एक शाम अनजान हसीना के नाम

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दोस्तो, मेरा नाम अपूर्व है…

शाम को रेलवे स्टेशन से बाहर आते ही ऑटो का इन्तजार करती हुई एक बहुत खूबसूरत सी हसीना दिखी।
हम दोनों ही ऑटो का इन्तजार कर रहे थे और एक-दूसरे से नैन-मटक्का भी कर रहे थे।
काफ़ी देर इंतज़ार के बाद मुझे ऑटो मिल गया और मैं भगवान से प्रार्थना करने लगा कि वो मेरे ऑटो में ही आ जाए, भगवान ने मेरी सुन ली, वो भी मेरे बगल ऑटो में बैठ गई।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि बात कैसे शुरू करूँ..
तभी उसने मुझसे पूछा- आप क्या करते हैं?
मैं तो मानो सातवें आसमान पर पहुँच गया, मैंने फटाफट जवाब दिया- मैं इंजीनियरिंग का स्टूडेंट हूँ… अभी अभी लखनऊ आया हूँ।
यहाँ से हमारी बातें बढ़ती गईं। उसने जैकेट पहन रखा था, फिर भी उसे ठंड लग रही थी।
उसने मुझसे कहा- ठंडी हवा से बचाने के लिए तुम अपना हाथ मेरे कंधे पर रख लो।
मैंने उसकी इच्छा समझ कर झट से अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया।
थोड़ा आगे जाने पर मुझे महसूस हुआ जैसे वो धीरे-धीरे गर्म हो रही हो, वो मेरे हाथ पर हाथ रगड़ने लगी, उसके गुलाबी होंठ कंपकंपा रहे थे।
वो गर्म होती जा रही थी, उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी।
उसने ऑटो के अंधेरे का फ़ायदा उठाया और मेरे हाथ को अपने पेट पर ले गई।
मैं भी ऑटो के अंधेरे का फायदा उठा कर उसका पेट सहलाने लगा, मसलने लगा।
फिर मैंने अपने हाथ उसकी ब्रा के अन्दर डाल दिए और उसके गरम मम्मे मसलने और दबाने लगा, उसके चूचुकों को निचोड़ने लगा।
वो भी आनन्द में डूब कर अपने होंठ चबा रही थी, वो मेरी टी-शर्ट के अन्दर अपना हाथ डाल कर मेरा सीना सहला रही थी।
फिर मैं भी अपना हाथ उसके जीन्स के अन्दर ले जाकर उसकी पैन्टी के अन्दर डाल दिया।
उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने जैसे ही उसकी चूत में एक उंगली डाली… उसकी सिसकारी तेज़ी से निकली ‘आआआहह’
मैंने तुरंत तेज़ी से ख़ांस कर उसकी आवाज़ को दबा दिया।
मैं उसकी पैन्टी में हाथ डाल कर चूत रगड़ने लगा।
वो पागल हो रही थी ‘आआआहह’ की धीमी सिसकारी ले रही थी।
उसकी उत्तेजना मेरे पेट पर उसके चुभते हुए नाख़ून से पता चल रही थी।
वो मदहोश सी हुई जा रही थी, मैं और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
आख़िर पांच मिनट बाद उसने अपना सारा पानी छोड़ दिया और पैर सिकोड़ लिए, पर शायद उसकी प्यास अभी बाकी थी। उसने मेरे लौड़े को सहलाना शुरू कर दिया।
यह कहानी आप अन्तर्वासना पर पढ़ रहे हैं।
मैंने झट से एक होटल के बाहर ऑटो रुकवा दिया।
वो मेरे साथ हो ली, हमने एक कमरा लिया और कमरे में पहुँचते ही अपनी अधूरी प्यास मिटाने के लिए एक-दूसरे को चूमने व चूसने लगे।
‘मुऊऊआहह म्मूऊुआहहआअमुआहः..’
वो मुझे बेतहाशा चूमने लगी, मैं भी उसके लबों को पीने लगा।
‘आअम्मूऊऊआहह..’ उसकी बेचैन कर देने वाली साँसें मेरे शरीर को छूने लगीं.. ‘आअहह अयेए.. आअहह..’ हम एक-दूसरे को चूस जाने को बेताब हुए जा रहे थे।
उसने झट से मेरा टी-शर्ट उतार फेंकी और मुझे बाँहों में भर कर रगड़ने लगी।
‘आहह.आअहह..’ मैंने सिसकारी लेते हुए उसका टॉप उतार कर दूर फेंक दिया..
उसके होंठों को पीने के बाद मैंने अपने होंठ उसके गले और कंधों पर रगड़ने शुरू कर दिए।
‘आअमम्मा ओआम्म्मह..’ वो भी बेतहाशा सिसकियाँ लेती हुई मेरे गालों को.. मेरे होंठ को.. मेरे कान के नीचे चूमने लगी और अपनी मादक सिसकारी मेरे कानों में सुनाने लगी।
मैंने भी उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी ब्रा खोल दी और उसे बिस्तर पर लेटा कर उसके रसभरे लबों को चूसने लगा।
मैं उसके मम्मे दबाने लगा… क्या मुलायम मम्मे थे.. क्या कड़े चूचुक थे…आह्ह..!
मैं जितना जोश में उसके मम्मे पीता.. उसकी सिसकारी और तेज़ हो जाती और वो ‘आअहह आअहह आआअहह’ की सिसकारी लेने लगती।
मैं उसके लबों को पीकर उसकी प्यास को मिटा रहा था, उसकी जीभ को चूस कर, उसके मम्मों को मुँह में भर कर चूसने लगा।
वो मदहोश होकर मुझे अपने मम्मों में दबाने लगी..
मैं कभी उसके चूचुकों को चूसता कभी उसके दूसरे मम्मे को दबाता.. मसलता।
फिर मैंने उसके कपड़ों को उतार दिया और तकिये पर सर रख कर लेट गया।
मैंने उस नग्न नागिन को अपने ऊपर ले लिया.. उसकी टाँगों को फैला कर उसकी चूत को मुँह में भर कर चूसने लगा।
‘आअम्मूऊऊआहह अंमुहहांमुआः आअमुआहह’ वो फिर से मदहोश होकर अपनी चूत मेरे मुँह में भर कर चुसवाने लगी।
मेरी जीभ से अपनी चूत चुदवाने लगी।
मैं भी उसकी टांगों को फैला कर उसकी चूत का रसपान कर रहा था, उसकी जी-स्पॉट को अपने जीभ से रगड़ रहा था।
वो पागल सी हुई जा रही थी.. वो तड़फ कर अपने ही मम्मे दबाने लगी।
थोड़ी देर में उसने अपना पानी छोड़ दिया।
चुदाई का नशा हमारी नस-नस में भर गया था.. आह्ह…क्या नशा था..!
उसकी चूत में भरपूर रस था.. आहह… उसकी चूत को अपनी जीभ से साफ करके मैंने फिर उसकी चूत को रगड़ना शुरू किया।
मदहोश होकर उसने भी मेरे लौड़े को निकाल लिया और हम दोनों 69 की अवस्था में एक-दूसरे का गुप्तांग चूसने लगे।
‘आअम्मूऊआहह आंमुहहह आआमुउउहह ययुउपप ययुउपप..’
वो मेरे लौड़े को ऊपर-नीचे करके खूब चूस रही थी।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगों को फैला कर उसकी चूत पर अपना लौड़ा रगड़ा, वो तड़पने लगी।
मैंने भी देर ना करते हुए उसकी चूत में अपना लौड़ा पेल दिया..।
‘आअहह आआ… आहह आअहह..’ करते हुए उसने चादर पर अपने नाख़ून गाड़ लिए और तेज़ सिसकारी ली ‘आआहहह आअहह’
मैंने उसके बदन को चूमा, उसने मम्मे को चुसवाने के लिए उठा दिए।
फिर मैंने धक्के देने शुरू कर दिए..
अब वो भी मेरे लौड़े का मज़े लेने लगी…
उसकी गुलाबी चूत मेरे लौड़े से चुदी जा रही थी।
‘आआहह..’ उसकी निकलती सिसकारी मुझे तेज धक्के देने के लिए उकसा रहे थे।
उसको बाँहों में समाते हुए मैं उसे धक्के मारे जा रहा था।
‘आहह आह’ हर धक्के के साथ उसकी सिसकारी तेज़ होती ‘आआहह आहह…’
पूरा कमरा ‘फ़च फ़च.. आअहह.. आअहह’ की आवाजों से गूँज रहा था।
फिर मैंने उसे बाँहों में भर कर उठा लिया और दीवार की तरफ ले गया और उसने भी अपनी दोनों टाँगों से मेरी कमर को घेर लिया।
दीवार के सहारे उसे टिका कर मैंने उसकी चूत में अपना लौड़ा पेल दिया..
वो फिर से मदहोश होकर मुझसे चिपक गई, मेरे बालों को सहलाने लगी.. अपने मम्मे मेरे होंठों में दबाने लगी।
फिर मैंने दीवार के सहारे धक्के मारे।
‘आअहह आअहह जान और करो.. हाँ ऐसे ही करो आआअहह और मारो.. आअहह आहह.. जान..मारो.. आआहह..’
इस तरह की मादक आवाजों से मैं और तेज धक्के मारने लगा।
उसकी चूत से ‘फ़च.. फ़च’ की आवाजें आ रही थी।
करीब 15 मिनट तक हम दोनों मदहोशी में चुदाई का खेल खेलते रहे और आख़िर में हम दोनों ने एक साथ पानी साथ छोड़ा..
‘आहहहह..’ उसने दीवार का सहारा छोड़ कर मेरी बाँहों में आकर मुझे बहुत चूमा ‘मुऊआहह मुआहह..’ और मुझे ‘थैंक्स’ कहा।
कुछ देर अपनी साँसें व्यवस्थित करने के बाद हम दोनों ने एक-दूसरे का फोन नंबर लिया और फिर जल्द ही दुबारा मिलने का वादा करके अपनी-अपनी राह पर चल दिए।
हम बाद में भी मिल कर मज़े करते रहे।
मेरी इस जिन्दगी के और भी मजेदार किस्से है, मैं आपको अगली कहानी में लिखूँगा।
उम्मीद है कि आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी।

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