा धीरे से डालिए, पिछले एक महीने से किसी ने मेरी चूत को छुआ नहीं है !
अब मैं धीरे धीरे उंगली अन्दर-बाहर कर रहा था जिससे भाभी की कामाग्नि भड़क चुकी थी और उनका पानी भी निकलना शुरु हो गया था !
अब उनसे रहा नहीं गया, बोली- प्लीज डालो न…..मेरी खुजली मिटा दो ! यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
तुरंत मैंने उनको जवाब दिया- ऐसे मैं डालने वाला नहीं हूँ ! आपको एक काम और करना पड़ेगा, उसके बाद ही मैं आपकी चूत को शांत करूँगा !
तो वो बोली- अब कौन सा काम बचा है?
मैं बोला- मेरे लंड को चोकोबार समझ कर चूसो, तब ही मैं आपकी चूत में पानी छोडूँगा !
उन्होंने एक पल की भी देरी न करते हुए उठ कर मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी…
ऐसे लग रहा था मानो कोई विदेशी रांड मेरे लंड को चूस-चूस कर घिस डालेगी !
अब मैंने उनकी चूत को चाटना शुरु किया तो उनकी आवाजें जोर पकड़ने लगी- आह्ह…आह्ह…हू….ह्ह्हूऊ…
और अपने चूतड़ों को ऊपर उछाल कर मेरे मुँह में ठूंसने लगी और बोलने लगी- प्लीज बस भी करो अब, हो गया ! मेरी चूत को निहाल कर दो अब… आज जितना चोदना है उतना चोद डालो… प्लीज !
मैंने भाभी की तकलीफ समझते हुए सब बंद कर दिया और उनको सीधा लिटा के उनके पैरों को अपने कंधे पर लेके अपने लंड को उनकी चूत की मुँह पर रख दिया और एक ही झटके में पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया। वैसे ही उनके मुँह से जोर की आवाज निकली- मर गई मैं… मार डाला…
अब मैंने धीरे धीरे अपने लंड को आगे-पीछे करना शुरु किया और उनके शरीर पर आकर उनकी दोनों चूचियों को अपने मुँह में भर लिया ऐसा ही करीब 5 मिनट चला !
अब वो बोलने लगी- जरा जोर लगा कर करो ना !
तो मैंने स्पीड बढा दी ! अब मेरा लंड सीधा उनकी चूत में गपागप अन्दर-बाहर हो रहा था, भाभी को बहुत मजा आ रहा था, वो बहुत ही ज्यादा मज़ा लेकर चुदवा रही थी।
और थोड़ी ही देर में भाभी झर गई उनके पानी से अब मुझे उनकी चूत में ढीलापन महसूस हो रहा था इसीलिए मैंने अपना लंड निकाल लिया !
भाभी बोली- अरे आप क्यों निकल रहे हो? डाल दो ना पानी मेरे चूत में !
मैं बोला- आपकी चूत पूरी गीली हो गई है, मजा नहीं आ रहा !
तो वो बोली- मेरे चूत की तो प्यास बुझ गई है लेकिन आपका लंड प्यासा ही है तो आप एक काम कीजिये, मेरी गांड मार लीजिये जो बड़ी कसी है और आपको मजा भी आएगा !
मैं बोला- आपने कभी अपनी गांड मरवाई है क्या मेरे भाई से?
तो वो बोली- चूत को ही शांत नहीं करते, तो गांड कहाँ से मारेंगे !
मैंने थोड़ी सी पैट्रोलियम जेली ली और अपने लंड और उनकी गांड पर लगा दी !
अब मैंने उनको दीवान के किनारे घोड़ी बनाया और मैं नीचे खड़ा हो गया जिससे मेरा लंड उनकी गांड के छिद्र पर एकदम सटीक बैठ रहा था !
मुझे मालूम था कि भाभी ने कभी गांड नहीं मरवाई है इसीलिए उनको बहुत ज्यादा तकलीफ होगी जिसकी वजह से वो मुझे बराबर चोदने नहीं देगी इसीलिए मैंने उनका मुँह गद्दी पर रख दिया, दोनों हाथों को पकड़ कर गांड के पीछे कर दिया !
अब मेरी बारी थी क्योंकि भाभी की चूत तो शांत हो गई थी, मैंने अपना लंड भाभी के गांड से सटा दिया और उसे जोर अन्दर पेलने लगा लेकिन वो अन्दर जा नहीं रहा था।
अब मुझे लगा कि ये ऐसे जाने वाला नहीं है तो मैंने धीरे-धीरे दबाव डालते हुए से पूरा लंड उनकी गांड में घुसेड़ दिया।
वो तड़प उठी और बोली- प्लीज मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है, फट जाएगी पूरी…प्लीज !
वो हिल भी नहीं पा रही थी क्योंकि मैंने उसके दोनों हाथ और गांड को अपने हाथों से पकड़ रखा था !
अब मैंने अपने लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया… बड़ी कसी गांड थी उनकी, मुझे तो बड़ा मजा आ रहा था पर वो अब भी दर्द से चिल्ला रही थी।
मैंने उनकी तरफ से ध्यान हटा दिया और अपना लंड अन्दर-बाहर करना जारी रखा ! थोड़ी देर के बाद उनका दर्द कम हुआ और वो अब गांड चुदवाने में मजा ले रही थी।
अब मैं भी झरने की कगार पर था इसीलिए मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अगले एक मिनट में पूरा पानी भाभी के गांड में छोड़ दिया और उनको सीधा करके उनके शरीर पर लेट गया !
15 मिनट के बाद भाभी फिर से मेरे लंड से खेलने लगी जिससे मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। अब हम दोनों ने फिर से चुदाई का आनन्द उठाया और इस बार मैंने अपना पूरा पानी उनकी चूत में छोड़ दिया !
ऐसा करके मैंने मौके का फायदा उठाया और भाभी को चोदने का आनंद उठाया ! उसके बाद ठीक एक साल के बाद उनके देवर के शादी में सतत तीन दिन-रात खेत में उनकी चुदाई की !
भाभी को चोदने का आनंद तो आता ही है लेकिन उनकी लंड चूसने की अदा मुझे बेहद पसंद है ! अब कभी मौका मिला तो मैं भाभी की मुँह की चुदाई करूँगा और अपने चोकोबार की क्रीम उनके मुँह में डालूँगा !
आपका प्यारा देवर……राजेश

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