कुंवारी मारवाड़ी भाभी की वासना

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दोस्तो, मेरा नाम प्रणय है, मैं मुंबई रहता हूँ। मुझे मारवाड़ी लड़की और भाभी बहुत पसंद हैं.. वो बहुत चिकनी होती हैं और गोरी भी बहुत होती हैं। उनके कपड़े पहनने का अंदाज़ बहुत सेक्सी होता है।
अब मैं अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। यह मेरी पहली कहानी है, उम्मीद है आप सबको पसंद आएगी।

मैं उस वक्त 19 साल का था और मेरे जो गणित के मास्टर साहब थे.. वे ही मेरे क्लास टीचर भी थे.. और वो मारवाड़ी थे। मैं उनके घर पर गणित की क्लास पढ़ने जाता था। उनकी उमर करीब 35 साल की थी.. वो अपनी बीवी के साथ रहते थे।
उनका एक लड़का था.. जो कि हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रहा था, उसे हममें से किसी ने देखा नहीं था।

उनकी बीवी की उमर शायद 28-30 की होगी.. लेकिन वो अपनी उमर से काफ़ी छोटी दिखती थी। उसका फिगर 34-26-36 का है।
जब भी मैं उनके घर जाता था.. तो वो मेरा बहुत ख्याल रखती थी।

मेरे दिल में भी उनके लिए बहुत इज़्ज़त थी.. लेकिन एक दिन मैंने उन्हें नहाने के बाद सिर्फ़ पेटीकोट में देखा.. जो कि उनकी चूचियों पर बँधा हुआ था।
उनके गोरे पैर और पिंडलियाँ खुली थीं.. हाय.. कितने गोरे और गदराए पैर थे।
मैं उनकी चूचियाँ को देखता ही रह गया, उन्होंने मुझे घूर कर देखते हुए देखा और थोड़ा सा मुस्कुराईं और अन्दर चली गईं।

मेरा मन अब पढ़ाई में नहीं लग रहा था। मेरा लंड कड़क होने लगा.. किसी तरह मैं उसे दबा रहा था।
सर ने पूछा- क्या हुआ..? पेशाब लगी क्या?
मैंने डरते हुए कहा- हाँ..
उन्होंने अपनी बीवी से कहा- इसे बाथरूम दिखा दो..

वो तब तक साड़ी पहन चुकी थी.. मारवाड़ी स्टाइल में.. यानि पेटीकोट में लपेट कर.. बाकी आँचल था। उनकी चूचियाँ बड़े गले की चोली में से आधी से ज़्यादा दिख रही थीं।
यह देख कर मेरा लंड और कड़क हो गया और मेरे 7.5 इंच के मोटे लंड को संभालना मुश्किल हो गया।
मैं किताबें रखकर जैसे ही खड़ा हुआ.. मेरे लंड ने पजामे में टेंट बना दिया।

मेरा यह हाल उसने भी देखा और वो बड़ी अदा से मुस्कुराई.. उसने मुझसे कहा- जल्दी आओ.. इधर है बाथरूम..
मैं अन्दर गया.. लेकिन जल्दी में दरवाजा बंद नहीं किया।

लंड को बाहर निकाला.. थोड़ा सा पेशाब किया.. लेकिन लंड ठंडा ही नहीं हो रहा था.. सो मैं मुठ्ठ मारने लगा। दो मिनट में ही उसने ज़ोर की पिचकारी मारी.. जो सामने दीवाल पर गई। मैंने उसको अच्छे से धोया और लंड को पैन्ट के अन्दर किया।

जैसे ही मैं पीछे घूमा.. मैंने देखा दीवार के किनारे सर की बीवी खड़ी है। इसका मतलब उसने मुझे मुठ्ठ मारते हुए देखा था.. क्योंकि वहाँ से मेरा लंड पूरा दिखता था।

मैं सिर नीचा करके बाहर निकल आया तब उसने धीरे से कहा- बहुत मोटा और लंबा है..
यह कहकर वो जल्दी से चली गई.. मैं मुँह बाये उसे देखता ही रह गया।

वैसे मुझे वो अच्छी लगती थी और वो भी मुझे पसंद करती थी.. लेकिन उनके साथ सेक्स के लिए मैंने कभी भी सोचा नहीं था।

मेरे सर गणित में एक्सपर्ट थे और उनसे पढ़ने के लिए बहुत लड़के क्लास लगवाना चाहते थे। लेकिन उन्होंने सिर्फ़ मुझे ही चुना था क्योंकि क्लास लगाना उन्हें पसंद नहीं था। वो हमेशा गणित के प्राब्लम और थियोरम ही किया करते थे।

उनकी बीवी को सर का यूँ व्यस्त रहना पसंद नहीं था.. उन्हें अच्छी चुदाई की चाहत थी और वो किसी को ढूँढ रही थी। जबकि सर को लगता था कि अब सेक्स की कोई ज़रूरत नहीं है।

ये बातें मुझे तब पता चलीं.. जब मैं उनकी बीवी के संपर्क में आया और उनकी डायरी पढ़ी। मैंने ये डायरी उनके कपबोर्ड से निकाल कर पढ़ी थी। उस डायरी में मेरे बारे में भी लिखा था।

‘प्रणय एक कमसिन लड़का है और बहुत ही गरम लड़का है.. जो भी लड़की उससे चुदवाएगी.. उसकी किस्मत खुल जाएगी.. जिस लड़की को प्रणय का लंड खाने को मिलेगा.. वो बहुत ही नसीब वाली होगी। अगर मुझे मौका मिले.. तो मैं इस लड़के से एक बार ज़रूर चुदवा लूँगी और अपनी चूत की प्यास बुझवा लूँगी।’

उसकी डायरी की ये लाइनें मेरे दिमाग़ में घूम रही थी, वो मुझसे चुदवाना चाहती थी लेकिन अपने पति से डरती थी और फिर उस दिन के बाद मेरी नज़र भी बदल गई, अब तो वो मुझे बहुत सेक्सी लगने लगी थी।
उसकी उफनती हुई जवानी को याद करके मैं अब रोज ही मुठ्ठ मारता था। मैंने भी सोचा इसे एक मौका दिया जाए.. लेकिन कैसे?

एक दिन मैंने उन्हें मोबाइल फोन पर कॉल किया और कहा- आज मैं 4 बजे आने वाला हूँ.. ये बात आप सर को बता दीजिए।

मुझे मालूम था कि वो 4 बजे लाइब्रेरी जाते हैं और रात के 10 बजे वापिस आते हैं।

मैंने ये बात जानबूझ कर उसके सेल फोन पर कहा था। ये मेरी तरफ से इशारा था.. क्योंकि इसके पहले मैंने उसका सेल पर कभी कोई मैसेज या कॉल नहीं किया था।
जब से उसने मेरा लंड देख लिया था.. तब से मैंने उसकी आँखों में भी एक तड़प देखी थी।

मैं उनके घर ठीक 4.30 पर पहुँचा। उसने दरवाजा खोला.. मैंने देखा आज उसने एक पारदर्शक साड़ी पहनी हुई थी और बहुत ही चुस्त और खुले गले का ब्लाउज.. जिसमें से उसकी चूचियाँ मानो ब्लाउज फाड़ कर बाहर निकलने को बेताब थीं। ब्लाउज बहुत ही छोटा था और लहंगा नाभि के बहुत नीचे बँधा था। जिससे आज उसका गोरा पेट और पतली कमर साफ दिख रहे थे।

उसका गोरा पेट और चिकनी कमर देख कर मेरा लंड हरकत में आ गया, उसने मुझे बैठने को कहा और पानी लाने अन्दर गई।
पानी देते हुए वो इस तरह झुकी कि उसकी मदमस्त चूचियां मेरे सामने आ गईं।
उफ्फ.. वो घाटी… रसदार चूचियाँ देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया।

वो सोफे पर मेरे करीब ही किनारे पर बैठ गई.. मैंने उन्हें हिचकिचाते हुए पूछा- सर कहाँ है..? क्या आपने मेरे आने के बारे में सर को बताया है.. या वो भूल गई?
उसने कहा- मैंने सर को कुछ नहीं कहा..
मैंने पूछा- क्यों?
उसने कहा- आज तुमको मैं मुझे पढ़ाऊँगी।
ये कहते हुए वो अपने रसीले होंठों को दाँत से दबा रही थी और कोने में काट रही थी।

मैंने तब कहा- आप मज़ाक कर रही हैं।
उसने कहा-नहीं.. मैं सीरियसली कह रही हूँ।
तब मैंने कहा- आप कौन सा थियोरम सिखाएँगी?
उसने कहा- मैं सीरीयस हूँ.. लेकिन तुम्हें गणित नहीं पढ़ाऊँगी..

ये बात उसने बड़े नटखट अंदाज़ में कही थी।

मैंने पूछा- फिर क्या पढ़ाएंगी?
वो चुप रही और मेरे करीब आ गई और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, कहा- आज तुम मेरे मेहमान हो.. आज मैं तुम्हारी परीक्षा लेने वाली हूँ।
मैंने कहा- कैसी परीक्षा?
उसने कहा- बुद्धू मत बनो.. मैं सब जानती हूँ.. तुम मुझ पर फिदा हो..

मुझे मालूम था कि वो भी चुदने के लिए बेताब हो गई है और तैयार है।
उसने मेरा हाथ पकड़ा और खड़ी हो गई और मुझे अपने बेडरूम में ले गई। फिर उसने मेरे गाल पर चुम्बन किया और मेरे शर्ट और पैन्ट खोल दिए। मुझे भी मज़ा आ रहा था.. उसका नरम हाथ मेरे जिस्म पर घूम रहे थे।

उसने मेरी बनियान भी निकाल दी..
मैंने भी अब उसका पल्लू नीचे गिरा दिया.. उसकी बड़ी-बड़ी रस भरी चूचियाँ मेरे सामने थीं।
अब मैं थोड़ा नर्वस था.. लेकिन तब भी मुझे मज़ा आ रहा था। उसकी नोकदार चूचियों को देख कर मेरा लंड और कड़क होने लगा। उसकी तनी हुई चूचियाँ किसी भी मर्द को गरम कर देने लायक थीं।

अब मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया और उसके होंठों को अपने होंठों में क़ैद कर लिया और चूसने लगा।
उसका हाथ मेरी पीठ और सीने पर घूम रहे थे.. उसका ब्लाउज पीछे से सिर्फ़ 2 इंच का होगा। मेरा हाथ उसकी पीठ पर घूम रहा था। उसके गोल-गोल चूतड़ मैंने पूरी दम से दबा दिए.. तो उसके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी- आआहह.. इसस्स..!

मैं उसके होंठों को बहुत ज़ोर से चूस रहा था.. फिर मैंने अपनी जीभ उसके मुँह के अन्दर डाल दी। वो मेरी जीभ चूसने लगी.. उसकी चूचियाँ मेरे सीने में दब गई थीं। वो बहुत कस कर लिपटी हुई थी। मैंने पीछे से उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए।

अब वो बिस्तर पर बैठ गई.. मेरे गले और छाती को चूमने लगी। मैंने उसे थोड़ी देर ऐसा करने दिया.. लेकिन मैं भी गरम हो गया था.. अब मुझसे और सब्र नहीं हो रहा था।

मैंने उसे दूर को धकेला और उसका ब्लाउज निकाल दिया। उसने गुलाबी रंग की जालीदार ब्रा पहनी थी। मैंने उसकी ब्रा के अन्दर उंगलियाँ डाल दीं और उसकी चूची को हाथ में पकड़ लिया।

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अब उसका एक नर्म दूध मेरे हाथों में था। मैंने उसका होंठों को चूमना शुरू किया और उसके नीचे के होंठों को काट लिया।
वो सिसकार उठी- उम्म..आहह..
मैंने उसके गले पर होंठ रखे और वहाँ एक चुम्बन किया.. फिर जीभ से सहलाया..
उसकी आँखें बंद हो गईं- आहह.. ऊऊओह..
वो कामुकता पूर्ण आवाजें निकालने लगी।

मैंने अब दोनों चूचियाँ के बीच में होंठ रखे.. थोड़ा जीभ से चाटा और फिर हल्के से दाँत लगा दिए।
‘इस्श्ह.. उउईई..’ करते हुए वो चिल्ला उठी।

मैं चूमते हुए नीचे जाने लगा। इसी के साथ मैंने उसकी ब्रा निकाल दी और एक निप्पल को उंगलियों से छेड़ा.. वो कड़क हो गया था।
सच में.. क्या मस्त चूचियाँ थीं। उसे ब्रा की ज़रूरत ही नहीं थी.. एकदम भरे हुए दूध के बर्तन.. एकदम उठे हुए थे।

मैंने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चुभलाने लगा। उसने मेरा सिर अपनी सीने में दबाया और कहा- पूरा मुँह में ले लो न.. आह.. पूरा खा लो.. आह.. जोर से चूसो..
मैं समझ गया कि अब वो भी मज़ा ले रही है और गरम हो गई है, मैंने पूरी चूची को मुँह में लेने की कोशिश की।
फिर निप्पल के अरोला के साथ मुँह में जैसे पूरा आम ले लिया हो।

दूसरी तरफ की चूची को मैं सहला रहा था और उसके निप्पल को उंगली से मसल रहा था। ये सिलसिला एक-एक कर दोनों चूचियों के साथ कर रहा था।
कभी मैं हल्के से काट लेता.. तो वो चिल्ला उठती थी- आहह.. काटो मत.. बस चूसो.. ज़ोर से.. आह..

उसका मारवाड़ी बदन गोरे से लाल हो रहा था। मैं उसकी चूचियों के साथ पूरी बेदर्दी से पेश आ रहा था। उसे देख-देख कर मैंने बहुत बार मुठ्ठ मारी थी..
इधर मेरा लंड भी कड़क हो चुका था.. और बाहर आने को तड़प रहा था।
मैंने उसे इशारा किया.. उसने मेरा अंडरवियर नीचे खींचा और मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया।

उसने कहा- प्रणय.. सच में तुम्हारा लंड बहुत मस्त है.. मैंने उस दिन कहा था ना.. इतना लंबा और मोटा लंड मैंने कभी नहीं देखा..
उसने मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर सहलाना शुरू किया.. फिर सुपारे को चुम्बन किया.. उसे जीभ से चाटा और फिर लौड़े को मुँह में लेकर होंठों से चूसने लगी।

उसके चेहरे को देख कर ऐसा लगा.. जैसे किसी भूखे को पकवान की थाली मिल गई हो। वो मेरा लौड़ा बहुत आराम से चूसने लगी.. उसके चेहरे पर समाधान नज़र आ रहा था।
वो मेरे लंड को चूस रही थी और मैं सातवें आसमान में उड़ रहा था.. आहह..

अब मैंने उसके मुँह को चोदना शुरू किया.. उसने अपने होंठ गोल कर लिए और अन्दर-बाहर जाते लंड पर दबाव बना रही थी।
वो लंड चूसने मे माहिर थी.. और फिर मुझे लगा कि मेरा लावा निकल जाएगा।
मैंने उसका सिर पीछे हटाना चाहा.. उसने इशारे से पूछा- क्या है?
मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है..
उसने इशारे से कहा- मेरे मुँह में निकालो..

तभी मेरे लंड से बहुत सारा माल छूट कर उसके मुँह में जा गिरा.. उसने एक-एक बूँद चाट लिया।
अब मैंने उसकी नीचे गिरी हुई पूरी साड़ी को उसके तन से अलग कर दिया और उसके लहंगे का नाड़ा खींच दिया।
ओह.. उसने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था.. मैंने उसे धकेल कर बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत को देखा, एकदम गुलाबी चूत थी.. किसी 18 साल की लड़की जैसी.. और उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था।

ऐसा लगा कि जैसे आज ही चूत को साफ किया हो।
मैंने उसके पैर फैलाए और चूत के दोनों होंठ फैलाए.. जैसे वो गुलाब की पंखुड़ी हो.. चूत का मुँह एकदम छोटा सा था।
मुझे थोड़ा शक़ हुआ.. मैंने पूछा- सर क्या चुदाई नहीं करते?

उसने मायूसी से कहा- मेरी चूत कुँवारी है!
मैं कुछ समझ नहीं पाया.. कुँवारी चूत और एक लड़का..! खैर.. मैं अभी तो खुश हो गया.. क्योंकि चूत कुँवारी नहीं भी हो फिर भी एकदम टाइट थी।

वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.. साँचे में ढला हुआ बदन.. चूचियाँ आसमान देख रही थीं और पैर फैलाए उसकी बंद चूत मेरे सामने खुली थी..।
मैंने चूत के दाने को ढूँढा और हल्के से रगड़ने लगा।
‘इश्.. आअहह.. उफ.. प्रणय.. मत तड़पा मुझे..’
मैं अपना चेहरा उसकी चूत के पास लाया।

आह.. उसकी पेशाब और जूस की क्या मस्त खुश्बू थी.. मैंने उसकी चूत पर जीभ को फेरा ही था कि वो उछल पड़ी-आऐईयइ.. ऊहह..
एक ही स्पर्श में उसकी चूत रो पड़ी थी और उसमें से बहुत पानी निकलने लगा था, वो पानी उसकी गाण्ड की तरफ बह रहा था।

फिर मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा.. और उसके पैर ऊपर उठा कर बीच में बैठ गया और चूत के दरवाजे खोल कर जीभ अन्दर डाल दी। मैं उसकी चूत को पूरे मनोयोग से चाटने लगा। दो ही मिनट में ही उसकी चूत से झरने जैसा पानी बाहर निकल आया।

मेरा मुँह पूरा भर गया.. और वो ज़ोर से चिल्लाई- आह.. प्रणय.. मेरा हो गया.. आआअहह.. बस अब मत चाट..
यह कहते हुए वो मुझे दूर धकेलने लगी।
उसकी चूत चाटते हुए मेरा लंड फिर से फनफना गया था.. मैंने उसकी चूत से निकलने वाले पूरे जूस को चाट लिया।

ऐसा करते हुए मैं उसकी चूत के दाने को भी जीभ से सहला रहा था.. जिससे वो फिर गरम हो गई।
वो कहने लगी- अब मत तड़पा.. मैं बहुत तरसी हूँ.. मेरी जवानी को अपना ले.. अब ये अन्दर डाल कर.. फाड़ दे मेरी चूत को..
मैं जरा सा उठा तो उसने मादकता से कहा- तू तो एकदम एक्सपर्ट है..
उसे मेरा चूत चाटने का तरीका बहुत पसंद आया।

अब मैं नीचे की तरफ गया और उसकी चिकनी मोटी जाँघों को चूमने और चाटने लगा, मैं दोनों तरफ चाट रहा था। मैं उसे आज जी भर के चोदने के मूड में था। मैंने उसे पेट के बल औंधा लिटा दिया। फिर उसके चूतड़ों और पीठ को भी जीभ से खूब चाटा।

उसका पिछवाड़ा और भी सेक्सी था, उभरे हुए गोरे मस्त चूतड़ और उसकी घाटी.. चिकनी गोरी पीठ.. उसकी पीठ चूमते हुए मैं सामने हाथ ला कर उसकी चूची और निप्पल मसल रहा था.. उसके चूतड़ों को चाटने और दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था।
मैंने हल्के से काट लिया.. तो वो चिल्ला उठी- आआआहह.. नहीं.. लगती है ना..

मैं उसके चूतड़ों को ज़ोर-ज़ोर से दबाए जा रहा था, मेरी जीभ उसके दोनों चूतड़ों के बीच की घाटी में सैर कर रही थी।
चूतड़ इतने नरम और मुलायम थे कि उन्हें दबाने में अलग ही मज़ा आ रहा था।
उसकी गांड का छेद भी गुलाबी था.. उस सुराख में मैंने जीभ की नोक घुमाई.. तो वो सिहर उठी.. उसका यूँ मचलना बहुत ही मजेदार लगा था।

फिर मैंने पीछे से उसकी फूली हुई चूत को सहलाया और एक उंगली अन्दर डालने की कोशिश की.. चूत तो गीली थी लेकिन बहुत टाइट थी।
मेरी उंगली के अन्दर जाते ही वो थोड़ा चिल्लाई- आअहह.. धीरे.. दर्द होता है..
मैंने कहा- यह तो उंगली है.. और तुम मेरा 3 इंच मोटा और 7.5 इंच लंबा लंड लेने के लिए तड़प रही हो..
उसने कहा- मुझे नहीं मालूम.. मेरी चूत में बस आग लगी है.. अन्दर चीटियाँ रेंग रही हैं।

मैंने उसे चूमा.. मैं समझ गया कि लोहा गरम हो गया है.. अब कील ठोक देने का वक्त है, मैंने उसे अब सीधा लिटाया और पेट और नाभि को जीभ से चाटा और गीला कर दिया।
मैंने फिर चूत पर मुँह लगाया.. अब मेरी जीभ चूत के अन्दर फिर से खेल रही थी।
उसकी चूत एकदम फूलने लगी.. वो भी अपनी कमर उछाल रही थी।
मैं अभी उसे और तड़पाना चाहता था।

मैंने चूत को देखा नहीं और जीभ से उसके पैरों से लेकर जाँघों के जोड़ तक उसे पूरा गीला कर दिया।
इस बार मैं चूत में नहीं.. उसके चारों तरफ जीभ और हाथ से सहला रहा था।
मैंने देखा बिस्तर की चादर उसकी गाण्ड के नीचे पूरी गीली हो रही थी।

अब वो पूरी गरम हो गई थी.. अपने पैर रगड़ रही थी- हायइई.. अब सहन नहीं हो रहा..
उसने हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को हाथ में ले लिया। लौड़ा भी फिर से पूरे जोश में आ चुका था.. इस बार वो और भी मोटा लग रहा था।

उसने उठ कर मेरे लंड को चुम्बन किया थोड़ा चाटा.. फिर उसने कहा- सच में प्रणय.. उस दिन मैंने बाथरूम में जब तुम्हारा ये प्यारा लंड देखा था.. तभी सोच लिया था कि मेरी कुँवारी चूत की सील इसी लंड से टूटेगी। उस दिन के बाद से सिर्फ़ इसी लंड को सपने में देखती हूँ और अपनी चूत का पानी निकाल देती हूँ।

मैंने कहा- तो फिर आज इसे अपनी चूत में डलवा ही लो..

यह कहते हुए मैंने उसके पैरों को फैलाया और लंड को उसकी चूत के ऊपर रगड़ा ताकि उसकी चूत के रस से मेरे लंड का सुपारा चिकना हो जाए।

फिर मैंने एक बार उसे लम्बा चुम्बन किया और लंड को चूत के लाल छेद पर रख दिया। मैंने उसकी आँखों में आँखें डाल कर लौड़े को पुश किया.. उसकी चूत का मुँह बहुत छोटा था और मेरा सुपारा बहुत मोटा.. वो फिसल गया।

मैं उठा और मैंने पास रखे तेल के डिब्बे से बहुत सारा तेल मेरे लंड पर लगाया और उसकी चूत के छेद में भी तेल डाला।
अबकी बार मैंने उसके पैरों को और चौड़ा किया और लंड को छेद पर रख कर थोड़ी ताक़त से धकेला.. लंड का सुपारा अन्दर घुस गया।

वो चिल्लाई- मर गई आह.. हाईईईई.. ऊओह.. निकालो.. इतना मोटा नहीं जाएगा.. मुझे नहीं चुदना..
मैं कुछ पल रुका रहा वो सिसक रही थी।
मैंने उसकी आँखों में झांकते हुए कहा- निकाल लूँ?
वो मेरी तरफ देखने लगी.. उसकी आँखों में आँसू थे.. एक 28 साल की औरत और एक 19 साल का लड़का.. लंड तो लोहे की रॉड हो गया था।

मैंने उसे चुम्बन किया.. तब वो बोली- मैं कितना भी चिल्लाऊँ.. तुम आज मेरी चूत फाड़ दो..
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे ताकि वो ज़ोर से चिल्ला ना सके।
मैं समझ गया था कि वो सच में कुँवारी ही है।

अब मैंने अपनी कमर को सख़्त किया और लंड को ताक़त के साथ अन्दर धकेला.. लंड दो इंच घुसा.. वो दर्द से बिलबिला उठी.. तड़पने लगी।
मैंने उसका मुँह नहीं छोड़ा.. लेकिन मैंने महसूस किया कि उसकी चूत के अन्दर कुछ मेरे लंड को अन्दर जाने से रोक रहा है.. शायद इतनी बड़ी उमर होने के कारण चूत का परदा मोटा हो गया था।

मैंने लंड को थोड़ा बाहर खींचा.. और पूरी ताक़त से झटका मारा.. चूत के पर्दे को ककड़ी की तरफ फाड़ कर मेरा लंड 5 इंच अन्दर हो गया.. और उसकी चूत ने खून की उल्टी कर दी।
वो तड़फी और फिर बेहोश जैसी हो गई.. मैं डर गया.. मैं उसे चूमने लगा.. करीब 5 मिनट तक मुझे रुकना पड़ा।
ऐसे ही रहने के बाद फिर वो होश में आई.. उसकी आँखों में पानी और चेहरे पर दर्द था।
थोड़ी देर में जब उसका दर्द कुछ कम हुआ.. तो मैंने हल्के-हल्के धक्के लगाने शुरू किए।

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अब उसे दर्द मिश्रित मज़ा आने लगा.. मैंने पूछा- अब दर्द कम हुआ?
उसने कहा- हाँ..
अब मैंने लंड को पूरा बाहर खींचा और करारा झटका देते हुए पूरे लंड को जड़ तक उसकी चूत मे पेल दिया।
वो फिर चिल्लाई- ऊओ.. माँ.. मर गई आह..

लेकिन अबकी से मेरे धक्के चालू थे और फिर 4-5 मिनट में उसने भी चूतड़ उछालते हुए नीचे से धक्के देना शुरू किए।
अब उसकी चूत से पानी निकलने लगा था और लंड को भी अन्दर-बाहर होने मे सहूलियत हो रही थी।
मैं उसे अब ज़ोर से चोदने लगा.. वो भी कह रही थी- और ज़ोर से.. फाड़ दो.. मुझे माँ बना दो..
मैंने चोदते हुए उससे पूछा- अगर तुम कुँवारी थीं.. तो फिर वो लड़का किसका है.. जिसे तुमने हॉस्टल में रखा है..

उसने कहा- वो मेरी बड़ी बहन का लड़का है.. जिसकी एक एक्सिडेंट में मौत हो गई.. और उसके पति ने दूसरी शादी कर ली.. इसलिए एक साल के बच्चे को हमने गोद ले लिया था। अब मैं अपने बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ.. प्रणय.. मेरे पेट में बच्चा दे दो.. आहह.. क्या मस्त मज़बूत लंड है।

फिर वो मुझसे चिपकने लगी- आआहह.. मेरा निकलने वाला है..
उसने मुझे कस कर जकड़ लिया और वो झड़ गई।
मुझे मेरे कंधे पर से कुछ गरम बहता हुआ महसूस हुआ.. मैंने हाथ से देखा वो खून था.. दरअसल जब उसकी सील टूटी तब उसने नाख़ून से मेरे पीठ पर घाव बना दिया था.. और वहीं से खून निकल रहा था।

यह देख कर मुझे और जोश आ गया.. मैंने मेरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी.. उसकी चूत को इस तरह की चुदाई उम्मीद नहीं थी और उसकी चूत एकदम लाल हो गई।
मैंने उसकी कमर और चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ा और चूत मे लंड डाले हुए ही मैंने सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर खींच लिया..।
अब मैंने उससे कहा- अपनी गांड ऊपर-नीचे करो।

वो मेरे लौड़े पर कूदने लगी। उसके इस तरह उछलने से उसकी मस्त चूचियाँ मेरे मुँह के सामने उछल-उछल रही थीं।
मैंने दोनों हाथों से चूचियाँ पकड़ीं.. मसलीं और निप्पल को मुँह मे लेकर चूसने लगा।
वो लगातार झड़ रही थी.. मेरी गोटियाँ भी उसके चूत के पानी से गीली हो गई थी।

थोड़ी देर में वो थक कर मेरे सीने पर लेट गई.. मैंने बिना चूत से लंड निकाले फिर उसे नीचे लिया और खींचते हुए बिस्तर के किनारे लाया..। वहाँ उसकी चूत के नीचे तकिया लगाया और मैं खुद नीचे खड़ा हो गया।
उसके पैर अपने कंधे पर रखे और इस बार मेरे धक्के बहुत ही तूफ़ानी थे।

वो चिल्ला रही थी- आह.. हाय.. क्या मस्त लंड है.. मेरी चूत की किस्मत खुल गई.. मारो.. और ज़ोर से.. ऊह.. आह.. मैं गई।
वो फिर झड़ गई..
अब मेरा भी झड़ने का टाइम हो गया था.. मैंने कहा- ले.. मैं भी झड़ने वाला हूँ.. कहाँ निकालूँ..
उसने कहा- मेरी चूत में भर दो.. मुझे माँ बना दो प्रणय.. तुम्हारे मज़बूत लंड से मुझे बच्चा पैदा कर दो..

मैंने 5-6 जबरदस्त धक्के मारे और लंड को उसके बच्चेदानी के मुँह पर रख कर लंड से फव्वारा चला दिया।
हाय.. क्या जबरदस्त पिचकारी थी.. उसने अपने पैर मेरे कमर पर जकड़ लिए और मुझसे चिपक गई।
मेरे लंड की गरम पिचकारी से वो भी झड़ गई थी.. हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे।

फिर मैं उठा और अपने लंड को बाहर खींचा.. वो खून और दोनों के रस से लथपथ हो रहा था.. और उसकी चूत.. वो तो मुँह खोले सब माल बाहर निकाल रही थी। उसका शेप “O” जैसा हो गया था।

मैंने कहा- बाथरूम में चलते हैं..
उसने उठने की कोशिश की फिर ‘आअहह.. उउईई..’ करते हुए लेट गई.. उसके पैर कांप रहे थे। मैंने सहारा देकर उसे उठाया.. तब तक शाम के 5.30 हो गए थे.. हम बाथरूम में जाकर फ्रेश हुए।

उसकी नंगी जवानी को देख कर मेरा लंड फिर तैयार होने लगा।
उसने साबुन से मेरे लंड को साफ किया.. उसका हाथ लगते ही वो फिर गुर्राने लगा.. हम बाथरूम से लौटे और नंगे ही बिस्तर पर लेट गए।
मैंने उसे रात के 9 बजे तक और 2 बार अलग-अलग पोज़ में चोदा।
एक बार तो उसे उसके रसोई की पट्टी पर बैठा कर मेरे लंड पर झूला झुलाया।

उसके बाद से मैं रोज उसे चोदने के लिए ठीक 4.30 पर उसके घर जाता था और मैंने उसे दो बार प्रेग्नेंट भी किया.. लेकिन उसे पति के डर से गर्भपात करवाना पड़ा। तीसरी बार उसने किसी तरह अपने पति से चुदवाया.. और मेरे बच्चे को जन्म दिया.. जो कि आज 5 साल का है।
उसने मुझसे कहा था- यह तुम्हारी गुरू दक्षिणा है… अपने चुदाई के गुरू के लिए।
तीन साल बाद उसके पति का ट्रान्स्फर हो गया.. मुझे उसकी बहुत याद आती है।

Writer: Pranab Mukharjee

Editor: Sunita Prusty

Publisher: bhauja.com

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