ईमानदारी से मालिश और चुदाई

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मैं एक लम्बे अरसे से BHAUJA  का पाठक हूँ और पहली बार अपनी आपबीती आप सब तक भेज रहा हूँ।
मेरे पड़ोस में एक भाभी रहती हैं.. जिनकी जवानी के दीवाने छोटे-बड़े सभी हैं, भाभी जी एक दो साल के बच्चे की माँ भी हैं।
उनका बच्चा ऑपरेशन से हुआ था.. तो जाहिर है कि उनकी चूत आज भी टाईट ही थी।
उनका हमारे घर में आना-जाना था.. वो मेरी पत्नी से अक्सर कहती थीं- मुझे अपने बदन में बहुत दर्द महसूस होता है।
एक दिन मैंने मजाक में कह दिया- भाभी आप अपने शरीर की मालिश कराओ.. आपको आराम मिल जाएगा।
वो कुछ शरमाते हुए बोली- इधर कहाँ कोई मालिश वाली मिलती है।
मैंने कहा- भाईसाहब से करा लो न..
यह कह कर मैं हंस पड़ा।
लेकिन उन्होंने बड़ी शरारत भरी नजरों से मुझे देखा।
खैर.. बात आई-गई हो गई। वो आती तो अक्सर अपने दर्द की बात कहती थीं।
एक दिन मेरी पत्नी को 8–10 दिन के लिए अपने पीहर जाना पड़ा और बच्चों को भी साथ ले गई।
यह बात भाभी को पता नहीं थी, दोपहर को भाभी हमारे घर आईं और मेरी पत्नी को आवाज लगाते हुए अन्दर घर में आ गईं।
मैं अपने लिए चाय बना रहा था.. तो भाभी को आया देख कर मैंने उन्हें चाय के लिए पूछा- भाभी मैं चाय बना रहा हूँ आप पीएंगी?
पहले तो वो मना करने लगी.. किन्तु मेरे आग्रह करने पर चाय पीने को तैयार हो गईं।
मैं दो कप में चाय व प्लेट में नाश्ता लेकर भाभी के पास आया और हम दोनों चाय पीने लगे।
मैंने वैसे ही पूछ लिया- भाभी जी अब बदन का दर्द कैसा है?
तो भाभी कहने लगीं- किसी मालिश वाली की तलाश कर रही हूँ.. किन्तु कोई नहीं मिल रही है।
मैंने कहा- भाई साहब से करा लो..
तो कहने लगीं- उन्हें फुरसत ही कहाँ है.. वो तो अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं।
मैंने मजाक में कह दिया- आपकी समस्या जटिल है.. मैं तो अपनी पत्नी की मालिश कर देता हूँ.. अगर आप कहें तो हम पीछे नहीं हटेंगे..
दोस्तो.. यह बात मैंने कह तो दी.. लेकिन मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
भाभी इतना सुनते ही मुस्कराने लगीं और कहा- रहने दो.. आप कहाँ हमारी मालिश करने वाले हो.. आप तो कुछ और सोच रहे हो।
मैंने कहा- नहीं.. मैं अगर मालिश की बात कर रहा हूँ.. तो केवल मालिश की ही बात कर रहा हूँ.. कुछ और नहीं..
भाभी थोड़ी देर तो चुपचाप चाय पीती रहीं.. फिर बोलीं- अच्छा ठीक है.. आज रात को आपको मैं आपको कॉल करूँगी। आप आ जाना.. किन्तु ईमानदारी से.. जितना कहा बस उतना ही करना।
मैंने कहा- ठीक है।
इमुझे नहीं बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि भाभी यह बात सीरियसली बोल रही हैं।
किन्तु ठीक रात को 9 बजते ही भाभी की कॉल आई और वो कहने लगीं- मैंने अपने पति को बहाना बनाकर शहर के बाहर भेज दिया है.. और आज रात वो वहीं रहेंगे.. आप आकर मेरी मालिश कर दीजिए।
मैंने कहा- जरूर…
दोस्तो, मेरे मन में भाभी को पा लेने की लालसा जरूर थी.. किन्तु मैं हमेशा से वादे का पक्का रहा हूँ।
मैंने उनके घर पहुँच कर मालिश करने की तैयारी की और भाभी को बिस्तर पर लेटने को कहा.. तो भाभी मुझे अपने बेडरूम में ले आईं.. जहाँ उन्होंने पहले से ही एक मालिश वाले तेल की शीशी रखी थी।
भाभी लेट गईं.. तो मैंने तेल लेकर उनके पैरों पर मालिश करनी शुरू कर दी। पांच मिनट बाद पूछा- आराम मिल रहा है या नहीं?
तो भाभी बोलीं- बड़ा अच्छा लगा रहा है दर्द में आराम है।

मैं पैरों की मालिश करता रहा.. तो भाभी ने कहा- थोड़ा ऊपर तक कर दो।
तो मैंने भाभी का गाउन उनके नितम्बों तक चढ़ा दिया और उनकी शानदार जंघाओं पर हाथ फेरने लगा।

उनका गदराया हुआ बदन देखकर मेरा बुरा हाल था। मेरा कीमती हथियार भाभी को सलामी देने के लिए तैयार था.. किन्तु मेरा वादा बीच में आड़े आ रहा था।
थोड़ी देर मालिश करने के बाद भाभी से कहा- अब सीधी होकर लेट जाईए..
तो भाभी सीधी हो गईं। मालिश करते-करते उनका गाउन उनकी जंघाओं से ऊपर तक चला गया तथा उनकी कीमती चूत.. जो छोटे-छोटे बालों की बीच छुपी हुई थी.. मुझे दिखाई देने लगी।
मैं मालिश करते-करते उनकी झांटों के बालों को छू रहा था।
भाभी का चेहरा देखने से पता चलता था कि वो उत्तेजित हो रही हैं.. किन्तु चुप थीं।
करीब 20 मिनट मालिश करने के बाद मैंने पूछा- अब आराम है?
तो भाभी ने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया।
अब मैं भाभी की परीक्षा ले रहा था.. सो मैंने भाभी का गाउन नीचे सरका दिया और चलने के लिए कहने लगा।
भाभी ने कोई उत्तर नहीं दिया.. किन्तु मैं अपना तना हुआ हथियार लेकर दरवाजे पर आया और बाहर से निकल कर दरवाजा बन्द कर अपने घर चला आया।
तभी भाभी की कॉल आई और उन्होंने कहा- आपकी मालिश बड़ी अच्छी थी।
दोस्तो.. मालिश तो अच्छी थी.. किन्तु मेरे लण्ड का मैं क्या करता.. बड़ी मुश्किल से उसे समझाया.. बाथरूम में गया.. और उसकी भी मालिश करके.. वापस आकर बिस्तर पर लेटकर सो गया।
अब दूसरे दिन भाभी की कॉल फिर आई और भाभी ने फिर दर्द का बहाना बनाया।
वे कहने लगीं- आपकी मालिश बढ़िया थी.. किन्तु अधूरी है।
इस बात का क्या अर्थ था.. मैं खूब समझता था।
मैंने कहा- मैं जो वादा करता हूँ.. उसी पर अडिग रहता हूँ। केवल मालिश की बात हुई थी.. सो इससे आगे कुछ और नहीं..
तो भाभी ने कहा- आज और मालिश कर दो.. लेकिन कोई वादा और सीमा में आज का कार्यक्रम मत बांध देना।
मैं भाभी की बात समझ गया। उनकी इच्छा समझते ही और उनके मुँह से इतना सुनते ही मेरे हथियार ने एक जोरदार सलामी दी।
खैर.. मैं जल्दी-जल्दी तैयार होकर भाभी के घर गया। अब भाभी को मालिश की लत लग चुकी थी और मेरी ईमानदारी पर विश्वास भी हो गया था।
सो उन्होंने आज भी अपने पति को बहाने से शहर में भेज दिया था। मैं जैसे ही आया.. भाभी मुझे हाथ पकड़कर कमरे में ले गईं और कहने लगीं- पहले जैसी मालिश कर देना.. और ध्यान रहे इस बार कोई ‘कमी’ न रहे..
उन्होंने ‘कमी’ शब्द पर विशेष जोर दिया था।
मैंने कहा- पहले कहो तो ‘कमी’ ही पूरी कर दूँ?
तो भाभी ने एक कातिल अदा से मुस्कुराते हुए कहा- नहीं पहले मालिश करो।
भाभी पलंग पर लेट गईं.. और पहले से रखा हुआ तेल.. मैंने भाभी की पैरों पर लगाना शुरू कर दिया।
मेरा खड़ा सैनिक भी युद्ध लड़के के लिए बेताब था किन्तु ईमादारी आड़े आ रही थी इसलिए मैंने भाभी के पैरों की मालिश की.. फिर उनकी जंघाओं की मालिश की और अब उन्हें सीधी लेटने के लिए कहा।
मालिश करते समय मुझे पता चल चुका था कि आज भाभी ने छोटा जंगल काट कर साफ किया हुआ है। चूत एकदम टाईट और गुलाबी दिखाई दे रही थी।
मैंने आज उनके पैरों की मालिश करते हुए पैरों की जड़ तक मालिश की।
भाभी बार-बार ‘आहें’ भर रही थीं। उनकी चूत से चिकना पानी निकल रहा था। कुछ ही मिनट में भाभी बोल पड़ीं- अब कोई ‘कमी’ मत छोड़ना.. मालिश तो पूरी हो गई.. पर बाकी ‘कमी’ भी जल्दी से पूरी कर दो..
मैंने बहाना बनाया- कहो तो कमर की मालिश भी कर दूँ?
तो उन्होंने अपनी चूत को उचका कर कहा- अब तो इसे मालिश की जरूरत है।
मैंने थोड़ा तेल और लिया तथा भाभी की चिकनी चूत पर मालिश करने लगा।
तो भाभी तेजी से उठ कर बैठ गईं और मेरे लण्ड को पकड़ कर उस पर तेल लगा दिया और कहने लगीं- मेरी चूत की मालिश अपने लण्ड से कर दो..
अब मेरा भी सब्र का बांध टूट गया.. मैंने भाभी को सीधा लिटाया और उनकी जंघाओं पर बैठकर लण्ड भाभी की चूत पर लगा दिया और जोर का धक्का लगा दिया।
भाभी को इस हमले की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। अचानक घुसे मोटे मजबूत लण्ड से भाभी की आंखें फट गईं।
भाभी ‘आउउउह..’ की आवाज करते हुए कराह उठीं।
मैंने उनकी ‘कराहों’ को ‘आहों..’ में बदल दिया और दम से चूत चुदाई की.. अब वे झड़ चुकी थीं मैंने भी अपना रस उनकी चिकनी चूत में झाड़ दिया।
फिर चुदाई के कुछ पलों बाद अपनी आँखें खोलकर कहने लगीं- आह्ह.. आज आपने मालिश पूरी की है। मौका मिलते ही फिर से आ जाना..

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