मामी ने मेरे लण्ड की सील खोली

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हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम पी सिंह है। मैं 26 साल का हूँ। मैं एक मल्टिनेशनल कंपनी में इंजीनियर हूँ।
यह कहानी है मेरे लंड के उदघाटन की.. यानि मेरी पहली चुदाई की।
मेरे लंड ने जिसकी प्यास बुझाई वो है मेरी स्वीट और लवली.. हॉट शालू मामी।
मेरी मामी 30 साल की एक हसीना.. एक खूबसूरत औरत.. कटीला गोरा बदन.. बड़े गोल मम्मों.. और मस्त से गोल थिरकते हुए चूतड़ों के बीच फंसी हुई गाण्ड की मालेकिन थीं।

मैं सूरत में अपने मामा-मामी के साथ उनके फ्लैट में रहता था। मेरी मामी की दो बेटियाँ थीं। वो सुबह 7.30 बजे स्कूल निकल जाती थीं।
मैं और मामी अक्सर हँसी-मज़ाक करते रहते थे और कभी-कभी नॉनवेज बातें भी कर लेते थे। जब वो साड़ी पहनती थीं.. तब उसके एक-एक अंग के कटाव उभर कर बाहर को आते थे.. जिसे देख कर सबका लंड खड़ा हो जाए।

मामी घर पर अक्सर नाइटी पहने रहती थीं जो बहुत ही ढीली-ढाली होती थी। उनकी इस मैक्सी के गले का कट थोड़ा गहरा और बड़ा था।
रोज़ सुबह घर के सारे काम करते समय और झाड़ू-पोंछा आदि करते वक़्त मुझे रोज़ उनके मम्मों के दीदार होते।
मेरा लंड रोज़ सुबह पैन्ट में तंबू बना लेता और जब वो खाना पकातीं तो मैं उनकी गाण्ड ताड़ता रहता।

उनके मम्मों की तारीफ़ क्या करूँ.. वो मस्त गोरे-गोरे मुलायम मम्मे.. आह्ह.. मेरा तो जी करता था.. उसी वक़्त दबा लूँ।
वो अक्सर पोंछा लगाते वक़्त अपनी नाइटी को घुटनों के ऊपर तक ले आकर अपनी कमर पर अटका देतीं और जब वो नीचे बैठतीं तो वो नाइट तो और ऊपर उनकी जाँघों तक सरक जाती, जिससे उनकी मरमरी जाँघों की चिकनाहट मेरे लौड़े की चिकनाहट को बढ़ा देती.. और इस वजह से में और अधिक तड़प उठता था।

एक दिन उनकी दोनों लड़कियाँ मामा जी के साथ किसी रिश्तेदार के यहाँ गईं, मेरे रिश्तेदार शहर से बहुत दूर रहते थे.. सो मामी और मैं यहीं रुक गए।
उस दिन मेरा ऑफिस ऑफ था, मामी अपना काम निपटा कर मुझे देखने आईं.. तो मैंने उनसे कहा- मैं काम कर-करके थोड़ा पक गया हूँ.. चलिए थोड़ी देर बैठ कर बातें करते हैं।

वो वहाँ बैठ गईं और उस वक़्त मैं इंटरनेट पर कुछ ऐसा पढ़ रहा था जिसमें फॉर्चुनेट्ली.. विमन के सेक्स ऑर्गन वाला पेज खुला हुआ था।

मामी ने वो पेज देखा और पूछा- ये तू पढ़ाई कर रहा है.. या इस फोटो को ताड़ रहा है?
मैंने हल्की सी स्माइल देते हुए कहा- नहीं.. पढ़ रहा था.. दरअसल मैं तो मामी के सेक्स ऑर्गन की कल्पना कर रहा था।
फिर मैंने उनसे पूछा- कन्डोम लगा कर सेक्स करने पर ज़्यादा मज़ा आता है या बिना कन्डोम के?
तो वो झूटा गुस्सा दिखा कर बोलीं- क्यों??
मैंने कहा- ऐसे ही.. पढ़ रहा था तो ये सवाल दिमाग़ में आ गया।
वो बोलीं- बिना कन्डोम के..
‘हम्म..’

फिर वो बोलीं- गधे.. तू इतना बड़ा हो गया है.. तुझे इन सबके बारे में नहीं पता क्या?
मैंने झूट-मूट कहा- नहीं..!
वो मुझे कातिल नजरों से देख रही थीं।
फिर मैंने एक कदम और आगे बढ़ते हुए पूछा- जब मामा जी ने आपके साथ किया.. तो कैसा लगा?
वो ये सवाल सुनते ही झट से बोलीं- हट पगले.. ये क्या बातें कर रहा है अनाप-शनाप मत पूछा कर..

और वो वहाँ से उठ कर निकल ही रही थीं कि मैंने उनका हाथ थाम लिया और बिस्तर की तरफ खींच कर उन्हें बैठने को कहा। उन्हें एकदम से खींचने की वजह से वो झटके के साथ बिस्तर पर गिरीं और मुझे उनके मस्त चूचों के दीदार हुए।
मेरी तो आँखें खुली की खुली रह गईं।

मामी ने खुद को संवारा और कहा- नहीं मैं कुछ नहीं बताऊँगी।
मैंने रिक्वेस्ट किया.. तो वो बैठ कर बोलीं- बहुत दर्द हुआ था.. लेकिन मजा भी बहुत आया था।
हम दोनों एक-दूसरे को मस्त नजरों से देखते रहे।
फिर थोड़ी देर बाद वो मेरे फोन पर गाने सुनते-सुनते वहीं पर सो गईं।

जब मैंने थोड़ी देर पढ़ने के बाद उस तरफ नज़र घुमाईं.. तो देखा मामी का कटीला बदन उभर कर दिख रहा था। मामी की चूचियाँ एकदम टाइट थीं और उनके बड़े चूचे उभर कर एक पहाड़ के शिखर की तरह नज़र आ रहे थे।
उनके पावों थोड़े फैले होने के कारण नाइटी बीच गलियारे में घुसी हुई थी जिस वजह से उनकी चूत की तरफ के हिस्से का आकार साफ़ दिखाई दे रहा था।

मेरा मन तो ये देख कर उछला- आअहह.. ऊ..ला ला..
मेरे लण्ड जी तो एकदम तन्ना गए।
मैंने उनके कानों से हेडफोन निकाला.. उसी वक़्त मेरी कोहनी उनकी चूचियों को रगड़ गई थी.. पर उनकी तरफ से कोई हलचल ना होने की वजह से मेरा हौसला और बढ़ गया था।
मैंने उनकी नाइटी एक ऊपर का बटन खोल दिया और उनके क्लीवेज को निहारने लगा.. उनके मम्मों को देख-देख कर मैं अपना लंड सहला रहा था।
फिर मैं उनके कूल्हों पर हाथ फेरने लगा, वो थोड़ी सी हिलीं तो मैं डर गया और वहाँ से उठकर बगल में खड़ा हो गया।

हाय क्या गोल-मटोल चूतड़ थे.. ओहह.. मेरा तो मन कर रहा था कि उनकी नाइटी ऊपर करके उनकी गाण्ड में अपना लंड घुसा दूँ.. उफ़ कितना मज़ा आता।

फिर जब वो गहरी नींद में थीं.. तब मैं उनके मम्मों को हल्के हल्के दबाने लगा था। आहह.. क्या मस्त अहसास लग रहा था। मेरा लंड तो और मोटा होता जा रहा था और मेरे पैन्ट को फाड़ कर बाहर आने को तरस रहा था।

उस रात मैंने उनके मम्मों को और गाण्ड को बहुत प्यार किया। अगले दिन भी मेरी छुट्टी थी.. सो मैं घर पर ही था.. मैं मामी के साथ छत पर गेहूँ सुखाने गया।
वहाँ पर जब मामी झुक कर गेहूँ फैला रही थीं.. तब उनके मम्मों के तो खुले दीदार हो रहे थे।
मेरा मन तो किया कि मैं उनकी चूचियाँ चूसने लग जाऊँ।

मैं तो किताब की आड़ से अपने उस तने हुए लंड को छुपाने की कोशिश कर रहा था। शायद वो समझ गई होगीं कि मैं क्या छुपा रहा था लेकिन वो कुछ नहीं बोलीं।

फिर उस शाम हम शॉपिंग के लिए जाने वाले थे, जब मामी तैयार हो रही थीं तब मैं उनके कमरे के पास से गुज़र रहा था। मेरी नज़र अन्दर की ओर पड़ी.. तो मैं चौंक गया और मेरा हाथ अपने आप मेरे लंड को दबाने लगा।
मामी अपना ब्लाउज बदल रही थीं और इसी दरमियान मुझे उनके चूचों के दीदार हुए।
क्या बताऊँ यारो.. मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ रही थी। फिर मैं वहीं खड़े होकर उनकी गाण्ड को ताड़ने लगा था.. और थोड़ी देर बाद वहाँ से निकल गया और सीधे बाथरूम में जा कर लौड़ा हिलाने लगा.. मुठ्ठ मारी और शान्त हो गया।

फिर जब हम बाजार जाकर वापिस घर आए.. तो मामी बोलीं- बहुत थक गई हूँ.. मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे हैं.. प्लीज़ मेरे पैर दबा दो। मैंने आयंटमेंट लगा कर मालिश करना शुरू किया.. मालिश करते समय में तो पूरा गर्म हो गया था।
धीरे-धीरे उनके घुटनों की मालिश करते वक़्त मैं अपने हाथ उनकी जाँघों के बीच ले जाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान वो हल्की-हल्की सिसकियाँ ले रही थीं- आहह.. आआहह..

मैं समझ गया कि वो गर्म हो रही हैं और मामाजी की कमी महसूस कर रही हैं। मैंने सोचा कि आज इनकी कमी दूर कर देता हूँ.. और मैंने सीधे अपना हाथ उनकी चूत पर रख दिया और उसे ऊपर से दबाने लगा। वो झट से ऊपर उठीं तो मैंने एक हाथ से उनकी गर्दन पकड़ ली और उन्हें किस करने लगा।

‘एम्म्म..एम्म्म..’ की आवाज़ करते हुए वो मुझे दूर धकेलने लगीं.. लेकिन मैं समझता था कि अगर उन्हें थोड़ा और गरम कर दूँ तो वो चुदने के लिए मान जाएँगी इसलिए मैंने उनकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया।
वो थोड़ी शांत होती गईं और धीरे-धीरे मेरा साथ देने लगीं।

अब मैं पागलों की तरह उनके मम्मों पर कूद पड़ा और उन्हें चूमने लगा।
मैं कहने लगा- हाय आपके ये कितने मस्त हैं.. मैं तो इनका दीवाना हूँ और आपने मुझे बहुत सताया है.. आअहह.. क्या मुलायम हैं ये..
ये कहते ही मैंने उन्हें हल्के से काटा.. वो चीख उठीं- आऐईइ.. आअहह अहह आराम से..

फिर थोड़ा चूमने और दबाने के बाद हम अलग हुए और मामी से मैंने कहा- क्यों मामा जी की कमी महसूस हो रही है ना..??? मैं पूरी कर दूँ?
वो पागल हो गईं और ‘हाँ’ कहते हुए मुझसे लिपट गईं और मेरे लंड को अपने हाथों से दबाते हुए मुझे हर जगह चूमने लगीं।

वो बोलीं- साले, मैं कब से तरस रही थी तेरे लंड के लिए.. और तुझसे कहना चाहती थी.. मगर आज तूने शुरूआत करके मेरे ख्वाहिश पूरी कर ही दी। यह बता कमीने कि पहले कभी किसी के साथ किया है?
मैं बोला- आप ही पहली हो.. मुझे कुछ सिख़ाओ..
वो कहने लगीं- वाह, आज तो नए लण्ड का मज़ा आएगा.. आअहह..
और वे ज़ोर से मेरा लंड दबाने लगीं।
मैं चिल्लाया- आअहह..

दोस्तो, काम पिपासा से युक्त यह रसधार बहना शुरू हो चुकी थी.. मेरी मनोकामना अब पूरी होने के कगार पर आ पहुँची थी।
इस सम्पूर्ण मजे को आप Bhauja के अगले अंक में पढ़ सकते हैं..
कहानी जारी है।

5 Comments

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