क्लासमेट संगीता का शील भंग

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सुनीता भाभी की ये प्यार भरी जौन कहानी blog को आप सभी देबर को स्वागत।  आज की ये कहानी बहत दमदार हे मुझे लगता हे आप लोगों की मन को बेहेका देगा।  तो आप सभी के लिए मेरी यानी आप सभी की सुनीता भाभी के तरफ से bhauja.com पर आप ये कहानी पढकर मद-होस रंगीन दुनीआं में खो जाइए।

हैलो दोस्तों.. मैं लव चौधरी मथुरा से हूँ। मैं अपनी सच्ची कहानी लिख रहा हूँ.. मुझे उम्मीद है कि आप सबको पसन्द आएगी।
ये कहानी कुछ वक्त पहले की है.. जब मैं बीएससी के पहले साल में था और मेरी क्लासमेट संगीता थी..
जिससे मेरी दोस्ती क्लास में ही हुई थी। वो देखने में सुंदर और सेक्सी थी और थोड़ी भावुक किस्म की थी।
दोस्ती के बाद से हम दोनों क्लास में एक ही बैंच पर आजू-बाजू में बैठते थे।
कुछ ही दिन में हम आपस में बहुत घुल-मिल गए थे और कभी-कभी तो कॉलेज से बंक मार कर बाहर घूमने भी चले जाते थे।
हम दोनों जब भी बाहर जाते थे हमारे जिस्म जब भी एक-दूसरे से टच हो जाते थे तो मेरे जिस्म में 11000 वोल्ट का करंट दौड़ने लगता था और मेरा 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लण्ड खड़ा होने लगता था।
उस वक्त मेरे दिमाग में अजीब से ख्याल आने लगते थे और मुझे उसे बार-बार छूने का मन करता था.. मुझे ये बहुत अच्छा लगता था।
एक दिन हम मॉल में घूमने गए.. तो उसने कहा- लिफ्ट से चलते हैं।
लिफ्ट में केवल हम दो ही थे और मैंने मौका पाकर उसके होंठों पर चुम्बन कर दिया और उसके गोल-गोल मम्मों को ज़ोर से दबा दिया।
वो गुस्सा हो गई और मुझसे बोलने लगी- यह ग़लत है..
मैं चुप हो गया.. लेकिन उस दिन के बाद बस दिल एक ही ख्वाहिश थी.. उसे चोदने की..
उसका फिगर साइज़.. करीब 32-30-32 का था.. वो बहुत मस्त लगती थी।
लेकिन उस दिन के बाद वो मुझे अपने जिस्म से हाथ भी नहीं लगाने देती थी।
इस घटना के बाद मैंने उसे बहुत बार बाहर चलने को और सेक्स करने को कहा.. लेकिन वो हमेशा मना कर देती थी।
अब मुझे उस पर बहुत गुस्सा आने लगा था.. और हर वक्त ये ही सोचता था कि जब भी मौका मिलेगा इसे छोड़ूंगा नहीं.. चोद ही डालूँगा..
एक दिन शाम को मैं अपने दोस्त की दुकान पर घूमने के लिए गया।
मेरा दोस्त दवाई की दुकान पर जॉब करता था।
जब मैं उसके पास पहुँचा तो उसने पूछा- क्यों परेशान है?
मैंने उसे अपनी और संगीता की सारी कहानी बता दी।
तो उसने कहा- बस इतनी सी बात से परेशान हो.. तू चिंता मत कर.. तेरी संगीता को मैं चुदवा दूँगा।
मुझे लगा.. यह मेरी टाँग खींच रहा है।
फिर चलते वक्त दोस्त ने मुझे दो गोलियाँ दीं और बोला- एक तू खा लेना ओर एक गोली को किसी खाने की चीज में मिलाकर संगीता को खिला देना।
मैंने कहा- ठीक है।
मैं घर आ गया.. लेकिन मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि गोली से कुछ होगा.. जो लड़की हाथ नहीं लगाने दे रही है.. वो चोदने कैसे देगी।
फिर मैंने सोचा.. कुछ तो होगा ही.. फिर मैं दूसरे दिन गोली ले कर कॉलेज गया और सारा दिन संगीता को बाहर घुमाने के लिए मनाता रहा लेकिन वो बार-बार मना कर रही थी।
लेकिन जब मैंने वादा किया कि मैं उसे हाथ नहीं लगाऊँगा.. तो वो मान गई और उसने अगले दिन चलने के लिए कहा।
फिर कॉलेज खत्म होते ही हम अपने-अपने घर चले गए।
अब तो मैं अगले दिन लिए बहुत खुश भी था और परेशान भी.. कि क्या होगा।
आख़िर अगला दिन आ ही गया और मैं कॉलेज के बाहर उसका इन्तजार करने लगा।
थोड़ी देर बाद संगीता आ गई.. आज उसने ब्लू जींस और गुलाबी रंग का टॉप पहना था.. जिसमें से उसकी तनी हुई चूचियाँ साफ दिख रही थीं और वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।
उसे देख कर मेरा लण्ड फुदकने लगा।
मुझ पर चुदाई का भूत चढ़ने लगा।
मैं बाहर घूमने जाने के हिसाब से अपना बैग लाया ही नहीं था और संगीता ने अपना बैग अपनी सहेली के पास छोड़ दिया और हम दोनों घूमने चल दिए।
घूमते-घूमते हम लाग बातें करते हुए बिग-बाज़ार पहुँच गए।
बिग-बाज़ार में मैंने उसे कॉफी के लिए बोला.. वो मान गई और हम एक टेबल देख कर पर बैठ गए।
मैं कॉफी लेने चला गया.. मैंने कॉफी ली और दोनों कॉफी में दोस्त की दी हुई गोलियाँ डाल दीं.. और लाकर एक कॉफी संगीता को दे दी।
हम दोनों कॉफ़ी पीने लगे और कॉफी पीने के बाद थोड़ी देर मॉल में घूमे और फिर बाहर निकल आए.. सड़क पर बातें करते हुए चलने लगे।
कॉफी पिए हुए हमें आधा घंटा हो चुका था और मुझे थोड़ी बेचैनी होने लगी थी, साथ ही मेरी धड़कनें भी बढ़ने लगी थीं।
मुझे संगीता को चुम्बन करने का दिल करने लगा।
थोड़ा आगे चलने के बाद सड़क के किनारे पेड़-पौधों के कारण घना जंगल सा झुरमुट था.. उधर झाड़ियाँ भी थीं.. तो झाड़ियाँ देख कर संगीता ने मुझे उधर खड़ा कर दिया और खुद झाड़ियों के पीछे पेशाब करने चली गई।
दो मिनट बाद मुझसे रुका नहीं गया और मैं भी उसके पीछे चला गया।
वो मुझे देख कर खड़ी हो गई और पूछने लगी- तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
तो मैं कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाँहों में जकड़ लिया।
मैं उसे तेज-तेज चुम्बन करने लगा.. और उसके मम्मों को दबाने लगा। वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी।
कुछ मिनट तक मुझसे जद्दो-जहद करने के बाद उसे भी मजा आने लगा और उसने मेरा विरोध करना छोड़ दिया।
अब वो भी मुझे चुम्बन करने लगी, उसे मजा आने लगा था।
फिर मैं अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले गया और सहलाने लगा, मैं उसे चुम्बन करते जा रहा था।
अब तो वो मेरा पूरा साथ दे रही थी तभी मैंने उसका एक हाथ अपने लण्ड पर रख दिया और वो मेरे लण्ड को पैन्ट के ऊपर से ही मसलने लगी।
अब वो गरम होने लगी थी और उसके मुँह से आवाजें निकल रही थीं- आह.. अह.. आआह और तेज-तेज मम्मे दबाओ..
अब हमको ऐसा करते हुए करीब आधा घंटा हो चुका था।
फिर अचानक मुझे किसी के आने आहट लगी तो हम अपने कपड़े ठीक करके सड़क पर निकल आए।
लेकिन अब वो बहुत ही गरम हो चुकी थी और मुझे चुदासी नजरों से देख रही थी।
हम सड़क पर चलने लगे.. थोड़ा आगे ही एक गेस्ट-हाउस था.. और वो उसके सामने जाकर रुक गई।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो कुछ नहीं बोली.. बस गेस्ट-हाउस की तरफ देख रही थी।
मैं समझ चुका था.. फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और गेस्ट हाउस मैं घुस गया।
फिर मैंने 800 रुपए में एक कमरा बुक किया और हम कमरे में चले गए कमरे में जाते ही उसने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और मुझे चुम्बन करने लगी।
वो कामुकता से कहने लगी- आज तुम मुझे चोद ही डालो..
यह सुनते ही मेरा रोम-रोम खिलने लगा और मैंने उसे गोद में उठाया और पलंग पर डाल दिया।
मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसे चुम्बन करने लगा। वो भी मुझे चुम्बन कर रही थी। दो मिनट बाद उसके मुँह से आवाज़ निकलने लगी- आआह.. आह.. आह..
उसने मेरे एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए।
अब मैं नंगा हो चुका था.. मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था।
मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए।
अब हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे।
उसका गोरा बदन बड़ा सेक्सी लग रहा था.. उसके उठे हुए आमों को देख कर मेरा केला भी तनतना रहा था।
उसे देख कर मुझसे रुका ही नहीं जा रहा था।
हम एक-दूसरे पर टूट पड़े.. मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को मसक रहा था और एक आम को मुँह में लेकर चूस रहा था।
वो मेरे लण्ड को सहला रही थी और अपनी चूचियों पर मेरा मुँह दबाती जा रही थी।
फिर मैंने एक हाथ उसकी चूत पर ले गया और मैंने देखा कि उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी।
मैं चूत को सहलाने लगा तो वो और तेज-तेज आवाजें निकालने लगी।
‘आह्ह.. मुझे चोदो.. जल्दी चोदो.. आह्ह..’
फिर मैं नीचे को खिसका और उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया।
अब मैं उसकी रसभरी चूत को चाटने लगा, उसकी गुलाबी चूत को जीभ से चोदने लगा।
दो मिनट तक चूत चटवाने के बाद संगीता ‘ऊऊऊओह.. आआह.. ईईई..’ करके झड़ गई।
मैंने उसकी चूत का सारा पानी पी लिया और चूत को चाटता रहा।
मेरे चाटने से थोड़ी ही देर में वो फिर से गरम होने लगी थी।
अब मैं उठा और अपना लण्ड उसके मुँह पर रख दिया।
उसने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। वो एक हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी।
अब मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगी- आअहह…अह..
मैं उसका सिर पकड़ कर उसका मुँह चोदने लगा।
मेरा लण्ड कड़क हो चुका था.. मैंने उसके मुँह से लण्ड निकाल लिया और उसे लेटा कर उसकी चूत पर रख दिया।
मैंने अपने अपने लण्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और एक ज़ोर का धक्का मारा।
उसकी चूत बहुत टाइट थी.. तो केवल मेरे लण्ड का टोपा ही अन्दर गया था और वो चीखने लगी.. बाहर निकालने को कहने लगी।
लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और फिर से धक्का मारा।
अब मेरा आधा लण्ड उसकी झिल्ली को फाड़ते हुए चूत में घुस गया।
वो तेज-तेज चीखने लगी.. तो मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसकी आवाज़ बंद कर दी।
उसकी आँखों से पानी बहने लगा.. फिर मैंने एक और धक्का मारा और पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसेड़ दिया।
उसकी चीख मेरे मुँह में ही दब गई थीं और अब वो दर्द के कारण हाथ-पैर पटकने लगी.. तड़पने लगी और उसकी चूत से खून निकलने लगा था।
मैं थोड़ी देर रुका और उसे चुम्बन करने लगा उसके मम्मों को दबाने लगा।
थोड़ी देर में वो कुछ शान्त हो गई.. ये देख कर मैं धीरे-धीरे लण्ड को चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।
अब उसे भी कुछ-कुछ मजा आने लगा था।
वो दर्द से भरी कामुक आवाज़ निकाल रही थी।
‘आहह.. ऊऊऊऊहह.. ऊहह..’
अपनी मादक सीत्कारों के साथ ही नीचे से अपनी गाण्ड उठा कर मेरा साथ देने लगी।
अब हम दोनों तेज-तेज आवाजें निकालने लगे और दनादन धक्के लगाने लगे।
मेरा लण्ड तेज़ी से चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था.. चिकनेपन की वजह से “फॅक.. फॅक” की आवाज़ आ रही थी.. “फॅक.. फॅक” की आवाज़ सारे कमरे में गूंजने लगी।
हम दोनों के गोली खाने की वजह से हमारा जोश बढ़ता चला जा रहा था।
चुदाई में बहुत मजा आ रहा था।
‘आआहह.. ओर तेज चोदो.. ओर तेज चोदो..’
‘ले साली.. और भीतर ले..’
बस इन्हीं आवाजों से मस्ती का माहौल था।
अब हमको चुदाई करते-करते काफी वक्त हो गया था.. लेकिन कोई भी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।
दोनों में किसी का भी स्खलन नहीं हो रहा था।
फिर मैंने उसे कुतिया की तरह बनाया और पीछे से उसे चोदने लगा।
मैं बहुत तेज-तेज धक्के लगा रहा था।
उसकी सिसकारियाँ बढ़ गई- आआह.. आआह.. ऊऊऊओह..
ऐसा लग रहा था कि आज मेरा लण्ड फट जाएगा।
फिर लम्बी चुदाई के बाद संगीता सीधी लेट गई और मैं उसे ऊपर से चोदने लगा।
अब वो झड़ने वाली थी.. तो उसने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और अपनी बहुत ही टाइट चूत में मुझे समाने की कोशिश करने लगी, अकड़ती हुई झड़ गई।
उसके झड़ने के बाद मैं भी झड़ने वाला था और थोड़ी देर तेज-तेज धक्के लगा कर ‘अयाया आआआह आआआह आह..’ मैं भी झड़ गया।
मैंने लण्ड का सारा पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसके ऊपर ही लेट गया। थोड़ी देर लेटने के बाद हम खड़े हुए तो देखा कि नीचे बिछी चादर खून से सन चुकी थी।
संगीता देख कर डर गई।
फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार में ऐसा होता है।
हम बाथरूम में गए और अपने- अपने सामानों को साफ करने लगे।
जब मैंने उसकी चूत को देखा तो उसकी चूत सूज चुकी थी और खुल गई थी।
संगीता को बहुत दर्द हो रहा था और चलने में भी परेशानी हो रही थी।
हमने कपड़े पहने और गेस्ट हाउस का बिल चुका कर कॉलेज आ गए।
कॉलेज से अपने-अपने घर चले गए।
उसके बाद मैं उसे बहुत बार चोद चुका हूँ.. फिर तो मैंने उसकी गाण्ड भी मारी थी।
अब जब भी वक्त मिलता.. हम दोनों खूब चुदाई करते।
Editor: Sunita Prusty
Publisher: Bhauja.com

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