निशा की चूत का नशा (Nisa Ki Chut Ka Nasa

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Happy Independence Day To all ………………………………….

मेरी पहली कहानी का नाम है ‘ निशा की चूत का नशा ‘
पहली बार कहानी लिख रहा हूँ कोई गलती हो तो दोस्तों माफ़ कर देना।
मेरा नाम जय है, मैं छत्तीसगढ़ से हूँ।
मैं 24 साल का हूँ, मेरे लंड का नाप लगभग 6 इंच होगा।
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ.. मैंने बहुत सारी कहानियां पढ़ी हैं।
मेरी गर्ल-फ्रेंड का नाम निशा है.. बहुत सेक्सी लड़की है।
उसके जिस्म में 32-28-34 का मस्त कटाव था।
उसके गुलाबी रंग के होंठों.. गोरा बदन.. बिल्कुल परी जैसे दिखती थी।
उसकी झील सी आँखें.. एक काला तिल होंठों के नीचे.. बहुत ही अच्छी और मस्त माल दिखती थी।
हम दोनों साथ-साथ पढ़ाई करते थे.. हम 12 वीं कक्षा में थे।
मैं उसको देख कर यही सोचता कि काश यह मेरी गर्लफ्रेंड होती तो बस दिन भर चुदाई करता..
पर मैं उसे प्रपोज करने पर डरता था।
फिर एक दिन हिम्मत करके मैंने उसे ‘आई लव यू’ बोल दिया..
उसने मुझसे दो दिन तक बात नहीं की।
मेरा तो दिल ही टूट गया, साथ ही चूत का नशा भी…
बस क्लास में मैं गुमसुम सा बैठा रहता था।
कुछ दिन बाद उसने अपनी सहेली के हाथ एक चिठ्ठी भिजवाई जिसमें ‘आई लव यू’ लिखा था।
मैं बहुत खुश हो गया..
यह जानते ही मेरा लंड खड़ा हो गया..
और अब मैं उसके साथ चुदाई के ख्वाब देखने लगा और फ़िर से चूत का नशा मुझ पर छाने लगा।
फिर एक दिन मुझे मौका मिला..
उसी के घर पर..
जब कोई नहीं था।
तब उसने मुझे घर पर बुलाया।
‘दोस्त के घर सोने जा रहा हूँ…’ ऐसा बोल कर मैं अपने घर से निकल गया।
शाम 9:30 तक उसके घर पहुँच गया..
दरवाजे की घन्टी बजाई।
उसने दरवाज़ा खोला..
आह्ह..
नीली सलवार में वो परी लग रही थी।
मैंने उसको गले लगाया..
फिर ‘आई लव यू.. निशा…’
मैंने उसको चुम्बन किया.. वो भी मेरा साथ देने लगी।
वो मुझे पागलों की तरह चुम्बन करने लगी.. ऐसे जैसे बरसों से प्यासी हो…
धीरे-धीरे मेरे हाथ उसके मम्मे दबाने लगे.. एकदम कोमल.. मुलायम मम्मे थे।
मुझ पर चूत का नशा छाने लगा।
फिर निशा बोली- क्या यहीं पर प्यार करोगे.. अपनी बीवी को?
यह सुनते ही मेरे लंड ने सलामी देना शुरू कर दिया, उसको अपनी गोद में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया, उसके लाल होंठों को चुम्बन करने लगा.. वो एकदम गरम हो गई।
मैंने धीरे-धीरे उसकी सलवार नीचे सरका कर उसके जिस्म से अलग कर दी।
उसके गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और पैन्टी क्या कयामत लग रही थी।
मैंने ब्रा के ऊपर से उसके मम्मे दबाना शुरू किए..
उसके होंठों से कामुक और मादक आवाज़ निकलनी शुरू हो गई।
फिर नीचे चूत में मेरा हाथ लगते ही निशा को नशा छा गया।
एकदम गोरी वाली चूत थी.. मैंने उसके सेक्सी बदन से ब्रा और पैन्टी को अलग कर दिया।
उसकी गोरी काया देख पागल हो गया.. मैं उसके गोरे-गोरे मम्मों पर टूट पड़ा, मैंने उस उभारों को इतनी जोर से दबाया.. एकदम गुलाब की तरह लाल कर दिया।
मैं एक हाथ उसकी चूत पर ले गया.. एक ऊँगली अन्दर डाल दी।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
एकदम गरम चूत थी.. ऊँगली डालते ही वो झड़ गई।
फिर उसने मेरे कपड़े निकलाने शुरू कर दिए।
मेरे लंड को देखते ही रह गई.. उसकी जुबान से निकला- आज तो मर गई.. इतना बड़ा.. तुम तो मार ही डालोगे अपनी जान को?
हम दोनों नंगे एक-दूसरे से लिपट गए.. उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।
मैं उसके मम्मों के चूचुकों को मुँह में लेकर चूसने लगा।
उसने सीत्कार करना शुरू कर दिया.. वो एकदम से गरम हो गई।
मैंने जोर से मम्मों को दबाया तो निशा बोली- दर्द होता है.. धीरे से दबाओ ना जान..
मैंने 15 मिनट तक उसके होंठों को चूमा..
मेरे दोनों हाथ उसके गोरे-गोरे मम्मों से खेल रहे थे।
वो बहुत गरम हो गई और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
करीब 15 मिनट बाद मैं उसके मुँह में झड़ गया और मेरा थोड़ा कामरस उसकी गोरे मम्मों पर गिर गया।
मैं फिर से उसके मम्मों को दबाने लगा… गुलाबी होंठों को चूमने लगा।
थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर सलामी देने लगा।
निशा भी गरम हो गई थी।
अब निशा बोली- जल्दी करो कुछ… अपनी निशा को मत तड़पाओ..
लग रहा था कि उस पर भी चूत का नशा छा रहा था, वो एकदम मदहोश हो गई थी।
वो मेरा लंड हाथ से पकड़ कर चूत में घुसाने की कोशिश करने लगी।
मैं भी जोश में आ गया और मैंने अपना लंड उसकी चूत में लगा कर हलका सा धक्का दिया।
पहली बार में तो मेरा लवड़ा अन्दर ही नहीं गया..
फिर उसके दोनों पैरों को फैला कर निशाना तुक कर धक्का दिया तो थोड़ा सा अन्दर गया.. वो जोर से चिल्लाई।
मैंने होंठों पर चुम्बन करना शुरू किया.. कुछ देर में वो थोड़ा शांत हुई।
निशा की चूत बहुत टाईट थी.. मैंने फिर उसके मम्मों को जोर से पकड़ कर धक्का लगाया।
अबकी बार मैंने पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर तक दबा दिया।
उसकी आँखों से आंसू और चूत से खून निकल रहा था।
वो जोर से चिल्ला रही थी- मर गई.. बाहर निकालो इसको..
दर्द से वो तड़प रही थी।
फिर कुछ देर सहलाने के बाद वो थोड़ी देर में अपनी कमर उठा कर साथ देने लगी।
मैंने अपना मूसल आगे-पीछे करना शुरू किया।
ऐसा लगा रहा था.. जैसे मैं जन्नत की सैर कर रहा होऊँ।
थोड़ी देर बाद वो ढीली पड़ गई.. उसकी चूत झड़ गई थी.. मेरा अभी बाकी था।
मैं अपनी रफ्तार बढ़ा कर चोद रहा था।
उसके होंठों पर चुम्बन किया.. फिर दोनों हाथ उसके कोमल मम्मों पर रख कर मसलने लगा था।
मेरा लंड चूत में जोर-जोर से अन्दर-बाहर हो रहा था।
निशा बोलती रही ‘और जोर से करो.. उह्ह अहह..’ आवाजें कर रही थी।
पूरे कमरे में उसकी कामुक आवाज़ सुनाई दे रही थीं।
करीब 30 मिनट चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए..
उसने मुझे कस कर पकड़ लिया वो मुझे चुम्बन करने लगी..
उसने अपने नाख़ून मेरे पीठ पर गड़ा दिए।
मैंने पूरा माल छोड़ने के बाद लंड को बाहर निकला।
उसकी चूत से खून और कामरस की धार बाहर निकल रही थी।
पूरे बिस्तर पर खून के दाग लगे थे।
उस रात हम दोनों ने 3 बार चुदाई की.. सुबह उसकी चूत और मम्मे.. लाल गुलाब की तरह दिख रहे थे।
सुबह वो ठीक से नहीं चल पा रही थी।
पर वो बहुत खुश थी.. मैंने उसको बहुत चुम्बन किए..
फिर मैं घर आ गया।
उस दिन से उसे अपनी बीवी की तरह प्यार करता रहा था.. हमें जब भी मौका मिलता.. चुदाई करते थे।
इस तरह निशा की चूत का नशा हो गया मुझे..
अब उसकी शादी हो गई है।
मैं फिर कभी नहीं मिला.. पर आज भी उसको याद करता हूँ।
मेरी कहानी पर अपने विचार ईमेल जरूर कीजिएगा।

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