कोई ऐसी नहीं जो तृप्त ना हुई हो (Koi Aisi Nahi Jo Tript Na Hui Ho)

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मैं कमल.. नैनीताल का रहने वाला हूँ.. दिल्ली में एक कॉल सेंटर में जॉब करता था.. मैं वहाँ एक टीम लीडर था, वहाँ मेरी एक सीनियर थी।

एक दिन मुझे और मेरी सीनियर जिसका नाम पूजा दलाल था.. दोनों को थोड़ा सा काम था। तो हम वहीं ऑफिस में रुक गए.. उस दिन पूरे ऑफिस में और कोई नहीं था। यूँ ही बातों-बातों में मेरी और उसकी सेक्स के टॉपिक पर बात होने लगी।

उसने मुझसे पूछा- तुमने किसी के साथ सेक्स किया है?
तो मैंने कहा- हाँ.. मैं कई लड़कियों के साथ सेक्स कर चुका हूँ.. लेकिन तुम क्यों ऐसे पूछ रही हो?
उसने कहा- मुझे नहीं लगता कि कोई लड़का किसी लड़की की पूर्ण रूप से प्यास बुझा सकता है..
तो मैंने जरा शब्दों को खोलते हुए कहा- ऐसा नहीं है.. आज तक मुझे कोई ऐसी लड़की नहीं मिली.. जो मेरे लण्ड से तृप्त ना हुई हो..
तो उसने भी बिंदास कहा- ठीक है तुम्हें कभी ट्राई करूँगी..

अब मैंने खुल कर कहा- तुम्हारा जब भी मन हो.. तो आ जाना.. मेरे पास लड़कियों को चोदने के लिए हमेशा वक्त रहता है।
वो मुस्कुरा दी..

फिर मैं अपने कमरे पर आ गया।
मैं बता दूँ कि यहाँ मैं अपने घर से बाहर हूँ.. तो मैं एक कमरा किराए से ले कर अकेले रहता हूँ।
फिर मुझे उसी दिन शाम को उसका कॉल आया। उसने सीधे और सपाट कहा- मुझे अपने लण्ड का मज़ा कहाँ दोगे?
मैंने कहा- जहाँ आप अपनी चूत का मजा मुझे देना चाहें।

उसने कहा- ठीक है.. मैं तुम्हारे कमरे पर आ जाऊँ.. कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
मैंने कहा- नहीं डार्लिंग.. कोई दिक्कत नहीं होगी.. तुम आ जाओ..

फिर वो आधे घंटे पर मुझे पास के चौराहे पर मिली.. मैंने उसे अपनी बाइक पर बिठाया.. वो कुछ ज़्यादा ही मस्ती में लग रही थी। क्योंकि वो काफ़ी सट कर बैठी थी और अपनी चूचियाँ मेरी पीठ पर लगा कर रगड़ रही थी।

मैं उसे अपने फ्लैट पर लेकर गया। जैसे ही हम वहाँ पहुँचे.. वो एकदम से अपना पर्स फेंक कर मुझसे लिपट गई और मेरे कपड़े उतारने लगी।

मैंने कहा- ऐसे नहीं रानी.. आराम से करेंगे तो ज़्यादा मज़ा आएगा।

फिर मैंने सबसे पहले उसे उसके कपड़ों के ऊपर से ही कस के रगड़ा.. कस कर उसकी चूचियाँ दबाईं.. उसके चूतड़ों को सहलाया.. फिर उसके रसीले होंठों का मज़ा लेना शुरू किया।

करीब 30 मिनट तक यही सब करते हुए मैंने उसका टॉप उतार दिया। उसकी चूचियां ब्रा के अन्दर से ही झाँकने लगी थीं। कसम से वो उस टाइम पर बड़ी सेक्सी लग रही थी।

फिर मैंने उसके गले पर और ब्रा के ऊपर से जितना खुला हुआ अंग दिख रहा था.. उसे कस कर चूसा.. खूब रगड़ा.. अब मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी। फिर क्या था.. उसकी मस्त बड़ी-बड़ी चूचियां फुदकने लगी थीं।

मैंने पहले उसकी दोनों चूचियों को पकड़-पकड़ कर कसके दबाया.. फिर बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर कसके चूसना शुरू किया।

पूजा की साँसें तेज हो चुकी थीं.. उसके मुँह से मस्त-मस्त कामुक आवाजें निकलने लगी थीं.. जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थीं।

फिर मैंने अपने एक हाथ से उसकी जींस उतार दी और पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत दबाने लगा। उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी। मैंने फिर उसकी पैन्टी भी उतार दी और धीरे-धीरे उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा।
मेरे ऐसा करने से वो और भी मदहोश हो गई और ज़ोर-ज़ोर से ‘आँहें भरने लगी।

मैंने उसकी चूत में एक उंगली डाल दी.. उसकी चूत एकदम कुँवारी थी.. फिर क्या था.. मैंने कस-कस के अपनी उंगली से उसकी चूत के अन्दर मालिश करना शुरू कर दी, वो और भी मदहोश हो गई।

फिर मैंने अपने कपड़े उतारे.. जैसे ही मैंने अपना 9 इंच का लण्ड निकाला उसने उसे पकड़ लिया और बोलने लगी- हाए राजा.. तुम्हारा लण्ड तो बड़ा मस्त है.. एक बार इससे मेरी चूत की आग शांत कर दो… ओह्ह.. राजा जी कम ऑन..

मैंने उससे अपना लण्ड चूसने के लिए कहा..
उसने एक बार में ही मेरा आधा लण्ड मुँह में ले लिया और ज़्यादा अन्दर लेने की कोशिश करने लगी.. पर लण्ड बड़ा होने के कारण वो अपने मुँह में पूरा लण्ड नहीं ले सकी।
वो मस्ती से मेरा लण्ड चूसती रही.. फिर मैंने उसे उठा कर उसकी चूत पर अपने होंठ टिका दिए।

उसके मुँह से सिसकारियों की बौछार निकल पड़ी। फिर मैंने उसकी मक्खन जैसी चूत को रगड़-रगड़ कर चूसा.. वो बोली- अब बस करो मेरे राजा जी.. नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी और तुम्हारा लण्ड घुसवाने का मज़ा फीका हो जाएगा।

मैं नहीं माना और उसकी चूत चाट-चाट कर उसे झड़वा दिया। जब वो झड़ गई.. तो मैंने उससे कहा- तू तो बड़ी-बड़ी बातें कर रही थी कि कोई भी लड़का लड़की की प्यास नहीं बुझा सकता.. पर तुम तो मैदान ही छोड़ कर भाग निकली।

वो शर्मा गई.. पर मेरे लण्ड की प्यास अभी अधूरी थी। मैंने फिर से उसकी चूचियों को सहलाना शुरू किया और धीरे-धीरे उसे भी जोश आने लगा।

फिर मैंने दुबारा उसकी चूत को चाटना शुरू किया.. वो फिर पूरी मस्ती में आ गई।

इस बार मैंने देर नहीं की और उसकी टाँगें अपनी कमर पर रख कर अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह पर लगा दिया और एक ज़ोर का धक्का मार दिया। मेरा एक चौथाई लण्ड उसकी चूत में घुस गया।

लण्ड मोटा होने के कारण उसे तकलीफ़ हो रही थी.. लेकिन उसे लण्ड की चाह इतनी थी कि दर्द के बावजूद वो सिसकारियाँ लेते हुए कहे जा रही थी- आअहह.. मेरे राजा जीइईई.. मज्ज़जाआ.. आयाया रहा.. हैहाईईईई.. और लण्ड पेलो ना.. अपनी रानी की चूत में.. फाड़ डालो साली को.. बड़ा फुदकती है.. जल्दी से लण्ड अन्दर करो नाआ.. मेरे राज्ज्जजाआअ..

मैंने एक जोरदार धक्का दिया और मेरा पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत को फाड़ते हुए घुस गया। वो दर्द से कराह उठी.. पर मैं रुका नहीं और ताबड़तोड़ धक्के लगाते हुए.. धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाने लगा।
कुछ धक्के लगते ही वो चिल्लाने लगी प्लीज़ रुक जाओ.. बहुत दर्द हो रहा है..

मैं थोड़ा सा रुका.. फिर थोड़ी देर बाद मैंने धीरे-धीरे लण्ड रगड़ना शुरू किया। अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाने को कहने लगी- चोदो और ज़ोर से चोदो.. नाआआआ.. आइए हाए.. मज़ा आ रहा है.. हाए रे चूत तो फट गई.. उईए माआआअ.. घुस गया पूरा लण्ड.. मेरी चूत में… हाए राजा.. चोदो ना चूत.. फाड़ कर भोसड़ा बना दो आज..

मैं लगातार अपने धक्कों की स्पीड बढ़ाने लगा और वो भी नीचे से अपनी गाण्ड उछाल-उछाल कर मेरा पूरा साथ दे रही थी।
जब उसका झड़ने का टाइम आया.. तो उसने अपनी गाण्ड उछालना तेज कर दिया.. फिर एकदम से शांत हो गई।
मैंने भी उसे शांत होते देख अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और झड़ कर ही शांत हुआ।

इस तरह से मैंने उसे लगातार तीन दिनों तक जम कर चोदा।

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