भतीजी के साथ चाची फ्री में चोदने मिली

chachi ki chudai - hindi sex story
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अब मैं आपको मेरा ऐसा यादगार लम्हा लिख रहा हूँ.. जिसे आज भी सोचता हूँ.. तो मेरा रोम-रोम खिल उठता है, जब मैंने अपनी गर्लफ्रेंड की और उसकी चाची की चुदाई की थी.. वो भी एक साथ।

बात तब की है जब मेरी पोस्टिंग जयपुर में पॉवर हाउस पर थी। मेरे पॉवर हाउस पर पानी का बोरिंग वाला पम्प लगा हुआ था तो आस-पास के लोग मेरे पॉवर हाउस पर पानी भरने आ जाते थे। उन्हीं लोगों में एक लड़की थी जेबा.. जैसा उसका नाम था.. वैसी ही वो मस्त माल थी।

जब मैंने उसको पहली बार देखा तो देखता ही रह गया। दोस्तों थोड़ी सांवली थी.. मगर उसका फिगर बड़ा मस्त था। भरा-पूरा गदराया बदन..32-30-34 के बोबे.. कमर और चूतड़.. जिन्हें देखते ही मुँह में पानी आ जाता था। उसके उठे हुए मम्मों को तो मुँह में लेने को बड़ा मन कर रहा था।
उसके रसीले होंठ तो ऐसे थे.. कि एक बार चूसना शुरू करो तो उनका रसपान ही करते रहो।

वो रोज़ मेरे पॉवर हाउस पर आती थी। धीरे-धीरे मैंने उस से बातचीत करना शुरू की.. तो पहले पहल वो डर रही थी.. लेकिन बाद में मेरे व्यवहार को देखकर वो ही मुझसे काफी खुल कर बातें करने लगी।

जब वो मुझसे अधिक खुलने लगी.. तो फिर कभी-कभी मैं उससे प्राइवेट बात भी कर लेता था.. तो वो शर्मा कर भाग जाती थी।

फिर मैंने उसके घर आना-जाना शुरू किया और फिर उसके मम्मी-पापा भी मेरे आने-जाने को लेकर कुछ नहीं कहते थे। मगर उसकी एक चाची थी.. जो काफी कड़क मिजाज की औरत थी.. मगर वो भी लाजबाव मस्त माल थी।

उसका रंग गोरा.. भूरी आँखें और चूचे तो गजब के उठे हुए थे.. उसका फिगर भी 30-28-34 की साइज़ का रहा होगा।
मगर उसके मम्मे तो गजब के थे.. एकदम लपक कर चूसने के लायक थे।

मैं तो उसके मिजाज़ के कारण उससे थोड़ा दूर ही रहता था। लेकिन मैं जेबा को मन ही मन चाहता था और मुझे लगता था कि वो भी मुझे चाहती थी।

ऐसा हो भी गया था.. वो मुझसे अपना प्यार जता चुकी थी और अब तो जब कभी भी उसके परिवार को पानी की जरूरत होती थी.. तो वो बेझिझक पॉवर हाउस आ जाती थी.. तो अकेलेपन का फायदा उठाकर मैं उसके बोबे मसल देता था.. तो वो गुस्सा दिखाकर भाग जाती थी।

कभी-कभी मैं उसको चूम भी लेता था। ऐसा कुछ महीनों तक चलता रहा, लेकिन मुझे पता लग गया था कि उसकी चाची को मुझ पर शक हो गया था.. लेकिन वो कहती कुछ नहीं थी।
जेबा के चाचा दुबई में नौकरी करते थे तो चाची थोड़ी चिड़चिड़ी स्वाभाव की हो गई थी।

गर्मी के दिन थे, मुझे उसके पापा से जरूरी काम था तो मैं उसके घर गया.. उस वक्त वहाँ कोई नहीं था। मैंने आवाज़ दी.. तो कोई नहीं बोला।
फिर मैंने दोबारा आवाज़ लगाई तो ज़ेबा की आवाज आई- क्या है।
मैंने देखा वो बाथरूम से बोल रही थी। दोस्तों उनके बाथरूम में दरवाज़ा न होकर गेट पर सिर्फ पर्दा लगाया हुआ था।

तो वो अपनी गर्दन थोड़ी सी बाहर निकाल कर मुझसे बात कर रही थी। मैं उसको देखकर मुस्कुराया.. तो वो भी थोड़ा मुस्कुराई और बोली- जल्दी बताओ क्या है?
मैंने कहा- तेरे पापा कहाँ हैं?
वो बोली- आज घर में कोई नहीं है.. सब दावत पर गए हैं.. शाम को आएंगे।
मैं बोला- तू क्या कर रही है बाथरूम में?
बोली- नहा रही हूँ।

मैं बोला- मैं भी आ जाऊँ.. साथ नहायेंगे।
बोली- नहीं नहीं.. रहने दो.. कोई देख लेगा।
‘अरे कोई नहीं देखेगा.. आज बड़ी मुश्किल से तो चांस मिला है।’
यह कहते हुए मैं बाथरूम में घुस गया।

वो घबराती हुई बोली- तुम चले जाओ.. तुम्हें ऊपर वाले का वास्ता।
मगर मैं नहीं माना और उसके होंठों पर मैंने अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा।
उसने खुद को छुड़ाने की बहुत कोशिश की.. मगर फिर धीरे-धीरे उसका विरोध कम हो गया।

चूंकि वो तो पूरी नंगी थी.. बस उसने काले रंग की पैन्टी पहनी हुई थी।
मैं उसके पीछे हो गया और अपने सीने से उसको पीठ के बल पूरा चिपका लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा।
वो हल्के-हल्के अपने मुँह से सिसकारियाँ निकाल रही थी।

फिर मैंने उसके बोबों को मसलना शुरू किया.. साथ में हौले-हौले उनको दबा भी रहा था। वो अपनी मस्ती में उह्ह.. ऊह्ह..ऊह्ह.. आहह्ह्ह.. आह्ह.. कर रही थी।
फिर मैंने उसको सीधा किया और उसको देखा तो उसकी आँखें बहुत ही नशीली दिख रही थीं।

वो बोली- तुमने पता नहीं.. क्या जादू कर दिया मेरे ऊपर.. जो मुझे हर पल तेरी याद आती है।
मैं बोला- तू चिंता मत कर.. आज मैं तेरा सारा जादू उतार दूँगा।

फिर मैंने उसको दीवार से चिपका दिया और फिर उसके होंठों को चूसने लगा और एक हाथ से उसके एक चूचे को मसलने और दबाने लगा।

फिर मैं उसको बेतहाशा चूमने लगा.. वो भी गरमा उठी थी और मेरा बराबरी से साथ दे रही थी।

फिर मैंने उसके दोनों बोबों को अपने हाथों में लिया और दबाने लगा। लेकिन जैसे ही उसको अपनी नशीली आँखों से देखते हुए उसके एक चूचे को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा.. साथ ही दूसरे बोबे की घुंडी को मसलने लगा.. तो वो बिन मछली की भांति तड़प उठी।

उसके अपने मुँह से मादक सीत्कारें फूटने लगीं- आह.. ह्ह.. ह्ह…आह्ह्ह.. हाय अम्माह.. मर गई मैं तो… खा जाओ मेरे बोबों को.. चूस लो सारा दूध इनका.. बहुत परेशान कर रखा है इन जालिमों ने.. आह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… ऊउह्ह्ह.. आआऊउह्ह..

इस तरह से मैं एक-एक करके दोनों बोबों को मसलने.. दबाने और चूसने लगा और ज़ेबा अपनी पूरी मस्ती में उन्हें दबवा और चुसवा रही थी.. साथ ही वो मेरे बालों में उंगलियाँ भी फिरा रही थी।
ज़ेबा अपनी आँखें बन्द करके पता नहीं और जाने क्या बड़बड़ा रही थी।

मैं उसके बदन को चूमते हुए नीचे आया और जैसे ही उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से ही छुआ.. तो वो पूरी आग की भट्टी के जैसे तप रही थी.. जो तो वो पूरी तरह से गीली भी थी।

फिर मैंने चूमते हुए अपने दांतों से उसकी पैन्टी को भी उतार दिया। अब वो पूरी तरह से नंगी थी।
उसने अपनी चूत बिल्कुल साफ़ कर रखी थी.. चिकनी चूत देखते ही तो मेरे मुँह में पानी आ गया क्योंकि सफाचट चूत को चूसना मुझे बहुत पसंद है।
जैसे ही मैंने अपने हाथों से उसकी चूत को छुआ.. वो ‘सीई.. स्सीई.. स्ससीई..’ करने लगी।

मैंने देखा उसकी चूत फुल कर कुप्पा हो गई थी और उस पर हल्का-हल्का पानी चमकने लगा था।

मैंने उसकी एक टांग को उठाते हुए ऊपर अपने कंधे पर रख लिया। ऐसा करने से उसकी चूत मेरे और करीब आ गई और उसकी चूत की खुशबू से मुझ पर वासना का नशा छाने लगा। जैसे ही मैंने उसकी चूत के दाने को अपनी ऊँगली से रगड़ा.. तो वो एकदम से उछल पड़ी।

मैं अपने हाथ से उसके दाने को मसलने लगा तो ‘स्सीई.. स्ससीई.. स्सीई.. आहह्ह.. आहह्ह..’ करने लगी।
मैं अपनी जुबान से उसकी चूत को सहलाने लगा.. तो ज़ेबा तो जैसे पागल हो गई और अपने मुँह से जोर-जोर से सिसकारियाँ, ‘स्सीई…स्सीई..स्ससीई..’ निकालने लगी और अपने हाथों से मेरे मुँह को अपनी चूत पर दबाने लगी।

फिर तो मैं उसकी चूत को अच्छे से चाटने लगा.. और अब तो वो अपनी गाण्ड को आगे-पीछे कर-कर के अपनी चूत चटवा रही थी, वो मस्ती में कह रही थी- चाट.. ले.. चाट.. आहह्ह.. आह्ह्ह्ह.. और चाट.. आहह्ह.. आहह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है..

फिर तो जैसे मेरे ऊपर चूत चाटने का भूत सवार हो गया और मैं भी अपनी जुबान से उसे चोदने लगा।

अब ज़ेबा और जोर-जोर से ‘आह्ह्ह… आहह्ह.. ऊओह्ह्ह.. ऊह्ह.. हह्म्म… हह्म्म्म.. आहह्ह..’ करते हुए अपनी गाण्ड को आगे-पीछे करते हुए अपनी चूत को मेरे मुँह पर घिसने लगी थी.. शायद वो झड़ने के करीब आ चुकी थी।

उसने मेरे सर के बाल बड़े टाईट पकड़े हुए थे। थोड़ी देर के बाद उसकी ये पकड़ और मज़बूत हो गई और मैं समझ गया कि इसका पानी छूटने वाला है तो मैंने भी चूसने की रफ़्तार थोड़ी तेज़ कर दी।
फिर वो हाँफते हुए ‘आह्ह.. आहह..’ करते हुए वो मेरे मुँह में ही झड़ गई।

वो एकदम शिथिल हो कर मेरे ऊपर ही झुक गई.. जब वो थोड़ा नार्मल हुई तो फिर से हम एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे।
थोड़ी देर में वो फिर से गर्म हो गई और मेरी पैन्ट के ऊपर से ही वो मेरे लंड को दबाने लगी। चूंकि वो नहाए हुए गीले बदन थी.. तो मेरे कपड़े गीले हो गए थे।

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मैंने उसे लंड को चूसने के लिए बोला.. तो मना करने लगी।
फिर मेरे समझाने और मान-मनौअल करने पर वो मान गई, उसने मेरी पैन्ट में से लंड को बाहर निकाला और चूसने लगी।
शुरू-शुरू में वो थोड़ी झिझकी.. लेकिन थोड़ी देर के बाद जब उसे चूसने में मज़ा आने लगा.. तो जोर-जोर से रस को मुँह में लेते हुए चूसने लगी।

ज़ेबा लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे बचपन में हम सब बर्फ का गोला चूसते हैं।
इस मस्त मजे में मुझे तो पता ही नहीं था कि क्या हो रहा है.. मुझे तो होश ही नहीं रहा.. क्योंकि मज़ा ही इतना आ रहा था।

लगभग 7-8 मिनट बाद मेरा शरीर भी जवाब दे गया और मैं उसके मुँह में ही झड़ गया। वो चूस-चूस कर लंड का सारा पानी पी गई।

फिर हम एक-दूसरे को देखने लगे और उसे बाथरूम से उठाकर मैं अन्दर ले आया और बिस्तर पर लिटा दिया।

मैंने उसकी दोनों टाँगों को चौड़ा किया और उसकी चूत को दोबारा से चूसने लगा। थोड़ी देर में वो वापस सिसकारियाँ ‘स्ससीई.. स्ससीई..’ लेने लगी और इसके साथ ही वो अपनी गाण्ड भी उचकाने लगी।
मेरा लंड भी वापस खड़ा हो गया था।
थोड़ी देर बाद ज़ेबा बोली- अब मुझसे सहन नहीं हो रहा.. अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल दो..

वो जोर-जोर से हाँफने लगी। मैंने भी देर न करते हुए उसकी दोनों टाँगों को उठाकर अपने कंधों पर रखा और लंड के टोपे को उसकी चूत के मुहाने पर ले जाकर एक हल्का सा धक्का लगा दिया।

चूत के गीली होने कारण लंड ‘गप्प’ की आवाज़ के साथ उसकी चूत में घुस गया।
बाद में मुझे मालूम हुआ था कि वो एक चुदा हुआ माल थी.. और काफी दिनों के बाद चुदवाने के कारण ज़ेबा के मुँह से भी हल्की सी चीख निकल गई।
फिर धीरे-धीरे मैंने अपना लंड उसकी चूत में पूरा उतार दिया और अपनी कमर के झटके उसकी चूत पर देने लगा।

वो ‘आह.. आआह्ह्ह्ह.. आहह्ह..’ करके अपने हाथों को मेरी पीठ पर फिरा रही थी। फिर मैंने अपनी चुदाई की रफ्तार बढ़ाते हुए उसकी चूत को दनादन चोदने लगा और वो भी अपनी कमर को उचका कर मेरे लंड के हर धक्के का जबाव दे रही थी।

उसे इस चुदाई में बड़ा मज़ा आ रहा था और मस्ती में बड़बड़ा रही थी- आहह्ह.. आहह्ह.. ऊउह्ह्ह.. चोद.. दे.. चोद.. और जोर से.. चोद साले.. फाड़ दे इसे.. बहुत दिनों से खुजली हो रही थी.. अपने लंड की ठोकर से मिटा दे.. इस चूत की खाज.. मेरे राजाआआह्ह्ह..

मैं लगातार उसकी चुदाई कर रहा था। चूत के गीली होने के कारण ‘किच.. पिच.. किच.. पिच..’ की मधुर ध्वनि आ रही थी।

तभी उसने मुझे उठने के लिए बोला और मुझे अपने नीचे लिटाकर मेरे लंड को अपनी चूत पर टिकवाया और उसे अपनी चूत में लेकर जोर-जोर से लंड पर कूदने लगी।
पूरे कमरे में चुदाई की ‘थाप.. थप.. थप…’ की आवाज़ हो रही थी।
तभी मेरी नज़र उसकी चाची पर गई जो गेट पर खड़ी होकर इस सारे तमाशे को देख रही थी।
मैं तो डर गया और ज़ेबा से बोला- पीछे तेरी चाची खड़ी है।

ज़ेबा ने पीछे मुड़ कर देखा और मुस्कुराते हुए बोली- चाची.. तुम भी आ जाओ.. ये बड़ी अच्छी चुदाई करते हैं।

मेरा माथा ठनक गया.. लेकिन मुझे क्या.. मुझे तो ‘एक के साथ एक’ फ्री मिल रही थी.. मैंने महसूस किया कि ज़ेबा ने अपनी चुदवाने की रफ्तार कम नहीं की थी.. वो बराबर मेरे लंड के ऊपर कूद रही थी और हाँफ रही थी और मैं भी उसके हिलते हुए मस्त बोबों को दबा और मसल रहा था।

बोबों को मसकते हुए बीच-बीच में.. मैं उसकी घुंडियों को भी मसल देता.. तो उसकी मस्ती भरी ‘स्ससीई.. सस्सी.. आहह्ह..’ आवाज़ उसके मुँह से निकल जाती थी।

फिर चाची ने दरवाज़ा बन्द किया और वो भी अपने कपड़े उतारकर पूरी नंगी हो गई और मेरे पास आकर अपनी चूत चटवाने लगी।
मैं भी कहाँ कम था.. मैं भी उसकी चूत चाटने लग गया।
पता नहीं कब से वो हमारी चुदाई देख रही थी.. जिसके कारण चाची की चूत पूरी की पूरी पनिया रही थी।

मैंने भी चूत चाटने के साथ-साथ उसके बोबों को भी मसलना और दबाना आरम्भ कर दिया था।
थोड़ी ही देर में चाची भी गरम हो गई थी और इधर ज़ेबा ‘आआईई… आआईई…’ करती हुई झड़ गई।
मेरा लंड उसके पानी से पूरा गीला हो गया था।
मैंने तुरंत ज़ेबा को हटाया और चाची को लंड के ऊपर बैठने के लिए इशारा किया।

चाची मेरे लंड को अपनी चूत पर टिका कर एकदम से बैठ गई और ‘कच्च..’ की आवाज़ के साथ मेरा फूला हुआ लंड चाची चूत में घुसता चला गया।
चाची अपना मुँह भींचे हुए थी ताकि मुँह से आवाज़ न निकले। वो चूत में लौड़े के सैट होते ही लंड के ऊपर जम्प मारने लगी।
मैंने भी चाची की कमर पकड़ रखी थी और उससे अपना लौड़ा चुदवा रहा था।

चाची भी मस्त चुदक्कड़ निकली और वो बड़े आराम से ‘आहह्ह.. आहह्ह.. ऊउह्ह्ह.. ऊह्ह्ह.. ऊओह्ह्ह..’ करके चुद रही थी। मैं बड़े जोर-जोर से उसके बोबों को दबा रहा था।
चाची की चुदाई को देखकर ज़ेबा फिर से दोबारा आकर अपनी चूत मुझसे चटवाने लगी।

लेकिन थोड़ी देर के बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं जब तक चाची इसके बारे में बोलता.. वो खुद ही हाँफते हुए ‘आईई.. आईई.. ऊऊह्ह्ह.. ऊउह्ह्ह..’ करते हुए मेरे लंड के ऊपर ही झड़ गई।
मैंने भी देर न करते हुए उसको नीचे लिटा लिया और मैं पूरी रफ्तार उसकी चूत को चोदने लगा, वो ‘आहह्ह.. आईया.. आहह्ह..’ करके हाँफ रही थी।
फिर मैं भी चाची की चूत में ही झड़ गया।

कुछ पलों बाद जब हम सब नार्मल हुए तो हम सभी ने अपने-अपने कपड़े पहने और फिर चाची ने चाय बनाई।

जब हम चाय पी रहे थे.. तो चाची मेरा धन्यवाद देते हुए बोली- इसके चाचा अक्सर बाहर रहते हैं और मैं अपनी चुदाई को तरसती रहती थी.. मुझे अपनी चूत की चुदाई की सख्त जरूरत थी.. तभी ज़ेबा ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था। फिर हम दोनों ही मौके की तलाश में थे और ऊपर वाले ने आज हमारी सुन ली।
मैं बोला- कोई बात नहीं.. आप तो बस मुझे इशारा कर दिया करो.. बन्दा आगे से आपकी चूत की खिदमत में हाज़िर हो जाएगा।

भले ही मेरा तबादला कोटा हो गया.. मगर आज भी वो मुझे बुलाती हैं तो मैं जयपुर जरूर जाता हूँ.. क्योंकि मैं वादे निभाता हूँ.. तोड़ता नहीं।

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