बंद पडि बसमें मिला मौका.. ( मेरी कहानी )

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Hi mere pyare debar bhauja ki aap sabhi ke liye hamara ek pathak ne Shree Ajay Rane ji ne apne jiban ki sachhi experienced kahani hamara email par bheje hen to krupaya ye kahani padhkar lekhak ko uschahit ki jiye. to abhi aap kahani par chaliye.

दोस्तों नमस्ते,
मै अजय, आपको आज अपनी पेहली कहानी को
शेअर करता हुँ..
यह 1995 साल कि बात है. उस वक्त मै, मुंबई के
एक रईस के यहाँ कामपर था. उनका एक
फार्महाउस है, जीसकि देखभाल के लिए मुझे कामपर उन्होने रखा था.यह फार्महाउस मुंबई से
300 कि.मी. दुर एक गाँव में था. वहाँ काम करने वाले मजदुरोंसे काम करवाने के लिये, और हिसाब संभालने का जीम्मा था मेरा..
ईसी सीलसीले मुझे महिने के अंत मे शेटजी से मिलने मुंबई आना पडता था.
ऐसे हि एक बार मुंबई मे आकर अपना काम निपटा कर फिरसे रात कि बस से वापस गाँव जाने
निकला. हमेशा हि मै ईसी बससे सफर किया करता था.. बस रात के नौ बजे निकली थी. बस में हम सभी ग्यारह सवारीयाँ हि थे. बाकि बस बिलकुल खालि थी.आधे घंटे का सफर तय करके
बस एक सुनसान इलाके के स्टाॅप पर रुकि वहाँ से दो सवारी बस मे चढि साथ हि नन्हिसी लडकि भी थी. वो दोनो सवारी औरते थी.
एक अधेड उम्र कि औरत और वह बच्ची  ड्रायव्हर के पिछे वाली लंबी सीटपर बैठि.
और दुसरी औरत जो अपने नवजात शिशु को लेकर आगेसे छें लंबीवाली सीटें छोडकर पीछे आकर लंबीसीटपर बैठ गयी उसी सीटपर पेहले से
मै भी बैठा था.
अब हम दोनो हि ईतने पिछे एक हि सीट पर बैठे थे और सभी सवारी आगे बैठे थे. कुछदेर हम दोनो
एकदुसरे को चोरी चोरी देख रहे थे.
उसके गोद में नवजात शिशु जाग रहा था और यह औरत उससे बातें कर रहि थी. बीच बीच मे मेरी तरफ देखकर हसती थी. फिर हमारी बातें शुरु हुयी. पेहचान बढने लगी, बसके चलते हम कभी कभार एकदुसरे के धक्के सेह रहे थे.
और फिर बसमें अचानक हि कुछ खराबी आ गयी
बस रुक गयी, बाहर बहुत अंधेरा था, और वह
सुनसान इलाका था आसपास कोई बस्ती नहि थी.
थोडि देर बाद ड्रायव्हर कंडक्टर बस में आये और उन्होने बस न चलने का कारण बताया फिर कहा कि अगर किसी को जल्दि जाना हो तो वह कंडक्टर के साथ रास्तेपर रुकें और जो भी वाहन मिले उसमें से रवाना हो जायें..
बसमें से छें,साात लोग उतरें और कंडक्टर के साथ चले गये. बचेकुछ लोगोंमे यह औरतें भी थी जो गयी नहि मै भी बैठा रहा. ड्रायव्हर हमारे साथ रहा था. ऊसने सभी को सोने को केहकर,बस कि बत्तीयाँ बंद कर दि. मुझे नींद नही आ रहि थी.
यह औरत ऊठ कर आगे बैठे हुए औरत के पास गयी और अपने बच्चे को ऊसे देकर वापस आई.
फिर मुझसे बोली कि वह सीट पर लंबे पाँव करके सोना चाहती है. मैने कुछ कहने से पेहेले हि वह पाँव लंबे करके,सीर मेरी गोदमें रख कर सोने लगी
यह मेरे लिये मौका था.
बार बार वह अपना सीर हिलाती, और मेरे लंड में हलचल मचती धीरे धीरे मै गरम होने लगा था
शायद वो यह समज गयी . फिर उसने अपना हाथ सीर के निचे रख दिया जो मेरे लंडपर हि था.
ये अपने हाथ से मेरे लंड को खडा करने लगी..
यह जाने मैने उससे पुँछकर अपने लंड को बाहर निकाला. तुरंत हि ईसने मेरे लंड को हाथमें लिया और हिलाने लगी.
अब मै भी ऊसके बदन को टटोलने लगा ऊसके दुधभरें बॉल दबाने लगा . मुझे मजा आरहा था
फिर मैने ऊसका सीर मेरे लंड के पास करलिया
तो वह समझ गयी और मुँह मे लंड लेकर जोरजोर से चुसने लगी..
मैने ऊसके साडि मे हाथ डालकर ऊसकि चुत में ऊँगली करनी शुरु कि तभी मै जान गया कि ऩवजात बच्चे को जनकर उसकि चुत काफि फैली हुयी थी. इसीवजह मजा नहि आया.
फिर मैने ऊसकि गांडपर हाथ फेरा जो बहोत हि तंग लग रहि थी. मुझे बहोत मजा आ रहा था . ऊसके चुसने कि वजह अब मेरा लंड लीक होने वाला था. ये मैने उसे बताया तो वह बोली के
तुम झडने वाले हो तो झडोगे हि पर मै ईसे मुँह से नहि निकालुंगी. यह सुनकर मै और उत्तेजीत हो उठा. निचे से मै धक्के देने लगा और वह भी जोर से लंड चुसने लगी.. दस मिनट बाद मैने उसके मुँह मेअपना सारा लोहा झड दिया.. सारा माल पीकर वह सीट पर बैठ गयी.. और मेरा सीर अपने गोदमें
रख कर मुझे चुमने लगी मुझे अच्छा लगरहा था
मेरे सीर के पास हि उसके दूधसे भरें बॉल थे जीन्हे मै चुसना चहता था. उसे यह बात बताते हि उसने अपना ब्लाऊज खोला और मै शुरु हो गया.
एक बॉल हाथ से दबा रहा था और दुसरा चुस रहा था जीस वजह वह भी गरम हो रहि थी. मैे पहली बार दुध से भरे बॉल चुसने का मजा ले रहा था.
वह अपने हाथ से मेरे लंड को खडा करने लगी.
वह बोली मुझसे कि अब उससे रहा नहि जाता.

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उसके गर्भवती रहेने के बाद से उसके पतीने उसे चोदा हि नहि और अब मुझे फिर से बेटि होने पर मेरे पती ने घरसे हि निकाल दिया है . और अब न जाने कब तक मुझे प्यासा रहना पडेगा.
बसमें तुम्हे अकेला देख कर हि मै तुम्हारे पास आयी थी मुझे मालुम था कि तुम मौका जरुर ऊठावोगे.
आज मेरी प्यास बुझा दो.. तुम्हारे लंड का लोहा मेरे चुत में झड दो.. मुझे शांत करदो..
लेकिन ऊसकि बात बीच में हि काट कर मै बोला कि तुम्हारी चुत बहोत हि फैली हुयी है जीस कारण मजा नहि आयेगा. तो वह बोली के अब तो यह लोहा मेरी चुत में झड दो फित सारी रात बाकि है तुम जैसे चाहो कर लेना..
अब उठकर बैठो मै तुम्हारे गोद में लंड पर बैठती हुँ
मैने भी उसकि बात मानकर सीट पर बैठकर अपनी पँट, अंडरवेअर निचे सरका ली. फिर ऊसे गोदि मे अपने पुरी तरहसे खडे लंड पर बीठा लिया
उसने एकबार बसमें देखा सब सोरहे थे.और फिर मेरे लंड को अपनी चुत में भर लिया..
धिरे धिरे वो मदहोश होने लगी मै ने भि पिछे से उसके दोनो बॉल पकडे थे जोर जोर से दबायें जारहा था मै. और वो जोरों से शॉट लगाने लगी थी मैने भी बॉल से खेलते हुये निचे से फटके लगाना शुरु किया . दोनो भी ऊस सीट पर  बैठे यह आनंद लेरहे थे. उसके शॉट लगाने से वह बहोत दिनो कि प्यास बुझाने पर तुली हुयी थी. और मै भी लगातार उसे साथ दे रहा था..
बीस मिनट बाद वो बोली के अब वो झडने वाली है तो मैने भी अपना हाल बताया और कुछ हि पल मे हम एक साथ हि लिक हुये..
कुछ देर तक पसीने से भीगे हम दोनो वैसे हि बैठे रहे . मै उसके बॉल को दबा रहा था औरअल्पसे आराम के बाद हम फिर शुरु हुये . उसके ओठों पर अपने ओठ रख कर मै  चुसने लगा .. गरम साँसो के कारण हम फिर से तैयार हुये मेरा लंड खडा हुआ था . मैने ऊसकि गांड मारनी चाहि तो वो भी कुछ न बोलते हुये सीट पर उल्टे लेट गयी .
मैने उसकि साडि उपर उठाकर , उसगी गांड को हाथो से रगडने लगा गांड बहोत हि तंग थी
फिर मै उसकि गांड को चुमने लगा जीस कारण वो
अपनी गांड को बार बार उठाने लगी मै समझ गया. तुरंत हि मैने उसके गांड के होल को थुँक लगाई और अपने लंड को होल पर सेट कर दिया हल्के हल्के धक्के देने लगा..
उसने दर्द के कारण अपनी साडी को अपने मुँह मे भर लिया जीससे आवाज बाहर ना निकलें.. मेरे तो बदन में आग हि लग गयी थी लेकिन
सीट पर जगह कम पड ने से मै चाहकर भी जोरोंसे शॉट नहि लगा सका.. लेकिन धिरे धिरे करने का मजा कुछ और हि था..
उस रात हमने चार बार अपनी प्यास बुझाई..
और ईसी दौरान मै ऊसके बारे मे सब कुछ जान गया था..
अब यहि औरत , जीसका नाम अनुसया है, अपने दोनो बच्चों के साथ हमारे यहाँ फार्महाऊस पर, मेरा खाना पकाने के कामपर लगी है..
और अब आगे बताने कि जरुरत हि नहि रहि
के हम साथ साथ रहकर क्या क्या करते होंगे..   —

Writer: Ajay Rane

Editor: Sunita Prusty

Publisher: bhauja.com

1 Comment

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